सेवाराम जयपुरिया


शिक्षा, व्यवसाय और धन योग

अप्रैल 2010

व्यूस: 6990

जातक की कुंडली में चतुर्थ भाव का स्थान अति महत्वपूर्ण है। यह भाव माता का भाव है। इसका शिक्षा से गहरा संबंध है, क्योंकि बच्चे की मां उसकी पहली शिक्षक होती है। कुंडली के पंचम, अष्टम और नवम भाव भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। भाव, भावेश औ... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगशिक्षाकुंडली व्याख्याघरग्रहभविष्यवाणी तकनीकव्यवसायसंपत्ति

शिक्षा, व्यवसाय और धन योग

जनवरी 2005

व्यूस: 5231

किसी जातक की कुंडली में चतुर्थ भाव का स्थान अति महत्वपूर्ण है। यह भाव माता का भाव है। इसका शिक्षा से गहरा संबंध है, क्योंकि बच्चे की मां उसकी पहली शिक्षक होती है। कुंडली के पंचम, अष्टम और नवम भाव भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। भाव, भा... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगशिक्षाकुंडली व्याख्याभविष्यवाणी तकनीकव्यवसायसंपत्ति

भोजशाला (रसोई)

अकतूबर 2010

व्यूस: 5007

जैसा खाओगे अन्न वैसा बनेगा मन (16 कक्षों की कल्पना के कारण में भोजनालय भी है।) इसलिये रसोईघर घर का सबसे संवेदनशील स्थान होता है। यह सर्वविदित है कि प्रत्येक प्राणी के जीवन में भोजन का बहुत महत्त्व है। क्योंकि यह शारीरिक व मानसिक द... और पढ़ें

स्वास्थ्यवास्तुसुखगृह वास्तुव्यवसायिक सुधारसंपत्ति

ज्योतिष और मृत्यु काल

अप्रैल 2008

व्यूस: 4026

भारतीय परंपरा में अनेक विशेषताएं हैं और प्रत्येक के पीछे एक ही उद्देश्य रहा है कि मानव जीवन को अधिकतम सुविधा व सुरक्षा प्रदान की जाय। वेदशास्त्र ज्ञान विज्ञान का महाभंडार हैं। इसी परंपरा में ज्योतिष शास्त्र वेदों का विशेष छठा अंग ... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगदशाजैमिनी ज्योतिषभविष्यवाणी तकनीकगोचर

जातक कब बनेगा वकील

जुलाई 2009

व्यूस: 3433

मानव का समग्र विकास शिक्षा पर ही होता है और आजकल अन्तिम लक्ष्य भी यही है। द्वितीय या पंचम भाव में बुध, बृहस्पति हो अथवा द्वितीयेश, पंचमेश बुध, बृहस्पति से संबंध करे तो जातक कुशल वक्ता और प्रबुद्ध तर्कशक्ति वाला होता है। वकालत के ल... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगकुंडली व्याख्याघरग्रहभविष्यवाणी तकनीकव्यवसाय

गर्भाधान संस्कार

जनवरी 2012

व्यूस: 3034

भारतीय परंपरा के १६ संस्कारों में गर्भाधान संस्कार सबसे पहला व महत्वपूर्ण संस्कार है. भावी संतान के संस्कार की आधारशिला इसी प्रथम संस्कार पर आधारित है. इस संसार में सभी व्यक्ति चाहते है की उसे सब कुछ मिल जाये... और पढ़ें

ज्योतिषउपायबाल-बच्चे

राहु-केतु पीड़ा निवारक तक्षक तीर्थ

दिसम्बर 2010

व्यूस: 1261

काल सर्प योग राहु और केतु के माध्यम से बनता है। राहु को सर्प का मुख एवं केतु सर्प की पूंछ माना गया है। सांपों का भारतीय संस्कृति से बहुत गहरा संबंध है।... और पढ़ें

स्थानउपायअध्यात्म, धर्म आदिमन्दिर एवं तीर्थ स्थल

वास्तु और आपकी सेहत

दिसम्बर 2006

व्यूस: 498

घर की सार्थकता तभी है जब वहां निवास करने वाले लोगों की सेहत अच्छी रहे। हवादार व सूर्य की रोशनी से युक्त एक अच्छे घर में रहने की चाह सभी की होती है वास्तुदोष के कारण गृहस्वामी एवं परिवार के लोग स्वास्थ्य सुख से वंचित रह जाते हैं... और पढ़ें

स्वास्थ्यवास्तुभविष्यवाणी तकनीकवास्तु परामर्शवास्तु के सुझाव

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