महाराजा: दी एम्पेरर

महाराजा: दी एम्पेरर  

व्यूस : 1876 | सितम्बर 2016

जब कभी किसी व्यक्ति के सामने कोई समस्या आती है, यह स्थिति आती है कि वह समझ नहीं पाता कि अब उसे क्या करना चाहिए। ऐसे समय में वह किसी ज्योतिषी, पामिस्ट या किसी टैरो रीडर के पास जाता है जिससे उसकी समस्या का कुछ समाधान मिल सके। टैरो कार्ड रीडिंग भी ज्योतिष की ही एक शाखा है जो मनुष्य के जीवन में होने वाली घटनाओं के विषय में बताता है। महाराजा, दी एम्पेरर कार्ड भी टैरो डेक का एक प्रभुत्वशाली कार्ड है। टैरो रीडिंग में अगर किसी का उक्त कार्ड निकलता है

तो इसका अर्थ है उस व्यक्ति का प्रभुत्व अपने क्षेत्र में बढ़ने वाला है। मान लीजिए वह व्यक्ति सर्विस करता है तो उसका प्रमोशन होने वाला है, उसके अधीनस्थ कर्मचारियों पर उसका प्रभुत्व व रौब बढ़ने वाला है। उसके अधीनस्थ काम करने वाले लोगों का क्षेत्र भी विस्तृत हो जायेगा। इससे उसके कार्यक्षेत्र में सम्मान बढ़ जायेगा। उसके बाॅस के सामने भी उसका पद बढ़ने पर बाॅस उसके साथ इज्जत से बात करेंगे। उसके दोस्तों के बीच, परिचितों व समाज में भी सम्मान व प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।

अब अगर कोई व्यक्ति बिजनेस करता है और वह टैरो रीडर के पास जा कर टैरो रीडिंग करवाता है और अपने बिजनेस के प्रसार के लिये पूछता है और उस समय रीडिंग के दौरान उसका उक्त कार्ड ‘दी एम्पेरर’’ निकल आता है तो इसका अर्थ बहुत उत्तम है अर्थात उसके बिजनेस का विस्तार होने वाला है। व्यापार के क्षेत्र में उसका प्रभाव बढ़ने वाला है। उससे भी बड़े व्यापारियों में उसकी गिनती होने वाली है। उसके अधीनस्थ कार्य करने वाले कर्मचारियों की गिनती बढ़ने वाली है। विस्तार के रूप में उसकी कंपनी की अन्य एक और शाखा या एक से अधिक शाखाएं भी खुल सकती हैं। धीरे-धीरे उससे अधिक भी हो सकता है।


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उसके व्यापार का विस्तार विदेश में भी हो सकता है। विदेश में भी उसकी कोई शाखा खुल सकती है जिससे समाज, परिवार व मित्रों में उसकी इज्जत बढ़ सकती है। सबके बीच वह आकर्षण का पात्र बन सकता है। चारों ओर उसको सम्मान मिलने के अवसर मिल सकते हैं। वह जहां भी जायेगा सब उसको इज्जत की नजर से देखेंगे और वह अपने आप को सम्मानित महसूस करेगा। अगर कोई विद्यार्थी है और वह अपनी टैरो रीडिंग करवाने टैरो रीडर के पास जाता है और उस समय रीडिंग के दौरान इसका कार्ड ‘दी एम्पेरर’ निकल आता है तो यह उसके लिये शुभ संकेत है।

इसका अर्थ है उसके टीचर की नजर में वह ऊंचा उठने वाला है। यह तभी हो सकता है जब वह विद्यार्थी पढ़ाई में अच्छा है, खेल-कूद में अच्छा है, सामान्य ज्ञान में अच्छा है। यह कार्ड बताता है कि व्यक्ति का मोरल (नैतिकता) अच्छा है, वह अनुशासन प्रिय है, बड़ांे की इज्जत करना जानता है, आत्म विश्वास से परिपूर्ण है। अतः कार्ड ‘दी एम्पेरर’ आने पर स्वतः ही उस व्यक्ति या विद्यार्थी में इन गुणों का प्रादुर्भाव होना शुरू हो जायेगा। वास्तव में इन गुणों के अंकुर तो कथित व्यक्ति के अंदर पहले से ही विद्यमान होते हैं। बस इस कार्ड के प्राकट्य होने का अर्थ है

कि अब सही समय आ गया है उन अंकुरों के प्रस्फुटित होने का जिससे इन गुणों का विकास उसके अंदर होने लगता है और जल्दी ही वह सबके बीच प्रिय व पसन्दीदा व्यक्ति बन जाता है। उसे सब लोगों से प्यार, इज्जत व सम्मान मिलते हैं।


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पितृ दोष  सितम्बर 2016

फ्यूचर समाचार का वर्तमान अंक विशेष रूप से पितृ दोष को समर्पित है। हमारे धार्मिक ग्रन्थों से हमें पता चलता है कि हमें अपने पितरों को समय-समय पर भोजन व अन्य सामग्रियां प्रदान करते रहना चाहिए। विशेष रूप से भाद्रपद महिने के कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से अमावस्या तक के 15 दिन पूर्ण रूप से पितरों की सेवा के लिए ही होते हैं। पुरानों और अन्य धार्मिक ग्रन्थों से पता चलता है कि इस समय हमारे पितर पृथ्वी पर विशेष रूप से अपने सम्बन्धियों से भोजन व सम्मान प्राप्त करने आते हैं तथा इसके बदले में सम्बन्धियों को पूर्ण आशीर्वाद प्रदान करके लौट जाते हैं। इस वर्तमान अंक में बहुत सारे पितृ दोष से सम्बन्धि अच्छे लेख शामिल किए गये हैं। उनमें से कुछ विशेष लेख हैं: जानें क्या होता है पितृ दोष, कैसे कम होता है इसका प्रभाव?, श्राद्ध के साथ करें पितरों को विदा, पितृ पूजा: पहचान एवं उपाय, पितृ दोष से उत्पन्न ऊपरी बाधाएं, पितृ दोष: ज्योतिषीय योग एवं निवारण आदि।

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