दक्षिण दिशा में स्थित गृह/भूखंड

दक्षिण दिशा में स्थित गृह/भूखंड  

मनोज कुमार
व्यूस : 1989 | सितम्बर 2016

उत्तर दिशा स्वास्थ्य एवं ध्न का संकेतक है। उसी प्रकार यदि हम दक्षिण दिशा का उपयोग सही तरह से करें तो यह भी निवासियों को अच्छे स्वास्थ्य एवं ध्न प्रदान करेगा। दक्षिण दिशा के अध्पिति यम हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार ये शनि के बड़े भाई हैं जो आयु के अध्पिति हैं। यम पूर्वाग्रह रहित हैं तथा ये क्रूर निर्णय देते हैं। ये ध्र्म से विमुख नहीं होते। यम के एक मुख तथा दो भुजाएं हैं। इनके दाएं हाथ में गदा है। इनके बाएं हाथ में पफांसी का पफंदा रहता है जिससे आयु पूर्ण होने पर ये सभी लोगों का जीवन ले लेते हैं। इनकी सवारी भैंसा है। इन्हें हंतक भी कहा जाता है जिसका तात्पर्य होता है सबकुछ बर्बाद कर देने वाला अथवा मारने वाला।

अतः इस दिशा में न तो वृ(ि होनी चाहिए अथवा न ही अध्कि खुला स्थान होना चाहिए। इससे निश्चित रूप से निवासियों को दुर्भाग्य का सामना करना पड़ेगा। इन्हें ‘समवधर््न’ भी कहा जाता है जिसका तात्पर्य है कि ये सभी लोगों के साथ एक जैसा व्यवहार करते हैं। जब ये अपना निर्णय सुनाते हैं तो नहीं देखते कि कोई बड़ा है कि छोटा अथवा धनी है कि गरीब। हमें इस दिशा के उपयोग में कापफी चैकस एवं सावधान रहना चाहिए। इस दिशा में खुला स्थान कम से कम होना चाहिए तथा कोई भी निर्माण सीध इस दिशा में किया जा सकता है। यदि यह अग्नि दिशा की ओर थोड़ा बढ़ा हुआ अथवा कटा हुआ हो तो इस दोष के कारण निवासियों में दरिद्रता आती है।

गरीबी स्वतः इनके पास आ जाएगी। यह दिशा मकान में अध्कि वायु का संचार करती है। इससे निवासियों का स्वास्थ्य उत्तम रहता है। यह वायु रोगों को भी ठीक करती है। इस दिशा में वायु संचार की भी एक प(ति है तथा हमें भूखंड पर इसका ध्यान रखकर मकान अथवा अन्य संरचना का निर्माण करना चाहिए अन्यथा निवासियों को विपरीत परिणामों का सामना करना पड़ेगा। जो लोग दक्षिणमुखी मकानों में निवास करते हैं सामान्यतः उनमें अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ता रहती है। ये अपने विजय के लिए कोई भी तरीका अपनाने में नहीं हिचकते। इन्हें बड़े लाभ के लिए छोटी बातों का त्याग करने में कोई परेशानी नहीं होती। दक्षिणमुखी मकान व्यवसायियों, सौदागरों एवं महिलाओं के लिए अति उपयुक्त होते हैं। ऐसे मकानों में महिलाओं का वर्चस्व रहता है।

दक्षिणमुखी मकान के निवासी आसानी से ध्न इकट्टòा करते हैं क्योंकि व्यावसायिक लेन-देन में ये कापफी लचीले होते हैं। ये अपने मामले में थोड़े स्वार्थी हो सकते हैं। ये दूसरों को अपने ऊपर हावी होने का मौका नहीं देते। इसलिए इनके जीवन अथवा व्यवसाय में अनेक शत्राु पैदा हो जाते हैं। यदि यह दिशा दोषपूर्ण है तो इससे घर की महिलाओं में गुस्सा एवं चिड़चिड़ापन आ जाता है। ऐसा मकान महिलाओं का मकान बन जाएगा तथा पुरुषों का वर्चस्व वहां बिल्कुल नहीं रहेगा। इस दिशा में जमीन के अंदर कोई भी संरचना जैसे सेप्टिक टैंक, वाटर टैंक आदि का निर्माण नहीं किया जाना चाहिए। इस दिशा में कोई भी गड्ढा अथवा कुआं नहीं होना चाहिए, इससे निवासियों पर कापफी बुरा असर पड़ेगा।

यदि इस दिशा का सही उपयोग किया जाता है तो इससे ध्न एवं मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। कुछ लोगों का ऐसा विचार है कि दक्षिणमुखी मकान उपलब्ध्यिों के लिए अच्छा नहीं होता किंतु यह गलत धरणा है। दक्षिणमुखी मकान ध्न के मामले में कापफी अच्छे होते हैं। किंतु हमें ऐसे भूखंड का चयन करते वक्त तथा इस पर निर्माण करते वक्त कापफी सावधनी बरतने की आवश्यकता होती है तथा यदि ये कार्य वास्तु सि(ांतों के अनुरुप किये जायं तो विजय, ध्न, स्वास्थ्य में निश्चित रूप से वृ(ि होती है। ऐसे भूखंड को खरीदने से पूर्व अथवा उसपर निर्माण से पूर्व किसी अच्छे वास्तु विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। यदि दक्षिण दिशा में पर्वत अथवा ऊंची इमारतें अथवा एपार्टमेंट हों तो वहां के निवासी कुबेर की तरह जीवन व्यतीत करते हैं।

दक्षिण दिशा की ओर ऊंचाई बहुत महत्वपूर्ण है। यह दिशा किसी भी कारण से दबी हुई नहीं होनी चाहिए। दक्षिण दिशा में अध्कि खुला स्थान निवासियों को अनेक प्रकार की समस्याएं दे सकता है, इससे निवासिायों का स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य एवं ध्नागमन बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है। दक्षिणमुखी भूखंड को खरीदते वक्त अथवा मकान का निर्माण करते समय सावधनी बरतें। नीचे के चित्रों पर ध्यान दें। यह मकान दक्षिणमुखी कहा जाएगा तथा सड़क इस मकान के दक्षिण की ओर कहा जाएगा। कम्पास की दिशाओं पर ध्यान दें। दक्षिणमुखी भूखंड को खरीदने से पूर्व निवासियों को सावधनी बरतने की जरूरत है ताकि भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी उत्पन्न न हो।

यहां दोनों मकान दक्षिणमुखी हैं। दोनों मकानों के माप अलग-अलग हैं। मकान-1 की माप उत्तर-दक्षिण में पूर्व-पश्चिम की तुलना में अध्कि है। मकान-2 के पूर्व-पश्चिम की माप उत्तर-दक्षिण से अध्कि है। यदि भूखंड झुकावयुक्त अथवा विदिशा हो तो इन मापों का अपना महत्व है। दक्षिणमुखी अतिक्रमित भूखंड/ मकान दोनों मकान दक्षिणमुखी हैं तथा दोनों की माप भी समान है। दोनों मकानों में थोड़ा सा अंतर है।

मकान-1 अपनी जगह पर ही निर्मित है किंतु

मकान-2 ने नियम के विरु( थोड़ा सा सड़क को अतिक्रमित कर लिया है। वास्तु के अनुसार भी यह सि(ांतों के विपरीत है।

यदि कोई मकान सड़क की ओर दक्षिण दिशा में बढ़ा हुआ होगा तो इस मकान का दक्षिण-पूर्व-पूर्व एवं दक्षिण-पश्चिम-पश्चिम वीथिशूल से वेध् होगा तथा ये दोनों वीथिशूल कापफी खतरनाक हैं। इस बात को ध्यान में रखकर ही भूखंड अथवा मकान खरीदें तथा दक्षिण की ओर अतिक्रमण करने से पूर्व इस बात का अवश्य ध्यान रखें। यदि दक्षिणमुखी भूखंड/मकान में कुआं अथवा गड्ढा हो इस मकान में एक कुआं दक्षिण-पश्चिम हिस्से में है, यह कापफी अशुभ है अतः इसे शीघ्र भारी पत्थरों से बंद कर दें। आप अपने स्थानीय पंडित से इस जल स्रोत को बंद करने का सही दिन पूछ सकते हैं।

दक्षिण-पश्चिम दिशा में जल स्रोत हमेशा खतरनाक घटनाओं को अंजाम देता है। यदि आप ने अनजाने में इस तरह का भूखंड अथवा मकान खरीद लिया हो तो सबसे पहले कुएं को पत्थरों एवं मिट्टðी से तुरंत बंद करें तथा इसके उपरांत ही कोई निर्माण प्रारंभ करें। नकारात्मक शक्तियों को कम करने के कुछ दूसरे तकनीक भी हैं, यदि आप किसी वास्तु विशेषज्ञ की सलाह लें तो वह आपको भूखंड को सकारात्मक बनाने के अनेक रास्ते बताएगा। ढलान भूखंड में उत्तर-पूर्व दिशा की ओर कोई गड्ढा होना शुभ माना जाता है।

उत्तर-पूर्व की ओर किसी भी प्रकार का जल स्रोत निवासियों के लिए वरदान साबित होता है। भूखंड का दक्षिण भाग ऊंचा उठा होना तथा उत्तर दबा होना अर्थात उत्तर दिशा की ओर ढलान सर्वश्रेष्ठ है। कोई भी ऐसे भूखंड को खरीद सकता है। यहां हम केवल अंदर की चर्चा कर रहे हैं, किसी भूखंड का चयन करते वक्त बाह्य वातावरण की समीक्षा भी आवश्यक है।

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पितृ दोष  सितम्बर 2016

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फ्यूचर समाचार का वर्तमान अंक विशेष रूप से पितृ दोष को समर्पित है। हमारे धार्मिक ग्रन्थों से हमें पता चलता है कि हमें अपने पितरों को समय-समय पर भोजन व अन्य सामग्रियां प्रदान करते रहना चाहिए। विशेष रूप से भाद्रपद महिने के कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से अमावस्या तक के 15 दिन पूर्ण रूप से पितरों की सेवा के लिए ही होते हैं। पुरानों और अन्य धार्मिक ग्रन्थों से पता चलता है कि इस समय हमारे पितर पृथ्वी पर विशेष रूप से अपने सम्बन्धियों से भोजन व सम्मान प्राप्त करने आते हैं तथा इसके बदले में सम्बन्धियों को पूर्ण आशीर्वाद प्रदान करके लौट जाते हैं। इस वर्तमान अंक में बहुत सारे पितृ दोष से सम्बन्धि अच्छे लेख शामिल किए गये हैं। उनमें से कुछ विशेष लेख हैं: जानें क्या होता है पितृ दोष, कैसे कम होता है इसका प्रभाव?, श्राद्ध के साथ करें पितरों को विदा, पितृ पूजा: पहचान एवं उपाय, पितृ दोष से उत्पन्न ऊपरी बाधाएं, पितृ दोष: ज्योतिषीय योग एवं निवारण आदि।

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