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लग्न कुंडली देखे या चलित कुंडली

जब भविष्यवाणी करने की बात आती है तो भाव चलित कुंडली बहुत महत्वपूर्ण होती है। लोग प्रायः भ्रमित रहते हैं की किस कुंडली का प्रयोग किया जाए क्योंकि कभी कभार दोनों कुंडलियों में ग्रह स्थितियाँ अलग-अलग होती है।

कस्पल पद्धति

लेख में प्रस्तुत कुंडली एक जातक की है जिसका जन्म 27.9.1974 को रात 23.05 बजे कोलकाता में हुआ। यह लेख लिखने तक इस जातक की आयु 41 वर्ष की हो चुकी है तथा अभी तक इस जातक का विवाह होना संभव नहीं हो पाया। कस्पल कुंडली के माध्यम से हम यहां यह सुनिश्चित कर पायेंगे कि इतनी आयु होने के बाद भी जातक का विवाह क्यों नहीं हुआ तथा भविष्य में भी क्या कोई आशा है इस जातक का विवाह होने की।

क्या आपके ग्रह देंगे उत्पादन इकाई

उत्पादन कार्य एक जटिल, महंगा तथा तकनीकी कार्य रहा है। आज के प्रतिस्पर्धी युग में यह और भी जोखिम भरा तथा पेचीदा हो चला है। हर व्यक्ति, जो उत्पादन से जुड़ना चाहता है, उत्पादन कार्य में हाथ डालने से पहले ही इसकी सफलता को लेकर चिंतित हो जाता है। यह उचित भी है क्योंकि उसकी असफलता उसे मानसिक तथा आर्थिक दिवालियेपन की तरफ पहुंचा सकती है। किसी भी व्यक्ति को उत्पादन कार्य में सफलता के लिए चाहिए एक चतुर दिमाग, मजबूत इरादे, अच्छी वित्तीय स्थिति, धैर्य, सहनशीलता, अच्छी संगठन क्षमता, कुशल प्रशासन क्षमता, आत्मविश्वास, जोखिम लेने का साहस, अत्याधुनिक तकनीकी ज्ञान जो साथ-साथ बढ़ता रहे, अपने उत्पादन की श्रेष्ठता, उपयोगिता तथा उसके लोकप्रिय होने की दूर दृष्टि, संसाधनों का सही प्रयोग इत्यादि।

हृदय रोग और ज्योतिष

कार्डियाॅलाॅजिकल सोसाइटी के एक सर्वेक्षण के अनुसार हृदय रोग शहरों में 6ः और ग्रामीण क्षेत्रों में 3ः पाया जाता है। कुछ समय पूर्व तक यह रोग प्रौढ़ और वृद्ध लोगों में ही पाया जाता था। किंतु आज बच्चे और युवा भी इससे पीड़ित होते देखे जाते हैं। अमेरिका जैसे सम्पन्न देश में यह 2ण्6ः मगर भारत जैसे प्रगतिशील देश में 7ण्5ः जनसंख्या में पाया जता है। इस प्रकार हम देखते हैं कि 100 करोड़ की जनसंख्या में 7.5 करोड़ लोग हृदय रोग जैसी घातक बीमारी से पीड़ित हैं और इसके 10 करोड़ लोगों तक पहुंचने की संभावना है। इनमें से लगभग 28 लाख हृदय रोगी प्रति वर्ष मौत के मुंह में पहुंच जाते हैं। प्रतिवर्ष 25 लाख व्यक्ति इस रोग से पीड़ित हो रहे हैं। यह स्थिति तब है जब हमारे देश में चिकित्सा विज्ञान ने बहुत प्रगति की है।

ग्रह स्थिति एवं व्यापार

गोचर फल विचार मासारंभ में मंगल ग्रह का शनि व राहु से द्विद्र्वादश योग में रहना तथा सूर्य का शनि से समसप्तक योग में रहना राजनीतिज्ञों में परस्पर विरोधाभास को बढ़ाकर अशान्तमय माहौल पैदा करेगा। परस्पर विरोधी राजनीतिक दलों द्वारा आरोप प्रत्यारोपों को बढ़ावा देगा। शासकीय दलों के लिए विशेषतया संषर्षपूर्ण स्थितियां बनाएगा। इस मास में अग्निकांड, विस्फोटक दुर्घटनाओं इत्यादि से जन मानस में भय और आक्रोश की भावना को बढ़ाएगा।

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पुस्तकेंऔर देखें

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कुंडली मिलान

सरल अष्टकूट मिलान पुस्तक कुंडली मिलान की आवश्यकता कब, क्यों और कैसे, तथा विवाह की असफलता के कारणों पर प्रकाश डालती हैं। कुंडली मिलान द्वारा हम यह जानने की कोशिश करते है की लडके व् लड़की की प्रकृति, मनोवृति एवं अभिरुचि क्या है।

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सरल अष्टक वर्ग सिद्धांत

ग्रहों के गोचर एवं भावफलों को समझने के लिए पाराशर पद्धति से भी प्रभावशाली पद्धति अष्टकवर्ग पद्धति को माना जाता है क्योंकि अष्टकवर्ग में रेखा एवं बिंदु की सहायता से तुलनात्मक अध्ययन सहज और सरल हो जाता है।

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सरल ज्योतिष

सरल ज्योतिष पुस्तक की रचना ज्योतिष के प्रारंभिक छात्रों की रूचि, योग्यता, अवस्था और देश काल पात्र को ध्यान में रखते हुए की गयी हैं। सरल ज्योतिष पुस्तक में ज्योतिष से सम्बंधित खगोल ज्ञान, गणित, ज्योतिष फलित, गोचर, पंचांग के अध्ययन तथा कुंडली मिलान के प्रारंभिक ज्ञान के विषयों को लिखा गया हैं।

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कृष्णमूर्ति पद्धति

जन्मपत्रिका का सही निर्माण फलादेश में सटीकता प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। परन्तु कृष्णमूर्ति पद्धति द्वारा फलादेश में यह अनिवार्य हैं। कृष्णमूर्ति पद्धति में जन्मपत्री निर्माण, पारम्परिक विधि से ही होता है।

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लेख

लग्न कुंडली देखे या चलित कुंडली

जनवरी 2006

व्यूस: 81310

जब भविष्यवाणी करने की बात आती है तो भाव चलित कुंडली बहुत महत्वपूर्ण होती है। लोग प्रायः भ्रमित रहते हैं की किस कुंडली का प्रयोग किया जाए क्योंकि कभी कभार दोनों कुंडलियों में ग्रह स्थितियाँ अलग-अलग हो...और पढ़ें

कस्पल पद्धति

फ़रवरी 2016

व्यूस: 3914

लेख में प्रस्तुत कुंडली एक जातक की है जिसका जन्म 27.9.1974 को रात 23.05 बजे कोलकाता में हुआ। यह लेख लिखने तक इस जातक की आयु 41 वर्ष की हो चुकी है तथा अभी तक इस जातक का विवाह होना संभव नहीं हो पा...और पढ़ें

क्या आपके ग्रह देंगे उत्पादन इकाई

जनवरी 2006

व्यूस: 3440

उत्पादन कार्य एक जटिल, महंगा तथा तकनीकी कार्य रहा है। आज के प्रतिस्पर्धी युग में यह और भी जोखिम भरा तथा पेचीदा हो चला है। हर व्यक्ति, जो उत्पादन से जुड़ना चाहता है, उत्पादन कार्य में हाथ डालने से पहले ...और पढ़ें

हृदय रोग और ज्योतिष

जुलाई 2005

व्यूस: 3548

कार्डियाॅलाॅजिकल सोसाइटी के एक सर्वेक्षण के अनुसार हृदय रोग शहरों में 6ः और ग्रामीण क्षेत्रों में 3ः पाया जाता है। कुछ समय पूर्व तक यह रोग प्रौढ़ और वृद्ध लोगों में ही पाया जाता था। किंतु आज बच्चे और...और पढ़ें

ग्रह स्थिति एवं व्यापार

मई 2014

व्यूस: 3559

गोचर फल विचार मासारंभ में मंगल ग्रह का शनि व राहु से द्विद्र्वादश योग में रहना तथा सूर्य का शनि से समसप्तक योग में रहना राजनीतिज्ञों में परस्पर विरोधाभास को बढ़ाकर अशान्तमय माहौल पैदा करेगा।...और पढ़ें

मांगलिक योग: दांपत्य जीवन में दोष एवं निवारण

जुलाई 2015

व्यूस: 3548

जिस जातक की जन्मकुंडली में मंगल चतुर्थ, सप्तम, अष्टम, द्वादश भावों में स्थित होता है, उसे मांगलिक कहा जाता है। उपरोक्त भावों के अलावा द्वितीय भाव में मंगल की स्थिति को भी मंगली दोष मानते हैं। अर...और पढ़ें

सलमान खान के लिए कठिन समय

मार्च 2016

व्यूस: 3465

मनुष्य के जीवन में सुख-दुख का मिश्रण उनके पूर्वजन्म के कर्मफल के अनुसार होता है। पीढ़ियों के अनुभव ने इस तथ्य को ‘‘सब दिन होत न एक समान’’ लोकोक्ति का रूप दे दिया है। ‘‘उत्तरकालामृत गं्रथ (6.2) के...और पढ़ें

किस्मत और कर्म का कनेक्शन

दिसम्बर 2014

व्यूस: 3451

रोजाना, हम अलग-अलग प्रकार के जुमले सुनते रहते हैं कि ‘‘उसकी किस्मत बहुत अच्छी थी इसलिये वह इतना बड़ा आदमी बन पाया’’,‘‘मेरी तो किस्मत में सुख लिखा ही नहीं है”, “वह तो बदकिस्मत है’’, “जो किस्मत में लि...और पढ़ें

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