बर्थ टाईम रेक्टीफिकेशन कस्पल पद्धति

बर्थ टाईम रेक्टीफिकेशन कस्पल पद्धति  

पिछले लेख में आपको बर्थ टाईम रेक्टीफिकेशन (बीटी. आर) करने के ठोस नियमों से अवगत करवाया गया था। इस लेख में एक उदाहरण की सहायता से बी. टी. आर. को समझाने का प्रयास किया गया है। पहले नियम यानि की रुलिंग प्लैनेट्स ;त्नसपदह च्संदमजेद्ध की सहायता से इस विशिष्ट कुण्डली का जन्म समय शुद्ध करेंगे तथा उसके पश्चात हम बी. टी. आर. के सुदृढ़ नियमों को भी लागू करेंगे। किसी जातक ने अपनी जन्म तिथि 6 जुलाई 1973, जन्म समय सुबह 6 बजे से लेकर 6.30 बजे के बीच दिल्ली में जन्म की डिटेल प्रस्तुत की तथा यह जातक धातु (लोहा, तांबा, एलाॅय) का व्यापारी है। इस जातक को अपने जन्म समय को लेकर संदेह है। यहां जन्म समय में आधे घंटे का संदेह है। इस केस में सबसे प्रथम हमें जातक के जन्म समय को ठीक करने हेतु इस जातक के जन्म समय की चन्द्र की पोजिशन को ठीक करना होगा। तदुपरांत हम जातक के लग्न को फिक्स करेंगे। ऐसी समस्या से निपटने के लिए रुलिंग प्लैनेट्स की मदद ली जाती है। रुलिंग प्लैनेट्स का तात्पर्य है कि जिस समय आप कुंडली पर काम करने बैठे उस समय चन्द्र और लग्न की पोजिशन के सहशासक ग्रह कौन -कौन से हैं यानि कि चन्द्र किसी राशि में, किसी स्टार में, किसी सब (उप) में और किसी सब सब (उप उप) में होगा तथा उसी समय पर लग्न भी किसी राशि, किसी नक्षत्र, किसी सब और किसी सब सब में होगा। इस प्रकार मून के रुलिंग और लग्न के रुलिंग आपको चार-चार ग्रह उपलब्ध हो जाते हैं। मून के रुलिंग प्लैनेट्स की सहायता से जातक के लग्न की पोजिशन को फिक्स किया जाता है और लग्न के रुलिंग ग्रहों की सहायता से आप जातक के चन्द्र की पोजिशन को फिक्स करेंगे। 1) दिनंाक 13 जुलाई 2016 को सुबह 10.48.26 बजे, तिलक नगर, दिल्ली में जब इस विशिष्ट कुण्डली के जन्म समय शुद्धिकरण हेतु कम्प्यूटर खोला गया तथा जातक की डिटेल कम्प्यूटर में डाली गयी तो उस समय रुलिंग प्लैनेट लग्न की पोजिशन इस प्रकार थी बुध-सूर्य-शनि-चन्द्र यानि कि उस समय लग्न बुध की राशि, सूर्य के नक्षत्र, शनि के सब और चन्द्र के सब सब में उदय हो रहा था । इस प्रकार लग्न के रुलिंग चार ग्रह बुध, सूर्य, शनि और चन्द्र के रुप में इस जातक के चन्द्र की पोजिशन को फिक्स करने हेतु प्राप्त हो गए । इसी प्रकार उस समय रुलिंग प्लैनेट मून की पोजिशन इस प्रकार से थी शुक्र-राहु-गुरु-मंगल यानि कि चन्द्र उस समय शुक्र की राशि राहु के नक्षत्र में, गुरु के सब में और मंगल के सब सब में गोचर कर रहा था। राहु इस विशिष्ट दिन सूर्य और शुक्र का भी प्रतिनिधित्व कर रहा था क्योंकि राहु उस दिन सिंह राशि और शुक्र के नक्षत्र में था। इस प्रकार रुलिंग प्लैनेट चन्द्र के भी चार ग्रह शुक्र, राहु, गुरु, मंगल के रुप में इस जातक के लग्न को फिक्स करने हेतु उपलब्ध हो गए । 2) रुलिंग प्लैनेट्स लग्न के चारों ग्रहों की सहायता से इस जातक के जन्म के समय के चन्द्र की पोजिशन को ठीक करना है क्योंकि जन्म समय में जातक को आधे घंटे का संदेह है। जब भी जन्म समय में अन्तर ज्यादा हो तो सबसे पहले जातक के जन्म समय के चन्द्र की पोजिशन को ठीक करने की सलाह दी जाती है। 3) जातक द्वारा बतलाया गया है कि उसका जन्म सुबह 6 और 6.30 के बीच में हुआ है। यहां हम जातक की कुंडली का समय 06ः15 बजे रखकर आरंभ करेंगे क्योंकि बीच के समय पर कुंडली बनाने से आपको दिए गए समय के अनुसार आगे और पीछे दोनों तरफ जाने की छूट मिल जाती है। 4) जातक की कुंडली 06ः15 बजे की बनाई गई। इस समय पर जातक के चन्द्र की पोजिशन बुध-सूर्य-शनि-राहु के रुप में प्रकट हुई यानि कि चन्द्र बुध राशि में, सूर्य के नक्षत्र, शनि के सब और राहु के सब सब में गोचर कर रहा था। 5) अब रुलिंग प्लैनेट्स लग्न यानि की बुध-सूर्य-शनि-चन्द्र की सहायता से जातक के चन्द्र की पोजिशन को फिक्स करना है। 6) बुध-सूर्य-शनि ये सभी ग्रह जातक के चन्द्र की पोजिशन में प्रकट हो रहे हैं यानि की यह कुंडली सब लेवल तक सही प्रतीत होती है। अब अपने सबसे स्ट्राँग रुलिंग प्लैनेट लग्न के ग्रह चन्द्र को इस्तेमाल में लाना है। 6 बज कर 15 मिनट पर जातक के चन्द्र का सब सब लाॅर्ड राहु है जो कि आर. पी. लग्न के ग्रहों में प्रकट नहीं हुआ । 7) कुंडली का समय तब तक पीछे किया गया जब तक कि जातक के चन्द्र की पोजिशन में चन्द्र न मिल जाए। जातक के चन्द्र की पोजिशन में सब सब लाॅर्ड के रुप में चन्द्र को फिक्स करना होगा क्योंकि चन्द्र सबसे स्ट्राँग रुलिंग प्लैनेट है। 8) सुबह 6 बज कर 35 सेकंड पर जातक के चन्द्र की पोजिशन में चन्द्र का सब सब लाॅर्ड शुरु हो गया और वह सुबह 5 बजकर 41 मिनट और 26 सेकंड तक रहा। इसका तात्पर्य यह हुआ कि ईश्वर ने जो भी रुलिंग प्लैनेट्स दिए आर. पी. लग्न के रुप में, वे चारों ग्रह यानि कि बुध- सूर्य - शनि - चन्द्र जातक के जन्म समय के चन्द्र की पोजिशन को बतलाते हैं यानि की यह सुनिश्चित करने में तनिक भी कठिनाई नहीं आई कि इस विशिष्ठ जातक का जन्म 05.41.26 बजे से सुबह 06.00. 35 बजे के बीच में हुआ है। 9) अब हम रुलिंग प्लैनेट मून की मदद से जो कि शुक्र-राहु-गुरु-मंगल है जातक के लग्न को फिक्स करने का प्रयास करेंगे। 05.41.26 बजे से 06.00.35 बजे के बीच जातक की कुंडली में जातक का लग्न मिथुन राशि में 22.08 डिग्री से मिथुन 26.17.07 डिग्री के बीच रहता है। मतलब इस समय के बीच लग्न का राशि स्वामी बुध रहने वाला है और बुध आर. पी. मून में ग्रह के रुप में प्रकट नहीं हो रहा है फिर भी लग्न का स्वामी बुध के रुप में रखना पड़ेगा और इसी समय यानि की 05. 41.26 बजे से 06.00.35 बजे के बीच लग्न का नक्षत्र गुरु (पुनर्वसु) भी नहीं बदलता तथा गुरु रुलिंग प्लैनेट्स मून के ग्रहों में भी उपलब्ध है। गुरु को लग्न के नक्षत्र के रुप में फिक्स किया जा सकता है। 10) जब 05.41.26 बजे से आगे समय बढ़ाया गया तो लग्न का सब लाॅर्ड शनि और उसके पश्चात बुध बन कर आए, शनि और बुध रुलिंग प्लैनेट मून के ग्रहों के रुप में नहीं मिले इसलिए लग्न के सब लाॅर्ड के रुप में शनि और बुध को नहीं रखा जाएगा । 11) बुध के पश्चात केतु का सब लाॅर्ड सुबह 05.58.15 बजे से सुबह 06.01.50 बजे तक रहने वाला है। लेकिन जातक के चन्द्र की पोजिशन से चन्द्र का सब सब लाॅर्ड 06.00. 35 बजे तक ही रहता है। तदुपरांत मंगल का सब सब शुरु हो जाता है तथा मंगल को हम जातक के चन्द्र के सब सब लाॅर्ड के रुप में नहीं रख पाए थे क्योंकि रुलिंग प्लैनेट लग्न में हमें मंगल प्लैनेट नहीं मिला था। तो हम यहां यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि इस विशिष्ट जातक का जन्म 05.58.15 बजे और 06.00.35 बजे के बीच में ही होना चाहिए । 12) सुबह 06.00.35 बजे जातक का लग्न मिथुन में 26.17.07 डिग्री पर उदय हो रहा है यानि की जातक का लग्न, बुध-गुरु-केतु-गुरु के रुप में प्रकट हो रहा है। रुलिंग प्लैनेट्स मून में शुक्र-राहु-गुरु-मंगल के रुप में चार ग्रह उपलब्ध हुए हैं। शुक्र बहुत ही स्ट्राँग रुलिंग प्लैनेट है क्योंकि राहु भी यहाँ शुक्र का प्रतिनिधित्व करता है तथा साथ में सूर्य का भी क्योंकि राहु 13 जुलाई 2016 को सिंह राशि और सूर्य के नक्षत्र में गोचर कर रहा था। शुक्र बेशक बहुत ही स्ट्राँग रुलिंग प्लैनेट है फिर भी शुक्र को जातक के लग्न में को - रुलिंग ग्रह के रुप में प्रयोग में नहीं लाया जा सकता क्योंकि जब जातक के लग्न का सब सब लाॅर्ड शुक्र रखा जाएगा तो कस्पल नियम के अनुसार लग्न के सब सब लाॅर्ड का संबंध चन्द्र के नक्षत्र से होना अनिवार्य है। मून स्टार इस केस में सूर्य है और सूर्य और शुक्र का संबंध आपस में नहीं बनता इस लिए शुक्र को लग्न का सब या सब सब लाॅर्ड रखना उपयुक्त नहीं है। बेशक शुक्र रुलिंग प्लैनेट्स मून में बहुत ही प्रबल तौर पर उपलब्ध है। परंतु लग्न के सब लाॅर्ड के रुप में केतु को रखना होगा। केतु रुलिंग प्लैनेट्स मून के ग्रहों में प्रकट हो रहा है क्योंकि आर. पी. मून में राहु रुलिंग ग्रह बन कर प्रकट हुआ है। जिस दिन यानि कि 13 जुलाई 2016 को जन्म समय शुद्ध करने हेतु रुलिंग प्लैनेट्स लिए गए उस दिन केतु राहु का प्रतिनिधित्व कर रहा है क्योंकि केतु राहु के नक्षत्र में है। इसलिए लग्न के सब लाॅर्ड के रुप में केतु को रखना उपयुक्त है। शुक्र को हम लग्न के सब लाॅर्ड के रुप में नहीं रख पाए क्योंकि शुक्र का सब लाॅर्ड 06.00.35 बजे के बाद आता है तथा जातक के चन्द्र की पोजिशन में चन्द्र, सब सब लाॅर्ड के रुप में नहीं रहता बल्कि मंगल आ जाता है। मंगल को हम जातक के चन्द्र का सब सब लाॅर्ड नहीं रख पाए थे क्योंकि मंगल रुलिंग प्लैनेट्स लग्न में उपलब्ध नहीं हुआ था जिसकी चर्चा ऊपर ही की जा चुकी है। 13) अब बात लग्न के सब सब लाॅर्ड को फिक्स करने की है। लग्न का सब सब लाॅर्ड जो भी ग्रह फिक्स करना है वह 06.00.35 बजे से पहले और 05.58.15 बजे के बीच में फिक्स करना होगा। 06.00.35 बजे लग्न का सब सब लाॅर्ड गुरु है। गुरु को लग्न के सब सब लाॅर्ड के रुप में रख सकते हैं क्योंकि गुरु रुलिंग प्लैनेट्स मून में उपलब्ध है और इसका संबंध जातक के मून स्टार सूर्य से भी स्थापित होता है। परन्तु गुरु को हम पहले ही जातक के लग्न के स्टार लाॅर्ड के रुप में फिक्स कर चुके हैं। गुरु से पहले राहु और उससे पहले मंगल को हम जातक के लग्न के सब सब लाॅर्ड के रुप में नहीं रख पाएंगे क्योंकि इस विशिष्ट कुंडली में राहु और मंगल का रिलेशन जातक के मून स्टार सूर्य से नहीं बनता बेशक राहु हमारा रुलिंग प्लैनेट मून है। मंगल से पहले चन्द्र को हम लग्न का सब सब लाॅर्ड रख सकते हैं क्योंकि चन्द्र का जातक के मून स्टार से संबंध स्थापित हो जाता है। परन्तु चन्द्र हमारे रुलिंग प्लैनेट मून में प्रकट नहीं हुआ इसलिए हम चन्द्र को भी लग्न के सब सब लाॅर्ड के रुप में नहीं रख पाएंगे। 14) चन्द्र से पहले सूर्य को लग्न का सब सब लाॅर्ड रखा जा सकता है क्योंकि सूर्य का संबंध जातक के मून स्टार से स्थापित होता है। दूसरे, सूर्य हमारा रुलिंग प्लैनेट के मून का ग्रह भी है क्योंकि आर. पी. मून में राहु प्रकट हो रहा है तथा राहु सूर्य का प्रतिनिधित्व करता है। सूर्य का सब सब लाॅर्ड 05.59.02 बजे से 05. 59.13 बजे के बीच रहने वाला है। इसका तात्पर्य जातक का जन्म इसी समय के बीच में होना निश्चित है। 05.59.13 बजे लग्न की चाप (आर्क) 95.78 प्रतिशत है और पुरुष राशि में लग्न उदय हो रहा है। नियम है कि पुरुष जातक की कुण्डली को फिक्स करने हेतु लग्न की आर्क का 50 प्रतिशत से कम रखना अनिवार्य है तथा 05.59.08 बजे पर लग्न का सब सब लाॅर्ड सूर्य तथा आर्क 50 प्रतिशत से कम रखी गई । 15) ऊपर हमने रुलिंग प्लैनेट्स मून और रुलिंग प्लैनेट्स लग्न की सहायता से जातक की कुंडली को ठीक किया तथा हमने यहाँ कस्पल ज्योतिष में बर्थ टाईम रेक्टीफिकेशन के कुछ और नियमों जैसे कि लग्न के सब सब लाॅर्ड का जातक के मून स्टार से संबंध स्थापित होना तथा सूर्य के रुलिंग, मून के रुलिंग और लग्न के रुलिंग ग्रहों को पहले या सातवें या दसवें भावों को सिग्निफाई करना इत्यादि को भी लागू किया तथा हम यहाँ यह सुनिश्चित कर पाए कि इस जातक का सही जन्म समय 05.59.08 बजे है। 16) जैसा कि हमने ऊपर लिखा कि यह जातक धातु इत्यादि का व्यापार करता है। इसे कस्पल ज्योतिष के सुदृढ़ नियमों से भी कन्फर्म किया जा सकता है। 17) तीसरे भाव का सब सब लाॅर्ड शनि मंगल के नक्षत्र में है और मंगल दसवें भाव में प्रकट हो रहा है। दसवें भाव का सब सब लाॅर्ड बुध है। बुध शनि के नक्षत्र में है और शनि तीसरे भाव का सब सब लाॅर्ड है। सातवें भाव का सब सब लाॅर्ड शुक्र शनि के नक्षत्र में है और शनि दसवीं कस्पल पोजिशन में प्रकट हो रहा है। इसका तात्पर्य यह कुण्डली हर प्रकार से इस जातक के व्यापार संबंधी भी जानकारी दे रही है।

पितृ दोष  सितम्बर 2016

फ्यूचर समाचार का वर्तमान अंक विशेष रूप से पितृ दोष को समर्पित है। हमारे धार्मिक ग्रन्थों से हमें पता चलता है कि हमें अपने पितरों को समय-समय पर भोजन व अन्य सामग्रियां प्रदान करते रहना चाहिए। विशेष रूप से भाद्रपद महिने के कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से अमावस्या तक के 15 दिन पूर्ण रूप से पितरों की सेवा के लिए ही होते हैं। पुरानों और अन्य धार्मिक ग्रन्थों से पता चलता है कि इस समय हमारे पितर पृथ्वी पर विशेष रूप से अपने सम्बन्धियों से भोजन व सम्मान प्राप्त करने आते हैं तथा इसके बदले में सम्बन्धियों को पूर्ण आशीर्वाद प्रदान करके लौट जाते हैं। इस वर्तमान अंक में बहुत सारे पितृ दोष से सम्बन्धि अच्छे लेख शामिल किए गये हैं। उनमें से कुछ विशेष लेख हैं: जानें क्या होता है पितृ दोष, कैसे कम होता है इसका प्रभाव?, श्राद्ध के साथ करें पितरों को विदा, पितृ पूजा: पहचान एवं उपाय, पितृ दोष से उत्पन्न ऊपरी बाधाएं, पितृ दोष: ज्योतिषीय योग एवं निवारण आदि।

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