एक आॅल राउंडर व्यक्तित्व- नवजोत सिंह सिद्धू

एक आॅल राउंडर व्यक्तित्व- नवजोत सिंह सिद्धू  

अपने कहकहों एवं जानदार शेरों से पूरे भारत व विदेशी भारतीयों का मनोरंजन करने में चुस्त-दुरूस्त सिद्धू पाजी, शेरी पाजी अथवा नवजोत सिंह सिद्धू को कौन नहीं जानता। ये अपनी वाक्पटुता एवं अनोखी शैली से सभी का मन मोह लेते हैं। सिद्धू जी का बोलबाला कपिल शर्मा के शो तक ही सीमित नहीं है बल्कि भारतीय क्रिकेट और राजनीति के क्षेत्र में भी इनकी बहुत अच्छी पैठ है। नवजोत सिद्धू अपनी जिंदगी में असली आॅल राउंडर हैं क्योंकि एक तरफ ये कमेन्ट्री करने में माहिर हैं तो शायरी भी जोरदार कर लेते हैं। उधर राजनीति में भी पूर्ण रूप से सक्रिय हैं । सिद्धू जी ने अपनी वाणी के दम पर पूरे भारतवर्ष में अपना एक अलग मुकाम हासिल कर लिया है। नवजोत सिंह सिद्धू का जन्म 1963 में भारत के पंजाब प्रांत के पटियाला जिले में हुआ। उनके पिता सरदार भगवंत सिंह सिद्धू भी एक क्रिकेट खिलाड़ी थे और वे अपने बेटे नवजोत को एक उच्च श्रेणी के क्रिकेटर के रूप में देखना चाहते थे इसलिए पढ़ाई के साथ-साथ वे क्रिकेट में बहुत सक्रिय रहे और 1983 से 1999 तक उनका अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट करियर बहुत बढ़िया रहा। अपना अंतिम टेस्ट उन्होंने 6 जनवरी 1999 को न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला था और अंतिम एक दिवसीय मैच 20 सितंबर 1998 को पाकिस्तान के विरूद्ध खेला था। दिसंबर 1999 में उन्होंने अपने क्रिकेट के सभी फाॅर्मेट से संन्यास की घोषणा कर दी। अपनी बल्लेबाजी में बेहतर प्रदर्शन के कारण उन्हें 'Sixer Sidhu' कह कर पुकारा जाता था और अपनी बेहतरीन फील्डिंग के कारण उन्हें जोंटी सिंह कहा जाता था क्योंकि जोंटी रोड्स उस दौर के बेहतरीन फील्डर थे। 1999 के बाद नवजोत सिंह सिद्धू का क्रिकेट करियर तो खत्म हो गया लेकिन उन्हें और भी पारियां खेलनी थीं। सिद्धू ने 2001 में भारत के श्री लंका दौरे से बतौर कमंटेटर अपना करियर शुरू कर दिया। कमंटेटर के तौर पर सिद्धू ने अपनी अलग पहचान बनाई और वे अपनी One Line के कारण फेमस हो गये जिसे हम Sidhuism कहते हैं। अपने टी.वी करियर की शुरूआत स्टार वन पर शुरू हुए नाटक The Great Indian Laughter Challenge से की। फिर ‘पंजाबी चक दे’ में भी बतौर जज काम किया और फिर बिग बाॅस-6 प्रतियोगिता में भाग लिया लेकिन राजनीतिक विवादों के कारण उन्हें शो बीच में ही छोड़ना पड़ा था। अब वे पिछले कुछ वर्षों से ‘काॅमेडी नाइट विद् कपिल’ और अब ‘द कपिल शर्मा शो’ में कहकहे लगाते व अपने शेर सुनाते हुए नजर आते हैं। राजनीति में सिद्धू ने 2004 में भारतीय जनता पार्टी की तरफ से अमृतसर की सीट जीत कर कदम रखा लेकिन कुछ दिन बाद एक कोर्ट केस होने की वजह से उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा था। लेकिन दोबारा वे बहुमत से अपनी सीट पर कायम रहे। 2014 में उन्होंने अपनी सीट अरूण जेटली के लिए छोड़ दी और भाजपा के प्रचार-प्रसार में काफी मदद की। 28 अप्रैल 2016 को उन्हें राज्यसभा के सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया। लेकिन काफी समय से सिद्धू भाजपा से नाखुश चल रहे थे। अकालियों से उनकी बिल्कुल नहीं पटती इसलिए भाजपा से भी नाराज चल रहे थे और फिर अब जब ‘आम आदमी पार्टी’ उनके स्वागत के लिए बांहें फैलाकर तैयार बैठी है तो उन्होंने भी अवसर का फायदा उठाकर कुछ ऊंचा पद प्राप्त करने की अपनी चाहत को अंजाम दे Sidhuism : -is like a honey bee. It's got a small body, its got the honey & its got a sting too. सिद्धू के कुछ जुमले 1. सभी को सब कुछ हासिल नहीं होता। नदी के हर लहर को साहिल नहीं मिलता। अरे ये दिलवालों की दुनिया की अजब है दास्तां किसी से दिल नहीं मिलता और कोई दिल से नहीं मिलता। 2. झुकते हैं वो जिनमें जान होती है अकड़ना तो मुर्दों की पहचान होती है। 3. बुलबुलों के पंखों में बंधे हुए कभी बाज नहीं रहते बुजदिलों और कायरों के हाथों में कभी राज नहीं रहते। सर झुकाकर चलने की आदत पड़ जाए जिस कौम को उस कौम के सर पर कभी ताज नहीं रहते।। ही दिया। सिद्धू का अचानक बी.जे.पी. से जाना वास्तव में भाजपा और अकाली गठबंधन के लिए सिरदर्द साबित हो सकता है। वैसे भी ‘आम आदमी पार्टी’ की पंजाब में पकड़ मजबूत होती जा रही है। ऐसे में सिद्धू और उनकी पत्नी ‘आप’ में शामिल होते हैं तो भाजपा के लिए खतरा हो सकते हैं क्योंकि उनकी पत्नी की पकड़ भी क्षेत्र में काफी अच्छी है। अतः एक जमाने में स्पिनरों के लिए खौफ रहे सिद्धू अब राजनीति में बी.जे.पी. व अकाली दल के लिए खतरा बनने जा रहे हैं। इस आॅल राउंडर व्यक्तित्व के मालिक नवजोत सिंह सिद्धू की जन्मकुंडली के सितारे भी निश्चित रूप से कमाल के ही होने चाहिए। आइये देखते हैं क्या कमाल कर रहे हैं ये ग्रह नक्षत्र। ज्योतिषीय विश्लेषण सिद्धू जी की लग्न कुंडली और चंद्र कुंडली दोनों में ही ग्रहों की स्थिति बहुत अच्छी है और दोनों ही बलवान होने के कारण ये बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। इनकी कुंडली में पांच ग्रह मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र तथा शनि स्वराशि में स्थित हैं जिसके फलस्वरूप ये प्रारंभ से ही जीवन में सफलता के नये सोपान चढ़ रहे हैं और जीवन में कई बदलाव आने के बावजूद भी कभी इनमें असुरक्षा की भावना नहीं रही। राहु और केतु के भी उच्च होने से इन्हें राजनीतिक जीवन में भी सफलता हासिल हुई। अमृतसर लोक सभा सीट से सांसद रहे और फिर राज्य सभा के सदस्य निर्वाचित किये गये। इनका पराक्रमेश शनि स्वगृही होने से तथा पराक्रम भाव पर पंचमेश मंगल की पूर्ण दृष्टि होने से इन्हें खेल जगत (क्रिकेट) में अच्छी सफलता प्राप्त हुई और क्रिकेट से इन्हें धन और यश दोनों की प्राप्ति हुई। वाणी स्थान का स्वामी स्वगृही होने तथा वाणी कारक बुध कर्म भाव में उच्च राशि में होने से एवं बुध पर लग्नेश बृहस्पति की दृष्टि होने से सिद्धू अपनी वाणी के जादू से लोगों को आनंदित कर देते हैं और आज इनके देश-विदेश में लाखों प्रशंसक मौजूद हैं। बृहस्पति और बुध की शुभ स्थिति के कारण आप पूर्ण रूप से शाकाहारी भी हैं तथा हास्य कला व शायरी में भी माहिर हैं। लग्नेश की चतुर्थ भाव में स्वगृही स्थिति के कारण ये जनता में काफी प्रसिद्ध हैं और उनका सपोर्ट भी इन्हें मिलता रहता है और ये सामाजिक रूप से सबसे जुड़े रहते हैं। सिद्धू जी की कुंडली में अनेक शुभ योग बन रहे हैं जैसे हंस महापुरूष योग -बृहस्पति के चतुर्थ केंद्र में स्वराशि में स्थित होने से यह योग पूर्ण रूप से घटित हो रहा है। इसीलिए इनकी सुंदर वाणी, आकर्षक व्यक्तित्व, तीव्र बुद्धि, सुडौल शरीर आदि गुण विद्यमान हैं। भद्र महापुरूष योग: सिद्धू की लग्न पत्रिका में दशम भाव में केंद्र में बुध की उच्च राशि में स्थिति होने से यह योग भी पूर्ण रूप से घटित हो रहा है और इसीलिए सिद्धू पराक्रमी, विद्वान, बहुमुखी प्रतिभा युक्त व सतोगुणी प्रवृत्ति के व्यक्तित्व हैं। सप्तमेश बुध ग्रह कर्म भाव में बलवान स्थिति में होने से तथा सप्तम भाव में उच्चस्थ राहु एवं पत्नी कारक शुक्र लाभ भाव में भाग्येश सूर्य के साथ स्थित होने से सिद्धू की पत्नी उच्च शिक्षित, अच्छे सम्मानजनक करियर तथा राजनीति एवं समाज से जुड़ी हुई महिला हैं। सिद्धू की कुंडली में दो ग्रह सूर्य एवं चंद्रमा नीच राशि में हंै और अभी उनकी शनि की साढ़ेसाती भी चल रही है इसीलिए 2014 के चुनाव में अपनी पुरानी अमृतसर की सीट से चुनाव नहीं लड़ सके और इन्हें निराशा हाथ लगी। नवांश कुंडली में सूर्य वर्गोत्तम नीच नवांश में है तथा चंद्रमा स्व नवमांश में स्थित है। इससे सूर्य चंद्र कुछ शुभ तो हैं पर पूर्ण रूप से शुभ फल नहीं दे रहे हैं जिसके फलस्वरूप सिद्धू को पूर्ण राजयोग से विशेष उच्च पद की प्राप्ति नहीं हो पाई है। अभी तक इन्हें कुछ प्राप्त करने के लिए बड़े लोगों का सहारा लेना पड़ता है। चाहे क्रिकेट हो, टीवी हो या राजनीति आप किसी से जुड़कर ही कुछ हासिल कर पाए हैं। चूंकि सूर्य और चंद्र विशेष राजकारक, उच्च पद्वी प्रदायक ग्रह है, इनके नीच होने से अन्य ग्रहों से बनने वाले राजयोगों के फल भी सीमित हो गये हैं। वर्तमान में सिद्धू राज्य सभा का सम्मानित पद ठुकरा कर पंजाब में आम आदमी पार्टी से हाथ मिलाने की कोशिश में हंै और आदमी आदमी पार्टी इनका चुनाव में इस्तेमाल कर, भविष्य में समय आने पर इन्हें पार्टी में विशेष भूमिका अथवा मुख्य मंत्री का पद न दे इसकी संभावना हो सकती है इसलिए सिद्धू को सोच-समझकर ही कदम उठाना चाहिए। अभी वर्तमान समय में शुक्र में राहु की अंतर्दशा कुछ परिवर्तन के संकेत अवश्य दे रही है। परंतु आगामी कुछ महीने यानी जनवरी 2017 तक का समय इनके लिए विशेष अनुकूल नहीं रहेगा। 27 जनवरी 2017 के बाद दशम भाव व दशमेश पर गुरु व शनि के संयुक्त गोचरीय प्रभाव तथा 20 फरवरी 2017 के बाद के दशा परिवर्तन के शुभ प्रभाव से इन्हें राजनीति के क्षेत्र में विशेष मान सम्मान व श्रेष्ठ पद की प्राप्ति अवश्य होगी। भारत में कहा जाता है कि तीन तरह के लोगों को ही पैसा और शोहरत मिलती है- क्रिकेट, राजनीति और फिल्में/टी.वी.। सिद्धू जी ने इन तीनों क्षेत्रों में अपनी किस्मत आजमाई और पूर्ण रूप से शोहरत और पैसा दोनांे ही हासिल किए। बी. जे. पी. नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने राज्य सभा से इस्तीफा दे दिया है और राज्य सभा के सभापति ने सिद्धू का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। सिद्धू अपनी पत्नी सहित ‘आम आदमी पार्टी’ में शामिल हो सकते हैं। सिद्धू पंजाब विश्वविद्यालय से कानून विषय में स्नातक हैं। उनकी पत्नी का नाम भी नवजोत कौर है जो पेशे से डाॅक्टर हैं और पंजाब विधान सभा की सदस्य हैं। नवजोत सिंह सिद्धू की एक बेटी राबिया और एक पुत्र करण है। सिद्धू में एक खासियत और है कि वे पूर्ण रूप से सात्विक हैं न सिगरेट पीते हैं न शराब।


पितृ दोष  सितम्बर 2016

फ्यूचर समाचार का वर्तमान अंक विशेष रूप से पितृ दोष को समर्पित है। हमारे धार्मिक ग्रन्थों से हमें पता चलता है कि हमें अपने पितरों को समय-समय पर भोजन व अन्य सामग्रियां प्रदान करते रहना चाहिए। विशेष रूप से भाद्रपद महिने के कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से अमावस्या तक के 15 दिन पूर्ण रूप से पितरों की सेवा के लिए ही होते हैं। पुरानों और अन्य धार्मिक ग्रन्थों से पता चलता है कि इस समय हमारे पितर पृथ्वी पर विशेष रूप से अपने सम्बन्धियों से भोजन व सम्मान प्राप्त करने आते हैं तथा इसके बदले में सम्बन्धियों को पूर्ण आशीर्वाद प्रदान करके लौट जाते हैं। इस वर्तमान अंक में बहुत सारे पितृ दोष से सम्बन्धि अच्छे लेख शामिल किए गये हैं। उनमें से कुछ विशेष लेख हैं: जानें क्या होता है पितृ दोष, कैसे कम होता है इसका प्रभाव?, श्राद्ध के साथ करें पितरों को विदा, पितृ पूजा: पहचान एवं उपाय, पितृ दोष से उत्पन्न ऊपरी बाधाएं, पितृ दोष: ज्योतिषीय योग एवं निवारण आदि।

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