पश्चिम दिशा में स्थित गृह/भूखंड

पश्चिम दिशा में स्थित गृह/भूखंड  

पश्चिम दिशा का अपना अलग महत्व है। यदि पश्चिम दिशा की सतह पूर्व दिशा की तुलना में अध्कि ऊंची है तो उस मकान के सदस्य सुखी रहेंगे तथा वहां शुभ घटनाएं घटित होंगी, कोई शत्राुता नहीं होगी तथा कोई घातक रोग नहीं होगा। यदि पश्चिम दिशा में पर्वत हों तो विश्वास करें अथवा नहीं उस घर के निवासियों को अपने क्षेत्रा एवं ध्र्म में नेता की तरह सम्मान मिलेगा। इस दिशा के स्वामी वरुण हैं। ये वर्षा के भी स्वामी हैं जो कि मनुष्य एवं सभी जीवों के लिए अति आवश्यक है। वर्षा पौधें एवं जंगलों के विकास के लिए उत्तरदायी है। जल के बिना इस संसार में कुछ भी बचा नहीं रह सकता। वरुण के एक मुख तथा दो हाथ हैं। इनके दायें हाथ में एक सर्प तथा बायें हाथ में एक रस्सी है। इनकी देवी को पप्रिनी कहा जाता है। इनका रंग सुनहला है। ये एक बड़ी मछली जिसे मकर कहा जाता है, पर सवार रहते हैं। इनकी रस्सी प्रेम को प्रदर्शित करता है। अतः, यदि यह दिशा दोषपूर्ण है तो ऐसे लोग अपने परिवार अथवा मित्रों में अत्यध्कि आसक्त हो जाते हैं तथा उन्हें अत्यध्कि आसक्ति के कारण मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। जो लोग इस दिशा के मकान में अर्थात पश्चिममुखी मकानों में रहते हैं, हर कार्य के लिए उनके विचार दृढ़ होते हैं। इनको समझना कापफी मुश्किल होता है। ये सामान्यतः अपने कार्यों में अध्कि सावधन एवं चैकन्ने रहते हैं। ये दूसरों को अपने ऊपर हावी होने का मौका नहीं देते। ये अपने काम में स्वतंत्राता पसंद करते हंै। कई बार इन्हें दुराग्रह भी हो जाता है। किंतु ये हमेशा अपने लक्ष्य प्राप्ति की ओर उन्मुख रहते हैं। ये दूसरों से काम लेने में सख्त होते हैं। ये अपने कार्यों का परिणाम शीघ्र देखना पसंद करते हैं। यह दिशा कार्य एवं योजना आदि के लिए ऊर्जा प्रदान करता है। यह दिशा व्यक्ति के व्यावसायिक अथवा व्यापारिक उन्नति के लिए उत्तरदायी होता है। इस दिशा में दोष व्यक्ति को बदनामी देता है। साथ ही ऊपर वर्णित गुण इस दिशा में दोष के कारण अनुपस्थित रहेंगे। उनके घर अथवा व्यवसाय में शांति नहीं रहेगी। दोष के कारण व्यवसाय में भी प्रतियोगिता का सामना करना पड़ेगा तथा विकास खतरे में पड़ जाएगा। पश्चिम दिशा की ओर सूर्य अस्त होता है। वरुण एवं शनि क्रमशः दिशा स्वामी एवं ग्रह स्वामी हैं। यह देर तक नैसर्गिक प्रकाश प्रदान करता है। इस क्षेत्रा मंे चार भगवान पुष्पदंत, वरुण, असुर एवं मित्रा निवास करते हैं। कुछ क्षेत्रों में वास्तु विशेषज्ञ विशेष कर पश्चिम दिशा के भूखंड / फ्रलैट/ मकान / बंगला / दुकान / होटल / पफैक्ट्री आदि खरीदने की सलाह नहीं दे रहे हैं। ये क्यों पश्चिममुखी संपत्ति खरीदने की सलाह नहीं दे रहे, क्या इसके पीछे कोई कारण है अथवा ये लोग उस क्षेत्रा के प्रसि( किसी विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार काम कर रहे हैं। यहां वास्तविक बात क्या है। हमारे ज्ञान के अनुसार सभी दिशाओं की संपत्तियों में समान शक्ति है। किंतु यहां हम पूर्व दिशा की चर्चा करते हैं। सूर्य पूर्व दिशा से उदित होता है, अतः सूर्य की ऊष्मा सुबह में पूर्व दिशा से प्रारंभ होती है अतः पूर्व दिशा की संपत्ति दूसरे किसी दिशा की संपत्ति से ज्यादा अच्छी होती है। यहां एक तर्क पर ध्यान दें। पश्चिम दिशा की संपत्ति में भी पूर्व स्थान है तथा वहां भी सूर्य की किरणें आती हैं अतः यहां पूर्व एवं पश्चिम दोनों एक समान हैं। कुछ मकानों में सूर्य की किरणें बाह्य कारणों से नहीं आ सकतीं अतः यहां पर हमें यह सोचना होगा कि वास्तु सि(ांतों के अनुरुप हम उस मकान को कैसे ठीक करें। हमें तुरंत कोई निर्णय नहीं लेना चाहिए। पटना में एक मकान का निरीक्षण किया गया। निवासी ने कुछ मकान देख रखे थे तथा उनमें से कोई एक खरीदना चाहता था। उन मकानों में से एक पूर्वमुखी मकान उसने पसंद किया हुआ था। वास्तुविद ने जब उस मकान के क्षेत्रा में प्रवेश किया तो तुरंत उस पूर्वमखी मकान को लेने से मना कर दिया तथा उसे एक पश्चिममुखी मकान खरीदने की सलाह दी। क्यों? इसके पीछे क्या तर्क हैं? पश्चिममुखी मकान के पश्चिम दिशा में एक बड़ा एपार्टमेंट था अतः यह एपार्टमेंट पश्चिममुखी मकान के लिए सुरक्षा कवच है। पूर्वमुखी मकान के पूर्व दिशा में एक छोटी सी पहाड़ी थी। मकान के आसपास का क्षेत्रा यहां दिशा से अध्कि महत्वपूर्ण है। इस मकान के ठीक आगे से सड़क गुजरती है तथा सड़क पश्चिम दिशा की ओर है। अतः यह मकान पश्चिममुखी मकान कहा जाएगा। पश्चिममुखी मकान खतरनाक नहीं होते किंतु हमें मकान के निर्माण में एक प(ति का अनुसरण अवश्य करना चाहिए। यदि मकान सड़क का अतिक्रमण कर रहा है तो क्या होगा? यह दिशा शिक्षकों, धर्मिक उपदेशकों तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए अति उत्तम है। इस दिशा की अनुशंसा राजनीतिज्ञों, नेताओं तथा बड़े व्यवसायियों के लिए की जाती है। इस दिशा से आने वाली वायु सामान्यतः गर्म होती है। इससे मनुष्य के शरीर में अत्यध्कि ऊष्मा का संचार होता है जिससे कि लोग अत्यध्कि गर्मी से संबंध्ति रोगों से पीड़ित होते हैं। यदि पश्चिम दिशा में कम स्थान रिक्त छोड़ा जाय तथा पश्चिमी भाग का सही तरीके से उपयोग किया जाय तो यह निवासियों को नाम, यश एवं प्रसि(ि प्रदान करती है। किंतु पश्चिममुखी भूखंड को खरीदने में सावधनी बरतनी भी आवश्यक है। किसी भी पश्चिममुखी भूखंड, मकान, पफैक्ट्री, फ्रलैट खरीदने से पूर्व किसी अच्छे वास्तु विशेषज्ञ की सलाह लेनी आवश्यक है। पश्चिममुखी संपत्तियों को खरीदने से पूर्व कुछ सावधनियां आवश्यक हैं। अपनी जानकारी के लिए नीचे दिए गए चित्रा को ध्यान से देखें। यहां दो मकान दर्शाए गए हैं। दोनों मकान पश्चिममुखी हैं। यहां आपको गहराई से ध्यान देने की जरूरत है ... मकान-1 ने सड़क का थोड़ा अतिक्रमण कर लिया है जबकि मकान-2 सड़क के ठीक पीछे तक है। यह अतिक्रमण खतरनाक है, यह सराहनीय नहीं है। ऐसा होने से इस मकान को दक्षिण-पश्चिम-दक्षिण एवं उत्तर-पश्चिम-उत्तर वीथिशूल से वेध् है। अतः यह अच्छा नहीं है। जानकारी के अभाव में कुछ लोग इसे पसंद कर सकते हैं। कृपया इस बात का ध्यान दें, किसी को भी पश्चिम दिशा की ओर अतिक्रमण नहीं करना चाहिए। इस चित्रा में दोनों मकान पश्चिममुखी है। एक अध्कि लंबा है तो दूसरा अध्कि चैड़ा है। दोनों मकानों की लंबाई-चैड़ाई अलग-अलग हैं अतः परिणाम में भी अंतर होगा। मकान संख्या-2 को कुछ अच्छे परिणाम देखने को मिलेंगे किंतु मकान संख्या-1 का क्या। यह भी बुरा मकान नहीं है। परंतु हर हाल में यह आवश्यक है कि किसी मकान को खरीदने अथवा उसके निर्माण से पूर्व किसी अच्छे वास्तु विशेषज्ञ की सलाह लें।

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रत्न विशेषांक  जुलाई 2016

भूत, वर्तमान एवं भविष्य जानने की मनुष्य की उत्कण्ठा ने लोगों को सृष्टि के प्रारम्भ से ही आंदोलित किया है। जन्मकुण्डली के विश्लेषण के समय ज्योतिर्विद विभिन्न ग्रहों की स्थिति का आकलन करते हैं तथा वर्तमान दशा एवं गोचर के आधार पर यह निष्कर्ष निकालने का प्रयास करते हैं कि वर्तमान समय में कौन सा ग्रह ऐसा है जो अपने अशुभत्व के कारण सफलता में बाधाएं एवं समस्याएं उत्पन्न कर रहा है। ग्रहों के अशुभत्व के शमन के लिए तीन प्रकार की पद्धतियां- तंत्र, मंत्र एवं यंत्र विद्यमान हैं। प्रथम दो पद्धतियां आमजनों को थोड़ी मुश्किल प्रतीत होती हैं अतः वर्तमान समय में तीसरी पद्धति ही थोड़ी अधिक प्रचलित है। इसी तीसरी पद्धति के अन्तर्गत विभिन्न ग्रहों के रत्नों को धारण करना है। ये रत्न धारण करने के पश्चात् आश्चर्यजनक परिणाम देते हैं तथा मनुष्य को सुख, शान्ति एवं समृद्धि से ओत-प्रोत करते हैं। फ्यूचर समाचार के वर्तमान अंक में रत्नों से सम्बन्धित अनेक उत्कृष्ट एवं उल्लेखनीय आलेखों को सम्मिलित किया गया है जो रत्न से सम्बन्धित विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हैं।

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