आय-व्यय देखने की विधि: अपनी नाम राशि के नीचे लिखे आय-व्यय अंकों को जोड़िए। जोड़ने के बाद उसमें से 1 घटाएं और उसके बाद योग में 8 का भाग दीजिए। भाग देने के बाद जो शेष बचेगा उसका फल इस प्रकार से है: यदि 1 बचे तो उस साल आपकी आय और व्यय कम होता है। धन संचय भी होगा। यदि 2 बचे तो उस वर्ष आय व्यय बराबर रहता है। यदि 3 बचे तो उस वर्ष आय कम और व्यय अधिक होता है। व्यर्थ व्यय मन को खिन्न करता है। यदि 4 बचे तो आमदनी के मार्ग नए-नए खुलते हैं किंतु शारीरिक कष्ट/ रोगादि पर व्यय होता है। यदि 5 बचे तो आमदनी। बहुत कम होती है किंतु खर्च भी उसी अनुपात में सिमट जाते हैं। यदि 6 शेष बचे तो आमदनी नहीं के बराबर रहती है परिणामस्वरूप ऋण लेकर काम चलता है। यदि 7 बचे तो अकस्मात् सट्टे/ लाॅटरी द्वारा या अन्य अनियोजित मार्गों से बड़ी मात्रा में धन लाभ होता है। यदि 8 या 0 बचे तो आमदनी अच्छी होने के उत्साह में अनियोजित व्यय भी होता है। जैसे-जैसे कांत की राशि मिथुन होती है, इसमें लाभ 11 और व्यय 11 है। दोनों का योग 22 हुआ। इसमें 1 घटाने पर शेष 21 बचता है और इसमें 8 का भाग देने पर 5 शेष रहा। इस अंक फल के उपरोक्त विश्लेषण का निष्कर्ष है कि इस वर्ष आमदनी बहुत कम होगी और खर्च भी कम होंगे।


रत्न विशेषांक  जुलाई 2016

भूत, वर्तमान एवं भविष्य जानने की मनुष्य की उत्कण्ठा ने लोगों को सृष्टि के प्रारम्भ से ही आंदोलित किया है। जन्मकुण्डली के विश्लेषण के समय ज्योतिर्विद विभिन्न ग्रहों की स्थिति का आकलन करते हैं तथा वर्तमान दशा एवं गोचर के आधार पर यह निष्कर्ष निकालने का प्रयास करते हैं कि वर्तमान समय में कौन सा ग्रह ऐसा है जो अपने अशुभत्व के कारण सफलता में बाधाएं एवं समस्याएं उत्पन्न कर रहा है। ग्रहों के अशुभत्व के शमन के लिए तीन प्रकार की पद्धतियां- तंत्र, मंत्र एवं यंत्र विद्यमान हैं। प्रथम दो पद्धतियां आमजनों को थोड़ी मुश्किल प्रतीत होती हैं अतः वर्तमान समय में तीसरी पद्धति ही थोड़ी अधिक प्रचलित है। इसी तीसरी पद्धति के अन्तर्गत विभिन्न ग्रहों के रत्नों को धारण करना है। ये रत्न धारण करने के पश्चात् आश्चर्यजनक परिणाम देते हैं तथा मनुष्य को सुख, शान्ति एवं समृद्धि से ओत-प्रोत करते हैं। फ्यूचर समाचार के वर्तमान अंक में रत्नों से सम्बन्धित अनेक उत्कृष्ट एवं उल्लेखनीय आलेखों को सम्मिलित किया गया है जो रत्न से सम्बन्धित विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हैं।

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