कोहिनूर की यात्रा

कोहिनूर की यात्रा  

प्राचीन समय में भारत सोने की चिड़िया कहा जाता था। भारत की अकूत धन संपत्ति, स्वर्ण भंडार और संपन्नता ने विदेशी आक्रमणकारियों को अनेक बार अपनी ओर आकर्षित किया। पृथ्वी के गर्भ में न जाने कितने रत्न व उपरत्न छिपे हैं। भारतीय मान्यता के अनुसार चैरासी प्रकार के रत्न और अनेकों उपरत्न पाए जाते है। चैरासी रत्नों में हीरा, माणिक पन्ना, मोती मूंगा पुष्पराग (पुखराज) नीलम, गोमेद व वैदुर्य (केटस-आई) नवरत्न कहलाते हैं। इन नौ, रत्नों में माणिक पन्ना, मोती, हीरा व नीलम महारत्न है। लेकिन जितने भी रत्न उपरत्न है। उनमे हीरा सर्वोच्च है। इसकी चमक के आगे बाकी सब रत्नों की दमक फीकी है। हीरा सच में रत्नों का सम्राट है। यह अजेय और अमर है। इस दौलत में देश की कुछ धरोहरें ऐसी भी थीं जो अनमोल थीं। इन्हीं में से कुछ थे बेशकीमती हीरे। जिसमें भारत का गौरव कोहिनूर, दरिया-ए-नूर, रीजेंट हीरा, ओर्लोव हीरा, ब्रोलिटी ऑफ इंडिया, शाह डायमंड, आईडोल आई, ब्लू होप, ब्लैक ओर्लोव और ग्रेट मुगल हीरा। ये सभी हीरे भारत की शान थे जो आज विदेशों की शोभा बढ़ा रहे हैं। भारत का गौरव कोहिनूर कोहिनूर हीरा दुनिया का सबसे प्रसिद्ध हीरा है। दक्षिण भारत में कर्नाटक की गोलकुंडा की खानों से कोहिनूर का जन्म हुआ। इसके बचपन का नाम श्यामन्तिक मणि था जिसका अर्थ हीरों का नेता या युवराज था। फारस के राजा नादिरशाह ने इसे ‘‘कोहिनूर’’ नाम दिया। फारसी में इसका अर्थ “प्रकाश का पर्वत है। कोहिनूर हीरा आज तक पुरुषों के लिए अशुभ और मृत्यु का प्रतीक बना रहा है, जबकि महिलाओं के लिए खुशी और कामयाबी का कारण। बाबर के ”बाबर नामा” में भी इस हीरे का उल्लेख है। कोहिनूर की यात्रा - 1200 से 1300 के बीच म कोहिनूर बहुत से राजवंशों के पास था। - 1306 में इसे मालवा नरेश से काकतीय शासकों के द्वारा जबर्दस्ती अधिकार में लिया गया। - 1325-1351 में यह मोहम्मद-बिन-तुगलक के अधिकार में रहा। Ûऽ 1323 से 1526 तक मुस्लिम राजवंश जैसे-मंगोल, फारसी, तुर्की, अफगान में ही रहा। - 1526 में, इब्राहिम लोदी की हार के बाद इसे दोबारा मुगल साम्राज्य द्वारा प्राप्त कर लिया गया। - मुगल सम्राट शाहजहाँ के शासन काल में यह हीरा मयूर सिंहासन में लगा रहा। 1639 में यह हीरा औरंगजेब के स्वामित्व में रहा था। - 1739 में नादिर शाह ने मुगल साम्राज्य पर आक्रमण कर इसे अपने अधिकार में ले लिया। इस तरह यह फारस पहुंचा। कोहिनूर के अभिशाप के कारण, 1747 में नादिर शाह का साम्राज्य बहुत शीघ्र नष्ट हो गया। - 1800-1839 तक यह राजा रणजीत सिंह और इसके बाद उनके उत्तराधिकारियों के पास था। - कुछ समय बाद, ब्रिटेन ने भारत पर आक्रमण किया और 1858 से 1947 तक शासन किया। ब्रिटिश गर्वनर-जनरल, लॉर्ड डलहौजी, के द्वारा हीरे को ब्रिटिश शासन के द्वारा अपने अधिकार में ले लिया। - जब भारत के राजा के द्वारा कोहिनूर को महारानी को संधि के रुप में दिया गया तो वहां इसे फिर से तराशा गया और महारानी एलिजाबेथ के ताज में सजा दिया गया। कोहिनूर हीरे का मालिक कौन ? 1947, 1953 एवं 2000 में अभी तक भारत की सरकार, उड़ीसा का कांग्रेस मंत्रालय, रणजीत सिंह के कोषाध्याक्ष, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान आदि के द्वारा कोहिनूर को वापस लाने के अनेक दावे किए गए हैं। कई बार ब्रिटिश अधिकारियों के द्वारा इन दावों को सिरे से नकारा गया है। कोहिनूर भारत में मिला था और यह भारत से बाहर अवैध रुप से ले जाया गया था। अतः इसे भारत को वापस करना चाहिए। 1997 में, भारत की आजादी की 50वीं वर्षगाँठ के दौरान महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के भारत दौरे के समय भी इसे भारत वापस लाने की माँग की गई थी। नवम्बर 2015 में, भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के यू. के. दौरे के दौरान भारतीय मूल के ब्रिटिश सांसद ने कहा कि, विश्व प्रसिद्ध कोहिनूर हीरे को भारत को वापस कर देना चाहिए। यह भारत में उत्पन्न हुई सम्पत्ति है, जो देश को सम्मान के साथ वापस करनी चाहिए। कोहिनूर एक अभिशाप कहा जाता है कि यह हीरा अभिशापित है जिस कारण यह जिस किसी के भी पास जाता है उसे यह पूरी तरह से बर्बाद कर देता है। अनेक लोगांे ने, शक्तिशाली राजपरिवारांे ने इसे पाना चाहा लेकिन यह जिस किसी के भी पास गया उसे बर्बाद कर गया। कई ऐतिहासिक राजपरिवारांे के पतन के साथ भी इस हीरे का नाम जुड़ा है। - जब शाहजहाँ ने इसे अपने सिंहासन में जड़वाया तो कुछ ही समय बाद मुमताज की मौत हो गयी और खुद शाहजहाँ को भी जेल में डाल दिया गया। - नादिरशाह इसे अपने साथ अफगानिस्तान ले गया लेकिन वहां क्रूरता से उसकी हत्या कर दी गयी। - इसके बाद यह पहुंचा दुर्रानी शासकों के पास और इनके साथ भी वही हुआ तो पहले से अपेक्षित था, अर्थात इनका पूरा शासन परिवार समेत ही नष्ट हो गया। इसी क्रम में अनेक दुर्घटनाओं का कारण बनने के कारण इसके विषय में ऐसी मान्यताओं ने जन्म लिया कि शापित कोहिनूर हीरा केवल औरतों और संतों के लिए ही भाग्यशाली होगा। इसी मान्यता के चलते महारानी विक्टोरिया इस हीरे को ताज में जड़वा कर 1852 में स्वयं पहनती थीं जिसके बाद में महारानी विक्टोरिया एक वसीयत करती है कि इस ताज को सिर्फ महिला ही पहनेगी। यदि ब्रिटेन में कोई पुरुष राजा होगा, तो कोहिनूर के इस ताज को उसकी पत्नी पहनेगी। मगर तब भी कोहिनूर का शाप दूर नहीं हो सका इसी के चलते पूरे विश्व में अपनी सत्ता कायम करने वाले अंग्रेजी साम्राज्य का भी अंत हो गया।

रत्न विशेषांक  जुलाई 2016

भूत, वर्तमान एवं भविष्य जानने की मनुष्य की उत्कण्ठा ने लोगों को सृष्टि के प्रारम्भ से ही आंदोलित किया है। जन्मकुण्डली के विश्लेषण के समय ज्योतिर्विद विभिन्न ग्रहों की स्थिति का आकलन करते हैं तथा वर्तमान दशा एवं गोचर के आधार पर यह निष्कर्ष निकालने का प्रयास करते हैं कि वर्तमान समय में कौन सा ग्रह ऐसा है जो अपने अशुभत्व के कारण सफलता में बाधाएं एवं समस्याएं उत्पन्न कर रहा है। ग्रहों के अशुभत्व के शमन के लिए तीन प्रकार की पद्धतियां- तंत्र, मंत्र एवं यंत्र विद्यमान हैं। प्रथम दो पद्धतियां आमजनों को थोड़ी मुश्किल प्रतीत होती हैं अतः वर्तमान समय में तीसरी पद्धति ही थोड़ी अधिक प्रचलित है। इसी तीसरी पद्धति के अन्तर्गत विभिन्न ग्रहों के रत्नों को धारण करना है। ये रत्न धारण करने के पश्चात् आश्चर्यजनक परिणाम देते हैं तथा मनुष्य को सुख, शान्ति एवं समृद्धि से ओत-प्रोत करते हैं। फ्यूचर समाचार के वर्तमान अंक में रत्नों से सम्बन्धित अनेक उत्कृष्ट एवं उल्लेखनीय आलेखों को सम्मिलित किया गया है जो रत्न से सम्बन्धित विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हैं।

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