ज्योतिष द्वारा व्यवसाय का निर्धारण करना व जातक किस व्यवसाय से धन अर्जित करेगा इसके लिए ज्योतिष के विभिन्न सिद्धांतों व नियमों को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाता है जो देश, काल, परिस्थिति व पात्र पर निर्भर करता है। इस लेख में मुख्य रूप से वे कौन-कौन से ज्योतिषीय बिंदू हैं जो व्यवसाय निर्धारण को प्रभावित करते हैं उनका वर्णन किया गया है। यह लेख उन सभी के लिए लाभदायक है जो ज्योतिष सीख रहे हैं और जो ज्योतिष जानते हैं उनके लिए यह लेख एक पुनराभ्यास का कार्य करेगा और उन्हें करियर के क्षेत्र में फलादेश करने में सहायक सिद्ध होगा। ज्योतिष के माध्यम से यह अनुमान लगाना कि जातक किस प्रकार से धन व आजीविका अर्जन करेगा अति महत्वपूर्ण होता है। सर्वप्रथम देखें कि लग्न अथवा चंद्र से दशम भाव में कौन सा ग्रह स्थित है। यदि दशम भाव में सूर्य हो तो पैतृक संपत्ति प्राप्त होगी। चंद्रमा के दशमस्थ होने पर माता से धन की प्राप्ति होगी। मंगल के दशमस्थ होने पर शत्रुओं से धन प्राप्त होता है, बुध के दशम भाव में होने से मित्रों से, गुरु के दशमस्थ होने से भाइयों से तथा शुक्र के दशमस्थ होने पर स्त्रियों से व शनि के दशमस्थ होने से जातक के लिए नौकर चाकर अर्थात् व्यावसायिक संस्था के कर्मचारी धन कमाकर देते हैं। कुछ विद्वानों के मतानुसार सर्वप्रथम यह निर्णय करेंगे कि लग्न व चंद्र में से कौन बली है और जो बली हो उससे दशम भाव में बैठे ग्रह द्वारा धन के स्रोत का पता चलेगा। यदि दशम भाव में दो या अधिक ग्रह हों तो इन ग्रहों की दशा/ अंतर्दशा में ये ग्रह जिन वस्तुओं के कारक होते हैं उनके द्वारा धन आता है। यदि दशम में कोई ग्रह न हो तो सूर्य से दशमस्थ ग्रह से आजीविका विचार करें। यदि यहां भी कोई ग्रह न हो तो दशमेश के नवांशेश से धनागमन का विचार करें। - यदि दशमेश का नवांशेश सूर्य हो तो सुगंधित पदार्थ, इत्र, सोना, ऊन व दवाइयों के व्यापार से धन लाभ होता है। - यदि दशमेश का नवांशेश चंद्रमा हो तो मणि, मुक्ता, रत्न, कृषि उत्पाद या महिला के आश्रम से धन लाभ होता है। - दशमेश का नवांशेश मंगल हो तो उसे मिनरल, इस्पात, कम्पाउंड शास्त्रों, अग्नि संबंधी कार्यों से, पटाखों से, या रसोई अथवा इंजन परिचालन आदि अग्नि कार्य से संबंधित स्थल, साहसिक कार्यों से, शारीरिक क्षमता संबंधी कार्यों से धन लाभ हो। - यदि दशमेश का नवांशेश बुध हो तो लेखक, मैकेनिक, पेंटर, मूर्तिकार, शिल्पकार, कवि, गणितज्ञ, आर्किटेक्ट या इत्र आदि से धन लाभ होता है। - यदि दशमेश का नवांशेश गुरु हो तो ब्राह्मण, धर्म गुरु, पढ़े लिखे बुद्धिजीवी लोग, मंदिर, जन कल्याणकार्य, माइन, आॅपरेशन, मैन्युफैक्चरिंग, अनुशासनशीलता व तीर्थ यात्रा आदि से धन लाभ होता है। - जब दशमेश का नवांशेश शुक्र हो तो रत्न, धातु, गाय, भैंस आदि से। - जब दशमेश का नवांशेश शनि हो तो मजदूरी कार्य, बोझा उठाने, जल्लाद का कार्य करने अथवा ऐसे तुच्छ कार्यों के करने से धनार्जन होता है जो परिवार की परंपराओं के विपरीत होते हैं। उपरोक्त धनप्रदायक ग्रह जिस तरह की स्थिति में बैठा होता है वैसे ही प्रकार का धन स्रोत देता है जैसे यदि यह स्वगृही है तो जातक को अपने ही घर से धन प्राप्त होता है। शत्रु राशि में स्थित होने की स्थिति में शत्रु से धन प्राप्ति होती है। यदि यह ग्रह सूर्य हो व उच्चराशिस्थ या अन्यथा बली हो तो स्वयं के प्रयासों से धन प्राप्त करता है क्योंकि सूर्य मंगल की राशि मेष में उच्चराशिस्थ होता है। यदि सभी शुभ ग्रह बली होकर लग्न, द्वितीय का एकादश भावस्थ हो तो जातक विभिन्न स्रोतों से धन कमाता है। ऐसा जातक जिस किसी भी व्यापार में हाथ डालेगा निश्चित रूप से धन लाभ प्राप्त करने में सफल होगा। एक प्राचीन लेखक के मतानुसार यदि गुरु दशमस्थ हो तो जातक जन कल्याण के कार्यों से जुड़कर कीर्ति लाभ करता है और यदि शनि दशमस्थ हो तो गरीब व दबे कुचले वर्ग के लोगों के लिए कार्य करके मान सम्मान कमाता है। अधिक सटीक विश्लेषण करने के लिए यह देखना चाहिए कि आरूढ़ लग्न से दशम व कारकांश लग्न से दशम भाव में कौन सा ग्रह स्थित है और वहां पर किसकी दृष्टि है। ऋषि जैमिनी के मतानुसार यदि कारकांश से दशम भाव में बुध को छोड़कर कोई अन्य शुभ ग्रह स्थित हो तो ऐसा जातक इरादों का पक्का होता है या एक ऐसा धर्म गुरु बनता है जो अन्य लोगों के विवादों को निपटाता है। यदि कारकांश से दशम भाव पर केवल सूर्य या गुरु की दृष्टि हो तो ऐसा जातक गड़ेरिया हो सकता है अथवा मिल्क प्रोडक्ट्स का वितरण करता है। यदि कारकांश से छठे भाव में दो पाप ग्रह स्थित हों तो जातक कृषि कार्यों से लाभ उठाता है। यदि गुरु कारकांश लग्न से नवम भाव में हो तो भी जातक कृषि कार्यों से लाभ उठाता है। यदि सूर्य व शुक्र दोनों कारकांश लगन को देखें तो ऐसा जातक सरकारी नौकरी से लाभ प्राप्त करता है अथवा सरकार से उसके अच्छे संबंध होते हैं। यदि कारकांश लग्न से दशम भाव को बुध देखे अथवा वहां स्थित हो तो जातक सरकारी नौकरी करेगा। यदि शनि कारकांश लग्न में स्थित हो तो जातक किसी प्रसिद्ध व्यवसाय से जुड़कर आजीविकार्जन करेगा। यदि कारकांश लग्न का केतु केवल शुक्र ग्रह से दृष्ट होगा तो जातक धर्मोपदेशक होगा। यदि कारकांश लग्न बुध, चंद्र व शुक्र से दृष्ट हो तथा द्वितीयेश सप्तमस्थ हो तो जातक डाॅक्टर होता है। यदि कारकांश लग्न में सूर्य व राहु हों और ये सूर्य व राहु से संयुक्त हों तो जातक डाॅक्टर या वैद्य होगा जो विष का ईलाज करने में कुशल होता है। यदि कारकांश लग्न पर शुक्र व चंद्रमा की दृष्टि हो तो जातक रसायनशास्त्री होता है। करियर के क्षेत्र में शीघ्र उन्नति प्राप्त करने हेतु जन्मकुंडली में बली ग्रह योगों का होना आवश्यक है। - यदि लग्नेश, धनेश व लाभेश बली होकर केंद्र स्थान में स्थित हों तथा इनमें से एक ग्रह उच्च राशिस्थ हो तो ऐसा जातक अत्यधिक धनाढ्य व्यक्ति बनता है। - यदि लग्नेश लग्न भाव में ही स्थित हो तो जातक जीवन भर लक्ष्मी कृपा प्राप्त करता रहता है। - यदि द्वितीयेश, भाग्येश व लाभेश सभी ग्रह केंद्र स्थानों में स्थित हों। - यदि द्वितीयेश उच्चराशिस्थ हो तथा द्वितीय भाव में अनेक ग्रह स्थित हों । - यदि द्वितीयेश व लग्नेश में स्थान परिवर्तन योग हो। - यदि लग्नेश, द्वितीयेश, भाग्येश व लाभेश सभी उच्चराशिस्थ हों। - यदि मेष या वृश्चिक लग्न हो व मंगल, शुक्र, बुध व शनि सभी लग्न भाव में स्थित हों। - यदि धनु या मीन लग्न हो तथा गुरु, चंद्र व मंगल सभी लग्न भाव में हों। - यदि मंगल, शुक्र शनि व राहु में सभी कन्याराशिस्थ हों। - यदि द्वितीयेश बली हो व गुरु, चंद्र व सूर्य क्रमशः पंचम, नवम व तृतीय भाव में स्थित हों। - यदि मंगल स्वराशिस्थ, मूलत्रिकोण राशि या उच्चराशिस्थ होकर केंद्रस्थ हो। - यदि सभी ग्रह प्रथम, द्वितीय, पंचम, सप्तम, अष्टम, दशम व एकादश भाव में स्थित हों। आधुनिक काल में विभिन्न ग्रह निम्नांकित व्यवसायों के कारक माने जाते हैं- - सूर्य प्रशासन, सरकार व मेडिकल प्रोफेशन का कारक होता है। - चंद्रमा हाॅस्पिटैलिटी व पब्लिक रिलेशन का कारक है। - मंगल सेना, पुलिस व उद्योग से जुड़े व्यवसायों का कारक है। - बुध वित्तप्रबंधन, स्ट्रक्चरल डिजाईनिंग, लेखन कार्य व ज्योतिष का कारक है। - गुरु शिक्षा, कानून, परामर्शदाता, आध्यात्मिकता व वित्त प्रबंधन से जुड़े व्यवसायों से जोड़ता है। - शुक्र टेलीविजन, फिल्म उद्योग, पर्यटन, लाइफ सेविंग ड्रग्स, संगीत, नृत्य व लग्जूरियस आइटम के व्यापार आदि व्यवसायों से जोड़ता है। शनि उद्योग, नौकरी, श्रम कार्य, नेतागिरी, राजनीति व कूटनीतिक कार्यों से जोड़ता है। जन्मकुंडली केवल इतना संकेत देती है कि जातक किस व्यवसाय से जुड़ेगा। करियर में तरक्की के लिए जातक के दशाक्रम का अध्ययन करना होगा। करियर में उन्नति की सीमा जानने के विभिन्न सूत्र होते हैं। दशम भाव का बल व्यावसायिक क्षेत्र की उन्नति में सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यद्यपि नवम भाव का अध्ययन भी आवश्यक है क्योंकि जातक के भाग्य को जानने के लिए नवम भाव का महत्व अधिक है और जातक की प्रतिष्ठा के स्तर का अनुमान द्वितीय भाव से लगाया जाएगा। दशमांश कुंडली व्यवसाय में बड़ी सफलता की कारक कुंडली होती है। दशमांश कुंडली में जन्मकुंडली के दशमेश के बल की जांच अवश्य करनी चाहिए। करियर में उन्नति की दशाएं- 1. जन्मकुंडली के दशमेश की दशा। 2. दशमेश जिस भाव में बैठा उस भाव के स्वामी ग्रह की दशा 3. दशमांश कुंडली के लग्नेश की दशा। 4. दशमांश कुंडली के लग्न व दशम भाव में बैठे ग्रह की दशा। 5. उस ग्रह की दशा जो दशमांश में उच्चराशिस्थ हो। 6. दशम भाव व दशमेश पर दृष्टि डालने वाले ग्रह की दशा, दशमेश से युक्त ग्रह या दशमस्थ ग्रह की दशा। दशम भाव का स्वामी जहां बैठा है उस भाव के स्वामी के साथ बैठे या दृष्टि डालने वाले ग्रह की दशा। 7. सप्तमेश की दशा महत्वपूर्ण गोचर-- गुरु व शनि का संयुक्त गोचरीय प्रभाव, दृष्टि या उपस्थिति लग्न या चंद्रमा से निम्न भावों या ग्रहों पर पड़ता हो- 1. दशम भाव 2. दशमेश 3. सप्तम भाव 4. सप्तमेश यदि उपरोक्त चार में से दो पर प्रभाव पड़े तो निश्चित रूप से पदोन्नति का संकेत माना जाए।


दीपावली विशेषांक  अकतूबर 2014

फ्यूचर समाचार के दीपावली विशेषांक में सर्वोपयोगी लक्ष्मी पूजन विधि एवं दीपावली पर लक्ष्मी प्राप्ति के सरल उपाय, दीपावली एवं पंच पर्व, शुभ कर्म से बनाएं दीपावली को मंगलमय, अष्टलक्ष्मी, दीपावली स्वमं में है एक उपाय व प्रयोग आदि लेख सम्मलित हैं। शुभेष शर्मन जी का तन्त्र रहस्य और साधना में सफलता असफलता के कारण लेख भी द्रष्टव्य हैं। मासिक स्थायी स्तम्भ में ग्रह स्थिति एवं व्यापार, शेयर बाजार, ग्रह स्पष्ट, राहुकाल, पचांग, मुहूत्र्त ग्रह गोचर, राशिफल, ज्ञानसरिता आदि सभी हैं। सम्वत्सर-सूक्ष्म विवेचन ज्योतिष पे्रमियों के लिए विशेष ज्ञानवर्धक सम्पादकीय है। सामयिक चर्चा में ग्रहण और उसके प्रभाव पर चर्चा की गई है। ज्योतिषीय लेखों में आजीविका विचार, फलित विचार, लालकिताब व मकान सुख तथा सत्यकथा है। इसके अतिरिक्त अन्नप्राशन संस्कार, वास्तु प्रश्नोत्तरी, अदरक के गुण और पूर्व दिशा के बन्द होने के दुष्परिणामों का वर्णन किया गया है।

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