दीपावली स्वयं में है एक उपाय

दीपावली स्वयं में है एक उपाय  

त्यौहारों का मानव जीवन पर विशेष प्रभाव है। हर त्यौहार जीवन की आंतरिक और बाह्य परिस्थितियों की शुद्धि करता है और इसी के साथ-साथ सामाजिक क्षेत्र में भी सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करता है। जरा ध्यान से अध्ययन करें कि दीपावली के त्यौहार से हमारे जीवन में वास्तु और ग्रहों पर क्या सम्बंध हो सकता है। कुछ आचार्यों ने बतलाया है कि प्राचीन ऋषि और आचार्य यह चाहते थे कि आने वाले समय में हर व्यक्ति विशेष सुखी रहे, छोटे-छोटे वैज्ञानिक प्रभावों वाली बातों को भी उन्होंने भय के माध्यम से मानव जीवन में सुचारू करने का सोचा। उदाहरण् ातः वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में कैक्टस के पौधे नहीं होने चाहिए। इससे शारीरिक एवं मानसिक कष्ट की उत्पत्ति होगी। अब इसका अर्थ समझें कि कैक्टस का पौधा कैसे घर में शारीरिक और मानसिक कष्ट देगा। अगर घर में कांटे वाले पौधे होंगे और उसी घर में छोटे बच्चे भी हों न जाने कब ऐसी घटना घट जाए कि बच्चों को जाने अनजाने में कांटे वाले पौधे से कुछ नुकसान हो जाये या चोट लग जाये। तो, हो गया न शारीरिक कष्ट और माता पिता को मानसिक कष्ट। इसी प्रकार बड़े- बुजुर्गों के द्वारा सामान्य तौर पर कहा जाता है कि शाम के बाद घर में झाड़ू न लगायें धन हानि, आकस्मिक नुकसान होता है। अब इसे समझते हैं, पुराने समय में बिजली नहीं होती थी, कई-कई जगहों पर सिर्फ कभी-कभी उपलब्ध थी शाम के समय जब दिन ढल जाता था तो लालटेन आदि का इस्तेमाल होता था जिसकी रोशनी पर्याप्त नहीं थी। अब मान लें कि अंधेरे में वस्त्र बदलते समय या सोने के समय से उठने के समय तक कोई कीमती गहना या वस्तु झाडू लगाते समय घर से बाहर चली गई तो क्या होगा ? वही धन हानि एवं आकस्मिक नुकसान। इसी तरह दीपावली हिन्दू धर्म का सबसे बडा और खुशहाल त्यौहार है। सभी जन मां लक्ष्मी की कृपा के पात्र होकर समृद्ध होना चाहते हैं। प्राचीन समय से ही सभी लोगों में दीपावली से पहले घरों में रंगाई-पुताई, नया फर्नीचर आदि सामान लेने की प्रथा है। वास्तु के अनुसार किसी भी स्थान विशेष पर जब कोई वस्तु बहुत समय से सिर्फ पड़ी रहती है उसका इस्तेमाल नहीं होता या वह अपनी जगह से कभी बदलती नहीं है तो उसके आस-पास का औरा नकारात्मक होने लगता है और यही नकारात्मक ऊर्जा से उत्पन्न होते हैं वास्तु दोष। जब भी हम दीपावली पर रंगाई पुताई करते हैं तो घर का एक-एक सामान बाहर निकालते हैं, रंगाई के बाद फिर से घर के अंदर उसे स्थान देते हैं, पूरे घर के आंतरिक और बाह्य ऊर्जाओं का नवीनीकरण होता है। पुराना कबाड़, खराब इलेक्ट्राॅनिक सामान जो अनावश्यक घर में पड़े-पड़े वास्तु दोष दे रहा होता है। उसे निकालकर नया सामान घर में आ जाता है। ऊर्जा का बदलाव हमेशा मन में जीवन में खुशी देता है। हर त्यौहार इसी तरह हमारी जीवनशैली में एक विशेष उद्देश्य से अपनी उपस्थिति रखता है। आशा है सभी जन इस दीपावली पर अपने भवन को तो अच्छे से सजायेंगे ही, सकारात्मक बदलाव के लिए अपने मन और जीवन से भी बुराई, हिंसा आदि कूड़े को निकालकर प्रेम एवं अच्छाई का दीपक प्रकाशित करेंगे, जिसके फल स्वरूप मां लक्ष्मी की कृपा आप सब पर बिखरेगी।


दीपावली विशेषांक  अकतूबर 2014

फ्यूचर समाचार के दीपावली विशेषांक में सर्वोपयोगी लक्ष्मी पूजन विधि एवं दीपावली पर लक्ष्मी प्राप्ति के सरल उपाय, दीपावली एवं पंच पर्व, शुभ कर्म से बनाएं दीपावली को मंगलमय, अष्टलक्ष्मी, दीपावली स्वमं में है एक उपाय व प्रयोग आदि लेख सम्मलित हैं। शुभेष शर्मन जी का तन्त्र रहस्य और साधना में सफलता असफलता के कारण लेख भी द्रष्टव्य हैं। मासिक स्थायी स्तम्भ में ग्रह स्थिति एवं व्यापार, शेयर बाजार, ग्रह स्पष्ट, राहुकाल, पचांग, मुहूत्र्त ग्रह गोचर, राशिफल, ज्ञानसरिता आदि सभी हैं। सम्वत्सर-सूक्ष्म विवेचन ज्योतिष पे्रमियों के लिए विशेष ज्ञानवर्धक सम्पादकीय है। सामयिक चर्चा में ग्रहण और उसके प्रभाव पर चर्चा की गई है। ज्योतिषीय लेखों में आजीविका विचार, फलित विचार, लालकिताब व मकान सुख तथा सत्यकथा है। इसके अतिरिक्त अन्नप्राशन संस्कार, वास्तु प्रश्नोत्तरी, अदरक के गुण और पूर्व दिशा के बन्द होने के दुष्परिणामों का वर्णन किया गया है।

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