वास्तु का महत्व

वास्तु का महत्व  

- अभी फरवरी माह में पंडित जी दिल्ली के एक प्रमुख I.V.F क्लीनिक में वास्तु विजिट के लिये गये। लेडी डाॅइन्चार्ज का कहना था कि इस आधुनिक रूप से सुसज्जित नर्सिंग होम में सफलता का प्रतिशत बहुत अधिक है, परंतु फिर भी आशानुरूप लाभ नहीं हो पा रहा है। मालिक जो द्वितीय तल पर ही रहते हैं, उन्हंे अकारण भय बना रहता है। क्लीनिक/निवास भूतल व दो तलों में बना हुआ था, छत व समस्त भवन का विधिवत निरीक्षण करने के उपरांत फ्यूचर समाचार के प्रबुद्ध पाठकों/वास्तु सलाहकारों के लाभार्थ संक्षिप्त विश्लेषण प्रस्तुत है: - यह भवन पश्चिम मुखी है तथा पश्चिमी वायव्य में प्रवेश द्वार है। यह स्त्रियों व बच्चों से संबंधित कार्य के लिये सर्वोत्तम है। भूतल - पानी का झरना क्लिनिक के मुख्य प्रवेष की दीवार के साथ उत्तर दिषा में है। यह स्थान धन के प्रवाह के लिए आति उत्तम है। - लिफ्ट मध्य में नहीं है अतः स्वीकारात्मक है। - रिसेप्षन अथवा प्रतीक्षालय कक्ष में भगवान गणेष जी और लक्ष्मी जी की मूर्तियाँ उचित स्थान पर नहीं हैं क्योंकि दोनों मूर्तियाँ आवागमन के स्थान पर हैं और दक्षिणमुखी हैं। इस स्थिति के कारण भय और चिंताएं व्याप्त रहती हैं और धन का अभाव भी रहता है। इन्हें पूर्व या पश्चिम की दीवार पर लगाना चाहिये। - डाॅ. इन्चार्ज के कक्ष मंे पूजा का स्थान अति उत्तम है क्यांेकि वह ईषान कोण में है। परन्तु लक्ष्मी और गणेष जी की मूर्ति दक्षिणमुखी हैं एवं इन्हें वहाँ से हटा कर पूर्व मुखी अथवा दक्षिण दिषा मंे रखें। - डाॅ. साहब के कमरे में मैरून रंग के फ्रेम में जड़ा हुआ पहाड़ का चित्र कुर्सी के पीछे पष्चिम दीवार में ऊँचा करके लगाने से उनमें स्थिरता और षक्ति का विकास होगा। - वीर्य सैम्पल कक्ष में सिरहाना अभी उत्तर में है। इसे विपरीत दिशा में करें। - आई. यू. आई. लैब सही दिषा में है। - पूजा कक्ष भी सही है। - लेखा अधिकारी कक्ष और इंजेक्षन कक्ष भी सही स्थिति में है। - चैडे़ पत्तों के पौधे भले ही वो नकली हों या असली हों और सूखे फूल, पत्तियों को उठा कर अविलम्ब बाहर फेंक दें। यह तनाव व ग्राहकों की कमी उत्पन्न करते हैं। - दक्षिण-पश्चिम में कैन्टीन का होना तथा इसके मुख्य भवन से जुड़ाव के कारण यह हिस्सा नीचा होना हर समय मालिक को तनाव में रखता है। अतः इसको यहाँ से हटाना ही सर्वोत्तम है। प्रथम तल - इसमें कई अत्याधुनिक मशीनें ठीक तरह लगी थीं। सुधार का कोई सुझाव नहीं है। द्वितीय तल - सीढियाँ उत्तर के वायव्य भाग मंे स्थित हैं। सीढ़ियों का वायव्य भाग मंे स्थित होना ठीक है परन्तु उत्तर में होने के कारण व्यापार वृद्धि की गति कम हो जाती है। - ईषान कोण में स्थित एक टॅायलेट किसी भी स्थिति में मान्य नहीं है। इस कारण से अत्यधिक खर्चे व मानसिक अषान्ति होती है। इसके दुखःदायी परिणामों को कम करने हेतु इस टॅायलेट को इस स्थान से हटाना अति आवष्यक है। - दक्षिण दिषा में स्थित टाॅयलेट सही है। - सोते समय जिस कमरे में भी टेलीविजन लगा हो उसे मोटे कपड़े से ढंक दें। इससे आपका स्वास्थ्य और परिवार में सौहार्द्रता बनी रहेगी। षयन कक्ष की दक्षिण दीवार पर पर्वत का चित्र लगाने से स्वास्थ्य और आपसी सम्बन्धों में बहुत सुधार होता है। - लिविंग कक्ष में लकड़ी के बने हुए घोड़ांे के षोपीस को वहाँ से जल्द हटा दिया जाये जिससे यहां के निवासियों के मन से असुरक्षा और डर की भावना समाप्त हो सके। - ड्राईंग रूम के नैर्ऋत्य कोण में स्थित षीषे को हटा दें अथवा उसके प्रभाव को षून्य करने के लिए उसपर फिल्म/वॅाल पेपर/प्लाई आदि लगा दें, अन्यथा इसके दुष्प्रभाव के कारण मन में भ्रांतियां, पैरों में दर्द, खुशी, प्यार व उत्साह में कमी रहेगी। - लिविंग रूम मंे ब्राउन अथवा मैरून कलर के फ्रेम में पहाड़ का जड़ा हुआ चित्र दक्षिण की दीवार पर लगायें, इससे विचारों मंे स्पष्टता और प्रेम में वृद्धि होगी। - सामान्य दिशा-निर्देश - घड़ी को पूर्व, उत्तर अथवा ईशान कोण की दीवारों पर लगायें। इससे आर्थिक स्थिति और सभी प्रकार के कार्यों में वृद्धि होगी। - ड्रेसिंग मिरर को सभी शयन कक्षों में उत्तर अथवा ईशान कोण की दीवार की तरफ लगाएं और ये इस प्रकार लगे होने चाहिए कि मिरर और बेड आमने-सामने न हों। - आग्नेय कोण के कटे हुए काॅर्नर को व्यवस्थित करने के लिए लकड़ी के परगोले को वहां पर स्थापित करें, इससे नाम, प्रसिद्धि और बचत में वृद्धि होगी। - बिजली की अर्थिंग का उत्तरी क्षेत्र मंे होना ठीक है। नैर्ऋत्य कोण और दक्षिण दिशा में स्थित मुँह देखने वाले शीशे दक्षिण दिशा में प्रतिबिम्बों को परिमार्जित करते हैं, जो कि वास्तु सिद्धांतों के अन्तर्गत अति हानिकारक हैं। अतः सभी तलों में नैर्ऋत्य कोण और दक्षिण दीवार पर लगे शीशे हटा देने चाहिए। इन प्रतिबिम्बों के कारण कार्यों में देरी, प्रमुख निर्णय लेने में भ्रांतियाँ, पैरों में दर्द और खुशियांे में कमी होती है। - लिविंग क्षेत्र में मिरर व कन्सोल लगाना हो तो हल्का व वायु नीचे से जाने वाला, उत्तर की दीवार में लगाएं। - उत्तरी व वायव्य दिशा में कुछ खुली जगह होने से ये दिशायें कट गई हैं। बिल्डिंग को समचैरस/ आयताकार बनाने के लिये उस हिस्से में मेटल का जाल लगाना श्रेष्ठ है। इससे आय तथा आपसी संबंधांे में बहुत सुधार होगा। - छत पर ईशान कोण में स्थित स्टाफ रूम सही है। - दूसरा स्टाफ रूम जो कि आग्नेय कोण में है वह भी सही है। - मशीन रूम, दोनों टाॅयलेट और कवर्ड शाफ्ट भी दक्षिणी दिशा में मान्य हैं। - ईशान कोण में हर प्रकार का पड़ा हुआ कूड़ा और बिजली के सामान का कूड़ा उठाकर फिकवा देने से जीवन में शान्ति का निवास होगा। - उत्तर दिशा में स्थित भारी और ऊँचे ओवरहेड टैंक को हटा कर पश्चिमी दिशा में रख दंे, और इसके साथ ही दक्षिण दिशा मंे स्थित टाॅयलेट की छतों की ऊँचाई ममटी से ऊँची कर दें। ऐसा करने से आपके व्यापार व परिवार में आशानुरूप वृद्धि होगी।


अंक ज्योतिष विशेषांक  जून 2015

फ्यूचर पाॅइंट के इस लोकप्रिय अंक विशेषांक में अंक ज्योतिष से सम्बन्धित लेख जैसे अंक ज्योतिष का उद्भव- विकास, महत्व और सार्थकता, गरिमा अंकशास्त्र की, अंक ज्योतिष एक परिचय, अंकों की विशेषताएं, अंक मेलापक: प्रेम सम्बन्ध व दाम्पत्य सुख, नाम बदलकर भाग्य बदलिए, कैसे हो आपका नाम, मोबाइल नम्बर, गाड़ी आपके लिये शुभ, मास्टर अंक, लक्ष्मी अंक भाग्य और धन का अंक, अंक फलित के तीन चक्र प्रेम, बुद्धि एवं धन, अंक शास्त्र की नजर में तलाक, कैसे जानें अपने वाहन का शुभ अंक इत्यादि शामिल किये गये हैं। इसके अतिरिक्त अन्य अनेक लेख जैसे अंक ज्योतिष द्वारा नामकरण कैसे करें, चमत्कारिक यंत्र, कर्मफल हेतुर्भ, फलित विचार, सत्य कथा, भागवत कथा, विचार गोष्ठी, पावन स्थल, वास्तु का महत्व, कुछ उपयोगी टोटके, ग्रह स्थिति एवं व्यापार आदि के साथ साथ व्रत, पर्व और त्यौहार आदि के बारे में समुचित जानकारी दी गई है।

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