कारखाने या उद्योग में वास्तु का महत्व

कारखाने या उद्योग में वास्तु का महत्व  

व्यूस : 8389 | अकतूबर 2014
प्र. कारखाने या उद्योग का निर्माण वास्तु के नियमों के अनुरूप क्यों करना चाहिए ? उ.-कारखाने या उद्योग का निर्माण वास्तु के अनुसार रखने पर, लम्बे समय तक लाभदायक फल देता है जिसके फलस्वरूप समय-समय पर आने वाली कठिनाइयों का शीघ्रताशीघ्र सामाधान हो जाता है। इसके विपरीत जिस कारखाने या उद्योग का निर्माण वास्तु के नियमों के विरूद्व होता है उसमें नित्य नयी-नयी परेशानियों का सामना होते देखा गया है। अतः किसी भी औद्योगिक परिसर या कल कारखाने के समुचित विकास एवं विस्तार के लिए निर्माण वास्तु के नियमों के अनुसार करना चाहिए। प्र.- कारखाने या उद्योग के निर्माण के लिए किस तरह की भूमि का चयन करना चाहिए ? उ.-किसी भी फैक्ट्री या कल कारखाने के लिए सदैव जीवित भूमि का क्रय करना चाहिए। ऐसी भूमि जिस पर उगे वृक्ष आदि हरे भरे रहते हों तथा अन्न (अनाज) आदि की ऊपज भी उत्तम हो उसे जीवित भूखंड समझना चाहिए। इसके अतिरिक्त अन्य भूमि अर्थात् अनउपजाऊ एवं बंजर भूमि को मृत भूखंड मानना चाहिए तथा जिस भूमि में दीमक, हड्डी हो अथवा जो भूमि फटी हुई हो उसे कभी भी कल कारखाने के निर्माण हेतु प्रयोग नहीं करना चाहिए। अतः जिस मिट्टी में अच्छी पैदावार हो, पानी की उचित उपलब्धता हो, मिट्टी ठोस हो, वैज्ञानिक प्रयोगषालाओं के परीक्षण में वह मिट्टी स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद हो तथा जिस भूख्ंाड पर कल कारखाने का स्थायित्व हो सके वत्र्तमान समय में ऐसी भूमि का चयन करना लाभप्रद एवं षुभफलदायी होगा। भूखंड में किसी प्रकार शल्य दोष नहीं होना चाहिए तथा भूखंड के आस-पास श्मशान या कब्रिस्तान नहीं होना चाहिए। ्र. औद्योगिक भूखंड की चारदीवारी किस तरह का होना चाहिए ? उ.-औद्योगिक भूखंड के दक्षिण और पश्चिम तरफ की चारदीवारी कंक्रीट एवं पत्थर के बने होने चाहिए। उत्तर एवं पूर्व के ओर की चारदीवारी कंटीले तार से भी बनाई जा सकती है। इसका मुख्य कारण उत्तर एवं पूर्व क्षेत्र को हल्का एवं खुला हुआ रखना है क्योंकि ईशान्य क्षेत्र को अवरूद्व या बंद रखने से कल कारखाने की प्रगति एवं समृद्धि रूक जाती है। आर्थिक स्थिति भी खराब हो जाती है। प्र. औद्योगिक परिसर के जमीन एवं छत की ढाल किस तरफ की रखनी चाहिए ? उ.-फैक्ट्री की जमीन की ढाल हमेशा उत्तर या पूर्व की ओर रखें। इसी तरह औद्योगिक इकाइयों की मुख्य फैक्ट्री के भवन जहां उत्पादन होता है, के छत का झुकाव भी उत्तर और पूर्व में रखना श्रेष्ठ होता है। खासकर बडे़ उपक्रम में मुख्य फैक्ट्री के ऊपर टीन का शेड लगा हुआ होता है और उनका झुकाव (ढाल) दोनों तरफ होता है। यदि छत की ढाल केवल पश्चिम की तरफ हो तो ऐसी इकाइयां निरंतर लाभ में नहीं रहती है अर्थात घाटे में रहती हंै। अतः इसके दोष निवारण के लिए उसके टीन के शेड का झुकाव दो तरफा बना लेना चाहिए या परिवर्तन के उपरांत ढलान पूर्व या उत्तर में रहे तो दोष का निवारण हो जाता है। प्र.-औद्योगिक परिसर के अन्दर काम करने वाले मजदूरों के लिए कमरा किस ओर बनाना चाहिए ? उ.- फैक्ट्री या उद्योग में काम करने वाले कर्मचारी एवं मजदूरों के लिए कमरा हमेशा वायव्य क्षेत्र में बनाना चाहिए। कर्मचारियों का यह निवास स्थान पूर्व या उत्तर की दीवार से जुड़ा हुआ नहीं होना चाहिए तथा कमरे की ऊँचाई मुख्य भवन की ऊँचाई से कम रखनी चाहिए। अन्यथा कर्मचारी, मजदूर या आॅफिसर्स मालिक की बात नहीं मानेंगे। गार्ड या वाॅचमैन के लिए कमरा दक्षिण-पूर्व या उत्तर-पश्चिम की तरफ उत्तर एवं पूर्व दीवारों से कम से कम 3 फीट अलग हटकर बनायें। प्र.-किसी भी औद्योगिक परिसर में सेप्टिक टैंक एवं शौचालय किस स्थान पर बनाना चाहिए ? उ.-किसी भी औद्योगिक परिसर में सेप्टिक टैंक भूखंड के ईशान्य क्षेत्र , नैर्ऋत्य क्षेत्र, आग्नेय क्षेत्र और मध्य स्थान की ओर नहीं बनाएं। औद्योगिक परिसर के मध्य, ईशान्य और नैर्ऋत्य में सेप्टिक टैंक पूर्णतः वर्जित है। यह पूरी व्यवस्था को छिन्न-भिन्न कर डालता है। प्रगति अवरूद्ध हो जाती हैै। औद्योगिक परिसर में सेप्टिक टैंक वायव्य क्षेत्र में बनाना लाभप्रद होता है। शौचालय भूखंड या भवन के उत्तरी वायव्य एवं पश्चिमी वायव्य की तरफ बनाना चाहिए। दूसरी प्राथमिकता नैर्ऋत्य एवं दक्षिण के मध्य का क्षेत्र है। इस स्थान पर भी शौचालय बनाया जा सकता है। प्र.-औद्योगिक परिसर में स्नानागार के लिए सबसे उपयुक्त कौन सी दिशा है ? उ.-औद्योगिक परिसर में स्नानागार के लिए सबसे उपयुक्त स्थान पूर्व दिशा है। स्नानागार को सीढ़ियों के नीचे नहीं बनाना चाहिए। सीढियां बुध ग्रह के अंतर्गत आता है जबकि स्नानागार में जल के अधिक उपयोग होने के कारण चंद्रमा के आधिपत्य में आता है। बुध ग्रह से चंद्र ग्रह का शत्रुवत संबंध होने के कारण सीढ़ी के नीचे भूलकर भी स्नानागार नहीं बनाना चाहिए। स्नानागार के जमीन की ढाल उत्तर-पूर्व में रखें। फर्श से निकलने वाला पानी हर हालत में उŸार-पूर्व, पूर्व या उŸार से बहते हुए निकलना चाहिए। नल, झरना आदि उŸार या पूर्व में रखें। प्र.-औद्योगिक परिसर में कच्चे माल एवं मशीन को किस तरह रखना चाहिए ? उ.-फैक्ट्री के मुख्य परिसर में कच्चे माल का प्रवेश अग्नि कोण से और तैयार उत्पाद की निकासी उत्तर या ईशान्य की तरफ से रखना श्रेष्ठ होता है। अतः फैक्ट्री की बनावट इस प्रकार हो कि कच्चा माल अग्निकोण की तरफ से प्रवेश करे और उसकी प्रोसेसिंग मूल पश्चिम क्षेत्र में हो। इस तरह कच्चा माल उत्तरोत्तर तैयार माल बनकर वायव्य के क्षेत्र में भंडारण होते हुए वितरण के लिए उत्तर या ईशान्य क्षेत्र से फैक्ट्री से बाहर ले जाना उत्तम होता है। मशीनें जो ज्यादा स्थान घेरे और वजन में भारी हो उन्हे नैर्ऋत्य से मूल दक्षिण और नैर्ऋत्य से मूल पश्चिम की तरफ स्थापित करना चाहिए। यदि भारी मशीनों की शृंखला हो तो नैर्ऋत्य से वायव्य की तरफ स्थापित की जा सकती है। हल्की या हाथ से संचालित होने वाली मशीनें मूल उत्तर, पूर्व या आग्नेय क्षेत्र में स्थापित की जा सकती हैं। मशीनांे को इस तरह से स्थापित करना चाहिए कि प्रयोग में लाने वाले श्रमिकों के चेहरे उत्तर या पूर्व की तरफ रहें।

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दीपावली विशेषांक  अकतूबर 2014

फ्यूचर समाचार के दीपावली विशेषांक में सर्वोपयोगी लक्ष्मी पूजन विधि एवं दीपावली पर लक्ष्मी प्राप्ति के सरल उपाय, दीपावली एवं पंच पर्व, शुभ कर्म से बनाएं दीपावली को मंगलमय, अष्टलक्ष्मी, दीपावली स्वमं में है एक उपाय व प्रयोग आदि लेख सम्मलित हैं। शुभेष शर्मन जी का तन्त्र रहस्य और साधना में सफलता असफलता के कारण लेख भी द्रष्टव्य हैं। मासिक स्थायी स्तम्भ में ग्रह स्थिति एवं व्यापार, शेयर बाजार, ग्रह स्पष्ट, राहुकाल, पचांग, मुहूत्र्त ग्रह गोचर, राशिफल, ज्ञानसरिता आदि सभी हैं। सम्वत्सर-सूक्ष्म विवेचन ज्योतिष पे्रमियों के लिए विशेष ज्ञानवर्धक सम्पादकीय है। सामयिक चर्चा में ग्रहण और उसके प्रभाव पर चर्चा की गई है। ज्योतिषीय लेखों में आजीविका विचार, फलित विचार, लालकिताब व मकान सुख तथा सत्यकथा है। इसके अतिरिक्त अन्नप्राशन संस्कार, वास्तु प्रश्नोत्तरी, अदरक के गुण और पूर्व दिशा के बन्द होने के दुष्परिणामों का वर्णन किया गया है।

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