पर्यावरण वास्तु

पर्यावरण वास्तु  

व्यूस : 8783 | अप्रैल 2013

पर्यावरण को ठीक रखने के लिए घर के आस पास पेड़ पौधां का होना आवश्यक है। कौन सा पौधा हमारे जीवन के लिए उपयोगी है और कौन सा पौधा लगाने से वास्तु दोष ठीक किया जा सकता है। इसकी जानकारी के लिए कुछ तथ्य यहां प्रस्तुत हैं: अषोक वृक्ष का वास्तु में महत्वः-इस वृक्ष को घर के उत्तर में लगाना विषेष षुभ होता है। इसे घर में लगाने से घर में लगे हुए अन्य अषुभ वृक्षों का दोष समाप्त होता है। केले का वास्तु में महत्व:- घर की चारदीवारी में केले का वृक्ष षुभ होता है। यह वृक्ष ईषान क्षेत्र में अत्यधिक शुभ होता है। केले के पास ही तुलसी का पौधा हो तो यह और अधिक षुभ फल देने वाला होता है।

ईषान क्षेत्र में लगे हुए केले के पौधे के नीचे अध्ययन करने से वह अध्ययन व्यर्थ नहीं जाता है। आक (ष्वेतार्क):- ष्वेतार्क का पौधा दूध ;स्ंजमगद्ध वाला होता है। वास्तु सिद्धांत के अनुसार दूध से युक्त पौधों का घर की सीमा में होना अषुभ होता है। किंतु आर्क इसका अपवाद है। श्वेतार्क का पौधा रोपं नहीं बल्कि यदि वह गृह सीमा में स्वतः उग आए तो इसे निकालने की बजाय हल्दी, अक्षत और जल से इसकी सेवा करें। ऐसा करने से इस पौधे की बरकत से उस घर के रहने वालों को सुख षांति प्राप्त होती है। ऐसी भी मान्यता है कि जिसके घर के समीप ष्वेतार्क का पौधा फलता फूलता है वहां सदैव बरकत बनी रहती है।

उस भूमि मंे गुप्त धन होता है। कमल का वास्तु मं महत्व:- घर के ईषान क्षेत्र में, मूल कोण को छोड़कर एक छोटा सा तालाब बनाकर उसमें कमल का पोषण करने से उस घर में लक्ष्मी का वास होता है और ईष्वर की कृपा से अमन-चैन बना रहता है। आंवला:-वास्तु की दृष्टि से आंवले के वृक्ष का घर की सीमा में होना षुभ होता है। इस वृक्ष को लगाने से अषुभ वृक्षों का अषुभ फल भी नष्ट होता है। नीम:- घर के वायव्य कोण में नीम के वृक्ष का होना अति षुभ होता है। इस प्रकार जो व्यक्ति नीम के सात पेड़ लगाता है उसे मृत्योपरांत षिवलोक की प्राप्ति होती है। जो व्यक्ति नीम के तीन पेड़ लगाता है वह सैकड़ों वर्षों तक सूर्य लोक में सुखों का भोग करता है।

आम:- वास्तु की दृष्टि से आम का वृक्ष घर की सीमा में षुभ नहीं माना गया है। फिर भी यदि यह हो तो इसे काटना नहीं चाहिए बल्कि नित्य इसकी जड़ों में काले तिल डाल कर जल चढ़ाना चाहिए। साथ ही घर की सीमा में ही निर्गुंडी का एक पौधा लगा देना चाहिए। ऐसा करने से इसका अषुभत्व समाप्त हो जाता है। हल्दी:-इसका घर की सीमा में होना अषुभ होता है। षास्त्रों में यहां तक कहा गया है कि स्वतः उत्पन्न हुए हल्दी के पौधों को भी घर की सीमा में नहीं होना चाहिए। बरगद:- वास्तु की दृष्टि से यह एक और महत्वपूर्ण वृक्ष है। किसी भी भवन अथवा प्रतिष्ठान के पूर्व में वट वृक्ष का होना अत्यंत षुभ होता है सारी कामनाएं पूरी करता है।

परंतु भवन पर इसकी छाया नहीं पड़नी चाहिए। वट वृक्ष का घर या प्रतिष्ठान के पष्चिम की तरफ होना अषुभ कहा गया है। सीता फल:-सीता फल के पौधे का घर की सीमा में होना षुभ नहीं होता किंतु यदि यह घर की सीमा में उग आए तो इसे काटें नहीं बल्कि घर की सीमा में ही एक आंवले का एवं एक फल देने वाले अनार का पौधा लगा दें, इससे इसका अषुभत्व नष्ट हो जाता है। जामुन:- वास्तु की दृष्टि से जामुन के वृक्ष का घर की सीमा के दक्षिण में होना षुभ कहा गया है। अन्य दिषाओं में इसका होना सम फलदायी होता है। घर के उत्तर में जामुन वृक्ष होने से उसके साथ एक अनार अथवा आंवला भी अवष्य लगाएं। बिल्व:- बेल के वृक्ष का घर की सीमा में होना अति षुभ होता है।

भगवान षिवजी का परम प्रिय बेल का वृक्ष जिस घर में होता है वहां धन संपदा की देवी लक्ष्मी पीढ़ियों तक वास करती हैं। पलाषः- वास्तु की दृष्टि से पलाष के वृक्ष का घर की सीमा में होना अषुभ होता है। गुलाब:- वास्तु में षूल वाले पौधे का घर में होना अषुभ माना गया है। किंतु गुलाब का पौधा अशुभ नहीं होता। घर में बेलिया गुलाब अर्थात् ऐसा गुलाब जो बेल के रूप में होता है, का होना षुभ नहीं होता है। षुभ वृक्ष:- घर की सीमा में अषोक, मौलश्री, षमी, चंपा, अनार, सुपारी, कटहल, केतकी, मालती, कमल, चमेली, नारियल, केला आदि के वृक्ष होने से घर मंे लक्ष्मी का विस्तार होता है। और उनकी कृपा बनी रहती है।

घर के अंदर अथवा भूखंड की सीमा में कहीं भी ऊपर बढ़ने वाली लता षुभ होती है। इसी प्रकार यदि घर में कोई मनी प्लांट हो तो उसका आरोहण षुभ होता है। अषुभ वृक्ष:- घर में कांटे या दूध वाले वृक्ष से स्त्री और संतान की हानि होती है। परंतु गुलाब पर यह नियम लागू नहीं होता है। अषुभ वृक्ष को काटना संभव न हो तो उसके समीप अन्य षुभदायक वृक्षों को लगा देने से उसका दोष दूर हो जाता है। परंतु यह नियम कांटेदार कैक्टस के पौधों पर लागू नहीं होता है।

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