प्रश्न- पिरामिड किसे कहते हैं? उत्तर- पिरामिड का षाब्दिक अर्थ होता है सूच्याकार पत्थर का खंभा। मिश्रवासियों के अनुसार पिरामिड दो षब्दों से बना है। पिरा (Pyra) एवं मिड (Mid) दोनों का सम्मिलित अर्थ होता है त्रिकोणाकार ऐसी वस्तु जिसके मध्य में अग्नि ऊर्जा के स्रोत का निर्माण होता है। पिरामिड के अंदर ऐसी सकारात्मक ऊर्जा का निरंतर प्रसार होता रहता है जो जड़ और चेतन दोनों प्रकार के वस्तुओं पर प्रभाव डालती हैं। प्रश्न- वास्तु में पिरामिड का निर्धारण किस तरह होता है ? उत्तर- पिरामिड का निर्धारण चुंबकीय दिशाओं के अनुसार करना चाहिए। इसकी कोई भी सतह पृथ्वी के उत्तर या दक्षिण धु्रव के समानांतर रखनी चाहिए। सही तरीके से इस्तेमाल नहीं करने पर लाभ के बजाय हानि की संभावना बनती है। इसे साफ-सुथरी, हवादार जगह पर रखें। इसके आसपास किसी तरह की गंदगी नहीं होनी चाहिए। इसे बिजली के तार एवं उपकरणों से दूर रखें परंतु कम्प्यूटर या कोई अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरण हो तो इसके ऊपर रखा जा सकता है। प्रश्न- किसी भी भूखंड के कोने कटे होने पर पिरामिड के द्वारा किस तरह उस भूखंड को ठीक किया जा सकता है? उत्तर-किसी भी व्यावसायिक एवं औद्योगिक भूखंड के कोनां का कटा होना वास्तु के दृष्टिकोण से अच्छा नहीं माना जाता है। खासकर उत्तर-पूर्व के कोने कट जाने से दुकान, फैक्ट्री, धन-दौलत एवं काम-काज आदि सभी बंद हो जाते हैं। भाग्य सो जाता है मालिक कर्ज एवं ऋण में डूब जाते हैं। लक्ष्मी रूठ जाती है। फलस्वरूप दरिद्रता का पूर्ण नियंत्रण उस स्थान पर हो जाता है। ऐसे स्थान पर लाख प्रयत्न के बावजूद व्यवसाय नहीं चल पाता है। उद्योग धंधे भी धीरे-धीरे बंदी के कगार पर चले जाते हं। इसे ठीक करने के लिए पिरामिड की दीवार बनाकर कोने में लगानी चाहिए। प्रश्न- किसी भी भूखंड के ठीक उत्तर-पूर्व की ओर शौचालय होने पर क्या करना चाहिए ? उत्तर-किसी भी व्यावसायिक परिसर के ठीक उत्तर-पूर्व की ओर शौचालय नहीं होना चाहिए अन्यथा आर्थिक विपन्नता घेरे रहती है। प्रयत्न के बावजूद आर्थिक विकास पूर्ण रूप से नहीं हो पाता है। अकस्मात् दुर्घटनाएं होती रहती हैं। कार्य करने वाले को मानसिक परेशानियां बनी रहती हैं। धीरे-धीरे उद्योग धंधे बंद होने लगते हैं। मान-सम्मान, यश, प्रतिष्ठा खत्म हो जाती है। मुसीबतें, संकट एवं आपदाएं पीछा नहीं छोड़तीं। अतः इसे ठीक करने लिए पिरामिड को इसकी बाहरी दीवार की ओर लगाना चाहिए। इससे इसके ऋणात्मक प्रभाव में कमी आएगी। प्रश्न-अनियमित आकार के भूखंड को किस तरह ऊर्जामय बनाना चाहिए। उत्तर-अनियमित आकार का भूखंड वास्तु के दृष्टिकोण से अच्छा नहीं होता है। इस तरह के भूखंड पर प्रयत्न के बावजूद प्रगति संतोषजनक ढंग से नहीं हो पाती। उद्योग धंधे सही ढंग से नहीं चल पाते। हमेशा कलह एवं बदहाली की स्थिति देखने को मिलती है। इसे ठीक रखने के लिए प्रत्येक कोने में एवं ब्रहा्र स्थान में पिरामिड लगाना लाभप्रद होता है।


पराविद्या विशेषांक  जुलाई 2013

फ्यूचर समाचार पत्रिका के पराविद्या विशेषांक में शिक्षा के क्षेत्र में सफलता/असफलता के योग, मानसिक वेदना, विवाह के लिए गुरु, शुक्र एवं मंगल का महत्व, ईश्वर एवं देवताओं के अवतार, वास्तु दोष व आत्महत्या, श्रीयंत्र का अध्यात्मिक स्वरूप, पितृमोक्ष धाम का महातीर्थ ब्रह्म कपाल, फलित ज्योतिष में मंगल की भूमिका, प्रेम का प्रतीक फिरोजा, स्त्री रोगों को ज्योतिष व वास्तु द्वारा आकलन, हृदय रोग के ज्योतिषीय कारण, क्या है पूजा में आरती का महत्व, राजयोग तथा विपरीत राजयोग, चातुर्मास का माहात्म्य इत्यादि रोचक व ज्ञानवर्धक आलेखों के अतिरिक्त दक्षिणामूर्ति स्तोत्र, अंक ज्योतिष के रहस्य, सीमा का वहम नामक सत्यकथा, अर्जुन की शक्ति उपासना नामक पौराणिक कथा, कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए लालकिताब के अचूक उपाय, भगवान श्री गणेश और उनका मूल मंत्र तथा जियोपैथिक स्ट्रेस व अन्य नकारात्मक ऊर्जाओं आदि विषयों पर भी विस्तृत रूप से चर्चा की गई है।

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