सिनेमा हाल, थियेटर या आडिटोरियम

सिनेमा हाल, थियेटर या आडिटोरियम  

व्यूस : 3266 | फ़रवरी 2013
सिनेमा हाल, थियेटर या आडिटोरियम आधुनिक समाज के लिए अतिमहत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थान है जहां पर विभिन्न उम्र के लोग एक साथ बैठकर मनोरंजन का लुत्फ उठाते हैं। इस स्थान को वास्तु सम्मत बनाने पर लोगों के लिए यह काफी उपयोगी हो जाता है। सिनेमा हाल, थियेटर या आडिटोरियम को शहर के दक्षिण-पूर्व क्षेत्र में बनाना लाभप्रद होता है क्योंकि दक्षिण-पूर्व दिशा का आधिपत्य शुक्र ग्रह को है, जो कला, मनोरंजन, चलचित्र, ड्रामा, संगीत, नृत्य एवं फिल्म अभिनय का स्वामी होता है। प्र0-सिनेमा हाल, थियेटर या आडिटोरियम के लिए किस तरह का भूखण्ड सर्वश्रेष्ठ होता है ? उ0-सिनेमा हाल, आडिटोरियम के लिए भूखंड आयताकार या वर्गाकार रखना चाहिए। वृत्ताकार, त्रिकोणाकार और अनियमित आकार के भूखंड का चुनाव नहीं करना चाहिए। आयताकार भूखंड में लम्बाई उत्तर-दक्षिण और चैड़ाई पूर्व-पश्चिम में रखना चाहिए। जिस भूखंड की मिट्टी ब्राह्मणी और वैश्य अर्थात् सफेद या हरा हो वह सिनेमा हाल के लिए अच्छा होता है। भूखंड के सतह की ढाल उत्तर और पूर्व की ओर रखना लाभप्रद होता है। भूखंड के चारों तरफ खुला रखना काफी अच्छा रहता है लेकिन उत्तर और पूर्व में दक्षिण-पश्चिम की अपेक्षा अध्क से अधिक खुला स्थान रखना चाहिए। प्र0-सिनेमा हाल , थियेटर या आडिटोरियम के लिए कौन सी दिशा श्रेष्ठ है ? उ0-ज्योतिषीय दृष्टिकोण से संगीत, नृत्य, गायन, ड्रामा एवं सिनेमा इत्यादि शुक्र ग्रह के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। शुक्र ग्रह, दक्षिण-पूर्व दिशा के अधिपति ग्रह हैं। अतः इस कारण शहर के दक्षिण-पूर्व दिशा या भूखंड के दक्षिण-पूर्व की ओर सिनेमा हाल, थियेटर या आडीटोरियम बनाना लाभप्रद होता है। प्र0-सिनेमा हाल में प्रयोग होने वाले स्क्रीन या आडिटोरियम के लिए मंच किस दिशा की ओर बनाना चाहिए। उ0-सिनेमा हाल में प्रयोग होने वाले स्क्रीन या आडिटोरियम के लिए मंच के लिए सबसे उपयुक्त स्थान उत्तर या पूर्व तथा दर्शकों को बैठने के लिए दक्षिण या पश्चिम की दिशा है। प्रोजेक्टर को दक्षिण या पश्चिम दिशा की ओर रखनी चाहिए। प्र0- सिनेमा हाल के विकास में स्वीमिंग पूल या पानी के फव्वारे की क्या भूमिका है ? उ0-सिनेमा हाल के ईशान्य क्षेत्र को खाली एवं खुला हुआ रखना चाहिए। इन स्थानों पर फव्वारा या तालाब का निर्माण समृद्धि के लिए मददगार होता है। पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी इन स्थान पर छोटे-छोटे पार्क या पानी की व्यवस्था का होना व्यावसायिक विकास के लिए लाभप्रद होता है। लक्ष्मी की असीम कृपा मिलने लगती है। फलस्वरूप आर्थिक स्थिति श्रेष्ठ हो जाती है। सिनेमा हाल का परिसर साफ-सुथरा एवं सुंदर रखना चाहिए। सुंदर एवं मनमोहक व्यवस्था दर्शकों को बार-बार आने के लिए आकर्षित करता है। प्र0- सिनेमा हाल, थियेटर या आडिटोरियम में कैंटीन किस दिशा में श्रेष्ठ होता है ? उ0-सिनेमा घर में कैंटीन दक्षिण-पूर्व या दक्षिण के क्षेत्र में बनाना चाहिए। आग्नेय दिषा का स्वामी शुक्र ग्रह है जो भगवती अन्नपूर्णा का प्रतिनिधि भी है। अतः इस स्थान पर कैंटीन का होना विशेष लाभप्रद होता है। किसी भी तरह का विद्युतीय उपकरण या सामग्री जैसे ट्रांसफार्मर, जेनरेटर के लिए दक्षिण-पूर्व का क्षेत्र सबसे उपयुक्त होता है। प्र0- सिनेमा हाल, थियेटर या आडिटोरियम में प्रबंध निदेशक या स्वामी को बैठने के लिए कौन सी दिशा श्रेष्ठ है ? उ0-कार्यालय स्वामी या मुख्य व्यक्ति को बैठने के लिए सबसे उपयुक्त स्थान कक्ष एवं कमरे के दक्षिण-पश्चिम की दिशा होती है। इस स्थान पर बैठकर कार्य करने से उचित निर्णय लेने की क्षमताओं एवं शक्तियों में वृद्धि होती है। मुख्य प्रबंधक या मालिक को या पूर्व में मुंह कर कार्य करना चाहिए। इससे कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। कार्यालय के स्वामी का कक्ष सबसे बड़ा अर्थात् अन्य कमरों से बड़ा होना चाहिए। प्र0: सिनेमा हाल, थियेटर या आडिटोरियम में शौचालय किस दिशा में श्रेष्ठ होता है ? उ0: सिनेमा हाल में शौचालय की व्यवस्था उत्तर-पश्चिम के अलावा दक्षिण-पूर्व तथा र्नैत्य और दक्षिण के बीच में बनाया जा सकता है। शौचालय को मध्य स्थान और ईशान्य क्षेत्र की ओर नहीं बनाएं अन्यथा प्रगति रूक जाएगी। शौचालय में सीट की व्यवस्था पश्चिमी वायव्य या दक्षिण में रखें। यथासंभव सीट को उत्तर-दक्षिण अक्ष पर रखें।

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नक्षत्र विशेषांक  फ़रवरी 2013

फ्यूचर समाचार पत्रिका के नक्षत्र विशेषांक में नक्षत्र, नक्षत्र का ज्योतिषीय विवरण, नक्षत्र राशियां और ग्रहों का परस्पर संबंध, नक्षत्रों का महत्व, योगों में नक्षत्रों की भूमिका, नक्षत्र के द्वारा जन्मफल, नक्षत्रों से आजीविका चयन और बीमारी का अनुमान, गंडमूल संज्ञक नक्षत्र आदि ज्ञानवर्धक आलेख सम्मिलित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त हिंदू मान्यताओं का वैज्ञानिक आधार, वास्तु परामर्श, वास्तु प्रश्नोतरी, यंत्र समीक्षा/मंत्र ज्ञान, गुण जेनेटिक कोड की तरह है, दामिनी का भारत, तारापीठ, महाकुंभ का महात्म्य, लालकिताब के टोटके, लघु कथाएं, जसपाल भट्टी की जीवनकथा, बच्चों को सफल बनाने के सूत्र, अंक ज्योतिष के रहस्य, मन का कैंसर और उपचार व हस्तरेखा आदि विषयों पर गहन चर्चा की गई है। विचारगोष्ठी में वास्तु एवं ज्योतिष नामक विषय पर चर्चा अत्यंत रोचक है।

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