व्यावसायिक स्थल का वास्तु में महत्व

व्यावसायिक स्थल का वास्तु में महत्व  

प्र.- किसी भी व्यावसायिक कार्य के निर्माण हेतु किस तरह का भूखंड लाभप्रद होता है? उत्तर-व्यावसायिक कार्य करने के लिए आयताकार या वर्गाकार भूखंड सर्वश्रेष्ठ होता है। आयताकार भूखंड को 1:2 अनुपात से अधिक नहीं रखना चाहिए। भूखंड के दक्षिण-पश्चिम भाग की सतह ऊँची होनी चाहिए। दक्षिण-पश्चिम में निर्माण कार्य अधिक से अधिक करना चाहिए। उत्तर-पूर्व भाग की सतह नीची और अधिक से अधिक खुली रखनी चाहिए क्योंकि इनके खुला रखने तथा उत्तर-पूर्व की ओर ढलान होने से लक्ष्मी की स्वतः वृद्धि होती है। ईश्वर, गंगा और लक्ष्मी उत्तर-पूर्व में निवास करते हैं। अतः यह स्थल नीचा, खुला, पानी भरा हो तो कार्य करने वाले लोग धनाढ्य होते हैं तथा बडे़ से बड़ा सुख भोगते हैं। थोड़ी सी मेहनत करने पर ज्यादा से ज्यादा सफलता मिलती है और भाग्य को जगा कर सौभाग्यशाली बना देता है। व्यवसायी लोग अपने व्यवसाय, कारखाने या उद्योगों के उत्तर-पूर्व में पानी का अंडरग्राउंड टैंक, तालाब, स्वीमिंग पुल बनाकर अपने डूबते व्यवसाय को चार चांद लगा सकते हैं। ऐसा करने पर कर्ज, मुकदमे आदि की समस्या का शीघ्र ही समाधान हो जाता है। उत्तर-पश्चिम से लेकर उत्तर-पूर्व तक किसी तरह का निर्माण भूलकर भी नहीं करना चाहिए अन्यथा धन-दौलत, काम-काज, दुकान, फैक्ट्री सभी बंद हो जाते हैं। सभी जगह बंधन लग जाता है। साझेदार, मित्र और रिश्तेदारों से संबंध खराब हो जाता है। मुकदमे आदि की वृद्धि हो जाती है। इसे ठीक करने के लिए उत्तर-पश्चिम से उत्तर-पूर्व में अधिक से अधिक खाली जगह, पानी एवं आने-जाने का रास्ता रखना है। इससे महादरिद्रता एवं महापातकी में सुधार होता है। व्यावसायिक स्थल के दक्षिण-पश्चिम की सतह या चारदीवारी ऊँचा रखने से धन एवं आवक अच्छी रहती है। प्र. व्यावसायिक स्थल या दुकान का द्वार किस तरफ खुलना चाहिए ? उ.-किसी भी दुकान का दरवाजा हमेशा अंदर की ओर खुलना चाहिए। ऐसा होने से लक्ष्मी एवं संपन्नता दुकान में प्रवेश करती है साथ ही दुकान का प्रवेश द्वार संकरा न होकर चैड़ा होना चाहिए इससे दुकान की संपन्नता एवं आवक बढ़ती है। प्र. व्यावसायिक स्थल या दुकान का द्वार किस तरफ का होना चाहिए ? उ.-दुकान या व्यावसायिक स्थल का प्रवेश द्वार साफ-सुथरा, आकर्षक एवं पर्याप्त प्रकाशमय रहना चाहिए। दुकान के पूर्व या उत्तर में सड़क का होना तथा प्रवेश उत्तर या पूर्व से रहे तो काफी समृद्धि मिलती है। कारोबार का आवक काफी अच्छा रहता है। मुख्य द्वार पर गंदे पानी का नाला या कीचड़ न रखें। खासकर दक्षिण एवं पश्चिम दिशा में गंदे पानी का जमाव नहीं होना चाहिए अन्यथा यह दुकान की संपन्नता को रोककर मालिक को कर्जदार बना देता है। प्रवेश द्वार के ठीक सामने वेध करते हुए किसी भी तरह का खंभा या विज्ञापन बोर्ड आदि नहीं लगाना चाहिए। इसे प्रवेश द्वार के दोनों ओर लगाना चाहिए। प्र.-व्यावसायिक स्थल या दुकान के छत का ढलान किस ओर का रखना लाभप्रद होता है ? उ.-दुकान के छत की ढलान उत्तर, पूर्व या ईशान्य दिशा में होनी चाहिए। बरसात के पानी का निष्कासन भी ईशान्य एवं पूर्व दिशा से रखनी चाहिए। दुकान की छत एकतरफा खासकर दक्षिण और पश्चिम की ओर झुकी हुई ठीक नहीं होती। छत का अत्यधिक झुकाव दुकान की लक्ष्मी को बाहर धकेल देता है। प्र.-दक्षिण-पश्चिम के तहखाना या गड्ढे में दुकान क्या फल देता है ? उ.-दुकान को तहखाना या खड्डे में नहीं होना चाहिए। यह व्यावसायिक स्थल के विकास को रोक देता है। दुकान में आवक कम होने लगती है। मालिक विभिन्न प्रकार की समस्याओं से ग्रस्त होकर कर्जदार बन जाता है। सभी जगह बंधन लग जाता है। साझेदार, मित्र और रिश्तेदारों से संबंध खराब हो जाता है। मुकदमे आदि की वृद्धि हो जाती है। महादरिद्रता एवं महापातकी का साम्राज्य कायम होने लगता है। प्र.-विभिन्न मार्गों पर स्थित भूखंड के दुकान में मालिक को किस स्थान पर बैठना लाभप्रद होता है ? उ.- पूर्व मार्गों पर स्थित भूखंड के दुकान में मालिक या व्यवस्थापक को दक्षिण दिशा की ओर उत्तर की तरफ चेहरा कर बैठना चाहिए। दरवाजे के ठीक सामने बैठना शुभ नहीं होता। दरवाजे से थोड़ा कोणीय आकार लेते हुए मेज-कुर्सी लगायंे। इसी तरह दक्षिण मार्गों पर स्थित भूखंड में दक्षिण-पश्चिम में पूर्व की ओर चेहरा कर बैठ सकते हैं। मालिक या व्यवस्थापक को अपनी जगह से सारी दुकान का प्रत्येक कोना नजर आना चाहिए। प्रवेश द्वार भी दिखाई देना चाहिए। खंभांे और स्तंभों में तीक्ष्ण कोना नहीं रखना चाहिए। यदि हो तो इसे ढँक कर रखें। बिजली और टेलीफोन के तार ढँके होने चाहिए। प्रकाश समान रूप से सारे दुकान में फैला हुआ होना चाहिए। प्र.-दुकान या व्यावसायिक स्थल में कैश काउन्टर किस स्थान पर रखना लाभप्रद होता है ? उ.-साधारणतः छोटी दुकान में कैश बाॅक्स या कैश काउंटर व्यवस्थापक या मालिक के बिल्कुल पास होता है जबकि बड़ी दुकान या व्यावसायिक स्थल मंे इसके लिए अलग से काउंटर बनाया जाता है। कैश काउंटर का आकार वर्गाकार या आयताकार होना अच्छा होता है। कैश काउंटर की व्यवस्था व्यावसायिक स्थल के मूल रूप से उत्तर दिशा से ईशान्य तक कहीं भी बनाया जा सकता है। मध्य उत्तर धन के देवता कुबेर का स्थान है अतः यह स्थान कैश काउंटर के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है। दुकान में खजांची के प्रवेश करने पर काउंटर को दाहिने ओर होना शुभ फलदायक माना जाता है। कैश काउंटर को दूसरे अन्य काउंटर की अपेक्षा कुछ ऊंचा रखना चाहिए। यदि ऐसा संभव न हो तो अन्य काउंटर के समकक्ष भी रखा जा सकता है परंतु नीचा रखना शुभ फलदायक नहीं होता। कैश बाॅक्स को खोलते या बंद करते समय किसी तरह की कर्कश या तेज आवाज नहीं होनी चाहिए।


पितृ ऋण एवं संतान विशेषांक  सितम्बर 2014

फ्यूचर समाचार के पितृ ऋण एवं संतान विषेषांक में अत्यधिक ज्ञानवर्धक व जनहितकारी लेख जैसे- पितृ दोष अथवा पितृ ऋण परिचय, श्राद्ध कर्मः कब, क्यों और कैसे?, पितृदोष सम्बन्धी अषुभ योग एवं उनके निवारण के उपाय, संतान हीनताः कारण और निवारण, टेस्ट ट्यूब बेबीः एक ज्योतिषीय अध्ययन तथा ज्योतिष एवं महिलाएं आदि सम्मलित किये गये हैं। इसके अतिरिक्त पाठकों व कर्मकाण्ड के विद्वानों के लिए संक्षिप्त तर्पण तथा श्राद्ध विधि की सटीक व्याख्या की गई है। फलकथन के अन्तर्गत कुण्डली व संतान संख्या, इन्फर्टिलिटी, करियर परिचर्चा, सत्य कथा, पंचपक्षी के रहस्य, आदि लेख पत्रिका की शोभा बढ़ा रहे हैं। संतान प्राप्ति के अचूक उपाय, हिमालय की संतानोत्पादक जड़ीबूटियां, शाबर मंत्र, भागवत कथा, नक्षत्र एवं सम्बन्धित दान, पिरामिड के स्वास्थ्य उपचार, हैल्थ कैप्सूल, वास्तु परामर्ष, वास्तु प्रष्नोत्तरी, कर्मकाण्ड, पिरामिड वास्तु व अन्य मासिक स्तम्भ भी विषेष रोचक हैं।

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