‘‘फर्टिलिटी अर्थात प्रजनन क्षमता से जुड़ी समस्यायें स्त्री और पुरूष दोनों में ही पायी जाती हैं। हमारी कुंडली जीवन के प्रत्येक पक्ष को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। पुरूष की कुंडली में शुक्र और सूर्य तथा स्त्री की कुंडली में मंगल और चंद्रमा प्रजनन क्षमता को नियंत्रित करते हैं। इसके अतिरिक्त कुंडली का सप्तम भाव भी फर्टिलिटी में महत्वपूर्ण भूमिका रखता है। पुरुषों के लिए शुक्र, शुक्राणु को नियंत्रित करता है और सूर्य की सहायक भूमिका होती है तथा स्त्रियों के लिए मंगल और चंद्रमा रज को नियंत्रित करते हैं। इसके अतिरिक्त कुंडली का सप्तम भाव भी पुरूषों की शुक्र क्षमता को प्रभावित करता है और स्त्रियों में गर्भाशय और अंडाशय की स्थिति को दर्शाता है। अर्थात पुरूष की कुंडली में शुक्र और सप्तम भाव यदि बहुत पीड़ित या कमजोर स्थिति में हो तो फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याएं आ सकती हैं। इसी प्रकार स्त्रियों की कुंडली में यदि मंगल, चंद्रमा और सप्तम भाव पीड़ित हो तो यूटरस या ओवरी से जुड़ी समस्याएं सामने आ सकती हैं जिससे संतान प्राप्ति में बाधाएं उत्पन्न होती हैं। 1. पुरूष की कुंडली में यदि शुक्र नीच राशि (कन्या) में हो तो समस्याएं हो सकती हैं। 2. शुक्र छठे या आठवंे भाव में हो तो भी। 3. शुक्र केतु या मंगल के साथ हो तो। 4. शुक्र सूर्य के साथ समान अंश पर हो तो। 5. सप्तम भाव में पाप योग बने हों, सप्तमेश छठे या आठवें भाव में हो, नीचस्थ हो या षष्ठेश, अष्टमेश सप्तम भाव में हो तो भी पुरूषों में इन्फर्टिलिटी की समस्या हो सकती है। 1. स्त्रियों की कुंडली में यदि मंगल, चंद्रमा, नीच राशि में हों तो समस्याएं हो सकती हैं। 2. मंगल, चंद्रमा छठे या आठवें भाव में हो तो भी। 3. मंगल, चंद्रमा की राहु या शनि के साथ युति भी समस्या दे सकती है। 4. यदि सप्तम भाव पीड़ित हो या सप्तमेश पीड़ित हो तो भी स्त्रियों में फर्टिलिटी को लेकर समस्याएं हो सकती हैं। उपरोक्त सभी योगों में महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि फर्टिलिटी कारक ग्रह कमजोर है परंतु बलवान बृहस्पति की उनपर दृष्टि हो तो व्यक्ति को उस समस्या का समाधान मिल जाता है। ज्योतिषीय उपाय 1. पुरूष जातक शुक्र मंत्र का जाप करें। (ऊँ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः) 2. स्त्री जातक मंगल और चंद्रमा का जप करें। (ऊँ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः) (ऊँ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः) 3. पुरूष जातक शुक्रवार को गाय को खीर खिलायें। 4. स्त्री जातक मंगलवार को गाय को गुड़ खिलायें। 5. प्रतिदिन तुलसी जी को जल दें। 6. अपनी कुंडली के सप्तमेश ग्रह का भी निरंतर मंत्र जाप करें तो यह भी इन्फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याओं में लाभदायक होता है।


पितृ ऋण एवं संतान विशेषांक  सितम्बर 2014

फ्यूचर समाचार के पितृ ऋण एवं संतान विषेषांक में अत्यधिक ज्ञानवर्धक व जनहितकारी लेख जैसे- पितृ दोष अथवा पितृ ऋण परिचय, श्राद्ध कर्मः कब, क्यों और कैसे?, पितृदोष सम्बन्धी अषुभ योग एवं उनके निवारण के उपाय, संतान हीनताः कारण और निवारण, टेस्ट ट्यूब बेबीः एक ज्योतिषीय अध्ययन तथा ज्योतिष एवं महिलाएं आदि सम्मलित किये गये हैं। इसके अतिरिक्त पाठकों व कर्मकाण्ड के विद्वानों के लिए संक्षिप्त तर्पण तथा श्राद्ध विधि की सटीक व्याख्या की गई है। फलकथन के अन्तर्गत कुण्डली व संतान संख्या, इन्फर्टिलिटी, करियर परिचर्चा, सत्य कथा, पंचपक्षी के रहस्य, आदि लेख पत्रिका की शोभा बढ़ा रहे हैं। संतान प्राप्ति के अचूक उपाय, हिमालय की संतानोत्पादक जड़ीबूटियां, शाबर मंत्र, भागवत कथा, नक्षत्र एवं सम्बन्धित दान, पिरामिड के स्वास्थ्य उपचार, हैल्थ कैप्सूल, वास्तु परामर्ष, वास्तु प्रष्नोत्तरी, कर्मकाण्ड, पिरामिड वास्तु व अन्य मासिक स्तम्भ भी विषेष रोचक हैं।

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