दक्षिण-पश्चिम के द्वार व सीढ़ियों के नीचे शौचालय का दुष्प्रभाव

दक्षिण-पश्चिम के द्वार व सीढ़ियों के नीचे शौचालय का दुष्प्रभाव  

अप्रैल माह में पंडित जी को पहाड़गंज स्थित एक बहुत बड़े/प्रसिद्ध लकड़ी के व्यापारी ने बुलाया। वास्तु निरीक्षण के दौरान उन्होंने बताया कि वे लोग बहुत समय से मुकदमेबाजी, धन की कमी व बीमारी से परेशान हैं। दोनों लड़कियों की शादी में बहुत विलम्ब होता जा रहा है। प्लाईवुड की दुकान भी ठीक से नहीं चल रही है। लगातार बढ़ते नुकसान के कारण घर को भी बेचना चाहते हैं परन्तु भरसक प्रयत्नों के बावजूद सफलता नहीं मिल रही है। सब कुछ करने के बाद अन्त में हम बहुत उम्मीद से आपको संपर्क कर रहे हैं। कृप्या बतायें क्या वास्तु द्वारा कोई समाधान संभव है। वास्तु निरीक्षण के समय पाये गये दोष - दक्षिण-पश्चिम में घर का द्वार धन हानि का एक मुख्य कारण है तथा इसे बिकने नहीं देता। - उत्तर-पूर्व में शौचालय व इसके ऊपर छत पर पानी की टंकी के कारण हमेशा मानसिक तनाव व धन की कमी बनी रहती है, उधार फँस जाता है तथा पैसा टूट-टूट कर आता है। - सीढ़ी के नीचे मोटर व वाश बेसिन का होना, बिक्री में कमी व लड़कियों के भाग्य में रुकावट बनता है। - सीढ़ी का नीचे से बन्द होना, सीढ़ियों के बीच दक्षिण-पश्चिम में शौचालय बहुत बड़ा वास्तु दोष है। यह मुकदमेबाजी के कारण व्यापार को बन्द कर सकता है तथा घर की बहन बेटियों के लिये अत्यंत हानिकारक है। - रसोई उत्तर-पश्चिम में हो सकती है परन्तु थोड़ा हिस्सा उत्तर में आना आपसी मतभेद बढ़ाता है। - रसोईघर में चूल्हे का दक्षिण-पश्चिम-दक्षिण में होना स्त्रियों को बीमार करता है और विशेषतया सरवाईकल व कन्धों में दर्द बना रहता है। - दक्षिण-पश्चिम में सीढ़ियां धन व स्वास्थ्य के लिये अच्छी हैं परन्तु सीढ़ियों के सामने लगा शीशा (मिरर) उनके अच्छे असर खत्म करके आपसी मन मुटाव, व्यर्थ के खर्चे व बीमारी देता है। उपाय - मुख्य प्रवेश द्वार पर दहलीज बनायें व उसको पीला पेन्ट करें। उसके नीचे चाँदी की स्ट्रिप लगाना और चैखट के ऊपर तीन छोटे पीले पिरामिड लगाना और भी अधिक लाभदायक सिद्ध होगा। - सीढ़ियों से मिरर हटाकर कहीं भी उत्तर-पूर्वी/पूर्वी दीवार पर लगायें परन्तु उसमें बेड नजर नहीं आना चाहिए। - शौचालय, मोटर व वाश बेसिन को भी सीढ़ियों के नीचे से तुरतं हटायें। चूंकि यह दुकान के स्टाफ व ग्राहकों के लिये ही है, इसे दुकान में दिखाये गये स्थान पर उत्तर-पश्चिम में बना सकते हैं, अप्रत्याशित लाभ की गारंटी है। - छत की पानी की टंकी को सीढ़ियों के नजदीक वाले शौचालय के ऊपर स्थानांतरित करें। धन के आवागमन में आश्चर्यजनक सुधार होगा। - रसोई में आग को रसोई के दक्षिण-पूर्व में पूर्वमुखी रखें घर में शांति बढ़ेगी व बीमारी जरुर कम होगी। प्रश्नः- कृप्या दिए गए प्लाॅट की वास्तुनुरुपता के बारे में बताने की कृपा करें। इस दक्षिण-पश्चिम मुखी प्लाॅट के सामने बड़ा पार्क है। बिल्डर का स्टिल्ट के ऊपर प्रथम तल हम लेना चाह रहे हैं। चारु खेमानी, थाणे महाराष्ट्र उत्तरः- प्रिय चारु, घर के लिये नैर्ऋत्य मुखी प्लाॅट आखिरी विकल्प होना चाहिए। ऐसे प्लाॅट का आगे से टेढ़ा होना (दक्षिण/दक्षिण-पश्चिम कटा होना) अनावश्यक विवाद, हर काम में देरी आदि नकारात्मकता को और बढ़ाता है। किचन का पूर्व कटा होना स्त्रियों के स्वास्थ्य के लिये हानिकारक है। पीछे दोनों शौचालयों का अधिकांश भाग उत्तर-पूर्व (ईशान) में होना भी भारी खर्च व मानसिक अशांति का कारण है। सीढ़ियाँ दक्षिण-पूर्व में ठीक हैं परन्तु लिफ्ट का दक्षिण मे होना पिट (गड्ढा) होने के कारण खर्चा व बीमारी बढ़ाता है।

रत्न विशेषांक  जुलाई 2016

भूत, वर्तमान एवं भविष्य जानने की मनुष्य की उत्कण्ठा ने लोगों को सृष्टि के प्रारम्भ से ही आंदोलित किया है। जन्मकुण्डली के विश्लेषण के समय ज्योतिर्विद विभिन्न ग्रहों की स्थिति का आकलन करते हैं तथा वर्तमान दशा एवं गोचर के आधार पर यह निष्कर्ष निकालने का प्रयास करते हैं कि वर्तमान समय में कौन सा ग्रह ऐसा है जो अपने अशुभत्व के कारण सफलता में बाधाएं एवं समस्याएं उत्पन्न कर रहा है। ग्रहों के अशुभत्व के शमन के लिए तीन प्रकार की पद्धतियां- तंत्र, मंत्र एवं यंत्र विद्यमान हैं। प्रथम दो पद्धतियां आमजनों को थोड़ी मुश्किल प्रतीत होती हैं अतः वर्तमान समय में तीसरी पद्धति ही थोड़ी अधिक प्रचलित है। इसी तीसरी पद्धति के अन्तर्गत विभिन्न ग्रहों के रत्नों को धारण करना है। ये रत्न धारण करने के पश्चात् आश्चर्यजनक परिणाम देते हैं तथा मनुष्य को सुख, शान्ति एवं समृद्धि से ओत-प्रोत करते हैं। फ्यूचर समाचार के वर्तमान अंक में रत्नों से सम्बन्धित अनेक उत्कृष्ट एवं उल्लेखनीय आलेखों को सम्मिलित किया गया है जो रत्न से सम्बन्धित विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हैं।

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