शुक्ल पक्ष: रात्रि में पंच पक्षी के कार्य-3

शुक्ल पक्ष: रात्रि में पंच पक्षी के कार्य-3  

शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष में पांचों पक्षियां सप्ताह के अलग-अलग दिवस को दिन तथा रात में भिन्न प्रकार के कार्य संपादित करते हैं। दिन की अवधि के पांच यमों में पांचों पक्षियां पांच अलग तरह के कृत्य में प्राथमिकता के आधार पर संलिप्त रहते हैं। कोई पक्षी यदि प्रथम यम की अवधि में शासन करने की गतिविधि में संलिप्त होता है तो वही पक्षी अन्य 4 यमों की अवधि में दूसरा कार्य कर रहा होता है। इसी प्रकार की व्यवस्था रात्रि में भी संचालित होती है जो कि दिन की गतिविधियों के क्रम से बिल्कुल भिन्न होती है। इस आलेख में हम शुक्रवार एवं शनिवार को पंक्षियों के द्वारा रात में किए गये कार्यों का विवरण प्रस्तुत कर रहे हैं। यदि अपने पक्षी के अनुसार उचित समय का चयन करके उस अवधि में आवश्यक एवं महत्वपूर्ण कार्य संपादित किए जाएं तो वह अभीष्ट फलदायी साबित होता है। रात्रि में पंच पक्षी के कृत्य शुक्रवार 1. प्रथम यम की अवधि शाम 6 बजे से 8ः24 तक गिद्ध - खाना कौआ - घूमना मयूर - शासन करना उल्लू - सोना मुर्गा - मरना शुक्रवार को शाम 6 से 8ः24 तक पांचों पंक्षियां उपर्युक्त गतिविधियांे में संलिप्त रहते हैं। इस अवधि में यदि जन्म पक्षी मयूर वाला जातक कोई महत्वपूर्ण कार्य संपादित करता है तो उसके कार्य के शत-प्रतिशत सफल होने की पूर्ण संभावना होती है। जिसका जन्मपक्षी गिद्ध है उसका कार्य कुछ परेशानी के उपरांत विलंब से बनेगा। जन्मपक्षी कौआ वाले जातक को कठिन परिश्रम करना होगा, इसके उपरांत भी फल बहुत कम ही मिलने की संभावना है। उल्लू एवं मुर्गा जन्मपक्षी वाले जातक तो अपना प्रयास निरर्थक ही समझें क्योंकि इस अवधि में इनके कार्य सफल होने की संभावना नगण्य है क्योंकि इनके जन्मपक्षी इस समय क्रमशः सोने एवं मरने की गतिविधि संपादित कर रहे हैं। अतः यदि कार्य में सफलता चाहिए तो इन्हें उस समय का इंतजार करना होगा जब इनके जन्म पक्षी अच्छी गतिविधियों अर्थात् शासन करना अथवा खाना खाने के कार्य में संलिप्त होंगे। इसी प्रकार से पंच पक्षी के आधार पर उचित समय का चयन किसी भी कार्य में सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है। 2. द्वितीय यम की अवधि रात्रि 8ः25 से 10ः48 तक उल्लू - खाना मुर्गा - घूमना गिद्ध - शासन करना कौआ - सोना मयूर - मरना अर्थात् शुक्ल पक्ष शुक्रवार की रात्रि यदि 8ः25 से 10ः48 तक जन्म पक्षी गिद्ध वाले जातक कोई महत्वपूर्ण कार्य संपादित करेंगे तो उन्हें निश्चित रूप से सफलता मिलेगी। जन्मपक्षी उल्लू को कुछ प्रयासों के उपरांत थोड़ा विलंब से सफलता मिलेगी जबकि मुर्गा को सफलता के लिए काफी अधिक मेहनत करनी होगी फिर भी सफलता उनसे रुठी रह सकती है। कौआ एवं मयूर जन्मपक्षी वाले जातक को पूर्ण निराशा प्राप्त हो सकती है। 3. तृतीय यम की अवधि रात्रि 10ः49 से 1ः12 तक कौआ - खाना मयूर - घूमना उल्लू - शासन करना मुर्गा - सोना गिद्ध - मरना शुक्ल पक्ष शुक्रवार की रात्रि जन्म पक्षी उल्लू वाले जातक के द्वारा रात्रि 10ः49 से 1ः12 तक संपादित किया गया हर कार्य सफल होगा। कौआ द्वारा संपादित कार्य कुछ परेशानी एवं विलंब के साथ सफलता प्राप्त करेगा जबकि मयूर को सफलता प्राप्त करने के लिए अथक परिश्रम करना होगा। परिश्रम के उपरांत भी सफलता में संदेह है। मुर्गा एवं गिद्ध को इस समयावधि में आवश्यक एवं महत्वपूर्ण कार्य को स्थगित कर देना चाहिए क्योंकि इनके कार्य में बाधा उपस्थित होने तथा कार्य के असफल हो जाने की पूर्ण संभावना है। 4. चतुर्थ यम की अवधि रात्रि 1ः13 से 3ः36 तक मुर्गा - खाना गिद्ध - घूमना कौआ - शासन करना मयूर - सोना उल्लू - मरना शुक्ल पक्ष शुक्रवार की रात्रि जन्म पक्षी कौआ वाले जातक के द्वारा रात्रि 1ः13 से 3ः36 तक संपादित हर कार्य अपने इच्छित परिणाम को प्राप्त होगा। मुर्गा द्वारा संपादित कार्य कुछ बाधाओं एवं विलंब के साथ पूर्णता को प्राप्त होगा जबकि गिद्ध द्वारा संपादित कार्य में यथेष्ट परिणाम मिलने में संदेह की स्थिति बनी रह सकती है। मयूर एवं उल्लू को परेशानी से बचने के लिए अपने महत्वपूर्ण कार्य कुछ समय के लिए स्थगित करके उचित समय का इंतजार करना चाहिए। 5. पंचम यम की अवधि रात्रि 3ः37 से सुबह 6 बजे तक मयूर - खाना उल्लू - घूमना मुर्गा - शासन करना गिद्ध - सोना कौआ - मरना शुक्ल पक्ष शुक्रवार को रात्रि 3ः37 से सुबह 6 बजे तक की समयावधि में जन्म पक्षी मुर्गा शासन करने की गतिविधियों में संलग्न रहता है। अतः इस समयावधि में जन्मपक्षी मुर्गा वाले जातक के द्वारा संपादित हर कार्य सफलता की गगनचुंबी ऊंचाइयां छूएगा। जन्म पक्षी मयूर को अपने कार्य में सफलता हेतु अतिरिक्त प्रयासों की आवश्यकता होगी। जन्म पक्षी उल्लू अथक परिश्रम के उपरांत भी अपने कार्य में सफल होगा इसमें संदेह की स्थिति बनी रहेगी। इस समयावधि में गिद्ध एवं कौआ द्वारा संपादित कार्य असफल होने की ही अधिक संभावना है क्यांेकि दोनों क्रमशः सोना एवं मरना गतिविधि में संलग्न हंै। अतः गिद्ध एवं कौआ जन्म पक्षी वाले जातक यदि इस समयावधि में अपने महत्वपूर्ण कार्य को स्थगित कर उचित समय का इंतजार करें तो श्रेयष्कर होगा। शनिवार 1. प्रथम यम की अवधि शाम 6 बजे से 8ः24 तक उल्लू - खाना मुर्गा - घूमना गिद्ध - शासन करना कौआ - सोना मयूर - मरना शुक्ल पक्ष शनिवार को प्रथम यम काल में शाम 6 बजे से 8ः24 तक गिद्ध शासन करने की गतिविधि में संलग्न रहता है। अतः इस समयावधि में जन्म पक्षी गिद्ध वाले जातक के द्वारा सम्पन्न हर कार्य सफलता पूर्वक सम्पन्न होगा। उल्लू के द्वारा संपन्न कार्य के भी सफल होने की पूर्ण संभावना है किंतु थोड़ी परेशानी, परिश्रम एवं विलंब के उपरांत। इस काल में मुर्गा घूमने की गतिविधि में संलग्न है अतः इसके द्वारा संपन्न कार्यों में गाम्भीर्य का अभाव रहेगा तथा सफलता में संदेह बना रहेगा। कौआ एवं मयूर जन्म पक्षी वाले जातक के द्वारा सम्पन्न कार्य पूरी तरह से असफल होने की संभावना रहेगी क्योंकि ये दोनों जन्म पक्षी इस समयावधि में क्रमशः सोना एवं मरना गतिविधियों में संलग्न होंगे। 2. द्वितीय यम की अवधि रात्रि 8ः25 से 10ः48 तक कौआ - खाना मयूर - घूमना उल्लू - शासन करना मुर्गा - सोना गिद्ध - मरना शुक्ल पक्ष शनिवार को द्वितीय यम काल में रात्रि 8ः25 से 10ः48 तक उल्लू शासन करने की गतिविधि में संलग्न रहता है। अतः जन्म पक्षी उल्लू वाले जातक के द्वारा इस समयावधि में सम्पन्न हर महत्वपूर्ण कार्य सफल होगा। जन्म पक्षी कौआ द्वारा संपादित कार्य कुछ विलंब तथा परेशानी के उपरांत सफलता को प्राप्त करेगा। जन्म पक्षी मयूर द्वारा संपादित कार्य के काफी परिश्रम के उपरांत सफल होने की थोड़ी गुंजाइश बचती है। जन्म पक्षी मुर्गा एवं गिद्ध द्वारा सम्पादित कार्यों के सफल होने की गंुजाइश न के बराबर है। अतः इस समयावधि में इन्हें अपना कोई भी महत्वपूर्ण कार्य नहीं करना चाहिए। 3. तृतीय यम की अवधि रात्रि 10ः49 से 1ः12 तक मुर्गा - खाना गिद्ध - घूमना कौआ - शासन करना मयूर - सोना उल्लू - मरना शुक्ल पक्ष शनिवार को तृतीय यम काल में रात्रि 10ः49 से 1ः12 तक कौआ शासन करने की गतिविधि में संलिप्त होता है। अतः इस समयावधि में जन्म पक्षी कौआ के द्वारा प्रारंभ किया गया हर कार्य पूर्णता एवं सफलता को प्राप्त होता है। जन्म पक्षी मुर्गा द्वारा इस समयावधि में संपादित कार्य थोड़ी परेशानी के उपरांत सफलता को प्राप्त होता है। जन्म पक्षी गिद्ध यदि इस समयावधि में कोई कार्य प्रारंभ करता है तो अत्यधिक परिश्रम के उपरांत भी उसके सफल होने की संभावना कम ही होती है। इस कालावधि में जन्म पक्षी मयूर एवं उल्लू द्वारा संपादित कार्य असफल होते हैं तथा परेशानी एवं पीड़ा का कारण बनते हैं। 4. चतुर्थ यम की अवधि रात्रि 1ः13 से 3ः36 तक मयूर - खाना उल्लू - घूमना मुर्गा - शासन करना गिद्ध - सोना कौआ - मरना शुक्ल पक्ष शनिवार को चतुर्थ यम काल में रात्रि 1ः13 से 3ः36 तक की अवधि जन्म पक्षी मुर्गा के लिए पूर्ण सफलतादायक होता है क्योंकि मुर्गा इस समयावधि में शासन करने की गतिविधि में संलिप्त होता है। जन्म पक्षी मयूर को थोड़े संघर्ष एवं विलंब के उपरांत कार्य में सफलता मिलती है। जन्म पक्षी उल्लू को अनेक बाधाओं एवं परेशानियों का सामना करना पड़ता है तथा कार्य में सफलता भी नहीं मिलती है। जन्म पक्षी गिद्ध एवं कौआ इस समयावधि में क्रमशः सोना एवं मरना गतिविधियों में संलिप्त रहते हैं अतः इनकी सफलता की बिल्कुल गुंजाइश नहीं होती। इस समयावधि में इन्हें कोई भी महत्वपूर्ण कार्य प्रारंभ नहीं करना चाहिए। 5. पंचम यम की अवधि रात्रि 3ः37 से सुबह 6 बजे तक गिद्ध - खाना कौआ - घूमना मयूर - शासन करना उल्लू - सोना मुर्गा - मरना शुक्ल पक्ष शनिवार को पंचम यम काल में रात्रि 3ः37 से सुबह 6 बजे तक की अवधि जन्म पक्षी मयूर के लिए पूर्ण सफलतादायक होता है क्योंकि मयूर इस समयावधि में शासन करने की गतिविधि में संलिप्त होता है। जन्म पक्षी गिद्ध को इस समयावधि में प्रारंभ किए गये कार्य में थोड़े अड़चन एवं विलंब के बाद सफलता मिलती है। जन्म पक्षी कौआ को इस समयावधि में कठिन परिश्रम करना पड़ता है। परिश्रम के अनुपात में सफलता का प्रतिशत काफी कम होता है। जन्म पक्षी उल्लू एवं मुर्गा को इस समयावधि में अपने कार्य में असफलता का मंुह देखना पड़ता है क्योंकि इस समय में ये क्रमशः सोना एवं मरना गतिविधियों में संलग्न रहते हैं। इनके लिए बेहतर यही है कि इस कालावधि में कोई भी महत्वपूर्ण कार्य न करें।


वास्तु विशेषांक  दिसम्बर 2014

फ्यूचर समाचार के वास्तु विषेषांक में अनेक रोचक व ज्ञानवर्धक लेख जैसे भवन और वास्तु, वास्तु शास्त्र का वैदिक स्वरूप, वास्तु शास्त्र के मूलभूत तत्व, वास्तु शास्त्र व दाम्पत्य जीवन, उद्योग धन्धे क्यों बन्द हो जाते हैं?, फ्लैट/प्लाॅट खरीदने हेतु वास्तु तथ्य, अनुभूत प्रयोग एवं सूत्र, वास्तु सम्मत सीढ़ियां भी देती हैं सफलता, घर में क्या न करें?, विभिन्न दिषाओं में रसोईघर, वास्तुदोष समाधान, वास्तु संबंधी कहावतें, वास्तु दोष दूर करने के सरल उपाय, पंचतत्व का महत्व तथा स्वास्थ्य संबंधी वास्तु टिप्स। इसके अतिरिक्त वास्तु पर हुए एक शोध कार्य पर लिखा गया सम्पादकीय, करियर परिचर्चा, सुखी दाम्पत्य जीवन का आधार: शादी के सात वचन, सत्य कथा, हैल्थ कैप्सूल, पावन स्थल में बांसवाड़ा का प्राचीन मां त्रिपुरासुन्दरी मन्दिर, ज्योतिष व महिलाएं तथा ग्रह स्थिति एवं व्यापार, पंचपक्षी के रहस्य, मंत्र व तंत्र साधना का स्वरूप, कर्णबेधन संस्कार, गृह सज्जा एवं वास्तु फेंगसुई आदि लेखों को समायोजित किया गया है।स्थायी स्तम्भ विचार गोष्ठी के अन्तर्गत ‘पिरामिड का वास्तु में प्रयोग’ विषय पर विभिन्न विद्वानों के विचारों को प्रस्तुत किया गया है। आषा है फ्यूचर समाचार के पाठकों को यह विषेषांक विषेष पसंद आयेगा।

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