ग्रह स्थिति एवं व्यापार

ग्रह स्थिति एवं व्यापार  

गोचर फल विचार मासारंभ में नीच राशिस्थ मंगल का शुक्र से राशि संबंध बनाना पश्चिमी देशों व प्रदेशों में कहीं हिंसक घटनाओं और प्राकृतिक आपदाओं के कारण जन-धन हानि का योग बनाएगा और दुर्भिक्ष के कारण अकाल जैसी स्थितियां बनने के आसार हैं तथा शनि का सूर्य और बृहस्पति को दृष्टिगत करना राजनैतिक आलोचनाआंे को बढ़ावा देगा और आम जनता में बढ़ती हुई महंगाई के कारण शासन के प्रति आक्रोश की भावना को बढ़ाएगा। 15 सितंबर को मंगल का सिंह राशि में आकर सूर्य व गुरु से राशि संबंध बनाना तथा राहु ग्रह से द्विद्र्वादश योग में आना और इन तीनों ग्रहों का शनि व केतु की दृष्टि में होना यह योग यान दुर्घटना, अग्निकांड इत्यादि का कारण बनेगा और सैन्य हलचल बढ़ने से सीमाओं पर तनावपूर्ण माहौल रहेगा। 17 सितंबर को सूर्य का कन्या राशि में आकर बुध व राहु से राशि संबंध बनाना यह योग शासकीय कार्यों में विशेष उलझनें पैदा करेगा तथा यह योग आम जनता के मनों में नए-नए रोगों के कारण भय की स्थिति बनाएगा। इस मास में भारत के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों में बादल और रूक-रूक कर वर्षा के साथ उत्तरी क्षेत्रों में हिमपात होगा और शरद ऋतु का आगमन होगा। गोचर ग्रह परिवर्तन व नक्षत्र वेध 6 सितंबर के दिन कर्क राशि स्थित शुक्र मार्गी गति में आएगा। 7 सितंबर को सिंह राशि में स्थित गुरु ग्रह उदय होगा। 13 सितंबर को सूर्य उ. फाल्गुनी नक्षत्र में आकर सर्वतोभद्रचक्र द्वारा रेवती, उ. षाढ़ा व पुनर्वसु नक्षत्रों को वेधेगा। 14 सितंबर को गुरु ग्रह पू.फा. नक्षत्र में आकर अश्विनी नक्षत्र को वेधेगा। 15 सितंबर को मंगल ग्रह सिंह राशि में गुरु के साथ राशि संबंध बनाएगा तथा मघा नक्षत्र में प्रवेश कर दक्षिण वेध से अश्लेषा नक्षत्र को वेधेगा। इसी दिन चंद्र दर्शन मंगलवार के दिन मुहूर्ती में होगा। 17 सितंबर को बुध ग्रह कन्या राशि में वक्री गति में आएगा। इसी दिन सूर्य कन्या राशि में प्रवेश कर बुध तथा राहु के साथ संबंध बनाएगा तथा अश्विन संक्रांति 15 मुहूर्ती में होगी। 24 सितंबर को बुध ग्रह अस्त होगा। 26 सितंबर को राहु उ. फाल्गुनी नक्षत्र तथा केतु उभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश करेगा। 27 सितंबर को सूर्य हस्त नक्षत्र में आकर उ. भाद्रपद नक्षत्र को वेध करेगा तथा शनि ग्रह अनुराधा नक्षत्र के द्वितीय चरण में प्रवेश करेगा। 30 सितंबर को गुरु ग्रह पू. फाल्गुनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में प्रवेश करेगा तथा इसी दिन शुक्र सिंह राशि मघा नक्षत्र में प्रवेश कर भरणी नक्षत्र को वेधेगा। सोना व चांदी मासारंभ में 5 सितंबर तक उतार-चढ़ाव की स्थिति में मंदी का माहौल ही रहेगा। 6 सितंबर को सोना व चांदी के बाजारों में तेजी का योग दर्शाता है। 7 सितंबर को बाजारों में पूर्ववत तेजी की लहर को चलाएगा। 13 सितंबर को बाजारांे में तेजी के रूझान को बरकरार रखेगा। 14 सितंबर को बाजारांे में उतार-चढ़ाव के बाद मंदी का वातावरण बनाएगा। 15 सितंबर को बाजारों में तेजी का माहौल बनाएगा। 17 सितंबर को बाजारों में तेजी का रूख ही बनाएगा। 24 सितंबर को सोने व चांदी के बाजारों में तेजी का योग ही दर्शाता है। 26 सितंबर को बाजारांे में पूर्व रूख ही बनाएगा। 27 सितंबर को बाजारों में पूर्व रूख में वृद्धि ही करेगा। 30 सितंबर को बाजारों में उतार-चढ़ाव के बाद मंदी का वातावरण ही बनाएगा। गुड़ एवं खांड मासारंभ में 5 सितंबर तक उतार-चढ़ाव की स्थिति में मंदी का माहौल ही रहेगा। 6 सितंबर को गुड़ व खांड के बाजारों में तेजी का वातावरण बनाएगा। 7 सितंबर को बाजारों में पूर्व रूख का योग दर्शाता है। 13 सितंबर को बाजारों में मंदी का माहौल बनाएगा। 14 सितंबर को भी बाजारों में मंदी का रूख ही बनाएगा। 15 सितंबर को बाजारों में तेजी की लहर को चलाएगा। 17 सितंबर को बाजारों में तेजी के रूख को बरकरार रखेगा। 24 सितंबर को बाजारों में उतार-चढ़ाव की स्थिति ही लाएगा। 26 सितंबर को बाजारों में उतार-चढ़ाव के बाद तेजी की लहर को ही आगे चलाएगा। 27 सितंबर को बाजारों में तेजी के रूख को ही बनाएगा। 30 सितंबर को बाजारों में मंदी का माहौल ही बनाएगा। अनाजवान व दलहन मासारंभ में 5 सितंबर तक उतार-चढ़ाव की स्थिति में मंदी का माहौल ही रहेगा। 6 सितंबर को जौ, चना, गेहूं, ज्वार, बाजरा इत्यादि अनाजों तथा मूंग, मौठ, मसूर, अरहर इत्यादि दलहन के बाजारों में तेजी की लहर को ही चलाएगा। 7 सितंबर को बाजारांे में तेजी का रूख ही बरकरार रखेगा। 13 सितंबर को बाजारों में तेजी का योग ही दर्शाता है। 15 सितंबर को अनाजवान व दलहन के बाजारों में तेजी का वातावरण ही बनाएगा। 17 सितंबर को बाजारों में उतार-चढ़ाव के बाद मंदी की स्थिति को ही बनाएगा। 24 सितंबर को बाजारों में तेजी का माहौल ही बनाए रखने में सहायक होगा। 27 सितंबर को गेहूं, जौ, चना, ज्वार, बाजरा इत्यादि अनाजवानों तथा मूंग, मौठ, अरहर, मसूर इत्यादि दलहनों में तेजी का ही दायक होगा। 30 सितंबर को बाजारांे में मंदी का माहौल ही बनाएगा। घी व तेलवान मासारंभ में 5 सितंबर तक उतार-चढ़ाव की स्थिति में मंदी का माहौल ही रहेगा। 6 सितंबर को घी व तेलवान के बाजारों में तेजी का रूख बरकरार रखेगा। 7 सितंबर को भी बाजारों में तेजी का वातावरण बनाएगा। 13 सितंबर को बाजारों में पूर्वरूख ही दर्शाता है। 14 सितंबर को बाजारों में मंदी का योग बनाएगा। 15 सितंबर को बाजारांे में उतार-चढ़ाव की स्थिति का ही दायक होगा। 17 सितंबर को पुनः तेजी की लहर को चलाएगा। 24 सितंबर को बाजारों में तेजी का रूख ही बनाएगा। 27 को बाजारों में तेजी का वातावरण दर्शाता है। 30 सितंबर को बाजारों में मंदी का रूख ही बनाएगा। नोट: उपर्युक्त फलादेश पूरी तरह ग्रह स्थिति पर आधारित है, पाठकों का बेहतर मार्ग दर्शन ही इसका मुख्य उद्देश्य है। इसके साथ-साथ संभावित कारणों पर भी ध्यान देना चाहिए जो बाजार को प्रभावित करते हैं। कृपया याद रखें कि व्यापारी की सट्टे की प्रवृत्ति और निर्णय लेने की शक्ति में कमी तथा भाग्यहीनता के कारण होने वाले नुकसान के लिए लेखक, संपादक एवं प्रकाशक जिम्मेदार नहीं हैं।


लाल किताब विशेषांक  सितम्बर 2015

लाल किताब ज्योतिषीय फलादेश की अन्यान्य पद्धतियों में से सर्वोत्तम एवं विश्वसनीय पद्धति है। भारत में लाल किताब का आगमन 1930 के दशक में एक भारतीय ब्रिटिश अधिकारी पं. रूप चन्द जोशी के प्रयासों के फलस्वरूप माना जाता है। पं. रूप चन्द जोशी ने फलकथन की प्राचीन विधा की खोज कर इसे पुनस्र्थापित किया। लालकिताब के महान ज्ञाताओं के द्वारा यह अनुभवसिद्ध है कि लाल किताब के द्वारा अनुशंसित उपाय अशुभ ग्रहों के अशुभत्व को समाप्त कर शुभ फलदायी परिणाम देते हैं। यही नहीं इसके अलावा हर कार्य के लिए भी सटीक एवं उपयुक्त उपायों की चर्चा लाल किताब में की गइ्र्र है जैसे विवाह, सन्तान इत्यादि। फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में अनेक विषयों पर विद्वान ज्योतिषियों के आलेख उद्धृत हैं। फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में समाविष्ट कुछ अति महत्वपूर्ण आलेख हैं: लाल किताब एक परिचय, लाल किताब के विशेष नियम, पितृ ऋण, मातृ ऋण आदि की व्याख्या एवं फलादेश, लाल किताब के उपायों के प्रकार, ऋण एवं उनके उपाय, लाल किताब उपाय- जन्मकुण्डली के बिना भी मददगार, दान, मकान एवं धर्म स्थल संबंधी नियम, घरों के अनुसार ग्रहों का प्रभाव आदि। दूसरे अन्य महत्वपूर्ण एवं प्रशंसनीय आलेखों में शामिल हैं- ईशा का नन्हा विभोर, दी फूल, पंच पक्षी इत्यादि।

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