आज हम बात कर रहे हैं ट्रैजडी किंग’ कहें जाने वाले अभिनय की दुनिया के बेताज बादशाह दिलीप कुमार की। 11 दिसंबर 1922 को पेशावर में के फलों के सौदागर गुलाम सरबर खान के घर पांचवी संतान के रूप में मोहम्मद युसूफ खान का जन्म हुआ (दिलीप कुमार परिवर्तित नाम)। उनके पिता अत्यंत धार्मिक व्यक्ति थे। संपन्न परिवार में जन्मे दिलीप कुमार के घर में किसी चीज की कोई कमी नहीं थी। बचपन में वे बहुत शरारती थे। बड़े भाई के इलाज के कारण वे 5-6 वर्ष की आयु में ही मुंबई जाकर रहने लगे। देवलाली के प्रसिद्ध बर्नेस स्कूल में उनका दाखिला हुआ। पढ़ाई में वे सामान्य थे किंतु फुटबाल में उनका मन रम गया। अंग्रेजी पर उनका अच्छा अधिकार था। खालसा काॅलेज की तरफ से उन्हें फुटबाल खेलने का मौका मिलता था। फीस के रूप में 15 रु. भी मिलते थे। बचपन में पैसे की कोई तंगी न देखने वाले यूसुफ को जवानी में मुफलिसी के दिन भी देखने पड़े। उनके पिता का फल व्यवसाय धीरे-धीरे बंद हो गया। घर, मकान, मां के गहने सभी कुछ बिक गये। दिलीप कुमार की कुंडली मेष लग्न की है। लग्नेश मंगल एकादश लाभ भाव में स्थित है। लग्नेश मंगल पर चंद्र की पूर्ण दृष्टि ने उन्हें आकर्षक रूप रंग प्रदान किया। सप्तम भाव में स्थित गुरु जो कि भाग्येश व व्ययेश भी है, की पूर्ण दृष्टि लग्न व लग्नेश पर पड़ रही है। लग्नेश के लाभ भाव में बैठने व भाग्येश से दृष्टि पाने के कारण दिलीप कुमार धनी व संपन्न परिवार से जुड़े थे। भाग्येश बृहस्पति चूंकि व्ययेश भी है, इसी कारण उन्हें अपने जीवन में आर्थिक तंगी के साथ ही अनेक समस्याओं से भी जूझना पड़ा किंतु अंततः उन्होंने सफलता प्राप्त की। धनेश शुक्र अष्टम भाव में स्थित होकर धन भाव को पूर्ण दृष्टि भी दे रहा है। धनेश शुक्र की युति पंचमेश सूर्य व पराक्रमेश व षष्ठेश बुध से है साथ ही शुक्र पर कर्मेश व लाभेश शनि की पूर्ण दृष्टि है। लाभेश व धनेश का संबंध जातक को साधन संपन्न बनाता है। साथ ही लग्नेश मंगल की भी पूर्ण दृष्टि कुटुंब भाव पर है। दिलीप कुमार पढ़ाई-लिखाई में सामान्य से छात्र थे। पढ़ाई से ज्यादा उनकी रूचि खेल-कूद में थी विशेष रूप से फुटबाल और शतरंज के खेल में उन्हें महारत हासिल थी। कारण स्पष्ट है पराक्रमेश बुध व पंचमेश सूर्य दोनों की ही युति अष्टम भाव में है। तृतीय भाव पर कर्मेश व लाभेश शनि की दृष्टि है साथ ही तृतीयेश व पंचमेश पर भी शनि की दृष्टि है इसी कारण दिलीप साहब ने फुटबाल के खेल में महारत हासिल की और काॅलेज के दिनों में अपने खेल से आर्थिक लाभ भी प्राप्त कर लिया। उनकी सबसे पहली कमाई फुटबाल खेलकर मिलने वाली फीस थी मात्र 15 रुपये। पंचमेश सूर्य के साथ ही शुक्र की भी युति है। शुक्र विदेशी भाषा का कारक है इस कारण अंग्रेजी विषय पर भी उनका अच्छा अधिकार था। उन्होंने अंग्रेजी लाइब्रेरी ज्वाइन कर अपनी योग्यता को खूब विकसित किया। काॅलेज तक आते-आते उनकी चंद्रमा की दशा प्रारंभ हो गई। चंद्रमा जो कि उच्च शिक्षा अर्थात पंचम भाव में व्ययेश अर्थात चतुर्थेश होकर पंचम भाव में ही बैठे हैं, के प्रभाववश उन्हें बी. एस. सी. की पढ़ाई बीच में ही छोड़कर अत्यंत आर्थिक तंगी के कारण मात्र 36 रु. माहवार की नौकरी करनी पड़ी। दिलीप कुमार का पैतृक व्यवसाय फलों का था। फल व्यवसाय में उनकी भी रूचि थी। फल व्यवसाय में उन्होंने खूब कमाई की। सप्तम भाव व्यापार का भाव है। बृहस्पति फलों के कारक हैं। बृहस्पति जो कि भाग्येश हैं सप्तम में बैठकर लग्न व लग्नेश दोनों को ही प्रभावित कर रहे हैं जिसके प्रभाववश दिलीप साहब ने फल व्यवसाय में सफलता प्राप्त की। दिलीप साहब की कारोबारी यात्रा के दौरान नैनीताल यात्रा में उनकी मुलाकात बाॅम्बे टाॅकीज की मालकिन देविका रानी से हुई। उन्होंने ही दिलीप साहब को मुंबई आकर फिल्मों में काम करने का न्यौता दिया। विश्वयुद्ध के कारण फल व्यवसाय में होने वाले घाटे को देखते हुए दिलीप कुमार ने फिल्मों में भाग्य आजमाने का फैसला किया। दिलीप कुमार के लिए चंद्र दशा अत्यंत कष्टकारी रही। कारण चंद्रमा शुक्र के नक्षत्र में और शुक्र अष्टम भाव में स्थित है। चंद्रमा ने छठे और अष्टम भाव का फल दिया जिसके परिणामस्वरूप दिलीप साहब का सब कुछ बिक गया। उन्हें नये सिरे से अपने काम की शुरूआत करनी पड़ी।’’ आइये अब देखते हैं ऐसे क्या ग्रह योग रहे जिसके कारणवश दिलीप साहब ने ऐसे कार्य क्षेत्र में शोहरत हासिल की जिससे उनका दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं था। यदि किसी जातक की कुंडली में सूर्य, बुध, शुक्र व शनि की युति होती है या इन चारों ग्रहों का किसी प्रकार कोई संबंध बनता है तो ऐसा जातक सौभाग्यशाली होता है। दिलीप कुमार की कुंडली में सू. बु. शु. एक ही राशि में युत है और शनि की तृतीय दृष्टि तीनों ही ग्रहों पर है। सूर्य जातक को सत्तासीन, ऐश्वर्यवान, पुरूषार्थ आदि गुण प्रदान करता है। बुध जातक को हंसमुख, विनोदी स्वभाव व जैसा देश वैसा भेष बदलने में माहिर बनाता है। शुक्र ललित कलाओं का कारक है तथा सिनेमा, थियेटर, संगीत तथा अभिनय क्षमता देता है। शनि काल पुरुष की कुंडली में कर्मेश व लाभेश है। जब उपरोक्त ग्रहों से शनि का संबंध बन जाता है तो जातक सर्वगुण संपन्न हो जाता है। जातक को सामाजिक, आर्थिक, बौद्धिक, आदि सभी स्तरों पर सफलता प्राप्त होती है। दिलीप कुमार की कुंडली में लग्नेश मंगल लाभ भाव में बैठकर लाभेश व कर्मेश शनि को पूर्ण दृष्टि से देख रहे हैं। शनि स्वयं मंगल के नक्षत्र में और राहु के उपनक्षत्र में स्थित है। सू. बु. शु. अष्टम भाव में मंगल की ही दूसरी राशि वृश्चिक में है। सूर्य पंचमेश, बुध तृतीयेश व षष्ठेश तथा शुक्र धनेश व सप्तमेश अर्थात पांच भावों के भावेश एक साथ युति बनाकर बैठे हैं जिनपर कर्मेश और लाभेश शनि की पूर्ण दृष्टि है। कहने का तात्पर्य यह है कि शनि, शुक्र बुधादित्य के चतुग्र्रही संबंध के कारण ही दिलीप कुमार ने फिल्म जगत में पदार्पण किया और उसमें सफलता प्राप्त की। 1945 तक उनकी दो-तीन फिल्में प्रदर्शित हुईं लेकिन उन्हें विशेष सफलता नहीं मिली। 1945 के बाद प्रारंभ हुई लग्नेश मंगल की महादशा। जुगनू की जबर्दस्त सफलता के साथ शुरू हुआ दिलीप कुमार की सफलता का सफर। मंगल राहु के ही नक्षत्र और राहु के ही उपनक्षत्र में स्थित है। राहु षष्ठ भाव में अपनी उच्च राशि में कर्मेश व लाभेश शनि से युत होकर स्थित है। शनि स्वयं मंगल के नक्षत्र और राहु के उपनक्षत्र में है। षष्ठ भाव प्रतिस्पर्धा का भाव होता है। दिलीप कुमार की राजकुमार और देवानंद से कांटे की टक्कर थी। दोनों ही अभिनेता अपने सशक्त अभिनय के कारण फिल्म जगत में छाये थे। लग्नेश की महादशा में दिलीप साहब को अपने कर्म क्षेत्र में खूब सफलता मिली क्योंकि मंगल, शनि और राहु का काफी सशक्त संबंध बना हुआ है। 1952 के बाद प्रारंभ हुई राहु की महादशा। दिलीप साहब का नाम कई अभिनेत्रियों के साथ प्रेम-प्रसंगों में जुड़ा किंतु सबमें इनके दिल ही टूटे, कोई कामयाबी नहीं मिली। 40 साल के फिल्मी करियर में दिलीप साहब दौलत और शोहरत भरपूर पा चुके थे लेकिन उनके जीवन में एक खालीपन था। जिसे पूरा किया अपने जमाने की मशहूर अदाकारा सायरा बानो ने। 14 नवंबर 1966 के दिन दिलीप कुमार और सायरा बानो की शादी हुई। इसे फिल्मी दुनिया की सबसे ग्लैमरस शादी कहा जाता है जिसमें बारात की अगुआई पृथ्वीराज कपूर कर रहे थे और राजकपूर और देवानंद दुल्हन के पट की तैयारी करवा रहे थे। दिलीप सायरा की जोड़ी को फिल्मी दुनिया की सबसे खुशहाल और स्थायी दंपत्ति कहलाए जाने का अधिकार मिला। उनके सुखी वैवाहिक जीवन में हलचल मचाई अस्मा ने। दुर्भाग्य वश कुछ ऐसा हुआ कि दिलीप कुमार को अस्मा से निकाह करना पड़ा। सायरा बानो अपनी मम्मी के घर चली गईं। जितनी जल्दी दिलीप साहब का अस्मा से निकाह हुआ उतनी ही जल्दी तलाक। दिलीप और सायरा फिर एक-बार गिले शिकवे भुलाकर साथ रहने लगे। ‘‘दिलीप साहब इसे अपने जीवन की सबसे बड़ी दुर्घटना मानते हैं और सायरा सबसे त्रासद प्रसंग।’’ अनेक प्रेम प्रसंग, विवाद, तलाक फिर सुखद वैवाहिक जीवन दिलीप कुमार के जीवन की घटनाएं किसी फिल्म की ही तरह रहीं। पंचमेश सप्तमेश की युति अष्टम भाव में षष्ठेश बुध के साथ है। भाग्येश बृहस्पति जो कि व्ययेश भी हैं सप्तम भाव में विद्यमान है। पंचम भाव में चंद्रमा जो कि चंचलता का प्रतीक है और पंचम का व्ययेश है विद्यमान है। चंद्रमा की पूर्ण दृष्टि लग्नेश मंगल पर है। अष्टम भाव में स्थित सप्तमेश और पंचमेश शुक्र व सूर्य पर लाभेश शनि की पूर्ण दृष्टि भी है। यही कारण है कि दिलीप कुमार के अनेक प्रेम प्रसंग हुए और दो विवाह भी हुए। पंचम भाव में स्थित चंद्रमा जो कि मन का कारक है सप्तमेश शुक्र के नक्षत्र में और लाभेश शनि के उपनक्षत्र में है। शुक्र मारकेश भी है। चंद्रमा पंचम का व्ययेश है, सप्तम भाव में व्ययेश बृहस्पति बैठे हैं, सप्तमेश शुक्र सप्तम के व्ययेश षष्ठेश बुध से युत है। यही कारण है कि दिलीप कुमार को अपने प्रेम प्रसंगों के कारण मानसिक अवसाद से ग्रस्त होना पड़ा और मनोचिकित्सक की शरण लेनी पड़ी। बृहस्पति व्ययेश होने के साथ-साथ भाग्येश भी हैं। दिलीप सायरा का प्रेम विवाह नहीं हुआ था उनकी जोड़ी ईश्वर की बनाई हुई थी इसी कारण व्ययेश बृहस्पति ने उन्हें अलग जरूर किया लेकिन भाग्येश बृहस्पति ने उन्हें पुनः जीवनभर साथ रहने का मौका प्रदान किया। अंततः दिलीप सायरा पुनः एक हो गये। दांपत्य जीवन पुनः सुचारू रूप से चलने लगा। फिल्मांे से दिलीप साहब ने खूब धन व शोहरत कमाई। सायरा बानो काफी समय तक शादी के बाद भी फिल्मों में काम करती रहीं किंतु फिर उन्होंने भी फिल्मों को अलविदा कहा और अपने वैवाहिक जीवन में लग गई। दोनों ही आपस में खुश व संतुष्ट रहे लेकिन विवाह का सर्वप्रथम उद्देश्य होता है संतान प्राप्ति। दोनों ही आजीवन संतान प्राप्ति के सुख से वंचित रहे। पंचमेश सूर्य अष्टम भाव में षष्ठेश बुध से युत है। सूर्य षष्ठेश बुध के ही नक्षत्र में और षष्ठ भाव में स्थित राहु के उपनक्षत्र में है। पंचम भाव में पंचम के व्ययेश अर्थात चतुर्थेश चंद्रमा बैठे हैं। चंद्रमा शुक्र के नक्षत्र में है जो कि अष्टम भाव में है और शनि के उपनक्षत्र में है जो कि षष्ठ भाव में बैठै हैं। दिलीप कुमार की कुंडली में पंचमेश सूर्य षड्बल में दूसरे स्थान पर है और सप्तमेश शुक्र के साथ अष्टम भाव में षष्ठेश बुध से युत होकर बैठे हैं और विशेष बात यह है कि पंचमेश सूर्य षष्ठेश के साथ बैठे ही नहीं हैं बल्कि षष्ठेश के ही नक्षत्र में और षष्ठ भाव में बैठे राहु के उपनक्षत्र में विद्यमान हैं। यही कारण है कि दिलीप कुमार को आजीवन संतान सुख प्राप्त नहीं हुआ। वर्तमान में दिलीप कुमार की बुध की महादशा में राहु की अंतर्दशा चल रही है जो कि जून 2017 तक चलेगी। बुध षष्ठेश होकर अष्टम भाव में मारकेश शुक्र से युत होकर बैठे हैं। बुध अपने ही नक्षत्र में और षष्ठ भाव में बैठे शनि के उपनक्षत्र में स्थित हैं। राहु अष्टम भाव में स्थित सूर्य के नक्षत्र में और षष्ठ भाव में बैठे शनि के उपनक्षत्र में स्थित है। बुध तृतीय भाव के स्वामी भी हैं जो अष्टम से अष्टम होता है इस कारण वर्तमान दशा में उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। आज दिलीप कुमार सायरा के साथ शांत व सुखमय जीवन व्यतीत कर रहे हैं। हिंदी सिनेमा में अभिनय की अदायगी के मापदंडों पर जब-जब बहस होगी, दिलीप साहब का नाम हमेशा आता रहेगा।


लाल किताब विशेषांक  सितम्बर 2015

लाल किताब ज्योतिषीय फलादेश की अन्यान्य पद्धतियों में से सर्वोत्तम एवं विश्वसनीय पद्धति है। भारत में लाल किताब का आगमन 1930 के दशक में एक भारतीय ब्रिटिश अधिकारी पं. रूप चन्द जोशी के प्रयासों के फलस्वरूप माना जाता है। पं. रूप चन्द जोशी ने फलकथन की प्राचीन विधा की खोज कर इसे पुनस्र्थापित किया। लालकिताब के महान ज्ञाताओं के द्वारा यह अनुभवसिद्ध है कि लाल किताब के द्वारा अनुशंसित उपाय अशुभ ग्रहों के अशुभत्व को समाप्त कर शुभ फलदायी परिणाम देते हैं। यही नहीं इसके अलावा हर कार्य के लिए भी सटीक एवं उपयुक्त उपायों की चर्चा लाल किताब में की गइ्र्र है जैसे विवाह, सन्तान इत्यादि। फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में अनेक विषयों पर विद्वान ज्योतिषियों के आलेख उद्धृत हैं। फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में समाविष्ट कुछ अति महत्वपूर्ण आलेख हैं: लाल किताब एक परिचय, लाल किताब के विशेष नियम, पितृ ऋण, मातृ ऋण आदि की व्याख्या एवं फलादेश, लाल किताब के उपायों के प्रकार, ऋण एवं उनके उपाय, लाल किताब उपाय- जन्मकुण्डली के बिना भी मददगार, दान, मकान एवं धर्म स्थल संबंधी नियम, घरों के अनुसार ग्रहों का प्रभाव आदि। दूसरे अन्य महत्वपूर्ण एवं प्रशंसनीय आलेखों में शामिल हैं- ईशा का नन्हा विभोर, दी फूल, पंच पक्षी इत्यादि।

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