ग्रह स्थिति एवं व्यापार

ग्रह स्थिति एवं व्यापार  

गोचर फल विचार मासारंभ में 2 नवंबर को शनि का वृश्चिक राशि में आकर सूर्य से द्विद्र्वादश योग में आना तथा गुरु ग्रह से दृष्टिगत होना राजनीतिज्ञों में आपसी विरोध की भावना को बढ़ाकर टकराव की स्थिति पैदा करेगा। यह योग प्रमुख क्षेत्रों में अग्निकांड, हिंसक घटनाओं इत्यादि से जन-धन की हानि का कारक बनाएगा। शनि का मंगल से भी द्विद्र्वादश योग में होना भूकंप, यान दुर्घटना इत्यादि का योग बनाता है। यह योग सीमाओं पर शत्रुपक्ष की गतिविधियों से युद्धमय बादलों की काली घटाओं का कारण बनेगा। उच्चस्थ गुरु ग्रह पर मंगल की दृष्टि का होना दैनिक उपयोगी वस्तुओं में अत्यधिक महंगाई के कारण जन-मानस में आक्रोश की भावना को बढ़ाएगा। 16 नवंबर को वृश्चिक राशि में आकर शनि से राशि संबंध बनाएगा। यह योग विशिष्ट व्यक्तियों के लिए विशेष कष्टकारी रहेगा। मासान्त में मंगल का अपनी उच्च राशि मकर में आकर गुरु ग्रह से समसप्तक योग में आना इस मास में खंड के वर्षा के कारण शीतलहर को बढ़ाएगा। उत्तर पर्वतीय क्षेत्रों म वर्फबारी का संकेत देता है। सोना व चांदी मासारंभ में 1 नवंबर को शनि का तुला राशि में अस्त हो जाना सोने व चांदी में मंदी का योग दर्शाता है। 2 नवंबर को शनि का वृश्चिक राशि में आकर गुरु ग्रह से दृष्टिगत होना यह योग बाजारों में उतार-चढ़ाव की स्थिति पैदा करेगा। 3 नवंबर को गुरु का अश्लेषा नक्षत्र के चैथे चरण में आना सोने में तेजी की लहर चला देगा। 4 नवंबर को शुक्र का विशाखा नक्षत्र में आकर शनि से नक्षत्र संबंध बनाना तथा सर्वतोभद्रचक्र द्वारा धनिष्ठा नक्षत्र को वेधना सोना में तेजी के रूख को बरकरार रखते हुए चांदी में भी तेजी का रूझान बना देगा। 5 नवंबर को मंगल का पूर्वाषाढ़ा में आकर दक्षिण वेध से हस्त नक्षत्र को वेधना बाजारों में तेजी का ही योग बनाता है। 6 नवंबर को सूर्य का विशाखा नक्षत्र में आकर धनिष्ठा नक्षत्र को वेधना बाजारों में उतार-चढ़ाव की स्थिति को बनाएगा। 8 नवंबर को बुध का स्वाति नक्षत्र में आकर शतभिषा नक्षत्र को वेधना बाजारों में मंदी का वातावरण बनाएगा। 12 नवंबर को शुक्र का वृश्चिक राशि में आकर शनि से राशि संबंध बनाना चांदी में मंदी का सूचक बनाता है। 14 नवंबर को शुक्र का अनुराधा नक्षत्र में आकर अश्लेषा नक्षत्र को वेधना बाजारांे में मंदी का रूझान बनाए रखेगा। 15 नवंबर को राहु का हस्त नक्षत्र में आकर उ. भा. नक्षत्र को वेधना बाजारों में मंदी का ही दायक बनाता है। 16 नवंबर को सूर्य का वृश्चिक राशि में आकर शुक्र व शनि से राशि संबंध बनाना तथा मार्गशीर्ष संक्रांति का 30 मुहूर्ती में होना बाजारों के रूख में उतार-चढ़ाव अत्यधिक करेगा। व्यापारी वर्ग बाजार के वर्तमान रूख को विशेष ध्यान में रखें। 17 नवंबर को बुध का विशाखा नक्षत्र में आकर ध्ािनष्ठा नक्षत्र को वेधना मंदी की लहर ही चलाएगा। 19 नवंबर को सूर्य का अनुराधा नक्षत्र में आकर अश्लेषा, भरणी व विशाखा नक्षत्रों को वेधना बाजारों में उतार-चढ़ाव के बाद तेजी का रूझान बना देगा। 22 नवंबर को मंगल का उ.षा. नक्षत्र में आकर दक्षिण वेध से उ. फा. नक्षत्र को वेधना बाजारों में तेजी का माहौल बना देगा। 23 नवंबर को चंद्र दर्शन रविवार के दिन 15 मुहूर्ती में होना बाजारों में पूर्वरूख को बनाए रखेगा। 25 नवंबर को बुध का वृश्चिक राशि में आकर सूर्य, शुक्र व शनि से राशि संबंध बनाना बाजारों में तेजी का रूख ही दर्शाता है। 25 नवंबर को शुक्र का ज्येष्ठा नक्षत्र में आकर पुष्य नक्षत्र को वेधना बाजारांे में मंदी की लहर चला देगा। 26 नवंबर को बुध का अनुराधा नक्षत्र में आकर अश्लेषा नक्षत्र वेध करना पूर्वरूख को बरकरार रखेगा। 27 नवंबर को मंगल का अपनी उच्च राशि मकर राशि में आना गुरु से समसप्तक योग में आना बाजारों में पुनः तेजी का वातावरण बना देगा। 30 नवंबर को शनि का अनुराधा नक्षत्र में आकर अश्लेषा नक्षत्र को वेधना बाजारों में तेजी के रूख को बनाए रखेगा। गुड़ एवं खांड मासारंभ में 1 नवंबर को शनि का तुला राशि में अस्त हो जाना मंदी का वातावरण बनाएगा। 2 नवंबर को शनि का वृश्चिक राशि में आकर गुरु ग्रह से दृष्टिगत होना बाजारों में तेजी के बाद मंदी का रूख बनाएगा। 3 नवंबर को गुरु का अश्लेषा नक्षत्र के चैथे चरण में आना बाजारों में तेजी का रूझान बनाएगा। 4 नवंबर को शुक्र का विशाखा नक्षत्र में आकर शनि से नक्षत्र संबंध बनाना तथा सर्वतोभद्रचक्र द्वारा धनिष्ठा नक्षत्र को वेधना गुड़ व खांड में मंदी के बाद तेजी के योग को दर्शाता है। 5 नवंबर को मंगल का पू.षा. में आकर दक्षिण वेध से हस्त नक्षत्र को वेधना बाजारों में मंदी का रूख बना देगा। 6 नवंबर को सूर्य का विशाखा नक्षत्र में आकर धनिष्ठा नक्षत्र को वेधना बाजारों में पुनः तेजी का माहौल बनाएगा। 8 नवंबर को बुध का स्वाति नक्षत्र में आकर शतभिषा नक्षत्र को वेधना बाजारों में मंदी का रूझान बनाएगा। 12 नवंबर को शुक्र का वृश्चिक राशि में आकर शनि से राशि संबंध बनाना बाजारांे में पुनः तेजी का रूख बनाएगा। 14 नवंबर को शुक्र का अनुराधा नक्षत्र में आकर अश्लेषा नक्षत्र को वेधना बाजारों में मंदी का रूझान बनाए रखेगा। 15 नवंबर को राहु का हस्त नक्षत्र में आकर उ. भा. नक्षत्र को वेधना बाजारांे में पूर्वरूख का माहौल बनाएगा। 16 नवंबर को सूर्य का वृश्चिक राशि में आकर शुक्र व शनि से राशि संबंध बनाना तथा मार्गशीर्ष संक्रांति का 30 मुहूर्ती में होना बाजारों में तेजी का योग दर्शाता है। 17 नवंबर को बुध का विशाखा नक्षत्र में आकर धनिष्ठा नक्षत्र को वेधना मंदी की लहर चलाएगा। 19 नवंबर को सूर्य का अनुराधा नक्षत्र में आकर अश्लेषा, भरणी व विशाखा नक्षत्रों को वेधना बाजारों में उतार-चढ़ाव का वातावरण बनाएगा। 22 नवंबर को मंगल का उ.षा. नक्षत्र में आकर दक्षिण वेध से उ.फा. नक्षत्र को वेधना बाजारों में तेजी का रूझान बनाएगा। 24 नवंबर को बुध का वृश्चिक राशि में आकर सूर्य, शुक्र व शनि से राशि संबंध बनाना बाजारांे में तेजी के पूर्ववत रूख को बनाएगा। 25 नवंबर को शुक्र का ज्येष्ठा नक्षत्र में आकर पुष्य नक्षत्र को वेधना बाजारों में मंदी का रूझान बनाएगा। 26 नवंबर को बुध का अनुराधा नक्षत्र में आकर अश्लेषा नक्षत्र में आना बाजारों में मंदी का ही योग दर्शाता है। 27 नवंबर को मंगल का अपनी उच्च राशि मकर में आना तथा गुरु से समसप्तक योग में आना पुनः बाजारों में तेजी की लहर चलाएगा। 30 नवंबर को शनि का अनुराधा नक्षत्र में आकर अश्लेषा को वेधना बाजारों में तेजी के रूख को ही बनाए रखेगा। अनाज व दलहन मासारंभ में 1 नवंबर को शनि का तुला राशि में अस्त हो जाना गेहूं, जौ, चना, ज्वार-बाजरा इत्यादि अनाजों तथा मूंग, मौंठ, मसूर, अरहर इत्यादि दालवानों में मंदी के योग को दर्शाता है। 2 नवंबर को शनि का वृश्चिक राशि में आकर गुरु ग्रह से दृष्टिगत होना, यह योग बाजारों में मंदी का रूख ही बनाएगा। 3 नवंबर को गुरु का अश्लेषा नक्षत्र के चैथे चरण में आना बाजारांे में बदलाव के साथ तेजी की लहर ही लाएगा। 4 नवंबर को शुक्र का विशाखा नक्षत्र में आकर शनि से नक्षत्र संबंध बनाना तथा सर्वतोभद्रचक्र द्वारा धनिष्ठा नक्षत्र को वेधना अनाजों गेहूं, जौ, चना इत्यादि में तेजी का दायक ही बनाएगा। 5 नवंबर को मंगल का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में आकर दक्षिण वेध से हस्त नक्षत्र को वेधना बाजारों में मंदी का योग दर्शाता है। 6 नवंबर को सूर्य का विशाखा नक्षत्र में आकर धनिष्ठा नक्षत्र को वेधना बाजारों में तेजी का रूझान ही बनाएगा। 8 नवंबर को बुध का स्वाति नक्षत्र में आकर शतभिषा नक्षत्र को वेधना बाजारांे में मंदी का वातावरण बनाएगा। 12 नवंबर को शुक्र का वृश्चिक राशि में आकर शनि से राशि संबंध बनाना अनाजवानों तथा दालवानों में तेजी की लहर चलाएगा। 14 नवंबर को शुक्र का अनुराधा नक्षत्र में आकर अश्लेषा नक्षत्र को वेधना बाजारांे में मंदी का रूझान बनाएगा। 16 नवंबर को सूर्य का वृश्चिक राशि में आकर शुक्र व शनि से राशि संबंध बनाना तथा मार्गशीर्ष संक्रान्ति का 30 मुहूर्ती में होना बाजारों के रूख में उतार-चढ़ाव अत्यधिक करेगा। 19 नवंबर को सूर्य का अनुराधा नक्षत्र में आकर अश्लेषा, भरणी व विशाखा नक्षत्रों को वेधना बाजारांे में तेजी का वातावरण बनाएगा। 22 नवंबर को मंगल का उ.षा. नक्षत्र में आकर दक्षिण वेध से उ.फा. नक्षत्र को वेधना बाजारों में तेजी का माहौल ही बनाएगा। 23 नवंबर को चंद्र दर्शन रविवार के दिन 15 मुहूर्ती में होना बाजारांे में तेजी का माहौल ही बनाएगा। 23 नवंबर को चंद्र दर्शन रविवार के दिन 15 मुहूर्ती में होना बाजारांे में उतार-चढ़ाव का रूझान बनाएगा। 24 नवंबर को बुध का वृश्चिक राशि में आकर सूर्य, शुक्र व शनि से राशि संबंध बनाना तेजी का रूख ही बनाएगा। 25 नवंबर को शुक्र का ज्येष्ठा नक्षत्र में आकर पुष्य नक्षत्र को वेधना बाजारों में मंदी के योग को दर्शाता है। 26 नवंबर को बुध का अनुराधा नक्षत्र में आकर अश्लेषा नक्षत्र को वेधना बाजारांे में मंदी का रूख ही बनाएगा। 27 नवंबर को मंगल का अपनी उच्च राशि मकर में आना तथा गुरु से समसप्तक योग में आना बाजारों में पूर्ववत मंदी ही बनाएगा। 30 नवंबर को शनि का अनुराधा नक्षत्र में आकर अश्लेषा को वेधना अनाजों में अर्थात् गेहूं, जौ, चना, ज्वार, बाजरा इत्यादि मूंग, मौठ, मसूर, अरहर इत्यादि दालवानों में आगे तेजी का रूख बनाए रखेगा। घी व तेलवान मासारंभ में 1 नवंबर को शनि का तुला राशि में अस्त हो जाना तेल व घी में तेजी की लहर चलाएगा। 2 नवंबर को शनि का वृश्चिक राशि में आकर गुरु ग्रह से दृष्टिगत होना बाजारों में मंदी के योग को दर्शाता है। 3 नवंबर को गुरु का अश्लेषा नक्षत्र के चैथे चरण में आना बाजारांे में तेजी का रूझान बनाए रखेगा। 4 नवंबर को शुक्र का विशाखा नक्षत्र में आकर शनि से नक्षत्र संबंध बनाना तथा सर्वतोभद्रचक्र द्वारा धनिष्ठा नक्षत्र को वेधना बाजारों में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनाएगा। 5 नवंबर को मंगल का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में आकर दक्षिण वेध से हस्त नक्षत्र को वेधना बाजारों में तेजी का माहौल बनाएगा। 6 नवंबर को सूर्य का विशाखा नक्षत्र में आकर धनिष्ठा नक्षत्र को वेधना बाजारों में तेजी का रूझान ही बनाएगा। 8 नवंबर को बुध का स्वाति नक्षत्र में आकर शतभिषा नक्षत्र को वेधना बाजारों में मंदी का योग दर्शाता है। 12 नवंबर को शुक्र का वृश्चिक राशि में आकर शनि से राशि संबंध बनाना घी व तेलवान में तेजी का सूचक होगा। 14 नवंबर को शुक्र का अनुराधा नक्षत्र में आकर अश्लेषा नक्षत्र को वेधना बाजारों में मंदी का वातावरण ही बनाएगा। 15 नवंबर को राहु का हस्त नक्षत्र में आकर उ. भाद्रपद नक्षत्र को वेधना बाजारों में तेजी का ही रूझान बनाएगा। 16 नवंबर को सूर्य का वृश्चिक राशि में आकर शुक्र व शनि से राशि संबंध बनाना तथा मार्गशीर्ष संक्रांति का 30 मुहूर्ती में होना बाजारों में उतार-चढ़ाव के बाद मंदी के योग को ही दर्शाता है। 17 नवंबर को बुध का विशाखा नक्षत्र मंे आकर धनिष्ठा नक्षत्र को वेधना मंदी का माहौल ही बनाएगा। 19 नवंबर को सूर्य का अनुराधा नक्षत्र में आकर अश्लेषा, भरणी व विशाखा नक्षत्रों को वेधना बाजारों में तेजी की लहर चलाएगा। 22 नवंबर को मंगल का उ.षा. नक्षत्र में आकर दक्षिण वेध से उ.फा. नक्षत्र को वेधना बाजारांे में तेजी का माहौल ही बनाएगा। 24 नवंबर को बुध का वृश्चिक राशि में आकर सूर्य, शुक्र व शनि से राशि संबंध बनाना बाजारों में तेजी का रूख ही दर्शाता है। 25 नवंबर को शुक्र का ज्येष्ठा नक्षत्र में आकर पुष्य नक्षत्र को वेधना बाजारों में तेजी का लहर चलाएगा। 26 नवंबर को बुध का अनुराधा नक्षत्र में आकर अश्लेषा नक्षत्र में आना मंदी का माहौल बनाएगा। 27 नवंबर को मंगल का अपनी उच्च राशि मकर में आना तथा गुरु से समसप्तक योग में आना बाजारों में पुनः तेजी का वातावरण बना देगा। 30 नवंबर को शनि का अनुराधा नक्षत्र में आकर अश्लेषा को वेधना बाजारों में उतार-चढ़ाव के बाद तेजी की लहर चलाएगा।


शनि पर विशेष-दीपावली विशेषांक  नवेम्बर 2014

फ्यूचर समाचार के शनि पर विशेष दीपावली विशेषांक में अनेक रोचक व ज्ञानवर्धक लेख जैसे सम्पत्ति प्राप्ति के उपाय, दीपावली पर किये जाने वाले उपयोगी टोटके व उपाय आदि अनेक लेख सम्मिलित किये गये हैं। आवरण कथा में शनि देव पर एक परिचय के अतिरिक्त शनि की ढैया, साढ़ेसाती, दशा, गोचर फल व शनि के बारे में उनकी एक मित्र या शत्रु के रूप में धारणा, शनि की न्याय ज्ञान व वैराग्य के कारक के रूप में मान्यता आदि जैसे अनेक लेख हैं। अन्य लेखों में शनि के रत्न नीलम तथा शनि शमन के अन्य उपाय, व्रत व शनि के विभिन्न धामों के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी गई है। सत्य कथा, शनि व करियर, अध्यात्म, भागवत कथा, क्या आप जानते हैं?, टोटके, पंच-पक्षी, शेयर बाजार, ग्रह, स्थिति व व्यापार, विचार गोष्ठी, हैल्थ कैप्सूल,व विभिन्न वास्तु सम्बन्धी लेख पत्रिका की शोभा बढ़ा रहे हैं।

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