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अध्यात्म, धर्म आदि


क्या है- पूजा में आरती का महत्व

जुलाई 2013

व्यूस: 9311

पूजा-पाठ का एक महत्वपूर्ण अंग है, ‘आरती’ं शास्त्रों में आरती को ‘आरक्तिका’ ‘आरर्तिका’ और ‘नीराजन’ भी कहते हैं। किसी भी प्रकार की पूजा-पाठ, यज्ञ-हवन, पंचोपचार-षोडशोपचार पूजा आदि के बाद आरती अंत में की जाती है। पूजा-पाठ में जो त्रुट... और पढ़ें

देवी और देवअध्यात्म, धर्म आदिविविध

गर्भाधान संस्कार

अप्रैल 2014

व्यूस: 9211

भारतीय संस्कृति में कलिकाल में मनुष्य के सोलह संस्कारों का वर्णन किया है उसमें प्रथम संस्कार है। हमारे घर में उत्तम संतान का जन्म हो यही सभी चाहते हैं। हर मनुष्य की इच्छा होती है उसकी संतान उत्तम गुणयुक्त, संस्कारी, बलवान, आरोग्यव... और पढ़ें

अध्यात्म, धर्म आदिविविध

क्या है पितृ दोष अथवा पितृ ऋण?

सितम्बर 2014

व्यूस: 9116

लोगों की मृत्यु उपरांत विभिन्न कारणों से अथवा मोह माया वश जब उनकी आत्मा बंधन मुक्त न होकर मृत्यु लोक में ही घूमती रहती है और स्वयं मुक्त न होने के कारण इन पूर्वजों का अपने परिवार पर नकारात्मक अथवा किसी न किसी रूप में... और पढ़ें

ज्योतिषउपायअध्यात्म, धर्म आदिभविष्यवाणी तकनीक

विशिष्ट महत्व है काशी के कालभैरव का

जून 2013

व्यूस: 9115

भारत देश की सांस्कृतिक राजधानी और मंदिरों की महानगरी वाराणसी में मंदिरों की कोई कमी नहीं। काशी तीर्थ में उत्तर से लेकर दक्षिण तक और पूरब से लेकर पश्चिम तक एक से बढ़कर एक मान्यता प्राप्त पौराणिक देवालय हैं पर इनकी कुल संख्या कितनी ह... और पढ़ें

देवी और देवस्थानअध्यात्म, धर्म आदिविविधमन्दिर एवं तीर्थ स्थल

भगवान श्री गणेश और उनका मूलमंत्र

जुलाई 2013

व्यूस: 9007

हिंदुओं के सभी कार्यों का श्रीगणेश अर्थात शुभारंभ भगवान गणपति के स्मरण एवं पूजन से किया जाता है। भगवान श्री गणेश की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उनके पूजन एवं स्मरण का यह क्रम जीवन भर लगातार चलता रहता है। चाहे कोई व्रत, पर्व, उत्सव,... और पढ़ें

देवी और देवउपायअध्यात्म, धर्म आदिमंत्रयंत्र

शीघ्र विवाहार्थ व क्रोध शमन हेतु शावर मंत्र

अकतूबर 2014

व्यूस: 8691

भारतीय संस्कृति अनुसार जो विवाहादि कार्य सोलह वर्ष की अवस्था तक निश्चित रूप से संपन्न कर दिए जाते थे, आज भारत, भारत सरकार व स्व विचारधारा के अनुसार वह शुभ कार्य विलंब से पूर्ण किए जाते हैं। ऐसी स्थिति में वर व कन्या में हठधर्म... और पढ़ें

देवी और देवअन्य पराविद्याएंअध्यात्म, धर्म आदिमंत्र

ज्योतिष विज्ञान है, या अंध्विश्वास?

अप्रैल 2004

व्यूस: 8581

अभी तक परिचर्चा हुआ करती थीं कि विज्ञान वरदान है, या अभिशाप ? लेकिन समय के बदलते परिवेश में आज परिचर्चा का विषय भी बदला है और आजकल परिचर्चा का सबसे ज्वलंत विषय है - ज्योतिष विज्ञान है, या महज एक अंधविश्वास। यह बात इससे और भी साबित... और पढ़ें

ज्योतिषअध्यात्म, धर्म आदि

गुरु का माहात्म्य

जुलाई 2013

व्यूस: 8247

गुरु ही ब्रह्मा हैं, गुरु ही विष्णु हैं, गुरुदेव ही महेश भी हैं अर्थात् गुरु साक्षात् परम बह्म हैं। अतः हे गुरुदेव ! आपको शत्-शत् नमन। गुरु का माहात्म्य आदिकाल से ही स्थापित है। गुरु के माहात्म्य का बखान करना सूर्य को दीया दिखाने ... और पढ़ें

अध्यात्म, धर्म आदि

ध्रुव-चरित्र

दिसम्बर 2014

व्यूस: 8137

कर्मयोगी चक्रवर्ती सम्राट महाराज परीक्षित ने पूज्य गुरुदेव श्री शुकदेव जी से पूछा- मुनिवर ! ध्रुव के वनगमन का क्या कारण था? किस प्रकार ध्रुव भगवान की कृपा हुई और अविचल धाम की प्राप्ति हुई? श्री शुकदेवजी कहते हैं - राजन्। प्... और पढ़ें

देवी और देवअध्यात्म, धर्म आदिविविध

अश्वत्थ व्रत एवं महिमा

मई 2010

व्यूस: 8007

अश्वत्थ पीपल के वृक्ष का ही एक नाम है। पंचदेव वृक्षों में अश्वत्थ का स्थान सर्वोपरि है। प्रस्तुत है ब्रह्मांड पुराण में ब्रह्माजी द्वारा अश्वत्थ व्रत पूजा की महिमा का बखान का वर्णन..... और पढ़ें

देवी और देवउपायअध्यात्म, धर्म आदिपर्व/व्रत

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