अध्यात्म, धर्म आदि


मोक्षदायिनी नगरी काशी

मार्च 2010

व्यूस: 6282

वाराणसी विश्वविख्यात दर्शनीय पावन भूमि है। बड़ी प्राचीन मान्यता है कि काशी में मरण होने से मुक्ति हो जाती है। अनेक संत-महात्मा इसी कारण वाराणसी में शरीर त्याग करना चाहते हैं प्रस्तुत है मोक्षदायिनी नगरी वाराणसी की आध्यामिक महत्ता क... और पढ़ें

देवी और देवस्थानअध्यात्म, धर्म आदिमन्दिर एवं तीर्थ स्थल

भगवती भ्रामरी देवी व्रत

फ़रवरी 2011

व्यूस: 6180

शत्रुओं के पराभव के लिए शास्त्रों में अनेक उपायों का उल्लेख किया गया है। ऐसा ही एक दिव्य व्रत है भगवती भ्रामरी देवी का। आइए जानें इस व्रत की कथा और इससे संबंधित अन्यान्य विवरण।... और पढ़ें

देवी और देवअध्यात्म, धर्म आदिपर्व/व्रत

वास्तु के दृष्टिकोण से वैष्णो देवी मंदिर

अप्रैल 2014

व्यूस: 6117

पवित्र भारत भूमि का कण कण देवी-देवताओं के चरण रज से पवित्र है। इसलिए भारत में हर जगह तीर्थ है। परन्तु कुछ तीर्थ ऐसे भी हैं जो भारत ही नहीं पूरे विष्व की धर्मपरायण जनता को अपनी ओर आकर्षित करते हंै। इन तीर्थों के दर्षन हर वर... और पढ़ें

फेंग शुईदेवी और देवस्थानअध्यात्म, धर्म आदिवास्तुभवनमन्दिर एवं तीर्थ स्थल

श्राद्ध कर्म: कब, क्यों और कैसे?

सितम्बर 2014

व्यूस: 6029

भारतीय शास्त्रों में ऐसी मान्यता है कि पितृगण पितृपक्ष में पृथ्वी पर आते हैं और 15 दिनों तक पृथ्वी पर रहने के बाद अपने लोक लौट जाते हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि पितृपक्ष के दौरान पितृ अपने परिजनों के आस-पास रहते ... और पढ़ें

ज्योतिषउपायअध्यात्म, धर्म आदिभविष्यवाणी तकनीक

बिहार का खजुराहो - नेपाली मंदिर

अप्रैल 2013

व्यूस: 5900

आदि-अनादि काल से सामाजिक प्रकाश स्तम्भ की भांति मंदिरों का अस्तित्व भारतीय समाज में विद्यमान रहा है। समाज को सही, स्वच्छ व् सटीक मार्गदर्शन देने वाले इन देवालयों में प्राकृतिक देवों के अलावा विभिन्न देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थाप... और पढ़ें

देवी और देवस्थानअध्यात्म, धर्म आदिमन्दिर एवं तीर्थ स्थल

भारत के चार धाम

अप्रैल 2016

व्यूस: 5850

आदि गुरु ने भारत के चारों दिशाओं में चार धामों की स्थापना की। ये चार धाम निम्न हैं: जगन्नाथपुरी यह धाम पूर्व में स्थित है। ‘जगन्नाथ’ का अर्थ है - ‘‘जगत के स्वामी’’ जो कि श्रीहरि के अवतार श्रीकृष्ण भगवान हैं। यह पूर्व दिशा म... और पढ़ें

देवी और देवअध्यात्म, धर्म आदिपर्व/व्रत

द्वादश ज्योतिर्लिंग के प्रतीक श्री पशुपति नाथ

फ़रवरी 2010

व्यूस: 5839

नेपाल में नागमति के किनारे स्थित कांतिपुर में पशुपतिनाथ विराजमान है। पशुपतिनाथ का मंदिर धर्म, कला, संस्कृति की दृष्टि से अद्वितीय है। इस मंदिर के दर्शन से मनुष्य का अगला जन्म पशु योनि में नहीं होता ऐसा लोगों का विश्वास है। चलिए चल... और पढ़ें

देवी और देवस्थानअध्यात्म, धर्म आदिमन्दिर एवं तीर्थ स्थल

माघामास - महात्म्य एवं व्रत

जनवरी 2010

व्यूस: 5717

भारतीय संवत्सर का ग्यारहवां चान्द्रमास और दसवां सौरमास ‘माघ' कहलाता है। इस मास में प्रयाग, काशी, कुरुक्षेत्र, हरिद्वार तथा अन्य तीर्थ स्थलों और नदियों में स्नान का विशेष महत्व है। पुराणानुसार इस मास का धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व... और पढ़ें

देवी और देवअध्यात्म, धर्म आदिपर्व/व्रत

महाकुम्भ का महात्म्य

फ़रवरी 2013

व्यूस: 5618

हिन्दुओं के धार्मिक ग्रंथों में अनेक प्राचीन धार्मिक उत्सवों के प्रमाण मिलते हैं। उनमें कुम्भ एवं महाकुम्भ भी हैं। इस अवसर पर भव्य एवं विशाल मेला लम्बे समय तक चलता हैं। जहाँ, मनोरंजन के साथ साथ, मानव चरित्र को आवश्यक विधियों की ओर... और पढ़ें

देवी और देवस्थानअध्यात्म, धर्म आदिपर्व/व्रत

अन्नप्राशन संस्कार

अकतूबर 2014

व्यूस: 5586

जन्म से पूर्व बालक को नौ माह तक माता के गर्भ में रहना पड़ता है। इस कारण माता के गर्भ में मलिन-भक्षणजन्य दोष बालक में आ जाते हैं। इस संस्कार के द्वारा बालक में उत्पन्न इन दोषों का नाश हो जाता है। इस संदर्भ में कहा भी गया... और पढ़ें

अध्यात्म, धर्म आदिविविध

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