अध्यात्म, धर्म आदि


मरने से पहले की सोच

आगस्त 2010

व्यूस: 5104

मेरे पास लोग आते हैं। वे कहते हैं - हमें संन्यास लेना है; लेकिन जरा बेटी की शादी हो जाए; क्योंकि अगर शादी न हुई और हमने संन्यास ले लिया तो अड़चनें आ जाएंगी, शादी करना मुश्किल हो जाएगा।... और पढ़ें

अध्यात्म, धर्म आदिविविध

सीमन्तोन्नयन संस्कार

जून 2014

व्यूस: 5056

तीसरा संस्कार ‘सीमन्तोन्नयन’ है। गर्भिणी स्त्री के मन को सन्तुष्ट और अरोग रखने तथा गर्भ की स्थिति को स्थायी एवं उत्तरोत्तर उत्कृष्ट बनते जाने की शुभाकांक्षा-सहित यह संस्कार किया जाता है। समय-पुंसवन वत् प्रथमगर्भे षष्ठ... और पढ़ें

देवी और देवअध्यात्म, धर्म आदिविविध

संक्रांति व्रत

जून 2011

व्यूस: 5035

सूर्य देव के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश के समय को संक्रांति कहा जाता है। १५.६.२०११ को ज्येष्ठ मास में सूर्य वृष राशि से मिथुन राशि में प्रवेश कर रहे हैं। संक्रांति में की गयी सूर्य पूजा से अनिष्ट, अस्त, वक्री व नीच सूर्य का ... और पढ़ें

अध्यात्म, धर्म आदिपर्व/व्रत

देवताओं को हुआ जब अहंकार

मई 2013

व्यूस: 4972

संसार में किसी का कुछ नहीं, भौतिक विषयों को व्यर्थ में अपना समझना मूर्खता है, क्योंकि अपना होते हुए भी, कुछ भी अपना नहीं होता। कुछ रुपये दान करने वाला यदि यह कहे कि उसने ऐसा विशेष कार्य किया है, तो उससे बड़ा मूर्ख और कोई नहीं औ... और पढ़ें

देवी और देवअध्यात्म, धर्म आदिविविध

पुनर्जन्म : एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण

सितम्बर 2007

व्यूस: 4942

एक ऊंची सी समुद्र किलाहर दूसरी छोटी लहर से इठलाकर बोली की मुझे देखो, मैं कितनी बड़ी और ताकतवर हूं, और फिर कुछ भी क्षणों उपरांत वह समुद्र के किनारे पड़े एक पत्थर से टकराई और शांत हों गई। उसी के साथ फिर दूसरी लहर आई और वह भी पत्थर से... और पढ़ें

ज्योतिषअध्यात्म, धर्म आदिज्योतिषीय योगविविध

पितृ दोष

सितम्बर 2014

व्यूस: 4916

हमारे पूर्वज या पारिवारिक सदस्य जिनकी मृत्यु हो चुकी है उन्हें पितृ कहते हैं। पितृ हमारे व ईश्वर के बीच की एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं। इनकी क्षमताएं व ताकत ईश्वरीय शक्ति जैसी होती है। पितृ मानव और ईश्वर के बीच एक योनि है जिसमें मरणोपरा... और पढ़ें

ज्योतिषउपायअध्यात्म, धर्म आदिभविष्यवाणी तकनीक

रुद्राक्ष की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

मई 2014

व्यूस: 4904

हमारे शास्त्रकारों ने एक मत से यह निष्कर्ष प्रस्तुत किया है कि वास्तव में भगवान् शिव ने रुद्राक्ष के रूप में एक अद्भुत उपहार हमें दिया है। न केवल इसका दर्शन सुखकर और पुण्यवर्धक होता है, बल्कि इसका गले में विद्यमान रहना भी साधक... और पढ़ें

उपायअध्यात्म, धर्म आदिरूद्राक्ष

बुधवार व्रत

जुलाई 2010

व्यूस: 4853

व्यापार में वृद्धि, बुद्धि की कुशाग्रता एवं वाकशक्ति में प्रवीणता के लिए बुध ग्रह की अर्चना करनी चाहिए। बुधवार की व्रत व दान करने से बुधदेव प्रसन्न होते हैं।... और पढ़ें

देवी और देवअध्यात्म, धर्म आदिपर्व/व्रत

राजा प्राचीन बर्हि को नारदजी द्वारा आत्मज्ञान

मार्च 2015

व्यूस: 4795

चक्रवर्ती सम्राट के पद का मोह त्यागकर श्री शुकदेव बाबा जी के चरणों में स्थित महाराज परीक्षित् ने पूछा - भगवन्! पृथु वंश की राज्य परंपरा व भक्त श्रेष्ठ नारदजी द्वारा राजा प्राचीन बर्हिं को दिए आत्म विषयक ज्ञान का कृपा करके श्रवण... और पढ़ें

देवी और देवअध्यात्म, धर्म आदिविविध

होलिकोत्सव (होली)

मार्च 2013

व्यूस: 4782

विराट पुरुष के मुख से ब्राहमण भुजाओं से क्षत्रिय, जांघों से वैश्य और पैरों से शूद्रों की उत्पति हुई हैं। इनके नाम से ही चार वर्णों की प्रधानता हैं। और इनके चार मुख्य त्यौहार क्रमश: रक्षा बंधन, दशहरा, दीपावली और होली हैं।... और पढ़ें

घटनाएँदेवी और देवअध्यात्म, धर्म आदिपर्व/व्रत

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