पंचांग इतिहास - विकास - गणना विधि

अप्रैल 2010

व्यूस: 20470

इस अनुपम विशेषांक में पंचांग के इतिहास विकास गणना विधि, पंचांगों की भिन्नता, तिथि गणित, पंचांग सुधार की आवश्यकता, मुख्य पंचांगों की सूची व पंचांग परिचय आदि अत्यंत उपयोगी विषयों की विस्तृत चर्चा की गई है। पावन स्थल नामक स्तंभ के अं... और पढ़ें

ज्योतिषखगोल-विज्ञानआकाशीय गणितपंचांग

चंद्र पृथ्वी का एक मात्र उपग्रह

मार्च 2008

व्यूस: 18155

चंद्र देव का वर्ण गौर है। इनके वस्त्र, अश्व और रथ तीनों स्वेत वर्ण के है। ये सुंदर रथ पर कमल के आसान पर विराजमान है। इनके सिर पर सुदंर स्वर्ण मुकुट तथा गले में मोतियों की माला है। इनके एक हाथ में गदा है। और दूसरा हाथ वरदान की मुद्... और पढ़ें

ज्योतिषखगोल-विज्ञान

ब्रह्मांड की उत्पत्ति

आगस्त 2012

व्यूस: 11666

संपूर्ण चराचर भूतगण ब्रह्मा के दिन के प्रवेशकाल में अव्यक्त से अर्थात् ब्रह्मा के सूक्ष्म शरीर से उत्पन्न होते हैं और ब्रह्मा की रात्रि के प्रवेशकाल में उस अव्यक्त नामक ब्रह्मा के सूक्ष्म शरीर में लीन हो जाते हैं।... और पढ़ें

ज्योतिषखगोल-विज्ञानपंचांग

ब्रह्म सृष्टि विज्ञान

अकतूबर 2008

व्यूस: 9954

विश्व ब्रह्मांड का रहस्य कौतूहल का विषय है। आज का विज्ञान इन रहस्यों को उजागर करने में प्रयत्नशील है। सृष्टि का प्रादुर्भाव अण्ड विस्फोट से होने की जानकारी आज के वैज्ञानिकों को सन 1926-27 में हुई, जिसे बिग बैग की संज्ञा देकर उन्हो... और पढ़ें

उपायअध्यात्म, धर्म आदिखगोल-विज्ञानविविध

वक्री ग्रहों का शुभाशुभ प्रभाव

अप्रैल 2015

व्यूस: 7730

आकाश में जब कोई ग्रह वक्री होता है तो उस काल में जन्मे सभी प्राणियों मनुष्य, पशु, पक्षी, जलचर, कीट, वृक्षादि पर एवं संपूर्ण भूमंडल (मेदनीय ज्योतिष) पर समान रूप से प्रभाव पड़ता है। यहां तक कि गोचरीय स्थिति में ग्रहांे की वक्रत... और पढ़ें

ज्योतिषखगोल-विज्ञानग्रहभविष्यवाणी तकनीक

तारीख से वार की गणना और उसका आधार

जनवरी 2015

व्यूस: 7147

वार, पंचांग के पाँच अंगों में से एक है और इसकी गणना का एक आधार है। इसी आधार से कुछ सूत्र भी बने हैं और इस सरल से आधार को समझने के बाद आप भी अपने सूत्र बना सकते हैं। आइये, सर्वप्रथम हम वार के आधार को समझें: कैलेंडर के आरंभ की ... और पढ़ें

ज्योतिषखगोल-विज्ञानग्रहणपंचांग

ज्योतिष में शिक्षा और अनुसंधान

नवेम्बर 2010

व्यूस: 6559

ज्योतिष वेदांग है। वेदों की रचना स्वयं ब्रह्मा ने की थी। तब से वेद श्रवण-कथन द्वारा एक से दूसरे के पास और तब से आज हमारे पास पहुंचे हैं।... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय विश्लेषणज्योतिषीय योगखगोल-विज्ञानशिक्षाभविष्यवाणी तकनीक

ज्योतिष में सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण

अप्रैल 2006

व्यूस: 6092

प्रश्न: ज्योतिष में सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण का क्या महत्व है ? ग्रहण के पूर्व या ग्रहण के समय पूजा आदि का क्या विधान है? सूतक क्या है? इसमें कौन से कर्म वर्जित हैं? इस दौरान किन ग्रहों का उपाय, मंत्र जप आदि करना शुभ है?... और पढ़ें

ज्योतिषखगोल-विज्ञानभविष्यवाणी तकनीक

वक्री ग्रह

अप्रैल 2015

व्यूस: 6090

जब पृथ्वी ठ स्थान पर आती है, तब पृथ्वी से शनि 180° पर नजर आता है एवं जब पृथ्वी ब् स्थान पर पहुंचती है, तो शनि 180° से कम अंश पर दृश्य होता है।... और पढ़ें

ज्योतिषखगोल-विज्ञानग्रह

पंचांग - सुधार आवश्यक क्यों?

अप्रैल 2010

व्यूस: 5919

इस अनुपम विशेषांक में पंचांग के इतिहास विकास गणना विधि, पंचांगों की भिन्नता, तिथि गणित, पंचांग सुधार की आवश्यकता, मुख्य पंचांगों की सूची व पंचांग परिचय आदि अत्यंत उपयोगी विषयों की विस्तृत चर्चा की गई है। पावन स्थल नामक स्तंभ के अं... और पढ़ें

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