लाल किताब वर्षफल

लाल किताब वर्षफल  

व्यूस : 17582 | सितम्बर 2015

लाल किताब वर्षफल बनाने का ढंग वैदिक ज्योतिष से बिल्कुल अलग है। वैदिक ज्योतिष में वर्षफल में सूर्य जन्मकालीन स्थिति पर ही आ जाता है। वर्ष में सूर्य के अंश, कला, विकला वही होते हैं जो जन्म के होते हैं।

लाल किताब में वर्षफल बनाने की विधि भिन्न है। इसमें 120 वर्ष के लिए ंदी गई तालिका के अनुसार वर्षफल में ग्रह स्थिति तय की जाती है। जन्मकुंडली में किसी एक घर में बैठे हुए ग्रह तालिकानुसार किसी अन्य घर में रख दिए जाते हैं। वर्ष कुंडली में कोई भी ग्रह किसी भी घर में आ सकता है। हो सकता है वर्ष कुंडली में सूर्य, बुध आमने-सामने हों या राहु-केतु अगल-बगल में बैठे हों।

जन्म कुंडली और वर्ष कुंडली दोनों में प्रथम खाने में 1 यानि प्रथम भाव लिखा जाता है और इस प्रकार 12 खानों में 1 से 12 लिख दिया जाता है।

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उदाहरण के लिए एक कुंडली लेते हैं। 30-3-1970 प्रातः 07:49, शिमला। लाल किताब के अनुसार इनकी कुंडली इस प्रकार बनती है -


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अब 2015 में 45 वर्ष पूरे हो गए और 46वां वर्ष चल रहा है। 46वें वर्ष की ग्रह स्थिति जानने के लिए तालिकानुसार निम्न स्थिति बनती है -

जन्मकुंडली 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12
46वां वर्ष 10 12 2 7 5 3 11 6 4 8 9 1

खाना नंबर 1 के ग्रह खाना नंबर 10 में जाएंगे। खाना नं. 2 के 12 में व 3 के 2 में आदि। इस प्रकार 46वें वर्ष की वर्षकुंडली निम्न प्रकार से बनती है ध्यान दें कि जो ग्रह जन्मकुंडली में इकट्ठे होते हैं वे वर्ष कुंडली में भी इकट्ठे होते हैं। उनके केवल खाना नंबर बदल जाते हैं।

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वर्ष कुंडली में फलादेश व उपाय के नियम लगभग वही हैं जो जन्मकुंडली में होते हैं लेकिन जन्मकुंडली में खाना नंबर चार में कोई ग्रह अशुभ नहीं माना जाता।

इसलिए खाना नंबर चार में स्थित ग्रह का उपाय में अधिक महत्व नहीं होता लेकिन जन्मकुंडली में खाना नंबर चार का पापी ग्रह जब वर्षफल में भी चैथे घर में ही आ जाता है तो उस वर्ष में उसका उपाय आवश्यक हो जाता है। यदि सूर्यादि ग्रह वर्षफल में अशुभ हो जाएं तो निम्नांकित उपाय 43 दिन तक करने से ग्रह दोष दूर हो जाते हैं:

वर्षफल में सूर्यादि नवग्रहों का विभिन्न भावों में स्थिति के अनुसार उपाय

1शुद्ध चांदी की गोली पास रखें।74 केले 4 दिन चलते पानी में बहायें।
सूर्य चंद्र
भाव उपाय भाव उपाय
1 सूर्य को चीनी डाल कर अघ्र्य दें। 1 माता को उपहार देकर आशीर्वाद लें।
2 नारियल, तेल, बादाम धर्म स्थान में दें। 2 माता से चावल-चांदी लेकर सफेद कपड़े में बांध कर अपने पास रखें।
3 माता स्त्री को उपहार दे कर आशीर्वाद लें। 3 वजन का दसवें हिस्से के बराबर कन्याओं को हलवा देकर आशीर्वाद लें।
4 शरीर पर शुद्ध सोना धारण करें। 4 43 दिन दूध का दान करें।
5 बंदरों को गुड़ और चना/केले खिलायें। 5 पहाड़ की सैर करें।
6 बंदर को गेहूँ को भुन कर गुड़ लगा कर खिलायें। 6 6 दिन नाश्ते में कच्चा पनीर खायें।
7 चीनी खा कर पानी पीकर काम पर जायें। 7 वजन बराबर 9 गुणा 12 दरिया का पानी/चावल/ चांदी घर में रखें।
8 बडे़ भाई, मामा को उपहार दे कर आशीर्वाद लें। 8 8 दिन नाश्ते में पनीर खायें।
9 43 दिन धर्म स्थान जायें। 9 तीर्थ यात्रा करें।
10 सिर सफेद-शरबती टोपी/पगड़ी से ढंककर रखें। 10 10 दिन नाश्ते में कच्चा पनीर खायें।
11 रेत का तकिया बना कर रात को सिर के नीचे रखें। 11 भैरव मंदिर में साढ़े पांच किलो दूध चढ़ायें।
12 भूरी चींटियों को 430 ग्राम त्रिचैली डालें। 12 नीम का पानी घर पर रखें।
  मंगल   बुध
1 बड़े बहन-भाई को उपहार देकर आशीर्वाद लें। 1 ज्योतिष, कर्म-कांड में रूचि रखें।
2 बच्चों को दोपहर को भुनी गेहूँ को गुड़ लगाकर बांटे। 2 दूध, चावल धर्म स्थान में दें।
3 चांदी की अंगूठी बायें हाथ की अनामिका अंगुली में पहनें। 3 कन्याओं को हलवा देकर आशीर्वाद लें।
4 बंदर को गुड़-चना/केला खिलायें। 4 101 ढाक के पत्ते दूध से धोकर जल प्रवाह करें।
5 43 दिन नीम के वृक्ष को पानी से सींचें। 5 तांबे का पैसा सफेद धागे में पिरोकर गले में पहनें।
6 घर में वजन के बराबर गेहूँ रखें। 6 चांदी की बेजोड अंगूठी बायें हाथ में पहनें।
7 भतीजा-भतीजी को उपहार दें। 7 हीरा/पन्ना की अंगूठी पहनें।
8 मीठी रोटी तंदूर में लगा कर कुत्तों को खिलाये। 8 तांबे की बर्तन में मँूग भरकर जल प्रवाह करें ।
9 भाभी को उपहार दें.। 9 गाय, कुत्ते और कौवे को भोजन का हिस्सा दें।
10 काले-काने, निःसंतान व्यक्ति को कोई चीज उपहार में दें। 10 सरसों का तेल दान करें।
11 3 कुत्तों को भोजन का हिस्सा खिलायें। 11 तांबे का पैसा सफेद धागे में पिरोकर गले में पहनें।
12 दूध वाला हलवा आम जनता में बांटें। 12 खाली घड़ा ढक्कन देकर जल प्रवाह करें।
  गुरु   शुक्र
भाव उपाय भाव उपाय
1 पिता, गुरु को पुरस्कार देकर आशीर्वाद प्राप्त करें। 1 जौ, सरसों, चरी, सतनाजा दान दें।
2 मकान में फूलों वाले गमले लगायें। 2 आलू, दही का धर्म स्थान में दान करें।
3 9 कन्याओं को हलवा देकर आशीर्वाद लें। 3 राग-रंग में रूचि न रखें।े
4 कुल पुरोहित को भोजन करवाकर आशीर्वाद लें। 4 बछडे़ वाली गाय को चारा खिलायंे।
5 5 दिन धर्म मंदिर की सफाई करें। 5 गऊशाला मंे चारा दान करें।
6 मुर्गियों को मक्की का दलिया खिलायें। 6 शुद्ध ठोस चांदी पास रखें।
7 शुद्ध सोना पीले कपड़े में बांध कर रखें। 7 सफेद गायों को चारा खिलायें।
8 आलू, दही, देसी घी धर्म स्थान में दें। 8 तांबे का पैसा या फूल गंदे नाले में डालें।
9 किसी भी स्थान की तीर्थ यात्रा करें। 9 अल्युमिनियम के बर्तनों का प्रयोग न करें।
10 पीपल का वृक्ष लगायें। 10 गोदान करें।
11 पीला रूमाल पास रखें। 11 सरसों का तेल दान करें।
12 गुरु-साधु की सेवा करें। 12 धर्म स्थान में जाकर देसी घी की जोत जलायें।
  शनि   राहु
1 वट के वृक्ष की जड़ के दूध का तिलक करें। 1 गेहूँ, गुड़, तांबा धर्म स्थान में दें।
2 नंगे पैर धर्म स्थान में जायें। 2 चांदी की गोली सफेद धागे में गले में पहनें।
3 भांजा/दोहता, जीजा और साले को उपहार दें। 3 शुद्ध चांदी का कड़ा दायें हाथ में पहनें।
4 कुएं में दूध डालें। 4 430 ग्राम धनिया जल प्रवाह करें।
5 शुद्ध सोना पहनें। 5 चांदी का हाथी घर में स्थापित करें।
6 सांप को दूध पिलायें। 6 6 सिक्के की गोलियां पास रखें।
7 बांसुरी में चीनी भर कर वीराने में दबायें। 7 शुद्ध चांदी की 2 ईंटें घर में लाकर रखें।
8 चांदी का चैरस टुकड़ा पास रखें। 8 सिक्के के 8 पीस चैरस जल प्रवाह करें।
9 हल्दी/केसर का तिलक करें। 9 शरीर पर शुद्ध सोना पहनें।
10 दस अंधों को भोजन खिलायें। 10 सिर पर सफेद या शरबती पगड़ी बांधें।
11 घर में शुद्ध चांदी की ईंट रखें। 11 4 सूखे नारियल जल प्रवाह करें।
12 43 दिन तख्त पोश पर शयन करें। 12 वजन के बराबर कोयला जल प्रवाह करें।
केतु
2 शुद्ध सोने की अंगूठी, कड़ा पहनें। 8 कुत्तों को भोजन का हिस्सा खिलायें।
3 शरीर पर शुद्ध सोना पहनें। 9 कानों में सोने की ननतियां पहनें।
4 चने की दाल-केसर धर्म स्थान में दें। 10 शुद्ध सोने की ईंटें घर पर रखें।
5 हल्दी/केसर का तिलक करें। 11 चांदी का हाथी घर में स्थापित करें।
6 शुद्ध सोना शरीर पर पहनें। 12 काले-सफेद कुत्ते को भोजन का हिस्सा खिलायें।

उपाय करने के विशेष नियम

  1. सभी उपाय दिन (सूर्योदय के बाद सूर्यास्त से पहले) के समय करें।
  2. बारिश वाले दिन या बादल छाये हों तो उपाय नहीं किया जाता। एक दिन में केवल एक ही उपाय हो सकता है।
  3. किसी और के लिए उसके खून का रिश्तेदार भी उसके लिए उपाय कर सकता है।

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लाल किताब विशेषांक  सितम्बर 2015

लाल किताब ज्योतिषीय फलादेश की अन्यान्य पद्धतियों में से सर्वोत्तम एवं विश्वसनीय पद्धति है। भारत में लाल किताब का आगमन 1930 के दशक में एक भारतीय ब्रिटिश अधिकारी पं. रूप चन्द जोशी के प्रयासों के फलस्वरूप माना जाता है। पं. रूप चन्द जोशी ने फलकथन की प्राचीन विधा की खोज कर इसे पुनस्र्थापित किया। लालकिताब के महान ज्ञाताओं के द्वारा यह अनुभवसिद्ध है कि लाल किताब के द्वारा अनुशंसित उपाय अशुभ ग्रहों के अशुभत्व को समाप्त कर शुभ फलदायी परिणाम देते हैं। यही नहीं इसके अलावा हर कार्य के लिए भी सटीक एवं उपयुक्त उपायों की चर्चा लाल किताब में की गइ्र्र है जैसे विवाह, सन्तान इत्यादि। फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में अनेक विषयों पर विद्वान ज्योतिषियों के आलेख उद्धृत हैं। फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में समाविष्ट कुछ अति महत्वपूर्ण आलेख हैं: लाल किताब एक परिचय, लाल किताब के विशेष नियम, पितृ ऋण, मातृ ऋण आदि की व्याख्या एवं फलादेश, लाल किताब के उपायों के प्रकार, ऋण एवं उनके उपाय, लाल किताब उपाय- जन्मकुण्डली के बिना भी मददगार, दान, मकान एवं धर्म स्थल संबंधी नियम, घरों के अनुसार ग्रहों का प्रभाव आदि। दूसरे अन्य महत्वपूर्ण एवं प्रशंसनीय आलेखों में शामिल हैं- ईशा का नन्हा विभोर, दी फूल, पंच पक्षी इत्यादि।

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