लाल किताब वर्षफल

लाल किताब वर्षफल  

लाल किताब वर्षफल बनाने का ढंग वैदिक ज्योतिष से बिल्कुल अलग है। वैदिक ज्योतिष में वर्षफल में सूर्य जन्मकालीन स्थिति पर ही आ जाता है। वर्ष में सूर्य के अंश, कला, विकला वही होते हैं जो जन्म के होते हैं। लाल किताब में वर्षफल बनाने की विधि भिन्न है। इसमें 120 वर्ष के लिए दी गई तालिका (पृष्ठ संख्या 52-53 देखें) के अनुसार वर्षफल में ग्रह स्थिति तय की जाती है। जन्मकुंडली में किसी एक घर में बैठे हुए ग्रह तालिकानुसार किसी अन्य घर में रख दिए जाते हैं। वर्ष कुंडली में कोई भी ग्रह किसी भी घर में आ सकता है। हो सकता है वर्ष कुंडली में सूर्य, बुध आमने-सामने हो या राहु-केतु अगल-बगल में बैठे हों। जन्म कुंडली और वर्ष कुंडली दोनों में प्रथम खाने में 1 यानि प्रथम भाव लिखा जाता है और इस प्रकार 12 खानों में 1 से 12 लिख दिया जाता है। उदाहरण के लिए एक कुंडली लेते हैं। 30-3-1970 प्रातः 07ः49, शिमला। लाल किताब के अनुसार इनकी कुंडली इस प्रकार बनती है- अब 2015 में 45 वर्ष पूरे हो गए और 46वां वर्ष चल रहा है। 46वें वर्ष की ग्रह स्थिति जानने के लिए तालिकानुसार निम्न स्थिति बनती है - खाना नंबर 1 के ग्रह खाना नंबर 10 में जाएंगे। खाना नं. 2 के 12 में व 3 के 2 में आदि। इस प्रकार 46वें वर्ष की वर्षकुंडली निम्न प्रकार से बनती है - ध्यान दें कि जो ग्रह जन्मकुंडली में इकट्ठे होते हैं वे वर्ष कुंडली में भी इकट्ठे होते हैं। उनके केवल खाना नंबर बदल जाते हैं। वर्ष कुंडली में फलादेश व उपाय के नियम लगभग वही हैं जो जन्मकुंडली में होते हैं। लेकिन जन्मकुंडली में खाना नंबर चार में कोई ग्रह अशुभ नहीं माना जाता। इसलिए खाना नंबर चार में स्थित ग्रह का उपाय में अधिक महत्व नहीं होता लेकिन जन्मकुंडली में खाना नंबर चार का पापी ग्रह जब वर्षफल में भी चैथे घर में ही आ जाता है तो उस वर्ष में उसका उपाय आवश्यक हो जाता है। यदि सूर्यादि में जो ग्रह वर्षफल में मंदे (अशुभ) हो जाएं तो निम्नांकित उपाय 43 दिन तक करने से ग्रह दोष दूर हो जाते हैं: वर्षफल में सूर्यादि ग्रहों के विभिन्न भावों में स्थिति के अनुसार उपाय सूर्य भाव उपाय 1 सूर्य को चीनी डाल कर अघ्र्य दें। 2 नारियल, तेल, बादाम धर्म स्थान में दें। 3 माता स्त्री को उपहार दे कर आशीर्वाद लें। 4 शरीर पर शुद्ध सोना धारण करें। 5 बंदरों को गुड़ और चना/केले खिलायें। 6 बंदर को गेहूँ को भुन कर गुड़ लगा कर खिलायें। 7 चीनी खा कर पानी पीकर काम पर जायें। 8 बडे़ भाई, मामा को उपहार दे कर आशीर्वाद लें। 9 43 दिन धर्म स्थान जायें। 10 सिर सफेद-शरबती टोपी/पगड़ी से ढंककर रखें। 11 रेत का तकिया बना कर रात को सिर के नीचे रखें। 12 भूरी चींटियों को 430 ग्राम त्रिचैली डालें। चंद्र भाव उपाय 1 माता को उपहार देकर आशीर्वाद लें। 2 माता से चावल सफेद कपड़े में बांध कर अपने पास रखें। 3 वजन का दसवें हिस्से के बराबर कन्याओं को हलवा खिलाएं। 4 43 दिन दूध का दान करें। 5 पहाड़ की सैर करें। 6 6 दिन नाश्ते में कच्चा पनीर खायें। 7 वजन से 9 गुणा 12 दरिया का पानी घर में रखें। 8 8 दिन नाश्ते में पनीर खायें। 9 तीर्थ यात्रा करें। 10 10 दिन नाश्ते में कच्चा पनीर खायें। 11 भैरव मंदिर में साढ़े पांच किलो दूध चढ़ायें। 12 नीम का पानी घर पर रखें। मंगल भाव उपाय 1 बड़े बहन-भाई को उपहार देकर आशीर्वाद लें। 2 बच्चों को दोपहर के समय भुनी गेहूँ को गुड़ लगा कर बांटे। 3 चांदी की बेजोड़ अंगूठी बायें हाथ की अनामिका में पहनें। 4 बंदर को गुड़-चना/केला खिलायें। 5 43 दिन नीम के वृक्ष को पानी से सींचें। 6 घर में वजन के बराबर गेहूँ रखें। 7 भतीजा-भतीजी को उपहार दें। 8 मीठी रोटी तंदूर में लगा कर कुत्तों को खिलायंे। 9 भाभी को उपहार दें.। 10 काले-काने, निःसंतान व्यक्ति को कोई चीज उपहार में दें। 11 3 कुत्तों को भोजन का हिस्सा खिलायें। 12 दूध वाला हलवा आम जनता में बांटें। बुध भाव उपाय 1 ज्योतिष, कर्म-कांड में रूचि रखें। 2 दूध, चावल धर्म स्थान में दें। 3 कन्याओं को हलवा देकर आशीर्वाद लें। 4 101 ढाक के पत्ते दूध से धोकर जल प्रवाह करें। 5 तांबे का पैसा सफेद धागे में पिरोकर गले में पहनें। 6 चांदी की बेजोड अंगूठी बायें हाथ में पहनें। 7 हीरा/पन्ना की अंगूठी पहनें। 8 तांबे के बर्तन में मँूग भरकर जल प्रवाह करें । 9 गाय, कुत्ते और कौवे को भोजन का हिस्सा दें। 10 सरसों का तेल दान करें। 11 तांबे का पैसा सफेद धागे में पिरोकर गले में पहनें। 12 खाली घड़ा ढक्कन देकर जल प्रवाह करें। गुरु भाव उपाय 1 पिता, गुरु को पुरस्कार देकर आशीर्वाद प्राप्त करें। 2 मकान में फूलों वाले गमले लगायें। 3 9 कन्याओं को हलवा देकर आशीर्वाद लें। 4 कुल पुरोहित को भोजन करवाकर आशीर्वाद लें। 5 5 दिन धर्म मंदिर की सफाई करें। 6 मुर्गियों को मक्की का दलिया खिलायें। 7 शुद्ध सोना पीले कपड़े में बांध कर रखें। 8 आलू, दही, देसी घी धर्म स्थान में दें। 9 किसी भी स्थान की तीर्थ यात्रा करें। 10 पीपल का वृक्ष लगायें। 11 पीला रूमाल पास रखें। 12 गुरु-साधु की सेवा करें। शुक्र भाव उपाय 1 जौ, सरसों, चरी, सतनाजा दान दें। 2 आलू, दही का धर्म स्थान में दान करें। 3 राग-रंग में रूचि न रखें। 4 बछडे़ वाली गाय को चारा खिलायंे। 5 गऊशाला मंेेे चारा दान करें। 6 शुद्ध ठोस चांदी पास रखें। 7 सफेद गायों को चारा खिलायें। 8 तांबे का पैसा या फूल गंदे नाले में डालें। 9 अल्युमिनियम के बर्तनों का प्रयोग न करें। 10 गोदान करें। 11 सरसों का तेल दान करें। 12 धर्म स्थान में जाकर देसी घी की जोत जलायें। शनि भाव उपाय 1 वट के वृक्ष की जड़ के दूध का तिलक करें। 2 नंगे पैर धर्म स्थान में जायें। 3 भांजा/दोहता, जीजा और साले को उपहार दें। 4 कुएं में दूध डालें। 5 शुद्ध सोना पहनें। 6 सांप को दूध पिलायें। 7 बांसुरी में चीनी भर कर वीराने में दबायें। 8 चांदी का चैरस टुकड़ा पास रखें। 9 हल्दी/केसर का तिलक करें। 10 दस अंधों को भोजन खिलायें। 11 घर में शुद्ध चांदी की ईंट रखें। 12 43 दिन तख्त पोश पर शयन करें। राहु भाव उपाय 1 गेहूँ, गुड़, तांबा धर्म स्थान में दें। 2 चांदी की गोली सफेद धागे में पिरोकर गले में पहनें। 3 शुद्ध चांदी का कड़ा दायें हाथ में पहनें। 4 430 ग्राम धनिया जल प्रवाह करें। 5 चांदी का हाथी घर में स्थापित करें। 6 6 सिक्के की गोलियां पास रखें। 7 शुद्ध चांदी की 2 ईंटें घर में लाकर रखें। 8 सिक्के के 8 पीस चैरस जल प्रवाह करें। 9 शरीर पर शुद्ध सोना पहनें। 10 सिर पर सफेद या शरबती पगड़ी बांधे। 11 4 सूखे नारियल जल प्रवाह करें। 12 वजन के बराबर कोयला जल प्रवाह करें। केतु भाव उपाय 1 शुद्ध चांदी की गोली पास रखें। 2 शुद्ध सोने की अंगूठी, कड़ा पहनें। 3 शरीर पर शुद्ध सोना पहनें। 4 चने की दाल-केसर धर्म स्थान में दें। 5 हल्दी/केसर का तिलक करें। 6 शुद्ध सोना शरीर पर पहनें। 7 4 केले 4 दिन चलते पानी में बहायें। 8 कुत्तों को भोजन का हिस्सा खिलायें। 9 कानों में सोने की ननतियां पहनें। 10 शुद्ध सोने की ईंटें घर पर रखें। 11 काले कुत्ते को भोजन का हिस्सा खिलायें। 12 काले-सफेद कुत्ते को भोजन का हिस्सा खिलायें। उपरोक्त वर्षकुंडली में गुरु खाना नं. 11 में व राहु खाना नं. 9 में होने के कारण मंदे हैं। अतः गुरु के लिए पीला रुमाल पास रखना चाहिए व राहु के लिए शुद्ध सोना धारण करना चाहिए। गुरु व राहु के उपाय करने से वर्ष अच्छा हो सकता है। उपाय करने के विशेष नियम: 1. सभी उपाय दिन (सूर्योदय के बाद सूर्यास्त से पहले) के समय करें। 2. बारिश वाले दिन या बादल छाये हों तो उपाय नहीं किया जाता। 3. एक दिन में केवल एक ही उपाय हो सकता है। 4. किसी और के लिए उसके खून का रिश्तेदार भी उसके लिए उपाय कर सकता है। 5. उपाय 43 दिन लगातार करें। यदि उपाय किसी दिन छूट जाता है तो उपाय दुबारा शुरू करना होगा।


लाल किताब विशेषांक  सितम्बर 2015

लाल किताब ज्योतिषीय फलादेश की अन्यान्य पद्धतियों में से सर्वोत्तम एवं विश्वसनीय पद्धति है। भारत में लाल किताब का आगमन 1930 के दशक में एक भारतीय ब्रिटिश अधिकारी पं. रूप चन्द जोशी के प्रयासों के फलस्वरूप माना जाता है। पं. रूप चन्द जोशी ने फलकथन की प्राचीन विधा की खोज कर इसे पुनस्र्थापित किया। लालकिताब के महान ज्ञाताओं के द्वारा यह अनुभवसिद्ध है कि लाल किताब के द्वारा अनुशंसित उपाय अशुभ ग्रहों के अशुभत्व को समाप्त कर शुभ फलदायी परिणाम देते हैं। यही नहीं इसके अलावा हर कार्य के लिए भी सटीक एवं उपयुक्त उपायों की चर्चा लाल किताब में की गइ्र्र है जैसे विवाह, सन्तान इत्यादि। फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में अनेक विषयों पर विद्वान ज्योतिषियों के आलेख उद्धृत हैं। फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में समाविष्ट कुछ अति महत्वपूर्ण आलेख हैं: लाल किताब एक परिचय, लाल किताब के विशेष नियम, पितृ ऋण, मातृ ऋण आदि की व्याख्या एवं फलादेश, लाल किताब के उपायों के प्रकार, ऋण एवं उनके उपाय, लाल किताब उपाय- जन्मकुण्डली के बिना भी मददगार, दान, मकान एवं धर्म स्थल संबंधी नियम, घरों के अनुसार ग्रहों का प्रभाव आदि। दूसरे अन्य महत्वपूर्ण एवं प्रशंसनीय आलेखों में शामिल हैं- ईशा का नन्हा विभोर, दी फूल, पंच पक्षी इत्यादि।

सब्सक्राइब

अपने विचार व्यक्त करें

blog comments powered by Disqus
.