रत्न एवं स्वास्थ्य

रत्न एवं स्वास्थ्य  

औषधि मणि मंत्राणां-ग्रह नक्षत्र तारिका। भाग्य काले भवेत्सिद्धिः अभाग्यं निष्फलं भवेत्।। अर्थात- औषधि, रत्न एवं मंत्र ग्रह जनित रोगों को दूर करते हैं। यदि समय सही है तो इनसे उपयुक्त फल प्राप्त होते हैं। लेकिन विपरीत समय में ये भी निष्फल हो जाते हैं। रत्न प्रकृति द्वारा प्रदत्त एक मूल्यवान निधि है। रत्न शब्द का प्रथम प्रमाण ऋग्वेद के श्लोक में मिलता है। रत्न न केवल सौन्दर्य का प्रतीक है वरन यह चिकित्सा पद्धति का भी अंग है। इसका उल्लेख आयुर्वेद की प्रसिद्ध पुस्तक चरक संहिता में हुआ है। आयुर्वेद के अनुसार रोगनाश करने की जितनी क्षमता औषधि सेवन में है उसी के समान रत्न धारण करने में भी है। आचार्य दण्डी रत्न की विशेषता बताते हुए कहते हंै- अचिन्त्यों ही मणिमंत्रौषधीनां प्रभावाः। रत्नों में सौन्दर्य ही नहीं, औषधीय प्रभाव भी होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रोगों की उत्पत्ति अनिष्ट ग्रहों के प्रभाव से एवं पूर्वजन्म के अवांछित संचित कर्मों के प्रभाव से बताई गई है। अनिष्ट ग्रहों के निवारण के लिए पूजा, पाठ, मंत्र जाप, यंत्र धारण, विभिन्न प्रकार के दान एवं रत्न धारण आदि साधन ज्योतिष शास्त्र में उल्लिखित हैं। लग्न संपूर्ण कुण्डली की पृष्ठभूमि होता है। इसके द्वारा व्यक्ति के गुणों व अवगुणों का अवलोकन करने में सहायता प्राप्त होती है। यह व्यक्ति के शरीर, शरीर की बनावट, व्यक्तित्व, स्वभाव और रुप की व्याख्या करता है। इससे रोगों का भी विचार किया जाता है। इसलिए अपने स्वास्थ्य सुख को बनाए रखने और निरोगी रहने के लिए लग्नेश का रत्न धारण करना विशेष रुप से शुभ रहता है। लग्नेश का रत्न धारक के शरीर को बल प्रदान करता है। सभी मनुष्यों को उनकी लग्नानुसार कुछ रोग अधिक होने की संभावना रहती है। आईये जानते हैं कि स्वयं को रोगमुक्त रखने के लिए आप कौन सा रत्न धारण करें, जिससे होने वाले रोग शारीरिक कष्ट का कारण न बन सकें। मेष लग्न: आपकी लग्न का स्वामी मंगल है। आपको थकान और सिर दर्द शीघ्र परेशान करता है तथा पाचन तंत्र विकार और नेत्र रोगों से ग्रसित रहना पड़ता है। सर्वप्रथम आपको सदैव स्वस्थ बने रहने के लिए मंगल रत्न मूंगा जीवन भर के लिए धारण करना चाहिए। मूंगा रक्त विकार दूर करता है। रक्तचाप को नियंत्रित रखने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अतिरिक्त मूंगे के साथ मोती एवं पुखराज धारण करें। मोती आपको मानसिक तनाव में और पुखराज आपको लिवर समस्याओं से बचाएगा। वृष लग्न: आपका लग्नेश शुक्र है। आपको गले, नाक और छाती के रोग हो सकते हैं तथा भोजन में अशुद्धता के कारण उल्टी, दस्त और पेट में जलन की समस्या आपको सामान्य रुप से हो सकती है। साथ ही आपके उच्च अथवा निम्न रक्तचाप से भी पीड़ित होने की संभावनाएं बनी रहती हैं। अतः आप हीरा रत्न धारण कर अपने स्वास्थ्य को सकारात्मक बनाए रखें। आप हीरे के साथ पन्ना भी पहनें। पन्ना आपको त्वचा रोग व रक्तचाप से मुक्ति और स्वस्थ बनाए रखेगा। मिथुन लग्न: बुध आपकी लग्न के स्वामी हैं। आपको गैस, चर्म रोग और अपच की शिकायत प्रायः होगी। इसके अलावा जीवन में पक्षाघात, मिर्गी, श्वांसनली और अस्थमा रोगों से बचने का प्रयास करना चाहिए। बुध रत्न पन्ना धारण करना आपके स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखेगा। स्वास्थ्य सुख के लिए पन्ना रत्न के साथ हीरा व नीलम भी धारण करें । हीरा रत्न आपको मधुमेह और नीलम आपको गठिया रोगों से बचाएगा। कर्क लग्न: आपके लग्न का स्वामी चंद्र है। आपको खांसी, जुकाम, छाती में दर्द, ज्वर रोग भी समय-समय पर कष्ट देते रहते हंै। आपका पाचन तंत्र शीघ्र खराब हो जाता है। आप आजीवन मोती रत्न धारण करें, साथ-साथ आप मूंगा और पुखराज भी धारण करें। यह हृदय, दिमागी व रक्त विकारों को दूर रखने में सहयोग करेगा। इसके अतिरिक्त पुराना दमा, किडनी, हैजा आदि रोग और स्त्रियों को माहवारी में भी कष्ट से राहत मिलती है। सिंह लग्न: आपके लग्न का स्वामी सूर्य है। आपको रक्त विकार, रक्त स्राव और रक्त की कमी जैसे रोग हो सकते हंै। इसके अतिरिक्त आपको पीठ, कमर एवं जोड़ों के दर्द भी शीघ्र अपने प्रभाव में ले सकते हैं अतः सूर्य रत्न माणिक्य धारण करना आपके स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद रहेगा। इस रत्न की शुभता से आपका अस्थितंत्र मजबूत होगा और ह्रदय गति पहले से अच्छी होगी। कन्या लग्न: आपके लग्न का स्वामी बुध है। आपको उदर रोग, छोटी और बड़ी आंत, कमर दर्द और अनिद्रा जैसे रोगों के कारण स्वास्थ्य विकारों का सामना करना पड़ता है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आप पन्ना धारण करें। इसे धारण करने से मानसिक रोग आपको अधिक कष्ट नहीं दे पायेंगे। इसके साथ-साथ नीलम रत्न आपको जोड़ों के दर्द में राहत देगा। तुला लग्न: आपके लग्न का स्वामी शुक्र है। जनेन्द्रियों, कमर, नाभि से संबंधित रोगों के कारण आपका स्वास्थ्य कष्टमय हो सकता है। लग्नेश शुक्र का हीरा रत्न धारण करने से आपके स्वास्थ्य सुख में वृद्धि होगी। यह रत्न थायराॅइड को भी शीघ्र दूर करने में सहयोग करेगा। आपके लिए नीलम एवं पन्ना रत्न धारण करना भी उत्तम रहेगा। पन्ना रत्न आपको एलर्जी और नीलम रत्न आपके गठिया रोगों में कमी करेगा। वृश्चिक लग्न: आपके लग्न का स्वामी मंगल है। आपको रक्त चाप, सिर दर्द व मानसिक अशांति हो सकती है। स्वयं को स्वस्थ बनाए रखने के लिए आप मूंगा धारण करें। यह रत्न आपके रक्त एवं हृदय विकारों को दूर करेगा। साथ ही आप पुखराज और मोती भी धारण करें। पुखराज आपको मांसपेशियों से संबंधित और मोती आपके मानसिक व नेत्र रोगों का निवारण करेगा। धनु लग्न: आपके लग्न का स्वामी गुरु है। आपको कूल्हे, जांघ और मांसपेशियों में खिंचाव जैसी परेशानियां बार-बार हो सकती हैं। साथ ही मोटापा भी आपको रोग्रग्रस्त कर सकता है। इसलिए आप पुखराज रत्न धारण करें। पुखराज की शुभता से आपको लिवर, जिगर व पेट के रोगों से राहत मिलेगी। इसके साथ माणिक्य भी धारण करें। माणिक्य आपको रक्त चाप व हृदय रोग से बचाएगा। मकर लग्न: आपके लग्न का स्वामी शनि है। आपको गठिया, रक्त विकार, चर्म रोगों से पीड़ित होने के योग बनते हंै। शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए आप शनि रत्न नीलम धारण करें। इसके साथ ही नीलम रत्न आपको दिमागी रोगों और निराशा से भी मुक्त करेगा। इसके अतिरिक्त हीरा एवं पन्ना रत्न भी धारण करें। हीरा आपको जननेन्द्रिय संबंधी रोग और पन्ना आपको गुर्दा रोग व एलर्जी में रक्षा करेगा। कुंभ लग्न: आपके लग्न का स्वामी शनि है। आपको पैरों से संबंधित रोग, नेत्र रोग व रक्त विकार दे सकता है। इसके साथ ही इसके कारण आपको शुगर एवं पेट के रोग परेशान कर सकते हैं। रोगों में कमी करने के लिए आप नीलम रत्न धारण करें। साथ ही आप पन्ना और हीरा रत्न भी पहनें। पन्ना आपको आंत के रोगों और हीरा आपको थायराॅइड जैसे रोगों में लाभ देगा। मीन लग्न: आपके लग्न का स्वामी गुरु है। आपको संक्रामक रोग, मानसिक तनाव एवं मोटावा परेशान कर सकता है। इसके अतिरिक्त लिवर के रोग भी आपको कष्ट देंगे। लग्नेश गुरु का पुखराज रत्न धारण करना आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा रहेगा। इसके साथ ही आप मोती और मूंगा भी धारण कर स्वयं को निरोगी रख सकते हैं। मोती रत्न आपको दमा और मूंगा आपको रक्त संबंधी रोगों को दूर करने में सहयोग करेगा। रोग ग्रह रत्न, धातु एवं अंगुली बवासीर चंद्र मरियम, स्वर्ण, कनिष्ठा गुर्दा रोग बुध किडनी स्टोन, स्वर्ण, अनामिका हृदय रोग, रक्तचाप सूर्य अंबर, स्वर्ण, अनामिका पेट के रोग सूर्य माणिक्य, स्वर्ण, अनामिका मानसिक अवसाद चंद्रमा मोती, स्वर्ण, कनिष्ठा मधुमेह शुक्र सफेद मूंगा, स्वर्ण, अनामिका दमा केतु टाइगर आई, पंचधातु, अनामिका संतान बाधा, स्त्री कुंडली राहु गोमेद, अष्टधातु, मध्यमा संतान बाधा, पुरूष कुंडली केतु टाइगर आई, पंचधातु, अनामिका थायराॅइड शुक्र ओपल, स्वर्ण, अनामिका एलर्जी, पिंत्त विकार बुध ओनेक्स, स्वर्ण, अनामिका मतिभ्रम राहु गोमेद, अष्टधातु, मध्यमा सिर दर्द शनि चुंबक, तांबा, मध्यमा रक्त की कमी मंगल, गुरु मूंगा, अनामिका, पुखराज, तर्जनी, स्वर्ण नेत्र रोग सूर्य माणिक्य, स्वर्ण, अनामिका गठिया शनि एक्वामरिन, अष्टधातु, मध्यमा कैंसर शनि, राहु नीलम, गोमेद, अष्टधातु, मध्यमा रोग का निदान न होने पर सभी ग्रह नवरत्न, स्वर्ण, तर्जनी


रत्न विशेषांक  जुलाई 2016

भूत, वर्तमान एवं भविष्य जानने की मनुष्य की उत्कण्ठा ने लोगों को सृष्टि के प्रारम्भ से ही आंदोलित किया है। जन्मकुण्डली के विश्लेषण के समय ज्योतिर्विद विभिन्न ग्रहों की स्थिति का आकलन करते हैं तथा वर्तमान दशा एवं गोचर के आधार पर यह निष्कर्ष निकालने का प्रयास करते हैं कि वर्तमान समय में कौन सा ग्रह ऐसा है जो अपने अशुभत्व के कारण सफलता में बाधाएं एवं समस्याएं उत्पन्न कर रहा है। ग्रहों के अशुभत्व के शमन के लिए तीन प्रकार की पद्धतियां- तंत्र, मंत्र एवं यंत्र विद्यमान हैं। प्रथम दो पद्धतियां आमजनों को थोड़ी मुश्किल प्रतीत होती हैं अतः वर्तमान समय में तीसरी पद्धति ही थोड़ी अधिक प्रचलित है। इसी तीसरी पद्धति के अन्तर्गत विभिन्न ग्रहों के रत्नों को धारण करना है। ये रत्न धारण करने के पश्चात् आश्चर्यजनक परिणाम देते हैं तथा मनुष्य को सुख, शान्ति एवं समृद्धि से ओत-प्रोत करते हैं। फ्यूचर समाचार के वर्तमान अंक में रत्नों से सम्बन्धित अनेक उत्कृष्ट एवं उल्लेखनीय आलेखों को सम्मिलित किया गया है जो रत्न से सम्बन्धित विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हैं।

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