उत्तर पूर्व में सीढ़ियां बनाना वंश वृद्धि में रुकावट आना

उत्तर पूर्व में सीढ़ियां बनाना वंश वृद्धि में रुकावट आना  

व्यूस : 2541 | अकतूबर 2010

कुछ माह पूर्व पंडित जी दिल्ली के एक प्रसिद्ध आभूषण विक्रेता के घर का वास्तु परीक्षण करने गए। उनसे मिलने पर उन्होंने बताया कि जबसे उन्होंने अपने घर के साथ वाले घर को खरीदकर उसे पहले वाले घर के साथ जोड़कर एक बड़ा घर बनाया है तबसे ही उनके घर में मानसिक तनाव, व्यापार में हानि व माता एवं पिता के स्वास्थ्य में गिरावट तथा उनकी बहन के घर में तनाव उत्पन्न हो गए हैं। कुछ परेशानियां पहले भी थीं परन्तु अब वह भी ज्यादा बढ़ गई हैं। वह इकलौते पुत्र हैं और उनकी दो बेटियां हंै परंतु प्रपौत्र न होने से भी उनकी माता जी काफी चिंतित रहती हैं। वास्तु परीक्षण करने पर पाए गए वास्तु दोष:

Û उत्तर-पूर्व में सीढ़ियां बनी थीं जो कि वंश वृद्धि में रुकावट एवं मानसिक तनाव का मुख्य कारण होती है। व्यापार में भी दिवालिया ला सकती हैं।

Û उत्तर-पश्चिम में बोरिंग थी जो उन्होंने नए घर को साथ मिलाने के बाद करवाई थी। उत्तर-पश्चिम में गड्ढा घर की महिलाओं मुख्यतः बहन व बेटी के लिए हानिकारक होता है । मुकदमेबाजी, धन हानि होने की संभावना बनी रहती है।

Û दक्षिण-पश्चिम में शौचालय था जो घर के मालिक को लम्बी बीमारी एवं आर्थिक समस्याएं देता है। उनके पिताजी को लकवा मार गया था तथा वे काफी समय से बिस्तर से उठ भी नहीं पाते थे।

Û उनके घर की पहली एवं दूसरी मंजिल का उŸार पश्चिम का कोना कटा हुआ था जो आर्थिक विकास में बाधक होता है एवं अपने भी पराये हो जाते हैं।

Û छत पर उत्तर पूर्व एवं दक्षिण पूर्व ऊंचा था जो कि चहुंमुखी विकास में रुकावट उत्पन्न करता है एवं गृह स्वामिनी को अधिकतर घर से बाहर रखता है।

Û उनके घर की पूर्व की दीवार के साथ काफी भारी संगमरमर का मंदिर रखा हुआ था। पूर्व में भारीपन स्वास्थ्य एवं विकास के लिए हानिकारक होता है। सुझाव

Û उत्तर-पूर्व में बनी सीढियां हटवाने की सलाह दी गई और दक्षिण-पूर्व में बनी सीढ़ियों को इस्तेमाल करने को कहा गया।

Û उतर-पश्चिम में बनी बोरिंग को बंद करके गड्ढे को अच्छे से भरने को कहा गया। यदि आवश्यक हो तो उसे (आखिरी विकल्प) पश्चिम में बना सकते हैं।

Û दक्षिण-पश्चिम में बने शौचालय को पश्चिम में बने ड्रैसिंग रूम के साथ स्थानांतरित करने को कहा गया। तब तक शौचालय में कांच की कटोरी में समुद्री नमक रखने को कहा गया जिससे उसकी नकारात्मकता कम हो सके।

Û उत्तर-पश्चिम में बने शयनकक्ष से कटे हुए कोने की तरफ दरवाजा बनाने को कहा गया जिससे कटने का दोष खत्म हो सके।

Û छत पर उत्तर-पूर्व तो सीढ़ियों के हटने से समतल हो जाएगा। दक्षिण-पश्चिम, पश्चिम की ओर अस्थाई शैड डालने को कहा गया।

Û पूर्व की दीवार पर बने भारी संगमरमर के मंदिर को पश्चिम की दीवार के साथ लगाने की सलाह दी गई । पंडित जी ने व्यापारी को आश्वासन देते हुये कहा कि सभी सुझावों को कार्यान्वित करने के बाद उन्हें अवश्य लाभ मिलेगा तथा उन्हें तीन माह के बाद मिलने को कहा।

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दुर्गा पूजा विशेषांक  अकतूबर 2010

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