मिथुन में गुरु का गोचर

मिथुन में गुरु का गोचर  

गुरु 31 मई 2013, 6:49, धनिष्ठा नक्षत्र, सप्तमी तिथि, शुक्रवार, ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष, बव करण में वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। मिथुन राशि में गुरु 19 जून 2014, 8:47 तक रहेंगे। गुरु मिथुन राशि में प्रवेश करते ही 6 जून 2013 को 23:52 पर अस्त हो जायेंगे और 2 जुलाई 2013 को 22:53 तक अस्त रहेंगे। ये 7 नवम्बर 2013 को 10:33 पर वक्री होंगे एवं 6 मार्च 2014 को 16: 12 पर पुनः मार्गी होंगे। गुरु का शुक्र की राशि से बाहर आकर, मिथुन राशि में जाना कुछ लोगों के लिए विवाह, संतान, ऊच्च शिक्षा, मजबूत आर्थिक स्थिति और मांगलिक शुभता का उपहार लेकर आयेगा। गुरु की शुभता से संतान की प्रतीक्षा कर रहे लोगों का घर खुशी की किलकारियों से गँूज उठेगा, तो कुछ के जीवन में विवाह की शहनाइयों से एक नए जीवन की शुरूआत होगी। आइये जानें कि देव गुरु बृहस्पति के गोचर में आपके लिए कौन सा फल छुपा हुआ है - मेष राशि: गुरु गोचर में इस समय आपकी जन्मराशि से तीसरे भाव पर संचार करेंगे। गुरु प्रभाव से इस अवधि के कार्य पराक्रम भाव से पूर्ण होंगे। साथ ही साहसिक कार्यों में भी सफलता प्राप्त होगी। व्यावसायिक क्षेत्र में लाभ मिलंेगे। वर्तमान में राहु आपके जीवनसाथी और भागीदारों के साथ स्वभाव को अनुकूल बनाए रखने पर मजबूर करेंगे। नौकरी से लाभ रहेगा। कोर्ट-कचहरी के कार्य में सफलता मिलेगी। स्वजन या मित्रों से परेशानी रहेगी। अविवाहित होने पर विवाह सूत्र में बंध सकते हैं। वृष राशि: गुरु आपकी राशि से दूसरे भाव से गुजर रहा है, जिसमें आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। नौकरी में अच्छा मौका मिलेगा। व्यावसायिक क्षेत्र में सफलता मिलेगी। उच्च शिक्षा के लिए मौके मिलेंगे। परिवार में प्रश्न न खड़े हों उसका ध्यान रखें। राहु-शनि आपकी राशि से षष्ठ भाव पर गोचरस्थ हैं। ऐसे में परिवार के मामलों को कोर्ट-कचहरी में ले जाना सही नहीं होगा। शत्रुओं से परेशानी हो सकती है। मिथुन राशि: गुरु गोचर में आपकी राशि पर संचार कर रहा है। यह आर्थिक स्थिति को प्रबल कर आपके व्यावसायिक क्षेत्र का विस्तार कर सकता है। कुछ नया करने की प्रेरणा मिलेगी। गुरु की पांचवें स्थान में दृष्टि होने से संतान प्राप्ति होगी। प्रेम प्रसंग होंगे और उनकी नवं स्थान पर दृष्टि यात्रा का योग बना रही है। विवाह के ईच्छुक लोगों की ईच्छा पूरी होगी। शनि तुला राशि से गुजर रहा है, जो आपकी राशि के पंचम भाव में रहेगा। इससे मंत्र-तंत्र में रूचि रहेगी। पढ़ाई में अच्छे अंक मिलेगे। शेयर-सट्टा में समझदारी से दीर्घकालिक निवेश करें। कर्क राशि: गुरु आपकी राशि के बारहवें स्थान से गुजर रहा है। इससे नया घर, दुकान या वाहन लेने के योग हैं। दलाली-कमीशन का व्यवसाय लाभदायक होगा। यात्रा लाभदायक रहेगी। सफलता मिलेगी। धार्मिक कार्यों में खर्च होगा, कर्ज चुकाने में सरलता रहेगी। नौकरी में लाभ मिलेगा। साथ ही विदेश जाने का मौका या अच्छी कंपनी में जाॅब की कोशिश कर सकते हैं। लेकिन दाम्पत्य जीवन में परेशानियां आएंगी। आध्यात्मिकता की ओर झुकाव रहेगा। सिंह राशि: गुरु आपकी राशि से ग्यारहवें भाव में है। इससे पढ़ाई, व्यावसायिक क्षेत्र में सफलता मिलेगी, धनलाभ होगा। उच्च पदाधिकारियों के साथ संबंध रहेंगे। मान-सम्मान और प्रतिष्ठा मिलेगी। मित्रों से लाभ रहेगा। संतान प्राप्ति या संतान के कार्य क्षेत्र में प्रगति होगी। दाम्पत्य सुख अच्छा मिलेगा। स्टाक-मार्केट से फायदा रहेगा। धर्म, अध्यात्म की ओर झुकाव रहेगा। शनि व राहु आपकी राशि के तीसरे स्थान तुला राशि से गुजर रहे हैं, और केतु भाग्य स्थान में है। इससे साहस और पुरूषार्थ से व्यावसायिक क्षेत्र में सफलता मिलेगी। कन्या राशि: इस समय गुरु आपकी राशि के दसवं भाव से गुजरेगा, जिससे व्यवसाय या व्यापार के क्षेत्र में अच्छी प्रगति होगी। संपत्ति, मकान-जमीन आदि कार्यों मे सफलता मिलेगी। नौकरी में प्रमोशन मिलेगा। प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। विदेशी मित्रों से लाभ होकर, उनके द्वारा नई प्रगति की राह मिलेगी, फंसे हुए पैसे तुरन्त मिलेंगे। आपकी सत्ता बढ़ेगी। राहु तुला राशि में आपके धनस्थान में है। इससे आकस्मिक खर्चे आएंगे। आय से अधिक व्यय का प्रमाण रहेगा। संतानों के साथ वैचारिक मतभेद होगा। जमीन-धन और भौतिक सुख मिलेंगे। तुला राशि: गुरु गोचर में आपके भाग्य स्थान से गुजरेगा, जिससे भाग्यवृद्धि के योग बनेंगे। व्यवसाय के क्षेत्र में प्रगति होगी। सुख-सुविधा के साधनों में वृद्धि होगी। संतान प्राप्ति के बारे में चिंता दूर होगी। धार्मिक और मांगलिक प्रसंग हो सकते हैं। आध्यात्मिक क्षेत्र में प्रगति होगी। परिवार की जिम्मेदारियों में वृद्धि होगी। भाग्यवृद्धि होगी। परोपकारी कार्यों में रूचि रहेगी। नौकरी व्यवसाय के काम से बाहर जाना हो सकता है। जन्मराशि पर शनि राहु की युति शापित योग बनाकर आपको स्वास्थ्य के पक्ष में सावधान रहने का संकेत कर रही है। वृश्चिक राशि: आपकी राशि के अष्टम भाव में गुरु के भ्रमण से शारीरिक और आर्थिक नुकसान हो सकता है। पारिवारिक खर्च बढ़ेगा। मानसिक चिंताएं और क्लेश रहेगा। व्यावसायिक क्षेत्र में ध्यान रखें। कोर्ट-कचहरी के कार्यों में धन खर्च होगा। विद्याप्राप्ति में परेशानियां हांगी। धार्मिक कार्यों में धनखर्च होगा। शनि आपकी राशि के बारहवें स्थान में है और राहु के साथ युति सम्बन्ध में है जो आपके शारीरिक कष्ट और अधिक परिश्रम से सफलता मिलने का संकेत कर रहा है। स्वजनों के साथ वैचारिक मतभेद होगा। संतान के बारे में चिंता रहेगी। धनु राशि: गुरू आपकी राशि में सप्तम भाव से गुजरेगा जिससे महत्वाकांक्षाओं में वृद्धि होगी। दाम्पत्य सुख अच्छा मिलेगा। परिवार में शुभ और मांगलिक प्रसंग बनेंगे। भौतिक सुख के साधनों में वृद्धि होगी। नौकरी में लाभ होगा। सामाजिक कार्यों में यश, मान और प्रतिष्ठा मिलेगी। शनि आपकी राशि के लाभ स्थान पर है। इससे बुजुर्ग और मित्रों से लाभ मिलेगा। धन, मकान, वाहन सुख अच्छा है। नौकरी में उच्चपद मिलेगा। शनि के साथ राहु की युति लाभ भाव में और केतु आपकी राशि के पंचम स्थान में भ्रमण कर रहा है। शेयर सट्टे के क्षेत्र में बहुत मेहनत से अंत में लाभ मिलेगा। मकर राशि: गुरु गोचर में आपकी राशि से छठे भाव में रहेगा जिससे स्वास्थ्य अच्छा नहीं रहेगा। फिर भी व्यावसायिक क्षेत्र में लाभ रहेगा। पारिवारिक जिम्मेदारियां आएंगी। नौकरी में लाभ मिलेगा और वेतन में बढोत्तरी होगी। लंबी यात्रा भी हो सकती है। शनि-राहु की युति आपके कर्म स्थान में है और केतु सुख स्थान में परिभ्रमण कर रहा है, जिसके कारण नौकरी में बदलाव होगा। दाम्पत्य जीवन में मतभेद हो सकता है। आंतरिक और मानसिक अशांति और उद्वेग रहेगा। माता के साथ वैचारिक मतभेद होगा। मित्रों से अनबन होगी। कुम्भ राशि: गुरु आपकी राशि से पंचम भाव से गुजर रहा है इससे आकस्मिक धनलाभ होगा। साहसिक कार्यों में सफलता मिलेगी। व्यावसायिक क्षेत्र में यात्रा लाभदायी रहेगी। मांगलिक प्रसंग होंगे। परदेश से जुड़े कामकाज होंगे। यह पढ़ाई में सफलता दिलाएगा। नौकरी में लाभ मिलेगा। निःसंतान दंपति के संतान प्राप्ति का योग है। गोचर में शनि-राहु साथ हैं और केतु तीसरे स्थान पर संचार कर रहा है। इससे पिता के साथ और नौकरी में उच्च अधिकारियों के साथ वैचारिक मतभेद होगा। दाम्पत्य जीवन में भी मतभेद आ सकते हैं। मीन राशि: गुरु गोचर की इस अवधि में आपकी जन्मराशि से चतुर्थ भाव पर विराजमान होंगे। कार्यक्षेत्र में शुभता बनी रहेगी तथा शुभ कार्यों पर व्यय होने के योग बन रहे हैं। इस अवधि विशेष में धार्मिक यात्राओं पर व्यय होंगे। राहु शनि के साथ आपके अष्टम भाव में और केतु कुटंब भाव पर गोचर कर रहे हैं। परिवार के साथ तालमेल मिलाकर चलने की आवश्यकता पड़ सकती है। गुरु के गोचर की पूर्ण शुभता प्राप्त करने के लिए बृहस्पति वार का व्रत या गुरु मंत्र- “ऊँ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः“ का प्रतिदिन 108 संख्या में जाप अथवा गुरुवार के दिन घी, हल्दी, चने की दाल, बेसन, पपीता, पीत रंग के वस्त्र का दान करना लाभकारी रहता है। इसके अलावा फलदार पेड़ सार्वजनिक स्थल पर लगाकर या विद्यार्थियों को भोजन करा , दक्षिणा देकर भी आप बृहस्पति देव को प्रसन्न कर शुभता प्राप्त कर सकते हैं।


पराविद्या विशेषांक  जून 2013

फ्यूचर समाचार पत्रिका के पराविद्या विशेषांक में शनि जयंती, विवाह, विवाह में विलंब के कारण व निवारण, कुंडली में पंचमहापुरूष योग एवं रत्न चयन, तबादला एक ज्योतिषीय विश्लेषण, शुक्र की दशा का फल, शनि चंद्र का विष योग, उंगली और उंगलियों के दूरी का फल, दक्षिणावर्ती शंख, बृहस्पति का प्रिय केसर, दाह संस्कार-अंतिम संस्कार, परवेज मुशर्रफ के सितारे गर्दीश में, चांद ने डुबोया टाइटेनिक को, अंक ज्योतिष के रहस्य, विभिन्न भावों में मंगल का फल, स्वर्गीय जगदंबा प्रसाद की जीवन कथा, महोत्कट विनायक की पौराणिक कथा के अतिरिक्त, काल सर्प दोष से मुक्ति के लिए लाल किताब के अचुक उपाय, वास्तु प्रश्नोत्तरी, यंत्र समीक्षा/मंत्र ज्ञान, हेल्थ कैप्सुल, प्राकृतिक ऊर्जा संतुलन, विवादित वास्तु, विशिष्ट महत्व है काशी के काल भैरव का तथा हस्तरेखा द्वारा जन्मकुंडली निर्माण की विधियों पर विस्तृत रूप से चर्चा की गई है।

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