विवाह में विलंब के कारण

विवाह में विलंब के कारण  

ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से विवाह में विलम्ब होने के प्रमुख कारण हैं जन्म कुण्डली के सप्तम भाव में अशुभ, अकारक एवं क्रूर ग्रहों का स्थित होना तथा सप्तमेश एवं उसके कारक ग्रह बृहस्पति/ शुक्र एवं भाग्येश का निर्बल होना । यदि पृथकतावादी ग्रह सूर्य, शनि, राहु, केतु सप्तम भाव को प्रभावित करते हैं तो विवाह में विलम्ब के साथ-साथ वैवाहिक जीवन में कलह, तनाव, अलगाव, संबंध विच्छेद जैसी अनेक परेशानियां उत्पन्न होती हैं । लग्न कुण्डली के प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम एवं द्वादश में से किसी भाव में मंगल स्थित होने पर मंगली दोष निर्मित होता है। इसके कारण भी विवाह में विलम्ब हो सकता है । ज्योतिष विद्वानों के मतानुसार मंगली दोष होने पर विवाह योग 28 वर्ष के पश्चात् बनता है । मंगली दोष में विवाह के पूर्व कुण्डली का मिलान एवम् मंगल ग्रह की शांति हेतु दान, जाप एवं पूजन करना आवश्यक है । जन्म कुण्डली में वैधव्य योग होने पर विद्वान पंडित के मार्गदर्शन मंे भगवान शालिगराम या पीपल के वृक्ष के साथ कन्या का विवाह कराने पर वैधव्य योग नष्ट हो जाता है । शीघ्र विवाह के लिए निम्नानुसार उपाय करना चाहिए:- 1. कुण्डली में बृहस्पति निर्बल होने पर उसका व्रत, जाप,पूजन एवं स्वर्ण धातु में सवा 5 रत्ती का पुखराज धारण करना चाहिए । 2. 101 साबूत चावल के दाने चंदन में डुबोकर ऊँ नमः शिवाय मंत्र के जाप के साथ शिवलिंग पर चढावें । 3. गुरूवार का व्रत करें एवं केले के वृक्ष का पूजन करें । 4. कुण्डली में सप्तमेश निर्बल होने पर उसका नग धारण करें । 5. सोमवार को शिवलिंग पर दुग्ध मिश्रित जल से अभिषेक करें । 6. पार्वती मंगल स्तोत्रम का पाठ करें । 7. भृंगराज या केले के वृक्ष की जड़ को अभिमंत्रित कर धारण करें । 8. मनोवांछित जीवन साथी की प्राप्ति के लिए दुर्गा सप्तशती के निम्न मंत्र का जाप करें । ’’पत्नि मनोरमा देहि, मनोवृतानुसारिणीम्। तारिणी दुर्गसंसार सागरस्य कुलोद्ववाम्’’। यदि स्त्री जातक पाठ करें तो पत्नी की जगह पति पढं़े । विवाह में विलंब के कारण व निवारण प्रवीण जोशी पुरूष जातक के विवाह में विलम्ब होने पर शुक्ल पक्ष में मंगलवार को प्रातः हनुमान जी का ध्यान करते हुए 21 दिन तक निम्न श्लोक का 108 बार पाठ करें एवं हनुमान जी को चोला चढ़ाएं । ’’स देवि नित्य परित्यामानस्त्वामेव सीतेत्यभिभाषमाण: घृतव्रतो राजसुतो महात्मा तवैव लाभाय कृत प्रयत्नः’’ दुर्गा सप्तशती में वर्णित अर्गला स्तोत्रम् एवम् क्षमा प्रर्थना का पाठ प्रतिदिन करने से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होकर सुख, समृद्धि एवं सौभाग्य की प्राप्ति होती है । यदि उपरोक्तानुसार उपाय श्रद्धा एवं विश्वास के साथ योग्य एवं विद्वान पंडित के मार्गदर्शन में विधि विधान से किये जायं तो प्रभावी परिणाम प्राप्त होकर शीघ्र विवाह का योग बनता है ।


पराविद्या विशेषांक  जून 2013

फ्यूचर समाचार पत्रिका के पराविद्या विशेषांक में शनि जयंती, विवाह, विवाह में विलंब के कारण व निवारण, कुंडली में पंचमहापुरूष योग एवं रत्न चयन, तबादला एक ज्योतिषीय विश्लेषण, शुक्र की दशा का फल, शनि चंद्र का विष योग, उंगली और उंगलियों के दूरी का फल, दक्षिणावर्ती शंख, बृहस्पति का प्रिय केसर, दाह संस्कार-अंतिम संस्कार, परवेज मुशर्रफ के सितारे गर्दीश में, चांद ने डुबोया टाइटेनिक को, अंक ज्योतिष के रहस्य, विभिन्न भावों में मंगल का फल, स्वर्गीय जगदंबा प्रसाद की जीवन कथा, महोत्कट विनायक की पौराणिक कथा के अतिरिक्त, काल सर्प दोष से मुक्ति के लिए लाल किताब के अचुक उपाय, वास्तु प्रश्नोत्तरी, यंत्र समीक्षा/मंत्र ज्ञान, हेल्थ कैप्सुल, प्राकृतिक ऊर्जा संतुलन, विवादित वास्तु, विशिष्ट महत्व है काशी के काल भैरव का तथा हस्तरेखा द्वारा जन्मकुंडली निर्माण की विधियों पर विस्तृत रूप से चर्चा की गई है।

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