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शनि-चंद्र का विष योग

जून 2013

व्यूस: 44871

फलदीपिका’ ग्रंथ के अनुसार ‘‘आयु, मृत्यु, भय, दुख, अपमान, रोग, दरिद्रता, दासता, बदनामी, विपत्ति, निन्दित कार्य, नीच लोगों से सहायता, आलस, कर्ज, लोहा, कृषि उपकरण तथा बंधन का विचार शनि ग्रह से होता है। ‘‘अपने अशुभ कारकत्व के कारण शनि... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगघरभविष्यवाणी तकनीक

ज्योतिष द्वारा कैसे जानें विवाह योग ?

अकतूबर 2013

व्यूस: 44666

विवाह के विषय में जानना इतना आसान नहीं क्योंकि विवाह हमारे सोलह संस्कारों में एक मुख्य संस्कार है। हमारे ज्योतिष शास्त्र में विवाह के विषय में अनेक ग्रन्थ मिलते है। ज्योतिष शास्त्र ऐसा शास्त्र है जिससे हर विषय की सटीक जानकारियां उ... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगकुंडली व्याख्याघरविवाहग्रहभविष्यवाणी तकनीक

बारहवें भाव में शनि, राहु एवं केतु का फल एवं उपाय

अप्रैल 2014

व्यूस: 44566

बारहवां घर खुले आकाश का, व्यय का तथा मोक्ष का भाव है। शनि बारहवें घर का शनि व्यक्ति को असाधारण बनाता है, वह नेक भी हो सकता है बद भी। इस घर के शनि वाला व्यक्ति बिना किसी खास कारण के अपने को संतुष्ट महसूस नहीं करता। शनि व्यक्तिगत वि... और पढ़ें

ज्योतिषउपायग्रह

कुंडली में संतान योग

मार्च 2009

व्यूस: 44158

जीवन में समस्त सुखों में महत्पूर्ण हैं. संतानसुख. भारतीय हिन्दू धर्मशास्त्र में पांच प्रकार के ऋणों की चर्चा की गई हैं जिनमें एक पितृ ऋण. पितृ ऋण बगैर संतान उत्पति के नहीं चुकाया जा सकता. वंश को आगे बढाने हेतु पुत्रोत्पति ही पितृ ... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय विश्लेषणज्योतिषीय योगबाल-बच्चेभविष्यवाणी तकनीक

वक्री गुरु का प्रभाव

अप्रैल 2015

व्यूस: 43579

वक्री ग्रहों के संबंध में ज्योतिष प्रकाशतत्व में कहा गया है कि-“क्रूरा वक्रा महाक्रूराः सौम्या वक्रा महाशुभा।।” अर्थात क्रूर ग्रह वक्री होने पर अतिक्रूर फल देते हैं तथा सौम्य ग्रह वक्री होने पर अति शुभफल देते हैं।... और पढ़ें

ज्योतिषग्रहभविष्यवाणी तकनीक

क्या आपका जीवन साथी पहले से तय है?

अप्रैल 2006

व्यूस: 43430

मानव जीवन पर ग्रहों का प्रभाव पड़ता है, यह तो हम सभी जानते हैं। लेकिन अगर हम यह कहें कि ग्रहों का मानव जीवन पर प्रभाव अवश्य पड़ता है और वह अकाट्य होता है तो इसमें शायद मत भिन्नता हो सकती है। बहुत से बुद्धिजीवी, विशेषकर वैज्ञानिक, जो... और पढ़ें

ज्योतिषविवाहभविष्यवाणी तकनीक

छाया ग्रह होते हुए भी प्रभावी है राहू-केतु

आगस्त 2006

व्यूस: 43149

सौर मंडल में सभी ग्रह सूर्य के चारों और अपने-अपने अंडाकार पथ पर निरंतर परिक्रमा करते रहते है। सूर्य से बढती दूरी के क्रम में ग्रह हैं। - बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, गुरु और शनि। चूंकि हम पृथ्वी पर ग्रहों के प्रभावों के आकलन के लिए प... और पढ़ें

ज्योतिषप्रसिद्ध लोगज्योतिषीय विश्लेषणकुंडली व्याख्या

सूर्य का नीच भंग राजयोग

जुलाई 2010

व्यूस: 41176

नवग्रहों में सूर्य राजसी ग्रह माना जाता है। मेष राशि में सूर्य उच्चस्थ होते हैं और तुला राशि में नीचस्थ। प्रस्तुत है सूर्य के नीच भंग राजयोग का कुंडलीय विश्लेषण।... और पढ़ें

ज्योतिषप्रसिद्ध लोगज्योतिषीय योगयशकुंडली व्याख्याभविष्यवाणी तकनीकसफलता

भवन निर्माण कार्य एवं मुहूर्त

जून 2011

व्यूस: 41152

भवन निर्माण के लिए यदि हम अच्छा मुहूर्त यानि वास्तु पुरूष की जागृत अवस्था में कार्य प्रारंभ करें तो वास्तु या अन्य किसी दोष का निवारण स्वतः ही हो जाता है। जब किसी महीने में वास्तु पुरूष चौबीस घंटे सो रहें हो तो कोई भी निर्माण कार्... और पढ़ें

ज्योतिषमुहूर्तभविष्यवाणी तकनीक

सर्वतोद्रद्र मंडंल

अकतूबर 2009

व्यूस: 40060

मंडल, यंत्र एवं चक्र में अनेकानेक गुप्त शक्तियों को समाहित एवं नियंत्रित करने की असीम क्षमता होती है। मंडल का उपयोग देवता विशेष की पूजा एवं विशिष्ट उद्देश्य की पूर्ति हेतु होता है। मंडल एवं चक्र देवतारूपी महामंत्र है। इस पर पूजित ... और पढ़ें

ज्योतिषमेदनीय ज्योतिषभविष्यवाणी तकनीक

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