मूंगा

जून 2009

व्यूस: 30156

मूंगा धारण करने से मंगल ग्रह जनित समस्त दोषों का निवारण होता है. मूंगा धारण करने से रक्त साफ होता है. और रक्त की वृद्धि होती है. ह्रदय रोगों में भी मूंगा धारण करने से लाभ प्राप्त होता है. मूंगा धारण करने से व्यक्ति कों नज़र दोष तथा... और पढ़ें

ज्योतिषउपायरत्न

ग्रहों का उदय और अस्त

अप्रैल 2010

व्यूस: 30131

इस अनुपम विशेषांक में पंचांग के इतिहास विकास गणना विधि, पंचांगों की भिन्नता, तिथि गणित, पंचांग सुधार की आवश्यकता, मुख्य पंचांगों की सूची व पंचांग परिचय आदि अत्यंत उपयोगी विषयों की विस्तृत चर्चा की गई है। पावन स्थल नामक स्तंभ के अं... और पढ़ें

ज्योतिषआकाशीय गणितग्रह

भंग हो केमद्रुम योग, तो बने राजयोग

जून 2011

व्यूस: 29924

केमद्रुम योग के बारे में अधिकांशतः इसके नकारात्मक पक्ष पर अधिक बल है यदि हम इसके सकारात्मक पक्ष का गंभीर पूर्वक विवेचन करें तो कुछ विशेष योगों की उपस्थिति में केमद्रुम योग भंग होकर राजयोग में परिवर्तित हो जाता है।... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगकुंडली व्याख्याभविष्यवाणी तकनीक

नौकरी कब मिलेगी ?

अप्रैल 2014

व्यूस: 29789

शास्त्रों के अनुसार ग्रहों का मानव शरीर पर किसी न किसी रूप में प्रभाव पड़ते हैं। ये प्रभाव प्रतिकूल या अनुकूल हो सकते हैं। मानव की सभी क्रियाएं, कमोबेश, इन ग्रहों के द्वारा संचालित होती हैं। नौ ग्रहों में किस ग्रह की महादशा और अंतर... और पढ़ें

ज्योतिषदशागोचरग्रहवशीकरण

आइ. ए. एस. तथा आई.पी.एस. बनने के ज्योतिषीय योग

फ़रवरी 2011

व्यूस: 29684

शिक्षा प्राप्ति के बाद कार्य क्षेत्र में प्रवेश करने से पूर्व प्रशासन के क्षेत्र में उच्च पद प्राप्ति की महत्वाकांक्षाओं को पूर्ण करने में किन ज्योतिषीय योगों से मार्गदर्शन और सहायता प्राप्त की जा सकती है। आइए, जानें उन योगों के ब... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय विश्लेषणज्योतिषीय योगकुंडली व्याख्याभविष्यवाणी तकनीक

राजयोग तथा विपरीत राजयोग

जुलाई 2013

व्यूस: 29680

फलदीपिका ग्रंथ के अनुसार:- दुःस्थानभष्टमरिपु व्ययभावभाहुः सुस्थानमन्य भवन शुभदं प्रदिष्टम्। (अ. 1.17) अर्थात् ‘‘जन्मकुण्डली के 6,8,12 भावों को दुष्टस्थान और अन्य भावों को सुस्थान कहते हैं।’’ अन्य भावों में केन्द्र (1,4,7,10) तथा त... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगभविष्यवाणी तकनीक

राहु: शुभ अथवा अशुभ

मार्च 2013

व्यूस: 29406

ज्योतिष की दृष्टि से हमारे जीवन में घटित होने वाली शुभ या अशुभ प्रत्येक घटना नव ग्रहों पर ही आधारित होती है और नवग्रहों में ही राहु का नाम विशेष चर्चा में रहता है। जन्मकुंडली में राहु का नाम सुनते ही व्यक्ति अनिष्ट की आशंका करने ल... और पढ़ें

ज्योतिषउपायदशाघरग्रहभविष्यवाणी तकनीकटोटके

अस्त ग्रहों का प्रभाव एवं उनका फल

अप्रैल 2015

व्यूस: 29176

अस्तग्रहों के बारे में कहा गया है -‘त्रीणि अस्ते भवे जड़वत’ अर्थात किसी जन्म चक्र में तीन ग्रहों के अस्त हो जाने पर व्यक्ति जड़ पदार्थ के समान हो जाता है। ऐसा व्यक्ति स्थिर बना रहना चाहता है, उसके शरीर, मन और वचन सभी में शिथिलता... और पढ़ें

ज्योतिषग्रहभविष्यवाणी तकनीक

भविष्य जानने की प्राचीन विद्या रमल

अकतूबर 2011

व्यूस: 28884

रमल भूत, भविष्य, वर्त्तमान, रूप, आयु तथा मृत्यु हर प्रकार के शुभाशुभ फल ज्ञात करने की प्राचीन विद्या है. भारतीय विद्वानों के मतानुसार ज्योतिष के अन्य अंगों की भाँती 'रमल' विद्या भी मूलत" भारत की ही दें है.... और पढ़ें

ज्योतिषभविष्यवाणी तकनीकरमल शास्त्र

महिलाएं और उनको प्रभावित करने वाले नौ ग्रह

जुलाई 2014

व्यूस: 28875

वैसे तो सौरमंडल के सभी ग्रह धरती पर सभी प्राणियों पर एक जैसा ही प्रभाव डालते हैं। लेकिन सभी प्राणियों का रहन सहन और प्रवृत्ति या प्रकृति एक दूसरे से भिन्न होती है इसलिए ग्रहों का प्रभाव कुछ कम -ज्यादा तो होता ही है। यहा... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगग्रहभविष्यवाणी तकनीक

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