क्या और कैसे होते हैं-उच्च, नीच, वक्री एवं अस्त ग्रह

अप्रैल 2015

व्यूस: 39257

उच्च तथा नीच राशि के ग्रह भारतवर्ष में अधिकतर ज्योतिषियों तथा ज्योतिष में रूचि रखने वाले लोगों के मन में उच्च तथा नीच राशियों में स्थित ग्रहों को लेकर एक प्रबल धारणा बनी हुई है कि अपनी उच्च राशि में स्थित ग्रह सदा शुभ फल दे... और पढ़ें

ज्योतिषग्रहभविष्यवाणी तकनीक

व्यवसाय का निर्धारण

अप्रैल 2009

व्यूस: 39253

हमारे जन्मांग चक्र में विभिन्न भावों को धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष चार भागों में बांटा जाता है। 1, 5, 9 धर्म भाव, 2, 6, 10 अर्थ भाव, 3, 7, 11 काम भाव और 4, 8, 12 मोक्ष भाव है।... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगशिक्षाकुंडली व्याख्याघरग्रहभविष्यवाणी तकनीक

लाजवर्त मणि एक नाम अनेक काम

फ़रवरी 2006

व्यूस: 38998

प्रचीन ग्रंथों में जिस नीलम का वर्णन मिलता है, वह वास्तव में नीलम न हो कर आज की लाजवर्त मणि ही है। भले ही आज की नीलम ने लाजवर्त से वह उच्च आसन छीन कर उसे उपरत्न की श्रेणी में ला रखा हो, पर अब भी इसकी उपयोगिता कम नहीं हुई है... और पढ़ें

ज्योतिषरत्न

तुरंत फलादेश विधि

मार्च 2012

व्यूस: 38500

ज्योतिष में तुरंत उत्तर ही नहीं बल्कि जातक के मस्तिष्क में क्या सवाल है, वह भी जाना जा सकता है. सर्व प्रथम प्रश्न कुंडली उस समय व स्थान भी बनाएं जहां से जातक प्रश्न कर रहा है. यह ज्ञात रहे की ग्रह-गोचर जातक के दिमाग में... और पढ़ें

ज्योतिष

आर्थिक उन्नति कारक दक्षिणावर्ती शंख

आगस्त 2009

व्यूस: 38387

दक्षिणावर्ती शंख का अपने चमत्कारी गुणों क कारण अपना विशेष महत्व है. यह शंख विदेश दुर्लभ तथा सर्वाधिक मूल्यवान होता है. असली दक्षिणावर्ती शंख कों प्राण प्रतिष्ठित कर के उद्दोग – व्यवसाय स्थल, कार्यालय, दुकान अथवा घर में स्थापित कर ... और पढ़ें

ज्योतिषउपायमंत्र

उच्च नीच के ग्रह क्यों और कैसे होते हैं?

अप्रैल 2015

व्यूस: 37917

ज्योतिष में रुचि रखने वाले उच्च/ नीच के ग्रहों से रोजाना मुखातिब होते हैं और ग्रहों की इस स्थिति के आधार पर फलकथन भी करते हैं। शाब्दिक परिभाषा के आधार पर ‘उच्च’ का तात्पर्य सामान्य स्तर से ऊँचा और ‘नीच’ का तात्पर्य सामान्य ... और पढ़ें

ज्योतिषग्रहभविष्यवाणी तकनीक

कुंडली के द्वादश भावों में बृहस्पति का फल

अप्रैल 2004

व्यूस: 36585

सभी जानते हैं कि बृहस्पति ग्रह, समस्त ग्रह पिंडों में सबसे अधिक भारी और भीमकाय होने के कारण, गुरु अथवा बृहस्पति के नाम से जाना जाता है। यह पृथ्वी की कक्षा में मंगल के बाद स्थित है और, सूर्य को छोड़ कर, सभी अन्य ग्रहों से बड़ा है। इस... और पढ़ें

ज्योतिषघरग्रहभविष्यवाणी तकनीक

हस्त रेखा द्वारा जन्मकुंडली

जून 2013

व्यूस: 35146

प्रश्न: यदि किसी जातक के पास अपना जन्म विवरण न हो तो क्या हस्तरेखा के द्वारा जन्म विवरण जानकर जन्मकुंडली बनायी जा सकती है। यदि हां तो विस्तृत वर्णन करें अथवा प्रश्न कुंडली द्वारा वांछित प्रश्न का उत्तर कैसे देंगे, विस्तार पूर्वक व... और पढ़ें

ज्योतिषहस्तरेखा शास्रआकाशीय गणितग्रह पर्वत व रेखाएं

हिस्टीरिया

अप्रैल 2010

व्यूस: 34792

‘हिस्टीरिया' रोग एक मनोरोग है। इस रोग का मूल कारण होता है रोगी किसी अतृप्त इच्छा को अपने अंतर्मन में दबाए रखता है। आइए, इस रोग के लक्षण व विभिन्न लग्नों में ज्योतिषीय कारणों का पता लगाएं।... और पढ़ें

ज्योतिषस्वास्थ्यउपायराशि

विभिन्न भावों में मंगल का फल

जून 2013

व्यूस: 34351

जन्मकुंडली के प्रथम भाव में मंगल जातक को साहसी, निर्भीक, क्रोधी, किसी हद तक क्रूर बनाता है, पित्त रोग का कारक होता है तथा चिड़चिड़ा स्वभाव वाला बनाता है। उसमें तत्काल निर्णय लेने की क्षमता होती है तथा वह लोगों को प्रभावित करने तथा अ... और पढ़ें

ज्योतिषघरग्रहभविष्यवाणी तकनीक

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