उत्तर दिशा में स्थित गृह/भूखंड

उत्तर दिशा में स्थित गृह/भूखंड  

उत्तर दिशा के मकान / भूखंड उत्तर दिशा एक पवित्रा दिशा है। भगवान कुबेर इस दिशा के अध्पिति हैं। ये ध्न एवं समृ(ि के भी देवता हैं। ये व्यवसाय एवं व्यापार के लिए प्रमुख हैं। इनकी अभिरुचि ललित कलाओं में अध्कि है किंतु ये कुष्ठ रोग से पीड़ित हैं। लगता है कि शायद यही कारण है कि ध्नी एवं समृ( लोग बीमारियों से ग्रस्त रहते हैं। उत्तर दिशा धन एवं महिलाओं के सुख को प्रतिबिंबित करता है कुबेर को त्रयंबक भी कहा जाता है। ये भगवान शिव के अच्छे सहचर हैं। इनकी एक मुख तथा दो भुजाएं हैं। इनके दाएं हाथ में सोने का भाला तथा बाएं हाथ में एक बर्तन है जिसमें बेशकीमती रत्न, स्वर्ण, ध्न इत्यादि हैं। इनकी पत्नी अथवा देवी को ‘छिद्रिनी’ कहा जाता है। इनकी सवारी अश्व है। कुछ शास्त्रों का कहना है कि इनकी सवारी एक पुरुष है ;इसीलिए ध्न पुरुष का अध्पिति हैद्ध। इनका शरीर सुनहले रंग का है। यदि इस दिशा में उत्तर-पूर्व के साथ वृ(ि होती है तो यह परिवार को अध्कि सुख एवं समृ(ि प्रदान करता है। जो लोग उत्तरमुखी मकानों में निवास करते हैं, वे कानून का पालन करने वाले होते हैं। इन्हें अपने पद एवं आत्मसम्मान की कद्र होती है। इनको कानून के विरु( की जाने वाली गतिविध्यिों से भय लगता है। ये अपने कार्यों के प्रति ध्ैर्य एवं सहनशीलता प्रदर्शित करते हैं। इनकी अभिरुचि राजनीति एवं दूसरे सामाजिक विकास कार्यों के प्रति कम होती है। यह दिशा महिलाओं का वर्चस्व प्रदर्शित करती है। अच्छी तरह से निर्मित उत्तरमुखी मकान महिलाओं की स्थिति तथा परिवार में इनकी नेतृत्व क्षमता में वृ(ि करता है। यदि उत्तर-पूर्व दोषपूर्ण हो तो इसके कारण महिलाओं का स्वास्थ्य प्रायः प्रभावित होता है तथा इन्हें उचित ईलाज की आवश्यकता पड़ती है। इस दिशा से प्रवाहित होने वाली वायु का स्पर्श मध्ुर एवं चिपचिपा होता है। यह वायु ठंडी होती है तथा शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। ऐसे मकान में रहने वाले लोग अपने शत्राुओं को भी क्षमा कर देते हैं। ये गरीबों तथा नीचे तबके के लोगों के प्रति दया की भावना रखते हैं। किंतु ये लोग जोखिम उठाने में भय महसूस करते हैं। यदि इस दिशा का उचित उपयोग किया जाता है तो यहां महिलाओं का जीवन कापफी सुखी होता है। घर में हमेशा अच्छी मात्रा में ध्न का आगमन निरंतर होता रहता है। हमें इस उत्तर दिशा में पत्थर, कचरे इत्यादि का ढेर जमा नहीं करना चाहिए। इससे आर्थिक हानि होती है तथा बच्चों का विकास अवरु( होता है। इस मकान के सामने एक सड़क है तथा सड़क उत्तर दिशा की ओर है अतः यह मकान उत्तरमुखी मकान कहा जाएगा। इस मकान की स्थिति अच्छी है अतः यहां के निवासी सुख, समृ(ि, आनंद, ध्न, दूसरों को )ण, अच्छे स्वास्थ्य एवं हर प्रकार के सुख का अनुभव करेंगे। किंतु यदि चीजें विपरीत होंगी तो इसके परिणाम भी अलग होंगे। सामान्यतः इस मकान में महिलाओं का वर्चस्व परिलक्षित होता है। वर्चस्व का तात्पर्य है कि पति पत्नी की बातों की कद्र करेंगे अथवा पत्नी पति के हर कार्य में हस्तक्षेप करेगी एवं निर्देश देगी। उत्तर-पूर्व कटाव उत्तर पूर्व में कटाव संपूर्ण भूखंड / मकान के लिए खतरा है। उत्तर-पूर्व कटाव वाले भूखंड / मकान अथवा पफैक्ट्री न खरीदें। यदि उत्तर-पूर्व कोना नहीं है तो इससे हर प्रकार का विकास अवरु( हो जाएगा। दूसरा उत्तर-पूर्व कटाव वाला भूखंड देखें यहां भी उत्तर-पूर्व में कटाव संपूर्ण भूखंड / मकान के लिए खतरा है। उत्तर-पश्चिम वृद्धि भूखंड अथवा मकान इस भूखंड में उत्तर-पश्चिम में उत्तर की ओर वृ(ि है। यह भूखंड भी खतरनाक है तथा इसे खरीदने की सलाह नहीं दी जाती। कुछ तकनीक हैं जिससे कि इस वृ(ि दोष को दूर किया जा सकता है। किंतु मौलिक रूप से इस भूखंड में वृ(ि के कारण स्वयं नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आप इस तरह के कई भूखंड अमेरिका अथवा दूसरे पश्चिमी देशों में देख सकते हैं। ध्यान दें, यदि आपका व्यावसायिक प्रतिष्ठान इस प्रकार का है तो तुरंत सक्रिय हों अन्यथा इसका परिणाम कापफी बुरा हो सकता है।


श्रीकृष्ण विशेषांक  आगस्त 2016

फ्यूचर समाचार का वर्तमान अंक भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। इस अंक में भगवान श्रीकृष्ण, उनसे सम्बन्धित कहानियां एवं श्रीमद् भगवद्गीता के महत्वपूर्ण व्याख्यानों को समाविष्ट किया गया है। महत्वपूर्ण आलेखों में सम्मिलित हैं: गीता के शब्दार्थों का मूल एवं वर्तमान, श्रीकृष्ण जी का भगवद् प्राप्ति संदेश, संक्षिप्त गीतोपनिषद् कृष्ण की रास लीला या जीवन रस लीला, कर्म का धर्म आदि। इसके अतिरिक्त पत्रिका के अन्य स्थायी स्तम्भों के अन्तर्गत अनेक विचारोत्तेजक आलेखों को संलग्न किया गया है।

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