मिट्टी की जांच करने की विधि

मिट्टी की जांच करने की विधि  

नींव की प्लान तैयार करने से पहले नींव वाले स्थान की मिट्टी की जांच करना बहुत जरूरी होता है। मिट्टी की जांच करने से हमें पता चल जाता है कि मिट्टी में क्या गुण हैं। हमें यह पता चल जाता है कि वह कितना बोझ सहन कर सकती है या कितना बोझ उस पर डाला जा सकता है। दूसरे शब्दों में इसके गुणों का पता लग जाने से हम उसके अनुसार ही नींव अभिकल्पन कर सकते हैं। मिट्टी की जांच करने के लिए प्रायः निम्नलिखित तरीके अपनाये जाते हैं- निरीक्षण किसी भी संरचना का डिजाइन तैयार करने से पहले वहां के स्थल का निरीक्षण करना बहुत जरूरी है। इसके लिए उस क्षेत्र में बने गढ्डों और पहले की बनी हुई इमारतों की नींव से हम वहां के स्थल का अंदाजा लगा सकते हैं। उस क्षेत्र में नये गढ्डे खोदकर भी उस क्षेत्र के भूविज्ञान का अध्ययन किया जा सकता है। नगर पालिका, विकास प्राधिकरण या अन्य सोसाइटी जो सारे क्षेत्र के निर्माण की देखभाल करती है और मकानों के नक्शे की स्वीकृति देती है उसके पास उस क्षेत्र की वहन शक्ति का ब्यौरा होता है। उससे पूछताछ करके व कच्चे कुओं का अध्ययन करके उस क्षेत्र की अवभूमि की मूल्यवान जानकारी इकट्ठी की जा सकती है। गहराई नापना यह परीक्षण-विधि केवल नरम मिट्टी में ही उपयोगी है, जहां मिट्टी, बजरी या रेत हो। इस विधि द्वारा प्राप्त परिणाम विश्वसनीय नहीं होते तथा उनकी जांच करने के लिए और निश्चित उपाय करने चाहिए। इस परीक्षण-विधि में 2.5 सेमी. से 4 सेमी. व्यास की एक नुकीली छड़ का प्रयोग किया जाता है। यह छड़ हथौड़े से या किसी दूसरे तरीके से जमीन में धसा दी जाती है। थोड़ी-थोड़ी गहराई तक छड़ को धसाकर बाहर निकाल लिया जाता है तथा छड़ पर लगी मिट्टी का परीक्षण किया जाता है। यह छड़ तब तक जमीन में धसा दी जाती है जब तक कि उसकी नोंक किसी सख्त आधार से टकराती नहीं बीच-बीच में हम छड़ की नोंक पर चिपटी मिट्टी को विभिन्न तहांे की गहराई का अंदाजा लगा सकते हैं। इसके अलावा हथौड़े की चोट से जितनी छड़ अंदर धसी होे उस मिट्टी की परतों की गहराई का अंदाजा लगा सकते हैं। एक तजुर्बेकार व्यक्ति छड़ के अंदर धसने की दर सेे मिट्टी के गुणों का आसानी से अंदाजा लग सकता है। मिट्टी में तथा रेत में कम गहरी नींवों का परीक्षण करने के लिए एक उपकरण, जिसे लकड़ी का बरमा कहा जाता है, बहुत लाभदायक होता है। यह लकड़ी में छेद करने वाले गिटमिट जैसा होता है, कि उससे ज्यादा सख्त होता है। बेधन-विधि भिन्न-भिन्न प्रकार के बरमों से मिट्टी में छिद्र किए जा सकते हैं। इसलिए इस विधि को बेधन-विधि कहते हैं। साधारण भवनों की नींवों का परीक्षण करने के लिए ये बरमे बहुत सुविधाजनक और उपयोगी होते हैं। बेधन की विभिन्न विधियां इस प्रकार हैं- बरमा बेधन विधि मिट्टी वाली और रेतीली जमीन में परीक्षण करने के लिए यह विधि है। इसमें बरमे को सीधा खड़ा किया जाता है तथा उसके ऊपरी भाग पर लगे हुए दस्ते (हैण्डल) के द्वारा उसे नीचे को दबाते हुए घुमाया जाता है। लगभग एक फुट गहरा छिद्र करने के बाद बाहर निकाल लिया जाता है तथा उसके द्वारा इकट्ठी की गई मिट्टी परीक्षण के लिए रख ली जाती है। इस बरमे की मदद से लगभग 15 मी. गहराई तक मिट्ी का परीक्षण किया जा सकता है। पथरीली या बजरी वाली जगह पर इस विधि का प्रयोग नहीं किया जा सकता।


शनि विशेषांक  नवेम्बर 2011

शनि का महत्व एवं मानव जीवन में शनि का योगदान | तुला राशि में शनि का गोचर एवं इसका बारह राशियों पर प्रभाव| शनि दोष शांति हेतु ज्योतिषीय उपाय |

सब्सक्राइब

अपने विचार व्यक्त करें

blog comments powered by Disqus
.