माननीय श्री पी. चिदम्बरम

माननीय श्री पी. चिदम्बरम  

पी. चिदंबरम यू. पी. ए. सरकार में गृहमंत्री के पद पर विराजमान हैं। अन्ना हजारे के अनशन के समय से ही उनके उपर कई तरह के आरोप लग रहे हैं। अभी हाल ही में जब हाई कोर्ट के सामने आतंकी हमला हुआ था उस समय भी उनकी आलोचना हुई। आइये देखते हैं ग्रह नक्षत्रों के माध्यम से कि चिदम्बरम के सितारे क्या कहते हैं उनके बारे में। मामाननीय श्री पलानीअप्पन चिदंबरम जी का जन्म मिथुन लग्न तथा धनु राशि में हुआ लग्नेश चतुर्थेश बुध पराक्रमेश सूर्य के साथ बुद्धादित्य योग बना रहा है जिस पर शनि केतु की दृष्टि भी है। जो नाम सम्मान ज्ञान तो देता है साथ ही अहंकार अहम गुस्सा, मितभाषी, लगन, अकेलापन भी देता है उन्होंने बचपन में संघर्ष किया है, वे बहुत ही स्वाभिमानी व्यक्ति हैं वे हार मानने वाले व्यक्ति नहीं हैं। बल्कि लगातार प्रयत्न करने वाले व्यक्ति हैं। द्वितीयेश चंद्रमा केतु के साथ सप्तम में अष्टमेश भाग्येश शनि तथा षष्ठेश लाभेश मंगल उच्च के राहु से दृष्ट है। जो धन की लालसा या धन के प्रति अधिक रुचि पैदा करता है। परिवार कुटुंब का सुख नहीं मिलने देता। पत्नी से विचारों की भिन्नता और पत्नी का स्वास्थ्य प्रभावित करता है, पेट की शिकायत या पेट से संबंधित रोग भी देता है। द्वितीय स्थान में शुक्र स्थिति के कारण बहुत कमजोर हो गया है अर्थात समय-समय पर धन की कमी, आमदनी से अधिक खर्च की संभावनाएं बनी रहती हैं। बचपन में धन की कमी महसूस हुई होगी पराक्रमेश सूर्य लग्नेश चतुर्थेश के साथ योगकरी बन गया है जो व्यक्ति को सजग प्रयत्नशील, निर्भिक, उच्च, प्रशासनिक क्षमता वाला व्यक्ति बनाता है। साथ ही व्यक्ति सुनता तो सभी की है लेकिन करता अपने मन की है चतुर्थेश बुध अच्छा नहीं, इनके मित्र कम और शत्रु अधिक बनते हैं। इन्हें मित्रों से कोई लाभ नहीं मिलेगा। चतुर्थ स्थान का बृहस्पति दशमेश सप्तमेश होकर दोषी बन गया है अर्थात उन्हें समय समय पर स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां जैसे- बवासीर, आखों की रोशनी, नजर संबंधी परेशानियां होती रहेंगंी, उन्हें कमजोरी, घबराहट होती रहेगी। पंचमेश व्ययेश शुक्र द्वितीय स्थान में कमजोर हैं जो व्यक्ति को चालाक, बुद्धिमान, अहंकारी, विवेकी बनाता है, साथ ही उच्च शिक्षा भी दिलाता है। षष्टेश लाभेश मंगल शनि राहु के साथ लग्न में अच्छा नहीं अर्थात 1 अगस्त 1982 से 1 अगस्त 1989 तक आॅप्रेशन, चोट के योग थे। यह काल खंड अच्छा नहीं था। सप्तमेश दशमेश बृहस्पति चैथे घर में कुछ कमजोर और दोषयुक्त है जो दांपत्य सुख तथा स्थिरता के लिए अच्छा नहीं अष्टमेश भाग्येश शनि लग्न में अच्छा है। इनकी जन्मकुंडली में सभी ग्रह सिर्फ पांच घरों में माला तथा महाभाग्यशाली योग का सृजन कर रहे हैं। इसीलिए ये वित्त मंत्री तथा गृह मंत्री के उच्च पदों को मात्र 67 वर्ष की उम्र में प्राप्त किये। लेकिन लग्न में शनि मंगल राहु की स्थिति अच्छी नहीं, जो उनके नाम सम्मान योग्यता को समय-समय पर प्रभावित करेगी स्वास्थ्य भी प्रभावित होगा। सप्तम में चंद्रमा केतु की स्थिति अच्छी नहीं, एक राजनीति से जुड़े व्यक्ति के लिए यह योग व्यक्ति को सार्वजनिक जीवन में नहीं आने देता है, व्यक्ति भीड़ या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच नहीं जाता, न हीं संबंध बनाए रखता है और भीड़ में गया भी या संबंध बनाने की कोशिश की भी तो उसका प्रभाव हमेशा उल्टा ही पड़ता है व्यक्ति जनप्रिय या लोकप्रिय नहीं बन पाता है। अष्टमेश लग्न में अच्छा नहीं लेकिन भाग्येश भी होने पर अच्छा बन गया है। दशमेश बृहस्पति चतुर्थ स्थान में अच्छा है लेकिन यह बृहस्पति दोषी भी है जो अब किसी भी स्थिति से अच्छा नहीं है जो इन्हें कभी भी पद त्यागने के लिए मजबूर कर सकता है। लाभेश षष्ठेश मंगल लग्न में राहु शनि के साथ अच्छा नहीं जो स्वास्थ्य दांपत्य जीवन पद प्रतिष्ठा को प्रभावित करता रहेगा। व्ययेश पंचमेश शुक्र धन स्थान में कमजोर स्थिति में स्थित है जो धन कुटुंब के लिए अच्छा नहीं विंशोत्तरी क्रम में उनकी बृहस्पति की दशा चल रही है। जो 01 अगस्त 2023 तक चलेगी जो कि अच्छी नहीं है। 1 अप्रैल 2012 तक का समय बहुत ही खराब समय है उन्हें अपना पद माननीय न्यायालय के आदेश से त्यागना पड़ सकता है, खास करके 10 अक्तूबर 2011 से 30 नवंबर 2011 तक मान सम्मान कि दृष्टि से समय अच्छा नहीं। 01 अगस्त 2023 तक उन्हें कई बार अपमानित होना पड़ सकता है। राजनीतिक जीवन भी प्रभावित होगा सावधानी रखें। आगे भी समय अच्छा नहीं है।


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