प्रश्न- भवन में बच्चों के लिए अध्ययन कक्ष किस स्थान पर होना चाहिए? उŸार- अध्ययन कक्ष का सबसे उपयुक्त स्थान पष्चिम दिषा है क्यांेकि इस दिषा पर विद्या की देवी मां सरस्वती का वास होता है। इसके अलावा उत्तर, पूर्व एवं ईषान क्षेत्र में भी अध्ययन कक्ष बनाया जा सकता है। उत्तर दिषा पर मानस चेतना के कारक ग्रह बुध, ईषान क्षेत्र पर ज्ञान के ग्रह गुरु एवं पूर्व पर आत्म कारक सूर्य का अधिकार होता है। अतः इन क्षेत्रों में अध्ययन कक्ष बनाने से बच्चांे के अध्ययन मंे काफी लाभ मिलता है। जिन बच्चों की जन्मपत्री में बुध एवं गुरु कमजोर हांे, उनके लिए अध्ययन कक्ष ईषान या उत्तर के क्षेत्र में बनाना चाहिए। जो बच्चे सुस्त एवं आलसी हों, उनका अध्ययन कक्ष पूर्व की ओर बनाना चाहिए। पढ़ाई करते वक्त मुंह उत्तर या पूर्व की ओर होना चाहिए इससे बच्चे विलक्षण प्रतिभा के धनी एवं ज्ञानवान होंगे। बच्चों का कमरा साफ-सुथरा अवष्य रखें ताकि तनाव मुक्त होकर एकाग्रता पूर्वक अध्ययन कर सकें। कमरे के ईषान कोण में कम से कम सामान रखें। जिन बच्चों में एकाग्रता एवं मनश्चेतना में कमी रहे उन्हंे हल्के हरे रंग के रंगों की दीवार एवं पर्दांे का इस्तेमाल अधिक से अधिक करना चाहिए। सुंदर फूल, मां सरस्वती का चित्र पूर्वी दीवार पर लगाना चाहिए। संभव हो सके तो अध्ययन कक्ष के ईषान कोण में सरस्वती यंत्र लगाए जायें। बच्चांे की टेबल पर कम से कम सामग्री रखी जाए एवं एकाग्रता पूर्वक अध्ययन करने के लिए टेबल पर सामने पिरामिड एवं म्कनबंजपवद जवूमत रखना विशेष लाभप्रद होता है। लटकते हुए बीम के ठीक नीचे अध्ययन नहीं करना चाहिए इससे एकाग्रता में कमी आती है। बच्चों के बैठकर अध्ययन करते समय पीठ के पीछे ठोस दीवार का होना सर्वोतम होता है। इससे आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। प्रश्न- क्या आवासीय भूखंड में बेसमेंट बनाना चाहिए? उŸार- आवासीय भूखंड में बेसमेंट नहीं बनाना चाहिए। क्योंकि बेसमेंट सूर्य की किरणों के लाभ से वंचित रहता है। अगर अनिवार्य हो तो उत्तर-पूर्व में ब्रह्म स्थान को बचाते हुए बनाना चाहिए। प्रश्न- भवन के अंदर दक्षिण- पश्चिम दिशाओं में बेसमेंट का क्या प्रभाव होता है ? उŸार- भवन के अंदर दक्षिण-पश्चिम दिशा में तहखाना भूलकर नहीं बनाना चाहिए। इन जगहों पर बनाने से परिवार के लोगों के स्वास्थ्य, आयु एव भाग्य में कमी तथा आपदाओं का सामना करते देखा गया है। साथ ही क्लेश, कर्ज, महापातकी एवं गरीबी पीछा नहीं छोड़ती। पोलियो तथा कैंसर जैसी आसाध्य बीमारियां अक्सर होते देखा गया है। भाग्य सो जाता है तथा रोजी-रोटी के लिए मोहताज होने लगते है। अतः दक्षिण-पश्चिम में भूलकर भी तहखाने या बेसमेंट का निर्माण न करायें। तहखाने या बेेसमेंट को कभी भी शयनकक्ष भोजन कक्ष, शौचालय और स्नानगृह के रूप में प्रयोग नहीं करना चाहिए। इसका प्रयोग लिविग रूम, मीटिंग रूम, पूजा गृह, अध्ययन कक्ष आदि के रूप में किया जा सकता है। प्रश्न- भवन में धन रखने के लिए सबसे उपयुक्त एवं शुभ स्थान कहां पर होता है? उŸार- वास्तु शास्त्र में धन रखने के लिए सबसे उपयुक्त एवं शुभ स्थान उŸार दिशा को माना गया है। क्योंकि इस दिशा का स्वामी कुबेर है कुबेर समृद्धि के देवी मां लक्ष्मी के खजांची हैं। इसलिए स्ट्रांग रूम उत्तर में रखने की सलाह दी जाती है। ताकि धन एवं समृद्धि की प्रवाह भवन में निरंतर बनी रहे। जिस अलमारी में रुपये एवं आभूषण-जेवरात रखनी हो उसे उŸार दिशा के कमरे में दक्षिण की दीवार से सटाकर रखनी चाहिए । इस प्रकार रखने से अलमारी उŸार दिशा की ओर खुलेगी जो काफी शुभफल मानी जाती है। ईशान एवं पूर्वी दिशा के कमरे में भी आभूषण जेवरात एवं रुपये रखना अच्छा माना गया है। इससे धन में वृद्धि होती है तथा गृहस्वामी को इसकी कमी महसूस नहीं होती है। प्रश्न- भवन के अंदर अन्य दिशाओं में धन रखने का क्या प्रभाव होता है? उŸार- आग्नेय दिशा में धन संपति रखने से कर्ज की स्थिति बनी रहती है जबकि दक्षिण दिशा में दक्षिण मुंह का धन आभूषण एवं जेवरात रखना लाभप्रद नहीं रहता। क्योंकि दक्षिण में यम् एवं दुर्गुणी आत्मा का वाश होता है अतः इनकी ओर अलमारी का पीठ रखना ही शुभ होगा। पश्चिम दिशा की ओर धन संपति रखने पर साधारण लाभ मिलता है। परंतु घर का मुख्य व्यक्ति अपने मित्रों के सहयोग के बावजूद अत्यधिक कठिनाई के साथ धन कमा पाते हैं। जीवन में लाभ-हानि समय-समय पर आते रहते है। वायव्य दिशा में धन जेवरात रखने पर आमदनी के अपेक्षा खर्च अधिक होता है ऐसे व्यक्ति का बजट हमेशा गड़बड़ाया रहता है तथा उस पर कर्ज का बोझ बना रहता है। सीढ़ियों के नीचे तथा सामने तिजोरी या अलमारी नहीं रखनी चाहिए तथा साथ ही स्नान घर के सामने भी न रखें। तिजोरी वाले कमरे में कबाड़ या गंदगी नहीं होनी चाहिए अन्यथा धन संपति मंे वृद्वि नहीं होती साथ ही घर में तंगहाली एवं बदहाली की स्थिति बनी रहती है।


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