पित्ताशय की पथरी

फ़रवरी 2010

व्यूस: 16112

पित्ताशय की पथरी होने के कई कारण है। लेकिन मुख्य कारण आहार है। असंयमित भोजन से पाचन क्रिया मंद हो जाती है जिसके फलस्वरूप दूषित द्रव्य संचित होकर पथरी का रूप धारण कर लेते हैं। आइए इस रोग के ज्योतिषीय कारणों का भी पता लगाएं ......... और पढ़ें

ज्योतिषस्वास्थ्यउपायविविधराशि

कुछ उपयोगी टोटके

मार्च 2013

व्यूस: 15794

बच्चा हो या वृद्ध ज्वर सभी को होता हैं। यदि आप को तेज ज्वर है। तो आप मंगलवार ओर शनिवार के दिन हनुमान मंदिर जाकर उनके दर्शन करके केवल उनके चरणों का सिन्दूर लाकर कुषा के आसन पर बैठ जाएं व् उतर दिशा की ओर मुंह करके निम्न उपाय करें।... और पढ़ें

स्वास्थ्यउपायटोटके

नवग्रहों से रोग ज्ञान

सितम्बर 2006

व्यूस: 15304

रोग दो तरह के होते हीं- दोषज एवं कर्मज। जिन रोगों का उपचार दवाओं से हो जाता हों, उन्हें दोषज तथा जिनका उपचार दवाओं से नहीं हो उन्हें कर्मज कहते है। कर्मज रोग मनुष्य को पूर्व जन्म के बुरे कार्यों और पापी ग्रहों से पीड़ित होने के कार... और पढ़ें

ज्योतिषस्वास्थ्यमंत्रग्रहभविष्यवाणी तकनीक

तेल मालिश:एक प्राकृतिक उपाय

जून 2013

व्यूस: 14822

मालिश शरीर को स्वस्थ, सुंदर, यौवनपूर्ण बनाने का एक सरल एवं उत्तम उपाय है। इससे अनेक प्रकार के रोगों के उपचार में सफलता प्राप्त होती है। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा की दृष्टि से यह एक कला भी है और प्राकृतिक उपाय भी। तेल मालिश से शरीर हल... और पढ़ें

स्वास्थ्यउपायविविध

कुछ उपयोगी टोटके

जनवरी 2010

व्यूस: 14657

छोटे-छोटे उपाय हर घर में लोग जानते हैं, पर उनकी विधिवत् जानकारी के अभाव में वे उनके लाभ से वंचित रह जाते हैं। इस लोकप्रिय स्तंभ में उपयोगी टोटकों की विधिवत् जानकारी दी जा रही है... और पढ़ें

स्वास्थ्यउपायविवाहसफलताटोटके

ज्योतिष द्वारा कैसे जानें मानसिक रोग

अप्रैल 2011

व्यूस: 14545

मन के हारे हार है 'मन के जीते जीत' उक्त कहावत हमारे जीवन में बहुत सार्थक प्रतीत होती है। मानसिक बल के आगे शारीरिक बल न्यून हो जाता है। व्यक्ति का मन अगर भ्रष्ट या अविवेकी हो जाए तो व्यक्ति का चरित्र लांछित हो जाता है। मन रोगी व कम... और पढ़ें

ज्योतिषस्वास्थ्यकुंडली व्याख्याघरचिकित्सा ज्योतिषग्रहभविष्यवाणी तकनीक

पहला सुख निरोगी काया

अकतूबर 2008

व्यूस: 13729

पहला सुख निरोगी काया अर्थात् अच्छा स्वास्थ्य जीवन का सबसे बड़ा सुख है। यदि व्यक्ति स्वस्थ नहीं है तो अन्य सुख किस काम के। ज्योतिष में स्वास्थ्य का विचार मुख्यतः लग्न, लग्नेश, षष्ठभाव, षष्ठेश, अष्टम भाव, अष्टमेश एवं अष्टम भाव में स... और पढ़ें

ज्योतिषस्वास्थ्यउपायज्योतिषीय योगचिकित्सा ज्योतिषभविष्यवाणी तकनीक

दक्षिण-पश्चिम का दोष प्रगति में बाधक

जुलाई 2013

व्यूस: 13518

चुम्बकीय कंपास के अनुसार 202 डिग्री से लेकर 247 डिग्री के मध्य के क्षेत्र को नैर्ऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) दिशा कहते हैं। दक्षिण-पश्चिम का क्षेत्र पृथ्वी तत्व के लिए निर्धारित है। यह सभी तत्वों से स्थिर है। यह दिशा सभी प्रकार की विषमता... और पढ़ें

स्वास्थ्यउपायवास्तुसुखगृह वास्तुव्यवसायिक सुधारसंपत्ति

रोगों के कारक ग्रह और उनके ज्योतिषीय उपाय

जनवरी 2006

व्यूस: 12557

रोग कारक ग्रह जब गोचर में जन्मकालीन स्थिति में आते हैं और अंतर-प्रत्यंतर दशा में इनका समय चलता है तो उसी समय रोग उत्पन्न होता है। यदि षष्ठेश, अष्टमेश एवं द्वादशेश तथा रोग कारक ग्रह अशुभ तारा नक्षत्रों में स्थित होते हैं तो रोग की... और पढ़ें

ज्योतिषस्वास्थ्यउपायज्योतिषीय योगचिकित्सा ज्योतिषभविष्यवाणी तकनीक

कुष्ठ रोग

जनवरी 2010

व्यूस: 12547

कुष्ठ रोग त्वचा से प्रारंभ होता है। जब त्वचा की सभी मुख्य परतें दूषित और बाहरी जीवाणुओं की रोकथाम करने में असमर्थ हो जाती है तो कुष्ठ रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। प्रस्तुत है कुष्ठ रोग के ज्योतिषीय योग... और पढ़ें

ज्योतिषस्वास्थ्यउपायराशि

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