चिल्ड्रेन्स रूम

चिल्ड्रेन्स रूम  

व्यूस : 3040 | आगस्त 2014

माता-पिता की यह उत्कट अभिलाषा होती है कि बच्चों को हर प्रकार की सुख-सुविधा उपलब्ध कराएं, अच्छी से अच्छी शिक्षा प्रदान करें, खेलकूद-मनोरंजन की समुचित व्यवस्था करें ताकि बच्चों का समग्र विकास हो सके। बच्चों का कमरा उनके लिए मनोरंजन, मस्ती और उल्लास का केंद्र होता है। उनका रूम जितना अधिक वास्तु सम्मत होगा उतना ही अधिक वे ऊर्जावान होंगे तथा अपनी क्रिएटिविटी का सकारात्मक उपयोग अपनी पढ़ाई-लिखाई, खेलकूद, अनुशासन आदि जीवन के हर क्षेत्र में बखूबी कर पाएंगे। जीवन में सफलता के चरमोत्कर्ष पर पहुंचने के लिए आॅल राउंडर बनना जरूरी है और यह तभी संभव है जब उनका रूम पूर्णरूपेण वास्तु सम्मत हो जिससे कि अपने रूम में मनोरंजन, मस्ती एवं उल्लास के साथ-साथ आराम एवं सुखद नींद की भी अनुभूति कर सकें।

वास्तु सम्मत रूम का तात्पर्य है सभी सामानों एवं अवयवों जैसे स्टडी टेबल, बेड, बाथरूम आदि का समंजन उचित स्थान एवं दिशा में करना। सभी सामानों का उचित स्थानों पर प्लेसमेंट बच्चों के मन में सकारात्मक सोच, ऊर्जा एवं स्फूर्ति विकसित करता है जिससे वे हंसमुख रहकर अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित होते हैं। आज के आधुनिक परिप्रेक्ष्य में बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण, वैश्वीकरण आदि के कारण संकुचित होते भूखंड में वास्तु का ध्यान लोग नहीं रख पाते। यही कारण है कि बच्चों के व्यवहार में अनुशासन हीनता, उग्रता, हिंसात्मक विचारों की अभिवृद्धि होती जा रही है। इसका एक प्रमुख कारण वास्तु नियमों की अवहेलना है। अतः यदि आप अपने बच्चों का बेहतर भविष्य चाहते हैं तथा यदि आप चाहते हैं कि वे आज्ञाकारी हों, विकासशील हों तथा उनकी सोच सकारात्मक हो तो निम्नांकित निर्देशानुसार उनके कक्ष की व्यवस्था करें: चिल्ड्रेन्स रूम के लिए उपयुक्त दिशाएं बच्चों का कमरा पश्चिम दिशा में सर्वश्रेष्ठ है किंतु विकल्प के तौर पर उत्तर-पश्चिम भी श्रेष्ठ है। अतः चिल्ड्रेन्स रूम के लिए इन्हीं दो दिशाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए। रखें कि सोते वक्त उनका सिर दक्षिण दिशा में हो।

यदि दक्षिण में सिर रखना संभव न हो तो पूर्व दिशा में भी सिर रखकर सोना उपयुक्त है। फेंग शुई में कुआ नंबर के आधार पर बेड के व्यवस्थापन की बात कही गई है। अनुभव में यह देखा गया है कि कुआ नंबर के अनुसार चीजों का व्यवस्थापन भी अच्छे परिणाम देता है। ध्यातव्य है कि कुआ नंबर की गणना की विधि फ्यूचर समाचार के जनवरी 2014 के अंक में सविस्तार बतलाई गई है। स्टडी एरिया एवं स्टडी टेबल स्टडी के लिए बच्चों के कमरों में उत्तर-पूर्व का कोना यथेष्ट है। स्टडी एरिया बिल्कुल साफ-सुथरा एवं कबाड़ मुक्त होना चाहिए। इससे बच्चों की पढ़ाई में रूचि बढ़ती है तथा उनका संकेन्द्रण भी बढ़ता है। साफ-सुथरा एवं कबाड़ मुक्त स्टडी एरिया होने से बच्चों के दिमाग में नये-नये विचारों का उदय होता है तथा उनकी रचनात्मक गतिविधियां बढ़ती हैं। स्टडी टेबल को इस प्रकार व्यवस्थित करें कि पढ़ते समय बच्चे का मुंह उत्तर, पूर्व अथवा उत्तर-पूर्व दिशा की ओर रहे। पूर्व दिशा को सबसे शुभ दिशा माना जाता है क्योंकि यह बच्चों को ध्यान केन्द्रित करने में सहायक होता है। स्टडी टेबल को दीवार से बिल्कुल सटाकर न रखें। दीवार एवं टेबल के बीच कम से कम 3’’ की दूरी आवश्यक है।

स्टडी टेबल रेगुलर शेप का अर्थात् आयताकार अथवा वर्गाकार ही होना चाहिए। गोल, अंडाकार अथवा कोई अन्य आकार का स्टडी टेबल न रखें। स्टडी टेबल के ऊपर ऐसा ग्लास न रखें जो बच्चे का प्रतिबिंब बनाए। स्टडी टेबल का साइज न अधिक बड़ा और न ही अधिक छोटा होना चाहिए। यदि स्टडी टेबल पूर्वाभिमुख है तो लाइट अथवा लैंप दक्षिण-पूर्व दिशा की ओर रखें और यदि स्टडी टेबल उत्तराभिमुख है तो उत्तर-पश्चिम में लाइट अथवा लैंप रखना उपयुक्त है। टी. वी., कंप्यूटर/लैपटाॅप बच्चों के कमरों में टी. वी., कंप्यूटर/ लैपटाॅप आदि न रखें। इससे बच्चों का ध्यान भटकता है तथा वे पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते। किंतु स्थानों पर प्लेसमेंट बच्चों के मन में सकारात्मक सोच, ऊर्जा एवं स्फूर्ति विकसित करता है जिससे वे हंसमुख रहकर अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित होते हैं। आज के आधुनिक परिप्रेक्ष्य में बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण, वैश्वीकरण आदि के कारण संकुचित होते भूखंड में वास्तु का ध्यान लोग नहीं रख पाते। यही कारण है कि बच्चों के व्यवहार में अनुशासन हीनता, उग्रता, हिंसात्मक विचारों की अभिवृद्धि होती जा रही है। इसका एक प्रमुख कारण वास्तु नियमों की अवहेलना है।

अतः यदि आप अपने बच्चों का बेहतर भविष्य चाहते हैं तथा यदि आप चाहते हैं कि वे आज्ञाकारी हों, विकासशील हों तथा उनकी सोच सकारात्मक हो तो निम्नांकित निर्देशानुसार उनके कक्ष की व्यवस्था करें: चिल्ड्रेन्स रूम के लिए उपयुक्त दिशाएं बच्चों का कमरा पश्चिम दिशा में सर्वश्रेष्ठ है किंतु विकल्प के तौर पर उत्तर-पश्चिम भी श्रेष्ठ है।

अतः चिल्ड्रेन्स रूम के लिए इन्हीं दो दिशाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए। रखें कि सोते वक्त उनका सिर दक्षिण दिशा में हो। यदि दक्षिण में सिर रखना संभव न हो तो पूर्व दिशा में भी सिर रखकर सोना उपयुक्त है। फेंग शुई में कुआ नंबर के आधार पर बेड के व्यवस्थापन की बात कही गई है। अनुभव में यह देखा गया है कि कुआ नंबर के अनुसार चीजों का व्यवस्थापन भी अच्छे परिणाम देता है। ध्यातव्य है कि कुआ नंबर की गणना की विधि फ्यूचर समाचार के जनवरी 2014 के अंक में सविस्तार बतलाई गई है। स्टडी एरिया एवं स्टडी टेबल स्टडी के लिए बच्चों के कमरों में उत्तर-पूर्व का कोना यथेष्ट है।

स्टडी एरिया बिल्कुल साफ-सुथरा एवं कबाड़ मुक्त होना चाहिए। इससे बच्चों की पढ़ाई में रूचि बढ़ती है तथा उनका संकेन्द्रण भी बढ़ता है। साफ-सुथरा एवं कबाड़ मुक्त स्टडी एरिया होने से बच्चों के दिमाग में नये-नये विचारों का उदय होता है तथा उनकी रचनात्मक गतिविधियां बढ़ती हैं। स्टडी टेबल को इस प्रकार व्यवस्थित करें कि पढ़ते समय बच्चे का मुंह उत्तर, पूर्व अथवा उत्तर-पूर्व दिशा की ओर रहे। पूर्व दिशा को सबसे शुभ दिशा माना जाता है क्योंकि यह बच्चों को ध्यान केन्द्रित करने में सहायक होता है। स्टडी टेबल को दीवार से बिल्कुल सटाकर न रखें।

दीवार एवं टेबल के बीच कम से कम 3’’ की दूरी आवश्यक है। स्टडी टेबल रेगुलर शेप का अर्थात् आयताकार अथवा वर्गाकार ही होना चाहिए। गोल, अंडाकार अथवा कोई अन्य आकार का स्टडी टेबल न रखें। स्टडी टेबल के ऊपर ऐसा ग्लास न रखें जो बच्चे का प्रतिबिंब बनाए। स्टडी टेबल का साइज न अधिक बड़ा और न ही अधिक छोटा होना चाहिए। यदि स्टडी टेबल पूर्वाभिमुख है तो लाइट अथवा लैंप दक्षिण-पूर्व दिशा की ओर रखें और यदि स्टडी टेबल उत्तराभिमुख है तो उत्तर-पश्चिम में लाइट अथवा लैंप रखना उपयुक्त है। टी. वी., कंप्यूटर/लैपटाॅप बच्चों के कमरों में टी. वी., कंप्यूटर/ लैपटाॅप आदि न रखें। इससे बच्चों का ध्यान भटकता है तथा वे पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते। किंतु

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शारीरिक हाव भाव एवं लक्षण विशेषांक  आगस्त 2014

सृष्टि के आरम्भ से ही प्रत्येक मनुष्य की ये उत्कट अभिलाषा रही है कि वह किसी प्रकार से अपना भूत, वर्तमान एवं भविष्य जान सके। भविष्य कथन विज्ञान की अनेक शाखाएं प्रचलित हैं जिनमें ज्योतिष, अंकषास्त्र, हस्त रेखा शास्त्र, शारीरिक हाव-भाव एवं लक्षण शास्त्र प्रमुख हैं। हाल के वर्षों में शारीरिक हाव-भाव एवं अंग लक्षणों से भविष्यवाणी करने का प्रचलन बढ़ा है। वर्तमान अंक में शारीरिक हाव-भाव एवं अंग लक्षणों से भविष्यवाणी कैसे की जाती है, इसका विस्तृत विवरण विभिन्न लेखों के माध्यम से समझाया गया है।

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