व्यावहारिक अंग लक्षण विज्ञान

व्यावहारिक अंग लक्षण विज्ञान  

व्यक्ति का चेहरा उसके व्यक्तित्व का दर्पण होता है। व्यक्ति का प्रत्येक अंग उसके मस्तिष्क से बंधा होता है। उसका हृदय, लीवर, फेफड़े, किडनी, हड्डियां, नसें, नाड़ियां व मांसपेशियां सभी उसके सोचने व कार्य करने में सहायक होते हैं। पूर्ण शरीर समग्र रूप से ही कार्य करता है। शरीर का प्रत्येक अंग अपने आप में कुछ न कुछ संकेत समेटे रहता है। लेकिन कुछ संकेतों को कुछ विशेष अंगों से विशेष रूप से समझा जा सकता है। जैसे - सिर: जिस व्यक्ति का सिर बहुत बड़ा होता है वह पापी व निर्धन, छोटे सिर वाला स्फूर्तिवान और बुद्धिमान होता है क्योंकि बड़े सिर को फेफड़े पूर्ण ब्लड सप्लाई नहीं दे पाते और वह शीघ्र ही फैसले नहीें ले पाता। झुके सिर वाला विनम्र, मृदुभाषी व विद्वान होता है। अत्यंत नीचे सिर वाला व्यक्ति अल्पायु, टेढ़े सिर वाले दरिद्र व बहुत लम्बे सिर वाले दीर्घायु होते हैं। त्रिकोणाकार सिर वाले कलाकार होते हैं। मस्तक: छोटे मस्तक वाला सुखी, बड़े मस्तक वाला गुणी, उन्नत मस्तक वाला महत्वाकांक्षी, चैड़े मस्तक वाला यशस्वी, मस्तक में गड्ढे वाला निर्धन, दुर्बलकाय व कमजोर मानसिकता वाला होता है। मस्तक पर एक से लेकर पांच तक जितनी रेखाएं हों व्यक्ति उत्तरोत्तर उतना भाग्यशाली, दीर्घायु व सर्वगुण संपन्न होता है। लेकिन पांच से अधिक होने पर व्यक्ति भाग्यहीन व अल्पायु होता है। भौंहें: मोटी और सीधी भौंहें व्यक्ति को उल्लासपूर्ण बनाती हैं। पतली और कम घनी भांैहें कामचोर व लापरवाह लोगों की होती है। जुड़ी हुई भांैहें स्वार्थी व छोटी भौंहें परिश्रमी बनाती हैं। नेत्र: नीली आंखों वाले कुटिल, भूरी आंखों वाले स्वार्थी, सफेद आंखों वाले दम्भी, पीली आंखों वाले शरीर व बुद्धि से कमजोर, काली आंखों वाले विद्वान व गुणी होते हैं। बड़ी आंख वाले परोपकारी, धंसी हुई आंखों वाले गहरी सोच व गोपनीयता वाले, गोलाकार आंखों वाले दूरदर्शी, त्रिकोणाकार आँखों वाले अच्छे व्यापारी, कमानीदार आंखों वाले चालाक व छोटी आंख वाले अंतर्मुखी होते हैं। आंखों को इधर-उधर घुमाने वाले खोजी प्रवृत्ति के, चेहरे पर आंखें टिकाकार बात करने वाले संयमी, सिर पर दृष्टि टिकाकर बात करने वाले अहंकारी, घूरकर देखने वाले क्रोधी, एक आंख झपकाने वाले कुटिल, एक आंख वाले अविश्वसनीय होते हैं। नाक: सीधी नाक वाले अध्यात्मवादी, बड़ी नाक वाले नेतृत्वशक्ति संपन्न, छोटी नाक वाले अस्थिर प्रवृत्ति,लंबी नाक वाले कार्यकुशल, तीखी नाक वाले धूत्र्त, हुकदार नाक संपन्नता की लालसा वाले व तोते जैसी नाक वाले उच्च पदाधिकारी, राजा महाराजा होते हैं। गाल: गोल, उभरे व गुलाबीपन लिये हुये गाल वाले भाग्यशाली, ऊपरी उभार गाल वाले नेतृत्वशील, चैड़े और फैले गाल वाले कार्यों में निपुण, धंसे हुए गाल वाले भाग्यहीन, चपटे गाल वाले परिश्रमी, फूले हुए गाल वाले धनी, बैठे हुए गाल वाले पारिवारिक सुख से हीन होते हैं। होंठ: मोटे होंठ झगड़ालू प्रवृŸिा दर्शाते हैं। पतले होंठ जिद्दी स्वभाव के द्योतक होते हैं। काले होंठ तेज स्वभाव व तीक्ष्ण बुद्धि वालों के होते हैं। पतले होंठ महत्वाकांक्षी बनाते हैं। खूब बड़े होंठ व्यापारिक क्षेत्र में सफलता देते हैं। लम्बे, बड़े व पतले होंठ वाले व्यक्ति व्यवहार कुशल व सामने वाले के अनुसार स्वयं को ढाल लेने वाले होते हैं। यदि होंठ ऊपर की ओर घूमे हुए हों तो ऐसे व्यक्ति रहस्यमयी व बैंकिग सेक्टर में ऊंचा पद प्राप्त करते हैं। दांत: दांतों में दूरी होने से बुद्धिमान, टेढ़े दांतों वाले स्वार्थी, दांत के ऊपर दांत वाले कलहकारी, अधिक बड़े दांतों वाले मूर्ख, छोटे तीखे दांत वाले चतुर होते हैं। जिनके दांतों के साथ मसूड़े भी नजर आते हैं व मलिन अथवा पीले दांतों वाले व्यक्ति व्यर्थ बकवास करते हैं, सफेद, चमकीले व एक समान दांत वाले वाक्पटु होते हैं। चिबुक: ठुड्डी (चिबुक) पर डिंपल कलात्मक प्रवृŸिा दर्शाता है। चैड़ी ठुड्डी लंबी उम्र व अच्छे स्वास्थ्य को दर्शाती है। पतली ठुड्डी कमजोर किडनी की संकेतक है। बड़ी, लंबी, नुकीली ठुड्डी वालों का स्वास्थ्य कमजोर व आयु कम होती है। विषम आकार की ठुड्डी वाले चोर व डाकू होते हैं। जबड़ा: चैड़ा जबड़ा सात्विक प्रवृŸिा व वैज्ञानिक दृष्टिकोण दर्शाता है। कोणीय जबड़े वाले दूसरों की नकल निकालने में माहिर होते हैं तथा स्वयं को परिस्थितियों के अनुकूल ढाल लेते हैं। आगे निकले हुए दांतों वाले असभ्य, अविकसित व गरीब होते हैं। गोल जबड़ा विद्वत्ता व धन का संकेत देता है। नुकीला जबड़ा चालाक किस्म के लोगों का होता है। कान: छोटे कान वाले दब्बू, बड़े कान वाले भाग्यशाली, मुखाकृति के समानुपातिक कान वाले गुणी, भौंहों से ऊपर जाते कान वाले तार्किक शक्ति से ओत-प्रोत, लटके अर्थात्, नासिका से नीचे कान वाले अनियमितताओं से घिरे व कमजोर भाग्य वाले, भौंहों और नासिका के समानुपातिक कान वाले 35 वर्ष के आस-पास भाग्य पाने वाले होते हैं। केश: काले एवं घने केश उŸाम मान-सम्मान देने वाले होते हैं। जिनके बाल उम्र से पहले सफेद हो जाते हैं वे उदर रोगी होते हैं। लाल बाल कपट व स्वार्थ दर्शाते हैं जबकि सुनहरे बाल परोपकारिता व सुख के द्योतक हैं। घुंघराले बाल वाले सामान्यतः सुखी रहते हैं। कोमल बाल धनदायक जबकि रुखे कड़े बाल गरीबी दर्शाते हैं। जिनके बाल चिपके होते हैं वे जीवन में धोखा खाते हैं। कंधे: बड़े कंधे वाले शूरवीर, ऊंचे कंधे वाले साहसी, सामान्य कंधे वाले गंभीर, मांसहीन कंधे वाले निम्न श्रेणी के, झुके कंधे वाले कायर, गड्ढेदार कंधे वाले निर्धन, मांसल कंधे वाले मेहनती, चिकने कंधे वाले धनी, कंधों पर बाल वाले संपत्तिहीन, बैल समान कंधे वाले मेहनती होते हैं। चाल ढाल: अधिक स्थान घेर कर चलने वाले लोग स्वाभिमानी, सधी चाल वाले दृढ़ निश्चयी, ठक-ठक आवाज करने वाले अपने अं्रतर्मन की किसी न किसी कमजोरी पर सदा काबू पाने की चेष्टा में लगे रहते हैं। सिर झुकाकर चलने वाले धीर-गंभीर व टेढ़ी मेढ़ी चाल वाले विश्वासघाती होते हैं। छोटे-छोटे कदमों से चलना स्थायित्व का सूचक है। दायीं ओर कंधे झुकाकर चलने वाले मौका परस्त होते हैं। जूते: जिनके जूते आगे से फटे होते हैं वे निर्धन, किनारों से फटे जूते वाले वक्त की मजबूरी के शिकार, पाॅलिश किए हुए साफ जूते पहनने वाले व्यर्थ के झंझटों से दूर, सदैव साफ व चमकदार नुकीले जूते पहनने वाले उच्च महत्वाकांक्षी, जूतों के फीते खुले रखने वाले लापरवाह व स्पोर्ट शूज पहनने वाले मेहनती होते हैं। वस्त्राभूषण: अधिक चमकदार वस्त्र पहनने वाले अपना कार्य करवाने में निपुण, वाक्पटु, भोगी व धन उपार्जन करने में माहिर होते हैं। श्वेत वस्त्र धारण करने वाले अंदर कुछ और बाहर से कुछ और नजर आते हैं। फीके रंग के वस्त्र वाले शांति प्रिय, झंझटों से दूर, अंतर्मुखी, सामान्य जीवन यापन करने वाले संतोषी होते हैं। शालीन रंगों वाले वस्त्र वाले उच्च पदस्थ, बुद्धिमान, विद्वान और सर्वगुण संपन्न होते हैं। काले वस्त्र धारण करने वाले गुप्त विद्याओं में रूचियुक्त सभी भौतिक सुखों को भोगने की इच्छा रखने वाले होते हैं। उपरोक्त बिंदुओं के अतिरिक्त अनेक ऐसे बिन्दु हैं जिनके द्वारा व्यक्तित्व की पहचान की जा सकती है। यदि हम अपने व्यक्तित्व में निखार लाना चाहते हैं तो अपनी कार्यशैली पर ध्यान देकर और उसमें बुद्धि अनुसार परिवर्तन लाकर वांछित परिणाम उत्पन्न कर सकते हैं।


शारीरिक हाव भाव एवं लक्षण विशेषांक  आगस्त 2014

सृष्टि के आरम्भ से ही प्रत्येक मनुष्य की ये उत्कट अभिलाषा रही है कि वह किसी प्रकार से अपना भूत, वर्तमान एवं भविष्य जान सके। भविष्य कथन विज्ञान की अनेक शाखाएं प्रचलित हैं जिनमें ज्योतिष, अंकषास्त्र, हस्त रेखा शास्त्र, शारीरिक हाव-भाव एवं लक्षण शास्त्र प्रमुख हैं। हाल के वर्षों में शारीरिक हाव-भाव एवं अंग लक्षणों से भविष्यवाणी करने का प्रचलन बढ़ा है। वर्तमान अंक में शारीरिक हाव-भाव एवं अंग लक्षणों से भविष्यवाणी कैसे की जाती है, इसका विस्तृत विवरण विभिन्न लेखों के माध्यम से समझाया गया है।

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