क्या कहते हैं अन्ना हजारे के सितारे ? जन लोकपाल विधेयक के बारे में

क्या कहते हैं अन्ना हजारे के सितारे ? जन लोकपाल विधेयक के बारे में  

व्यूस : 3391 | अकतूबर 2011
क्या कहते हैं अन्ना हजारे के सितारे ? जन लोकपाल विधेयक के बारे में पं. विपिन कुमार पाराशर किसी भी काम का होना या न होना व्यक्ति की जन्मकुंडली को देखकर पता लग जाता है। जन लोक पाल विधेयक को सभी सांसदों ने ध्वनि मत से पास करके विचार करने के लिए स्टैंडिग कमेटी के पास भेज दिया है फिर भी जनमानस में यह प्रश्न बना हुआ है कि क्या जन लोकपाल विधेयक पास होगा, या फिर अधर में लटक जाएगा। इस बात को जानने के लिए हम विश्लेषण करते हैं अन्ना हजारे जी की कुंडली एवं उनकी सहयोगी रहीं किरण वेदी जी की कुंडली का। प्राचीनकाल इस बात का साक्षी रहा है कि जब-जब क्रांति हुई है तब-तब किसी न किसी महापुरूष का अवतरण हुआ है। विदेशी आक्रांताओं के कारण धर्म संकट के काल में स्वामी रामकृष्ण परमहंस, विवेकानंद, दयानंद, पं. महामना मदनमोहन मालवीय, महर्षि अरविंद जैसे महापुरूषों ने अवतरित होकर धर्मक्रांति में अपना योगदान दिया। देश को आजादी दिलाने के मिशन को पूरा कराने के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, सुभाषचंद्र बोस, भगत सिंह आजाद जैसे महापुरूषों का उद्भव हुआ। ऐसे ही आज के नैतिक पतन एवं भ्रष्टाचार के हाहाकार वाले संकटग्रस्त समय में भी अन्ना हजारे नामक एक महापुरूष का जन्म महाराष्ट्र के गांव भिंगर में निम्न वर्गीय परिवार में हुआ। कृष्ण राव अन्ना हजारे का जन्म 15 जून 1938 को महाराष्ट्र के भिंगर गांव में सिंह लग्न एवं कन्या राशि के नवमांश में हुआ। इनके पिता बाबूराम हजारे एक आयुर्वेदिक फार्मेसी में मजदूरी करते थे। इनकी बुआ इनकी दयनीय स्थिति को देखकर इन्हें मुंबई ले आयी, जहां इन्होंने दादर में फूल व माला बेचकर अपना जीवन यापन किया। जब 1962 में भारत-चीन का युद्ध हुआ तो ये सेना में शामिल हो गये। 1965-71 के युद्ध में भी इन्होंने वीरता का परिचय दिया। 1975 में सेना से स्वैच्छिक अवकाश ले लिया और सेना से बीस हजार रुपये जो फंड मिला वह गांव में विद्यालय ठीक कराने के लिए ग्राम सभा को दे दिया। गांव के लोग इतने प्रभावित हुए कि इन्हें अपना बड़ा भाई मानने लगे और महाराष्ट्र में बड़े भाई को अन्ना कहा जाता है, तभी से इनका नाम अन्ना हजारे पड़ गया। वर्ष 1991 में इन्होंने भ्रष्टाचार विरोधी जन आंदोलन चलाया जिसमें 6 मंत्रियों और 400 अधिकारियों को अपने पदों को छोड़ना पड़ा। वर्ष 1997 से 2003 तक सूचना के अधिकार का आंदोलन चलाकर इस लोकपाल जैसे उपकरण के माध्यम से भारतीय राजनीति, प्रशासनिक व न्यायिक व्यवस्था को भ्रष्टाचार से मुक्त कराने के लिए जनजागरण का अभियान छेड़ दिया। 05 अप्रैल 2011 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर उन्होंने 97 घंटे में ही सरकार को हिला दिया। वे कौन से ग्रह थे जो एक सामान्य व्यक्ति को इतनी ऊंचाई पर ले गये। उनके जन्मकालीन ग्रहों का ज्योतिषीय विश्लेषण कुछ ऐसा परिदृश्य प्रस्तुत करता है। अन्ना हजारे की जन्मकुंडली में लग्नेश सूर्य एकादश भाव में मंगल के साथ भाग्य भाव का स्वामी बनकर बैठा है। ऐसा व्यक्ति साहसी, पराक्रमी तथा जुझारू होता है। इसी मंगल के कारण वे सेना में भी नाम कमा गये। सातवें घर का स्वामी शनि आठवें घर में जाना और आठवें घर का स्वामी गुरु सातवें घर में आ जाना दांपत्य सुख व विवाह से मुख मोड़ देता है, इसलिए वे अविवाहित रहे। लग्न और लग्नेश दोनों पर गुरु व चंद्रमा की दृष्टि उन्हें सत्य और ईमानदार बताती है। शुक्र की अंतर्दशा उन्हंे समाजसेवा की ओर प्रेरित कर रही है। वर्तमान में शनि की महादशा नोट: अन्ना के जन्म की यह तारीख लेखक ने अपने सूत्रों से प्राप्त करके उसी के आधार पर संपूर्ण ग्रह योग विश्लेषण किया है जिसके लिए पूर्णतः वही उत्तरदायी हैं। संपादक मंडल, विश्लेषण की सटीकता के लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है। 13-03-1998 से प्रारंभ हुई है। शनि वर्तमान में पुनः ऊंचाईयों की ओर ले जा रहा है। मंगल की अंतर्दशा उन्हें इस आंदोलन में विजयी बनायेगी क्योंकि मंगल भाग्य का स्वामी होकर सूर्य के साथ एकादश भाव में बैठा है। पूर्व में भी मंगल की महादशा में वे सेना में नाम कमा चुके हैं। यह दशा भ्रष्टाचार तथा सरकार को झुकाने के लिए काफी रहेगी। अन्ना का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन उन्हंे देश के महापुरुषों की गिनती में ला देगा। सूर्य-मंगल-शनि की प्रत्यंतर दशा उन्हें महान नेता के रूप में स्थापित कर देगी। यह सारा कार्य नवंबर 2011 तक संपन्न हो जायेगा। इसी बीच नवंबर से जनवरी तक राहु की अंतर्दशा एवं प्रत्यंतर दशा उनके स्वास्थ्य को बिगाड़ सकती है। अब अन्ना हजारे के बाद विचार करते हैं उनकी निकट सहयोगी डाॅकिरण् ा वेदी की कुंडली का। इनका मंगल भी भाग्य में बैठकर तीसरे भाव (पराक्रम) को देख रहा है जिसके कारण वे भ्रष्टाचार विरोधियों को रणचंडी बनकर समाप्त करने में अपना योगदान देगी। उनकी कुंडली महारानी लक्ष्मीबाई से मिलती जुलती है। वर्तमान में सूर्य में मंगल की दशा उन्हें कीर्ति के क्षितिज पर ले जाकर खड़ा कर देगी। इससे पूर्व भी वे इस दशा की अंतर्दशा व प्रत्यंतर दशा में भारत की पहली महिला डायरेक्टर जनरल आॅफ पुलिस (आई पी. एस) के पद को सुशोभित कर चुकी हैं। ऐसे व्यक्ति की कुंडली के ग्रह शत्रुओं को परास्त करने के लिए काफी हैं। वर्तमान में आंदोलन के केंद्र बिंदु कांग्रेस की कुंडली और यूपीए सरकार की कुंडली के ग्रह धरातल की ओर जा रहे हैं। इस समय कांग्रेस की महादशा शनि की चल रही है। कांग्रेस की कुंडली में शनि नीच का होकर पंचम (दिमाग) के भाव में बैठा है और शुक्र ऋण, रोग-शत्रु का स्वामी होकर आठवें घर (मौत) में चल रहा है। इस कारण कांग्रेस के ग्रह-नक्षत्र उसे नीचे की ओर ही ले जा रहे हैं। यह ग्रहदशा 28-08-2014 तक चलती रहेगी। वर्तमान की यू.पी. ए सरकार 22 मई 2009 को शाम 06ः30 बजे दिल्ली में स्थापित हुई इसकी शुक्र में शुक्र की दशा भी इसे पतन की ओर ले जा रही है। शुक्र स्त्री भाव का स्वामी है इसीलिए यूपीए सरकार पर स्त्री शक्ति का ही वर्चस्व है।

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