नवग्रहों की शान्ति के सटीक उपाय

नवग्रहों की शान्ति के सटीक उपाय  

व्यूस : 6103 | अकतूबर 2011
नवग्रहों की शांति के सटीक उपाय! पं. शुभेश शर्मन सूर्य को प्रसन्न करने लिए आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ। माता-पिता की सेवा तथा सूर्य को अघ्र्य, जल में रोली तथा लाल पुष्प डालकर देना चाहिए। सोना-तांबा तथा चीनी-गुड़ का दान भी करें। सूर्याेदय से पूर्व उठें तथा रविवार का व्रत करें। नमक का परहेज करें। बुजुर्गों का सम्मान करें तथा उनकी परंपरा को सम्मानपूर्वक निभाएं। चंद्रमा को प्रसन्न करने के लिए ‘‘ऊँ नमः शिवाय’’ मंत्र का जप करें। भगवान शंकर पर पानी वाला नारियल, सफेद चंदन तथा चांदी का चंद्रमा, विल्वपत्र, सफेद मिष्ठान्न चढायें। सोमवार का व्रत करें तथा सफेद वस्त्र का दान करें, पहाड़ों की यात्रा करें तथा माता के चरणछूकर आशीर्वाद प्राप्त करें। मंगल की प्रसन्नतार्थ श्रीहनुमान भगवान को चमेली का तेल, सिंदूर, शुद्ध घी में चोला चढ़ाएं तथा मंगल स्तोत्र का पाठ करें, इमरती, जलेवी बूंदी तथा चूरमे का प्रसाद अर्पण करें। भाइयों के समक्ष छवि ठीक रखें। मंगलवार का व्रत करें। पड़ोसियों, मित्रों तथा साथ में काम करने वालो से अच्छा व्यवहार रखें। बुध ग्रह की प्रसन्नता के लिए भगवती दुर्गा की पूजार्चना करनी चाहिए। किन्नरों की सेवा करनी चाहिए। हरे मूंग भिगोकर पक्षियों को दाना डालें। पालक या हरा चारा गायों को खिलाएं। पक्षियों विशेष कर तोतों को पिजरों से स्वतंत्रता दिलावें। नौ वर्ष से छोटी कन्याओं के पैर धोकर उनको प्रणाम करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। बुधवार का व्रत रखें, मां भगवती दुर्गा का पूजार्चन करें। मंत्रानुष्ठान व ह्वन करके बुध की अनुकंपा प्राप्त करें। बृहस्पति देव गुरु की प्रसन्नता के लिए ब्राह्मणों का सम्मान करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। चने की दाल तथा मंदिर में केसर का दान करें। मस्तक पर केसर का तिलक लगाएं एवं योग्य व्यक्तियों को ज्ञानवर्द्धक पुस्तकों का दान करें। भगवान ब्रह्मा का केले से पूजन करें तथा कुल-पुरोहित का सम्मान करके आशीर्वाद प्राप्त करें एवं यथाशक्ति स्वर्ण का दान करें। शुक्र ग्रह की अनुकम्पा प्राप्त करने के लिए कनकधारा महालक्ष्मी का दैनिक पाठ करना चाहिए। वस्त्र स्वच्छ पहनने चाहिए तथा पत्नी का सम्मान करना चाहिए। गोशाला में गुड़, चरी, हराचारा तथा चने की दाल गायों को खिलाएं। विशेषरूप से श्रीविद्या का पूजन कराएं। एकाक्षी ब्राह्मण को कांसी के कटोरे में खीर खिलाकर दक्षिणा देकर आशीर्वाद प्राप्त करें। विशेष परिस्थिति में रोग हो तो मृत संजीवनी मंत्र का जप कराएं, संयम से रहें, व्यसनों से बचें। शनि ग्रह की प्रसन्नतार्थ पीपल तथा भैरव का पूजन करें इमरती, उड़द की दाल, दही-बड़े, भैरव जी को चढ़ावें व बांटे। मजदूरों को तला हुआ सामान बांटे। शनिवार का व्रत करें। ताऊ, चाचा से अच्छे संबंध बनाये रखें। श्री हनुमान चालीसा तथा सुंदरकांड का नियमित पाठ करें। शनिवार को तिल के तेल का शनि पर अभिषेक करें, दक्षिणा दें। राहू की प्रसन्नता के लिए माता सरस्वती का पाठ-पूजन करना चाहिए, रसोई में बने हुए भोजन का प्रातः जलपान करें। पूर्णतया शाकाहारी रहना चाहिए। किसी भी प्रकार का बिजली का सामान इकट्ठा न होने दें तथा बिजली का सामान मुफ्त में न लें, नानाजी से सौहार्दपूर्ण संबंध रखें, अश्लील पुस्तक बिल्कुल न पढ़ें। केतु ग्रह की अनुकूलता के लिए भगवान श्रीगणेश जी का पूजार्चन करना चाहिए। बच्चों को केले खिलायें तथा कुŸाों को तेल लगाकर रोटी दें। कुŸाों को चोट न पहुंचायें। मामाजी की सेवा करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। किसी भी धर्मस्थल पर ध्वजा (झंडा) चढ़ाएं। वर्षफल में मुंथा श्रेष्ठ नहीं हो तो उसी ग्रह का उपाय करना चाहिए जिस ग्रह की राशि में मुंथा स्थित है।

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दीपावली विशेषांक   अकतूबर 2011

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