वृक्षारोपण संबंधी कुछ विशिष्ट बातें

वृक्षारोपण संबंधी कुछ विशिष्ट बातें  

वृक्षारोपण संबंधी कुछ विशिष्ट बातें पं. जयप्रकाश शर्मा, लाल धागे वाले प्रकृति द्वारा प्रदŸा पंचमहाभूत जिस प्रकार हमारे लिए उपयोगी हैं उसी प्रकार पर्यावरण के लिए भी उपयोगी हैं। पृथ्वी के आवरण वायु, जल आदि में गतिशील परिवर्तन पर्यावरण है। जिस प्रकार हमारा शरीर अग्नि, पृथ्वी, वायु, जल और आकाश से मिलकर बना है, उसी प्रकार खेती-बाड़ी वनस्पति, पौधों व वृक्षों के सर्वागीण विकास के लिए इन पंचमहाभूतों की आवश्यकता है। मनुष्य शरीर को विशुद्ध वायु और जल की आवश्यकता होती है। वृक्षों और पौधों को वास्तु में उचित महत्व देने से हमें प्रकृति के साथ रहने का आनंद प्राप्त होता है। हमारे प्राचीन ग्रंथों में प्रत्येक वृक्ष का दिशानुसार शुभाशुभ फल दिया हुआ है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी राशि व नक्षत्र के अनुरूप वृक्षारोपण करना चाहिए। किस नक्षत्र, राशि व ग्रह से कौन सा वृक्ष संबंधित है इसे निम्न तालिकाओं से जानें- नक्षत्र वृक्ष अश्विनी कुचिला, बांस भरणी आंवला, फालसा कृŸिाका गूलर रोहिणी खैर मृगशिरा खैर आद्र्रा रेशम, बहेड़ा पुनर्वसु बांस पुष्य पीपल आश्लेषा नागकेसर, गंगेरन मघा बरगद पूर्वाफाल्गुनी ढाक उŸाराफाल्गुनी पाकड़, रुद्राक्ष हस्त रीठा चित्रा बेल, नारियल स्वाति अर्जुन विशाखा कटाई, बकुल अनुराधा मौलश्री ज्येष्ठा चीड़, देवदारू मूल साल पूर्वाषाढ़ा अशोक उŸाराषाढ़ा कटहल, फालसा श्रवण मदार (आक) धनिष्ठा शमी शतभिषा कदम्ब पूर्वा भाद्रपद आम उŸारा भाद्रपद नीम रेवती महुआ ग्रह वृक्ष सूर्य आक चंद्र पलाश मंगल खदिर बुध अपामार्ग गुरु पीपल शुक्र गूलर शनि शमी राशि वृक्ष मेष खदिर वृष गूलर मिथुन अपामार्ग कर्क पलाश सिंह आक कन्या दूर्बा तुला गूलर वृश्चिक खदिर धनु पीपल मकर शमी कुंभ शमी मीन कुश घर के बाहर दिशाओं के लिए शुभ वृक्ष



दीपावली विशेषांक   अकतूबर 2011

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