''नेल्सन मंडेला'' पं. शरद त्रिपाठी सितारों की कहानी सितारों की जुबानी स्तंभ में हम जन्मपत्रियों के विश्लेषण के आधार पर यह बताने का प्रयास करते हैं कि कौन से ग्रह योग किसी व्यक्ति को सफलता के शिखर तक ले जाने में सहायक होते हैं। यह स्तंभ जहां एक ओर ज्योतिर्विदों को ग्रह योगों का व्यवहारिक अनुभव कराएगा, वहीं दूसरी ओर अध्येताओं को श्रेष्ठ पाठ प्रदान करेगा तथा पाठकों को ज्योतिष की प्रासंगिकता, उसकी अर्थवत्ता तथा सत्यता का बोध कराने में मील का पत्थर साबित होगा। यह उप-निवेद्गावाद के खात्मे का समय था। पूरी दुनियां में स्वतंत्रता की लहर दौड़ रही थी। गांधी जी पूरी दुनियां के लिए प्रेरणा स्रोत बने थे। उनकी कर्मभूमि थी दक्षिण अफ्रीका जहां उन्होंने पहली बार रंग भेद का आंदोलन चलाया। वहां पर उनके हाथ का झंडा एक अद्गवेत युवा ने थामा। वह अद्गवेत युवा लोगों के लिए मसीहा की तरह था, एक सूर्य जो अपने प्रकाद्गा से उनकी जिंदगियों को उम्मीद की रोद्गानी से चमचमा रहा था। इस व्यक्ति का नाम था नेल्सन रोहिल्हाला मंडेला। इनका जन्म ट्रान्स्की के मवेजो गांव में 18 जुलाई सन् 1918 को प्रातः नौ बजे हुआ। नेल्सन के पिता गेटला हेनरी गांव के प्रधान थे। नेल्सन अपने पिता की तीसरी पत्नी नेक्युकी नोम्केली की पहली संतान थे। नेल्सन की मां एक मेथोडिस्ट थी। नेल्सन के सिर से 12 की उम्र में इनके पिता का साया उठ गया, उन्होंने क्लार्क बेरी मिद्गानरी स्कूल से अपनी प्रारंभिक द्गिाक्षा पूर्ण की। जीवन में उन्हें रोज याद दिलाया जाता कि उनका रंग काला है, उन्हें रोज एहसास कराया जाता कि अगर वे सीना तानकर सड़कर पर चलेंगे तो इस अपराध के लिए जेल भेज दिया जाएगा। ऐसे अन्याय ने उनमें असंतोष भर दिया और वे एक क्रांतिकारी के तरीके में तैयार होने लगे। हेल्ड टाऊन अश्वेतों के लिए बनाया गया विशेष कार्यस्थल था। यहीं से उन्होंने स्नातक की शिक्षा पूर्ण की। यहीं के कॉलेज केम्पस में अपने राजनैतिक विचारों और कार्य कलापों के लिए सुर्खियों पायी। इस बात का पता चलते ही कॉलेज प्रशासन ने उनको निकालकर उनके प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया। आइये, देखते हैं अभी तक की उनकी जीवनी का ज्योतिषीय विश्लेषण- लग्नेश चंद्रमा चतुर्थ में और द्वादश में गुरु चंद्रमा के नक्षत्र में, द्वादशेश बुध लग्न में द्वितीयेश सूर्य के साथ होने पर जातक को जीवन भर दूसरों सुखों के लिए स्वयं को कष्ट उठाकर जीवन भर संघर्ष करना पड़ता है। प्रस्तुत जन्मांग कर्क लग्न का है। लग्नेश चंद्रमा चतुर्थ भाव में स्थित है तथा गुरु के नक्षत्र में है। द्वादशेश बुध लग्न में द्वितीयेश सूर्य के साथ स्थित है। किसी भी कुंडली में ऐसा योग होने पर जातक को जीवन भर दूसरे सुखों के लिए स्वयं को कष्ट उठाकर जीवन भर संघर्ष करना पड़ता है। नवम भाव पिता का भाव होता है। आपकी कुंडली में नवमेश बृहस्पति द्वादश भाव में स्थित है जो कि जीवन में पिता के सुख की कमी को दर्शाता है। आपकी 12 वर्ष की आयु अर्थात 1930 में शनि में शनि की अंतर्दशा चल रही थी, शनि आपकी कुंडली में कर्क राशि में तथा बुध के नक्षत्र में है। अगर नवम भाव को पिता की लग्न मान लें तो शनि द्वादशेश और बुध सप्तमेश होता है जो दोनों ही तरीके से मृत्युतुल्य काम करता है। सन् 1930 में शनि धनु राशि में गोचर कर रहा था जो अपनी तीसरी दृष्टि से कुंभ राशि और दसवीं दृष्टि से कन्या राशि को देख रहा है। उपरोक्त कारणों की वजह से इसी समय उनके पिता की मृत्यु हुई। आपकी कुंडली में दशमेश मंगल तृतीय भाव में और चंद्रमा के नक्षत्र में स्थित है। इसलिए आप अपने कार्यक्षेत्र में मंगल की तरह जोशीले, और चंद्रमा की तरह शांत व साहस के मालिक हैं। लग्न में सप्तमेश शनि का बढ़ना सहयोगियों और जनमानस से अत्यधिक लगाव को बताता है। आपके परिवार वाले आपको क्रांति की राह पर जाते देख परेशान हो गये। उन्होंने विचार किया कि आपकी शादी कर दी जाय लेकिन नेल्सन का मन उद्वेलित था। वे घर से भागकर जोहांसबर्ग आ गये। रोजी-रोटी के लिए नेल्सन ने एक सोने की खदान में, चौकीदार की नौकरी करनी शुरु कर दी। धीरे-धीरे संघर्ष करते हुए उन्होंने कानूनी फर्म में लिपिक की नौकरी भी की। इसी बीच सन 1944 में उनकी जिंदगी में इवलिन 'मस' आयीं और जल्दी ही दोनों ने शादी कर ली। अब वे धीरे-धीरे नेल्सन की विचार शैली और कार्यक्षमता से प्रभावित होने लगे। 1951 में नेल्सन को कांग्रेस का अध्यक्ष चुन लिया गया। अपने लोगों की कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए सन 1952 में कानूनी फर्म की स्थापना की। थोड़े ही समय में उनकी फर्म अश्वेतों द्वारा चलायी जाने वाली देश की पहली फर्म हो गयी। धीरे-धीरे अश्वेतों के अधिकारों के लिए चलाये जा रहे आंदोलन में उनकी सक्रियता बढ़ती चली गयी। इसी व्यस्तता के कारण पत्नी इलविद से उनकी दूरियां बढ गयी तथा इवलिन ने उनका साथ छोड़ दिया। उनका आजादी का आंदोलन लगातार चलता जा रहा था जिसमें उनको सजा भी हो रही थी, लेकिन लोकप्रियता की वजह से सरकार को उनको रिहा भी करना पड़ रहा था। 1983 में एक बार उनका स्वास्थ्य टी.बी. के कारण अत्यधिक खराब हो गया था लेकिन जल्दी ही उनको उस रोग से मुक्ति मिल गयी। अब उनका संघर्ष पक रहा था। आखिर में रंग भेद के दिन लदते हुए दिखाई देने लगे। 1988 में दक्षिण अफ्रीका में परिवर्तन हुआ, सभी राजनीतिक बंदियों को आजाद कर दिया गया, इनमें नेल्सन को भी 11 फरवरी 1990 को आजाद कर दिया गया। आपको 1993 में शांति के लिए नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया। ठीक अगले साल यानी 1994 में अफ्रीका में एक चुनाव में नेल्सन मंडेला की पार्टी ने सम्मानजनक जीत प्राप्त की। 1997 में नेल्सन ने सक्रिय राजनीतिक जीवन से किनारा कर लिया और 1999 में अपने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। इसी बीच अपनी दूसरी पत्नी विनी मंडेला से अलग होने के बाद आपने अपने 80 वें जन्मदिन पर ग्रेस मेकल से तीसरा विवाह किया। आइये, इन सब बातों को अब ज्योतिषीय दृष्टिकोण से जानने का प्रयास करें- केतु और शुक्र उनकी कुंडली में एकादश भाव में बैठे हैं और ये दोनों ग्रह मंगल के नक्षत्र में हैं। मंगल जो कि दशमेश है तृतीय भाव में स्थित है। अतः 1965 से 1972 तक चलने वाली केतु की महादशा में उनको कार्यक्षेत्र में काफी संघर्ष का सामना करना पड़ा लेकिन इससे उनको खयाति काफी मिली। 1972 से 1992 तक शुक्र की महादशा चली। चूंकि शुक्र लाभेश है और लाभ भाव में बैठा है। इस वजह से इस केतु और शुक्र नेल्सन मंडेला की कुंडली में एकादश भाव में मंगल के नक्षत्र में हैं जो कि दशमेश होकर तृतीय भाव में है। इसलिए केतु की महादशा में उनको कार्यक्षेत्र में काफी संघर्ष करना पड़ा लेकिन इससे उनको खयाति काफी मिली। समय इस महादशा काल में आपको नाम और खयाति दोनों मिली लेकिन शुक्र के अधिक अंशों के कारण शुक्र चलित कुंडली में द्वादश भाव में चला गया। इसी कारण इसे महादशा काल में नाम और खयाति के साथ-साथ जेल में नजरबंद भी रहना पड़ा। 1990 में जैसे ही शुक्र में केतु का अंतर आया फिर केतु ने अपनी महादशा के फल के तरीके से एकादश भाव का लाभ दिया अर्थात आपको जेल से मुक्ति मिली। 1998 तक द्वितीयेश तथा लग्नस्थ सूर्य की महादशा में आपने अपने जीवन के सारे संघर्षों का फल प्राप्त किया। 1993 में सूर्य में मंगल के अंतर में आपको नोबेल पुरस्कार मिला। सूर्य लग्न में स्थित है तथा मंगल दशमेश होकर लग्नेश के नक्षत्र में स्थित है, अतः आपने सूर्य की महादशा समाप्त होते-होते राजनीति से सन्यास ले लिया। 1998 से 2008 तक चंद्रमा की महादशा चली। 1998 में सप्तमेश शनि मेष राशि में स्थित था और चंद्रमा में चंद्रमा की अंतर्दशा चल रही थी। सप्तमेश शनि गोचर में अपनी दसवीं दृष्टि से सप्तम भाव को देख रहा था तथा सातवीं दृष्टि से लग्नेश को देख रहा था, अतः इसी गोचरीय स्थिति, दशा व अंतर्दशा के कारण इस उम्र में उनका तीसरा विवाह भी हुआ। 1944 में शनि में राहु का अंतर चल रहा था जो कि पंचम भाव में बैठा है तथा राहु गोचर में उस समय कर्क राशि में अर्थात लग्न के ऊपर गोचर कर रहा था, सप्तम में पंचमेश या पंचम भाव में बैठे ग्रह अपनी दशा-अंतर्दशा में व्यक्ति के जीवन में जब आते हैं, तब व्यक्ति के प्रेम संबंधों द्वारा विवाह की संभावना बढ़ जाती है। आपकी कुंडली में सप्तमेश शनि का द्वादशेश बुध के साथ बैठा होना बहु-विवाह का योग बनाता है। वर्तमान समय में 2008 में मंगल दशा प्रारंभ हुई है। जुलाई 2010 से 2011 तक शनि का अंतर चल रहा है। वर्तमान समय में गोचर में शनि जन्मकालीन मंगल के ऊपर विचरण कर रहा है शनि जो कि आपकी कुंडली में मारक ग्रह का प्रभाव रखता है, बुध भी आपकी कुंडली में द्वादशेश होकर लग्न में स्थित है। यह भी जन्म कुंडली में अकारक ग्रह की भूमिका निभा रहा है। अतः कुल मिलाकर निष्कर्ष यह है कि अगस्त 2011 तक मंगल तथा अगस्त 2012 तक बुध के समय में शनि आपके जीवन व स्वास्थ्य के लिए अच्छा समय लेकर नहीं आ रहा है नेल्सन ने आजादी की लड़ाई में अपना 100 प्रतिशत दिया। उन्होंने कहा है कि मैंने एक सपना देखा है एक नयी दुनियां बसाने का जहां सबके लिए न्याय हो, शांति हो, काम हो, रोटी हो, पानी और नमक, जहां हम सबकी आत्मा, मन और मस्तिष्क को समझ सके और एक-दूसरे की जरुरत को पूराकर सके। ऐसी दुनियां बनाने के लिए हमें अभी चलना, है चलते रहना है। यही है जीवन की कहानी, ग्रहों की जुबानी।

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लाल-किताब  मार्च 2011

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