कालसर्प एवं द्वादश ज्योतिर्लिंग

मार्च 2013

व्यूस: 11504

कालसर्प योग की जन्मांग में उपस्थिति मात्र से जनसामान्य के मन में आतंक और भय की भावना उदित हो जाती हैं। कालसर्प योग से पीड़ित जन्मांग वाले जातकों का संपूर्ण जीवन अभाव अनवरत अवरोध, निरंतर असफलता, संतानहीनता, वैवाहिक जीवन में अनेक कष... और पढ़ें

ज्योतिषदेवी और देवस्थानउपायज्योतिषीय योगरत्नघरलाल किताबमंत्रग्रहमन्दिर एवं तीर्थ स्थल

राजनीतिज्ञ बनने के ज्योतिषीय कारण

अप्रैल 2014

व्यूस: 11391

‘‘होनहार बिरवान के होत चिकने पात’’ अर्थात देश काल व परिस्थितियों से जन्म लेते हैं- जनप्रिय राजनीतिज्ञ राजनेता। यही कारण हैं राजनीतिज्ञ बनने के। प्रजातांत्रिक समाज में लोगों की आम समस्याओं एवं उनके समाधान तथा जनहित के विकास कार्यों... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगग्रह

शनि के बारे में आप क्या जानते है ?

अकतूबर 2009

व्यूस: 11134

फ्यूचर पॉइंट के सौजन्य से शनि जीवन में सर्वाधिक महत्वपूर्ण ग्रह है। इस आलेख में शनि की विभिन्न स्थितियों के फल का निरूपण किया गया है। शनि का अन्य ग्रहों के साथ साहचर्य, भावों और राशियों के साथ-साथ सभी लग्नों पर इसके प्रभाव के अतिर... और पढ़ें

ज्योतिषकुंडली व्याख्याघरग्रहभविष्यवाणी तकनीक

नेत्र रोग

जुलाई 2009

व्यूस: 11083

नेत्र की रचना : अपने अंगूठे मध्य भाग के बराबर जो अंगुल है, उन दो अंगुल के बराबर नेत्र बुद्बुद के अंतः प्रविष्ट नेत्र हैं। अक्षिगोलक लंबाई और चौड़ाई में अढ़ाई अंगुल है। यह आंख सुंदर, गोलाकार, गाय के स्तन के समान पांच भौतिक रचना है।... और पढ़ें

ज्योतिषस्वास्थ्यकुंडली व्याख्याघरचिकित्सा ज्योतिषग्रहभविष्यवाणी तकनीक

मंगलकारी मंगल ग्रह

अप्रैल 2015

व्यूस: 10918

मंगल की ग्रीष्म ऋतु मानी गयी है। पुराणों के मतानुसार मंगल देवताओं के सेनापति थे। इन्होंने तारकासुर का वध किया था। ऋषि श्री पराशर के मतानुसार मंगल के वस्त्र लाल रंग के, श्री कल्याण वर्मा के अनुसार मंगल के वस्त्र मोटे और बहुत ... और पढ़ें

ज्योतिषग्रह

फलित में अष्टक वर्ग की विशेषता

जनवरी 2004

व्यूस: 10913

फलित ज्योतिष में फलादेश निकालने की अनेक विधियां प्रचलित हैं, जिनमें से पराशरोक्त सिद्धांत, महादशाएं, अंतर दशाएं, प्रत्यंतर दशाएं, सूक्ष्म दशायें इत्यादि के साथ, जन्म लग्न, चंद्र लग्न, नवांश लग्न के द्वारा, वर्ष, मास, दिन एवं घंटों... और पढ़ें

ज्योतिषअष्टकवर्गकुंडली व्याख्याघरग्रहभविष्यवाणी तकनीक

बालारिष्ट योग (आयु निर्णय)

अकतूबर 2012

व्यूस: 10893

बच्चे तथा उसके माता-पिता द्वारा किए गए पूर्व जन्म के दुष्कृत्यों से संचित शिशु की जन्मकालिक क्रूर ग्रह स्थिति आदि को रिष्ट या अरिष्ट कहा गया है। रिष्ट तथा अरिष्ट का अर्थ शब्दकोश के अनुसार शुभ और अशुभ है, किंतु आयु निर्णय में इसका ... और पढ़ें

ज्योतिषस्वास्थ्यकुंडली व्याख्याघरचिकित्सा ज्योतिषग्रहभविष्यवाणी तकनीक

वक्री ग्रह व विवाह सुख

जुलाई 2014

व्यूस: 10888

भारतीय ज्योतिष में विवाह सप्तम भाव से देखा जाता है। सप्तम भाव जहां जीवन साथी हेतु देखा जाता है वहीं उसके स्वामी की स्थिति, उसका लग्नेश के साथ संबंध और इन सबसे ऊपर शुक्र (भोगकारक) ग्रह की स्थिति का आकलन सही प्रकार से किया जाए... और पढ़ें

ज्योतिषकुंडली व्याख्याविवाहग्रहभविष्यवाणी तकनीक

शनि अष्टकवर्ग

जनवरी 2011

व्यूस: 10678

अष्टकवर्ग विद्या की अचूकता व सटीकता का प्रतिशत सबसे अधिक है। सभी ग्रहों के अष्टकवर्ग के फलकथन के क्रम में इस बार शनि के अष्टकवर्ग के फल कथन की बारी है जिससे कर्म, नौकर, मजदूर, मेहनत, रोग बाधा, न्यायालय, आयु आदि विषय में विचार किया... और पढ़ें

ज्योतिषअष्टकवर्गकुंडली व्याख्याघरग्रहभविष्यवाणी तकनीक

शनि शांति हेतु नीलम धारण

नवेम्बर 2014

व्यूस: 10593

नीलम एक ऐसा रत्न है जो कि शनि के दुष्प्रभाव को नष्ट करता है। इसे इंद्र नीलमणि, नीलमणि, याकूत, कबूद, सेफायर (इंग्लिश में) कहते हैं। नीलम और माणिक्य दोनों ही मूलतः कुरून्दम समूह का रत्न है। वास्तव में लाल कुरून्दम तो ‘माणिक्य... और पढ़ें

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