सूर्य-शनि युति फलादेश

फ़रवरी 2017

व्यूस: 22615

जन्मकुंडली में दो या अधिक ग्रहों के आपसी संबंध को ‘योग’ कहते हैं। इन संबंधों में ‘युति’ का अंतिम (चैथा) स्थान है। ग्रह योग पिछले जन्म के अच्छे-बुरे कर्मफल अनुसार बनते हैं जिसकी अनुभूति उन ग्रहों की दशा भुक्ति में जातक को ह... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय विश्लेषणग्रहभविष्यवाणी तकनीक

सुदर्शन चक्र कुंडली एक अध्ययन

जुलाई 2011

व्यूस: 22428

किसी भी कुंडली का फलकथन राशि, लग्न एवं ग्रह दशा को ध्यान में रखकर किया जाता है। जन्म नक्षत्र ज्योतिषीय शास्त्र में वह केंद्र बिंदु है जिसके चारों तरफ जातक की जीवन गति चलती रहती है। सटीक फलकथन करने के लिए जन्म नक्षत्र विचार करना पर... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगकुंडली व्याख्याघरग्रहभविष्यवाणी तकनीक

अष्टकवर्ग से फलकथन

अकतूबर 2013

व्यूस: 22046

ज्योतिष शास्त्र में फलित करने की प्रायः तीन विधियां प्रचलन में रहती हैं - जन्म कुंडली, चन्द्र कुंडली तथा नवांश कुंडली। लग्न से शरीर का विचार होता है, चंद्रमा से मन का। जन्म पत्रिका में चंद्रमा से मन की स्थिति देखकर यह निश्चय किया ... और पढ़ें

ज्योतिषअष्टकवर्गकुंडली व्याख्याघरग्रहभविष्यवाणी तकनीक

नेप्च्यून - एक भाग्यकारक ग्रह

अप्रैल 2006

व्यूस: 20296

सामान्यतः जन्मकुंडलियों के ग्रहों और भावों के आधार पर ग्रहों की महादशा, अंतर्दशा, उनकी स्थिति एवं दृष्टियों को ध्यान में रखकर फलित ज्योतिष की गणना की जाती है। लेकिन आधुनिक युग में जन्मांग चक्र में नेपच्यून, प्लूटो तथा यूरेनस नामक ... और पढ़ें

ज्योतिषग्रह

मंगली होना दोष नहीं, बल्कि योग है

जुलाई 2015

व्यूस: 20020

सामान्यतः मांगलिक पत्रिका वाले जातक प्रतिभा संपन्न होते हैं तथा उनमें विशेष गुण पाये जाते हैं। मांगलिक होने का विशेष गुण यह है कि जातक किसी भी कार्य को पूर्ण लगन एवं निष्ठा से करता है।... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय विश्लेषणज्योतिषीय योगग्रहभविष्यवाणी तकनीक

प्रतिस्पर्धात्त्मक परीक्षा में सफलता कैसे ?

अप्रैल 2010

व्यूस: 19971

मानव के समस्त कार्य और व्यवसाय को संचालित करने में नेत्रों की भूमिका जिस प्रकार अग्रगण्य मानी गई है ठीक उसी प्रकार ज्ञान, विज्ञान विद्या के क्षेत्र में ज्योतिष विज्ञान दृष्टि का कार्य करता है।... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगशिक्षाकुंडली व्याख्याघरग्रहभविष्यवाणी तकनीकव्यवसाय

मेष लग्न: विभिन्न भावों में शुक्र की दशा का फल

जून 2013

व्यूस: 19854

शुक्र की महादशा मेष लग्न में शुक्र धन भाव का स्वामी होता है और जन्म कुंडली में किस भाव में स्थित है उसका भी विशेष महत्व है। जब भी शुक्र की दशा आयेगी धन योग का फल मिलेगा लेकिन दशा के अनुसार ही शुभ-अशुभ फल प्राप्त होगा। लग्न में शुक... और पढ़ें

ज्योतिषदशाघरग्रह

राहु-केतु का फलकथन

अप्रैल 2011

व्यूस: 19758

राहु केतु के फलकथन का आधार क्या होना चाहिए और जीवन की लंबी अवधि के कितने वर्ष इन छाया ग्रहों से प्रभावित रहते हैं तथा किन ग्रह योगों के साथ ये शुभ या अषुभ फल देते हैं तथा विभिन्न स्थितियों में राहु और केतु की दषा क्या फल प्रदान कर... और पढ़ें

ज्योतिषग्रहभविष्यवाणी तकनीक

देव गुरु बृहस्पति एक वरदान

अप्रैल 2011

व्यूस: 19729

ऋषि मुनियों ने बृहस्पति की कल्पना ऐसे पुरूष के रूप में की है जो बृहदकाय, विद्वान, सात्विक एवं मिष्ठानप्रिय है। बृहस्पति देव की कृपा के बिना किसी भी जातक का जीवन सुखी एवं संतुष्ट होना असंभव है। जन्मकुंडली में बृहस्पति कर्क, धनु, मी... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगकुंडली व्याख्याग्रहभविष्यवाणी तकनीक

अष्टम भावस्थ शनि और मृत्यु

जुलाई 2005

व्यूस: 19064

अष्टम भाव रहस्यमय है और इसके कुछ कारकत्व भी रहस्य से जुड़े हैं। शनि तो रहस्यमय है ही। अष्टम भाव का कारक भी शनि ही है। अष्टम भाव में ही 22वां द्रेष्काण होता है। शनि यदि अष्टम भावस्थ हो तो उसकी दृष्टियां दशम, द्वितीय व पंचम भावों प... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगघरग्रहभविष्यवाणी तकनीक

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