पुराणों एवं धर्मशास्त्रों में गो माहात्म्य

पुराणों एवं धर्मशास्त्रों में गो माहात्म्य  

ब्रह्मा जी द्वारा सर्व प्रथम गौओं की सृष्टि - स्वयम्भू ब्रह्मा जी ने जब लोक सृष्टि की कामना की थी, तब उन्होंने समस्त प्राणियों की जीवन वृत्ति के लिए सबसे पहले गौओं की ही सृष्टि की थी। लोकान् सिसृक्षुणा पूर्व गावः सृष्टाः स्वयम्भुवा। वृत्त्यर्थ सर्वभूतानां तस्मात् ता मातरः स्मताः।- - (महाभारत, अनु. 145) संसार में समस्त जीवों में सिर्फ गाय ही ऐसी प्राणी है जिसका बछड़ा ‘‘मां’’ शब्द का उच्चारण करता है। ‘‘मां’’ शब्द की उत्पत्ति गौवंश से हुई है। गाय माताओं की माता एवं देवताओं की भी देवता है। Û गोभक्त के लिए कुछ भी दुर्लभ नहीं है गोषु भक्तश्च लभते यद् यदिच्छति मानवः। स्त्रियोऽपि भक्ता या गोषु ताश्च काममवाप्नुयः।। पुतार्थी लभते पुत्रं कन्यार्थी तामवाप्नुयात। धनार्थी लभते वित्तं धर्मार्थी धर्ममाप्नुयात्।। विद्यार्थी चाप्नुयाद् विद्यां सुखार्थी प्राप्नुयात् सुखम्। न किंचिद् दुर्लभं चैव गवां भक्तस्य भारत।। (महा. अनु. 83/50-52) अर्थात: गोभक्त मनुष्य जिस-जिस वस्तु की इच्छा करता है, वह सब उसे प्राप्त होती है। स्त्रियों में भी जो गौओं की भक्त हैं, वे मनोवांछित कामनाएं प्राप्त कर लेती हैं। पुत्रार्थी मनुष्य पुत्र पाता है और कन्यार्थी कन्या। धन चाहने वाले को धन और धर्म चाहने वाले को धर्म प्राप्त होता है। विद्यार्थी विद्या पाता है और सुखार्थी सुख। गोभक्त के लिये कुछ भी दुर्लभ नहीं है। - गाय के सींग में ब्रह्मा, विष्णु, महेश ‘‘भविष्य पुराण’’ में कहा गया है कि - शृंगमूले गवां नित्यं ब्रह्मा विष्णुश्च संस्थितौ। शृंगाग्रे सर्व तीर्थनि स्थावराणि चराणि च।। शिवो मध्ये महादेवः सर्वकारण कारणम्। ललाटे संस्थिता गौरी नासावंशे च षण्मुखः।। अर्थात- गौओं के सींग की जड़ में सदा ब्रह्मा और विष्णु प्रतिष्ठित हैं। सींग के मध्य में चराचर समस्त तीर्थ प्रतिष्ठित है। सभी कारणों के कारण स्वरूप महादेव शिव सींगों के मध्य में प्रतिष्ठित हैं। गौ के ललाट में गौरी तथा नासिका के अस्ति भाग में भगवान कार्तिकेय प्रतिष्ठित हैं। - गौ के श्वांस में पापों को खींचने की शक्ति निविष्टं गोकुलं यत्र श्वासं मुंचित निर्भयम्। विराजयति तं देशं पापं चास्यापकर्षितति।। (महाभारत, अनु 51/32) अर्थात - गौओं का समुदाय जहां बैठकर निर्भयता पूर्वक श्वांस लेता है, उस स्थान की शोभा बढ़ा देता है और वहां के सारे पापों को खींच लेता है।’’ - गाय के श्वांस में 24 घंटे आॅक्सीजन प्राणियों में गाय ही ऐसा प्राणी है, जो 24 घंटे अपने उच्छ्वास में आॅक्सीजन छोड़ता है।


वास्तु विशेषांक  दिसम्बर 2015

वास्तु संरचना का विज्ञान है जिसका उद्देश्य मनुुष्य की सुख समृद्धि है। हर संरचना चाहे वह घर हो अथवा दुकान अथवा फैक्ट्री अथवा कार्यालय, प्रत्येक संरचना के निर्माण में वास्तु नियमों का अनुपालन किया जाना आवश्यक है। यदि कोई भी संरचना वास्तु सम्मत नहीं हैं तो यह अनेक प्रकार की आर्थिक, स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं, दुःख, वैवाहिक जीवन में कठिनाई, पारिवारिक विवाद आदि को जन्म देता है। फ्यूचर समाचार के वास्तु सम्बन्धित इस विशेषांक में अनेक उल्लेखनीय आलेखों को समाविष्ट किया गया है जिसमें वास्तु के महत्वपूर्ण सिद्धान्तों का विश्लेषण सूक्ष्मता से किया गया है। इनमें से अति महत्वपूर्ण आलखों में शामिल हैं: नारद पुराण में वास्तुशास्त्र का सूक्ष्म वर्णन, वास्तु शास्त्र में पंच तत्व, भवन निर्माण में वास्तुशास्त्र का महत्व, वास्तु शास्त्र एक वैज्ञानिक पद्धति, वास्तु शास्त्र एवं धर्म, दिशा दोष दूर करने के वास्तु उपाय, फेंग शुई और वास्तु में अंतर और समानताएं, वास्तु एवं फेंग शुई के उपाय, मल्टीस्टोरी फ्लैट की वास्तुु की उपयोगिता एवं व्यवस्था, फ्लैट खरीदने में किन बातों का खयाल रखें आदि। इसके अतिरिक्त इस विशेषांक में सभी स्थाई स्तम्भों का समावेश भी पूर्व की भांति किया गया है जिसमें विविध आयामी आलेख सम्मिलित हैं।

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