संतान प्राप्ति के उपाय

संतान प्राप्ति के उपाय  

व्यूस : 5471 | मई 2014

सामाजिक जीवन में पारिवारिक खुशी एवं पितृ ऋण के मुक्ति बाबत आगम एवं आर्ष ग्रंथों में संतान का जन्म लेना दंपत्ति के लिए मंगलमय माना गया है। आइये हम अध्यात्मवाद एवं सरलतम् उपायों से चाहे बंध्या हो, काक बंध्या हो, कन्या बंध्या या मृत वत्सा हो। सबके लिए निम्न उपाय श्रद्धा से करें तो इच्छित संतान की प्राप्ति संभव है।

- अपनी जन्मपत्रिका या हस्त पठन ज्योतिषीय त्रिस्कंध विधि से पाये जाने वाले दोषों का निवारण करना चाहिए। योनि दोष बाधा पितृ दोष बाधा। ग्रह अस्तोदय वक्रता दृष्टि दोष का निवारण करें।

- सवत्सा गौ का दान या सुवर्ण की गौ का दान ब्राह्मण को करें।’’ सोमोधेनु अर्वन्त’’ यह यजुर्वेद का मंत्र है, उससे हवन करावे, और चान्द्रायण व्रत करें तो काम बनेगा। यानि लाभ का योग बनेगा।

- किसी ब्राह्मण की कन्या का विवाह करावें, जो ब्राह्मण गरीब यानि आर्थिक स्थिति से कमजोर हो।

- किसी ब्राह्मण के जनेऊ संस्कार का खर्च वहन करें।

- संतान गोपाल मंत्र के पाठ एक वर्ष तक नियमित करें।

- संपुष्टि दुर्गा पाठ नौ दिनों तक सविधि करें।

- नाग पंचमी का व्रत दोनों (दंपत्ति) सविधि करें।

- हरिवंश पुराण का पाठ या श्रवण कर महारूद्र का जप करावें। वरूण मंत्र से आहुतियां देकर आचार्य को सुवर्ण दक्षिणा दें।

- प्रति अमावस्या को ब्राह्मण भोजन करावें।

- वैशाख, कार्तिक, या माघ मास के पितरों की तृप्ति के लिए किसी तीर्थ में जाकर ‘‘तृपिण्डी श्राद्ध’’ कराना चाहिए।

- तुलसी का विवाह करायंे। श्रद्धा युक्त ठाट बाट से कार्य करायंे।

- गाय को कामधेनु मानकर तीन वर्ष तक उसी का दूध उसी का घी दही आदि का सेवन करें तथा गौ की नित्य पूजा का प्रसाद ग्रहण करें तो कार्य में सफलता मिलती है। अन्य: कुल देव यानि देवता दोष बोध-बाधा।

- यदि छठे भाव में शनि हो उस पर चंद्र व बुध की दृष्टि हो तथा लग्न को पाप ग्रह देखे तो कुल देवता दोष माना गया है।

- शनि की राशि में स्थित सूर्य पर पाप ग्रह की दृष्टि हो।

- पंचम स्थान में शनि की राशि में सूर्य और लग्न में पाप ग्रह हो। ऐसी स्थिति में कुल देवता एवं कुल देवी की सविधि पूजा, यज्ञ साधना एवं प्रायश्चित शाम मोचनादि यज्ञ करके उनकी पूजा करना शुभदायक है। कुल देवता की पूजा कुल की जो मर्यादा परंपरागत रूप से हो रही है। अपने पूर्वजों की साधना धारण कार्य योग से करना ही शुभ माना गया है। उक्त उपाय एवं पूजनोपरांत दंपत्ति परस्पर प्रेम स्नेह जीवनोपयोगी सद्व्यवहार से प्रसंग करें तो सफलता निश्चित बनती है। भाग्य प्रबलम कर्मेषु प्रमुख।।

Ask a Question?

Some problems are too personal to share via a written consultation! No matter what kind of predicament it is that you face, the Talk to an Astrologer service at Future Point aims to get you out of all your misery at once.

SHARE YOUR PROBLEM, GET SOLUTIONS

  • Health

  • Family

  • Marriage

  • Career

  • Finance

  • Business

रत्न एवं रूद्राक्ष विशेषांक  मई 2014

फ्यूचर समाचार के रत्न एवं रूद्राक्ष विशेषांक में अनेक रोचक और ज्ञानवर्धक आलेख हैं जैसे- रूद्राक्ष की ऐतिहासिक पृष्ठ भुमि, रूद्राक्ष की उत्पत्ति, रूद्राक्ष एक वरदान, रूद्राक्ष धारण करने के नियम, ज्योतिष में रत्नों का महत्व, रत्न धारण का समुचित आधार, रत्न धारण से रोगों का निदान, उपरत्न, लग्नानुसार रत्न निर्धारण, रत्नों का महत्व और स्वास्थ्य आदि। इसके अतिरिक्त पंच पक्षी के रहस्य, वट सावित्री व्रत, अक्षय तृतिया एवं आपकी राशि, ग्रह और वकालत, एक सभ्य समाज के निर्माण की प्रक्रिया, अगला प्रधानमंत्री कौन, कुण्डली के विभिन्न भावों में केतु का फल, सत्य कथा, पुंसवन संस्कार, हैल्थ कैप्सूल, शंख थेरेपी, ज्योतिष और महिलाएं तथा वास्तु प्रश्नोत्तरी व वास्तु परामर्श जैसे अन्य रोचक आलेख भी सम्मिलित किये गये हैं।

सब्सक्राइब


.